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शुक्रवार, 30 अप्रैल 2021

400 साला जन्मोत्सव: गुरु तेग बहादुर साहिब जी

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# नव साहित्य परिवार

# दिनांक - 01/05/2021

# दिन - शनिवार

# विषय - 400 साला जन्मोत्सव: गुरु तेग बहादुर साहिब जी

# विधा - स्वैच्छिक

मीरी पीरी के मालिक से, गुरु हरगोबिन्द से तेगमल नाम पाया

मुगल के साथ जंग में खंड़ा बहुत चलाया, 

तभी तो तेग बहादुर कहलाया, 

माता नानकी से प्यार बहुत पाया, 

धर्म के प्रति अपना फर्ज खूब निभाया, 

जन्म के बाद गुरुपिता ने माथा आपका चूमा  , 

यह सब देख सबको आश्चर्य हो आया, 

गुरु जी को पुत्र में क्या नज़र आया, 

गुरु जी ने गरज कर बोले, 

शीश इसका हिंद की लाज बचायेगा, 

मेरे यह पुत्र हिंद की चादर कहलायेगा । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर






ज्ञान से बड़ा कुछ नहीं

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार उतरप्रदेश इकाई

# दिनांक - 30/06/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - जीवन में ज्ञान का महत्व

# विधा - गद्य - पद्य ( छंदमुक्त कविता) 

ज्ञान ही विद्वान बनाता

अच्छे बुरे की परख सिखाता, 

ज्ञान ईश्वर से मिलाता, 

मनुष्य के सारे भ्रम मिटाता, 

पुस्तकें ही ज्ञान देने का साधन बनती , 

मस्तिष्क को ज्ञान सागर से भरती , 

ज्ञान ही मनुष्य को महान बनाता, 

समस्त संसार से सम्मान दिलाता, 

सृष्टि का कण कण ज्ञान सिखाता, 

 ईश्वर की मौजूदगी का अहसास कराता । 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर







गुरुवार, 29 अप्रैल 2021

पीपल वृक्ष

#काव्य_प्रभा_अखिल_भारतीय_ससाहित्यिक_मंच 

#संस्मरणलेखनक्रमांक-०१

विषय- बात उन दिनों की है

दिनांक - २१/५/२१

विधा -संस्मरण

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बात उन दिनों की है  जब हम गाँव में रहते थे। हमारे घर के पास पीपल का एक वृक्ष था। हमनें पूरा दिन पीपल के नीचे बैठे रहना। वही खेलना कूदना । कुलचे वाला पीपल के पेड़ के नीचे ही दुकान लगता था। हम उससे बहुत सारे कुलचे खरीदकर खाते थे । 

गाँव के बहुत सारे लोग घर  और खेतों  का काम खत्म करके अपनी थकान वही आकर उतारते थे। सभी को पीपल की ठंडी ठंडी छांव बहुत भाती थी । गाँव का अमीर से अमीर ,गरीब से गरीब आदमी वही आकर अपनी थकान मिटाने आता था पीपल के पेड़ ने सबको एक समान बना दिया था। 

गाँव की बड़ी से बड़ी, छोटी से छोटी समास्याओं का समाधान यही किया जाता था, क्योंकि गाँव की पंचायत भी यहीं होती थी । 

गाँव के बुजुर्ग पुरुष यहाँ बैठकर ताश खेलते थे। गाँव की सभी औरतें किसी विशेष पर्व पर यहाँ आकर पीपल के पेड़ को धागा बांधती थी और उसकी पूजा करती थी । जिस दिन औरतों की पूजा का दिन होता था ,मै और मेरे अन्य साथी पीपल के पेड़ के पास जाकर सुबह ही बैठ जाते थे, क्योंकि उस विशेष पर्व पर औरतें बच्चों को मीठी रोटी का प्रसाद भी बांटती थी । हम मीठी रोटी का प्रसाद बड़े चांव से खाते थे। 

जब भी मैं पीपल को देखता हूँ, मेरे बचपन की यादें ताजा हो जाती है। 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू,  जम्मू कश्मीर


ऑक्सीजन

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# कलमकार कुम्भ

# दिनांक - 05/05/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - ऑक्सीजन/प्राणवायु

# विधा - गद्य - पद्य


ज्यादा से ज्यादा पेड़  लगाएं, 

जिंदगी में खुशहाली लाये, 

ऑक्सीजन की कमी दूर भगाये, 

पेड़ों को कटने से बचाये, 

पेड़ों से ही ऑक्सीजन मिलती, 

इसी से सबकी सांसें चलती, 

पेड़ ही हमारे जीवन को गति देते, 

तन मन में नव स्फूर्ति भरते, 

ऑक्सीजन ही जीवन देती , 

तन का रोम रोम जागृति करती । 



स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  ,  जम्मू कश्मीर




बुधवार, 28 अप्रैल 2021

कवि की कल्पना

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार बिहार इकाई

# दिनांक - 28/04/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - कवि की कल्पना

# विधा - गद्य - पद्य

पर्वत से बातें करता , 

कल्पना से उनमें प्राण भरता, 

कवि की कल्पना तन मन के दुख हरती, 

सबको नया राह दिखलाती , 

जीवन पथ पर आगे बढ़ाती, 

नदियों की निर्मल धारा, 

विघ्न बाधाओं को करती पार, 

पहुँच जाती सागर के द्वार, 

नदी जीवन में आने वाली मुश्किलों से , 

लड़ने का संदेश देती, 

कवि की कल्पना नदी का सहारा लेती, 

जीवन विषम परिस्थितियों में जीने का उपदेश देती, 

कवि की कल्पना आसमां में घूमती , 

नीचे पृथ्वी की प्रदूषण से हुई दुर्दशा दिखाती, 

कवि की गई कल्पना जीवन के सत्य बताती, 

झूठ का पर्दा आंखों से हटाती


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर







चिड़िया

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार  जम्मू कश्मीर  इकाई

# दिनांक - 28/04/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - चिड़िया

# विधा - गद्य - पद्य

चिड़िया रानी मेरे घर आओ, 

चीं चीं करके घर की रौनक बढ़ाओ, 

तुम्हारा आना मुझे बहुत भाता, 

बचपन के दिन याद दिलाता, 

तिनका तिनका जोड़कर तुम्हारा घर बनाना, 

पंखे पर बैठकर जोर जोर से चिल्लाना, 

अपने छोटे बच्चे को आकर दाना खिलाना, 

बार बार घर के अंदर बाहर जाना, 

चिड़िया रानी तुम फिर से घर में घौंसला  बनाओ, 

घर की रौनक में चांद चांद लगाओ । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर




अपनी आँखों से देखा है

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# कलमकार कुम्भ साहित्य संस्थान

# दिनांक - 28/04/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - अपनी आँखों से देखा है

# विधा - स्वैच्छिक

अपनी आँखों से देखा , 

मैंने प्रीतम का प्यार, 

उसका मेरे लिए होना बेकरार, 

मुझे आंखों से ढूंढना, 

मुझे मिलने के लिए, 

कर देता हर हद पार, 

अपनी आँखों में ,

मेरी छवि भर लेता है, 

मुझे देखने के लिए ,

हर पल बहाना ढूंढ लेता है, 

अपनी आंखों से मुझे 

मेरा पिया ही सब ओर दिखता है । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू,  जम्मू कश्मीर






संयम जरूरी है

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#नव साहित्य परिवार

# दिनांक - 28-30/04/2021

# दिन - बुधवार- शुक्रवार

# विषय - संयम जरूरी है

# विधा - स्वैच्छिक

संयम का पाठ ग्रंथ पढ़ाते, 

संयम की महिमा सभी ऋषि मुनि गाते, 

संयम ही जीवन को पवित्र बनाता, 

मनुष्य को देव तुल्य सम्मान दिलाता, 

आंखों का संयम मन पवित्र कर जाता, 

बुरे देखने से बचाता, 

बोलो का संयम लड़ाई झगड़े से दूर करता, 

सबके दिल में सम्मान बढ़ाता, 

खाने पीने में संयम बिमारियों से बचाता, 

जीवन तदरूस्ती से बिताता, 

धन कमाने में संयम बेईमानी, चोरी ,ठगी, भ्रष्टाचार से बचाता, 

मनुष्य का आचरण शुद्ध बन जा,ता

संयम जिसके जीवन का सारथी बन जाता, 

वो ही नर अपना जीवन सफल बनाता


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - जम्मू

जम्मू कश्मीर



मजदूर

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक - 13-15/05/2021

# दिन - बृहस्पतिवार - शनिवार

# विषय - मजदूर

# विधा - स्वैच्छिक


दिन रात मेहनत करता हूँ, 

फिर भी खाने के लिए तरसता हूँ, 

मेहनत  का पूरा धाम नहीं मिलता, 

मन की इच्छाओं को दबाकर जीता , 

सीमेंट से हाथ पैर फट जाते, 

एक गज भी चल नहीं पाता, 

असहाय होकर सारा जीवन बिताता, 

अपने बच्चों का भविष्य बना नहीं पाता , 

बड़े बड़े महलों को मै बनाता हूँ, 

अपने लिए झोपड़ी भी नहीं बना पाता, 

मजदूर हूँ मजबूर बना दिया, 

मेरी मेहनत का पैसा ,

बडे़ बड़े ठेकेदारों ने खा लिया। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर








मंगलवार, 27 अप्रैल 2021

आपस में भाईचारा

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार बिहार इकाई

# दिनांक - 29/04/2021

# दिन - बृहस्पतिवार

# विषय - स्वतंत्र ( आपस में भाईचारा) 

# विधा - कविता

 जात पात का झंझट छोड़ो , 

सबसे प्यार का नाता जोड़ो, 

ईश्वर ने  इंसान बनाया, 

सबसे मिलकर रहना सिखाया, 

वो सबके दिल में बसता, 

किसी से कोई भेदभाव नहीं करता, 

उसने हमें भाईचारा सिखाया, 

हमनें अज्ञानता में   अमूल्य उपदेश भूलाया । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू,   जम्मू कश्मीर





मिट्टी

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार बिहार इकाई

# दिनांक - 27/04/2021

# दिन - मंगलवार

# विषय - मिट्टी

# विधा - गद्य - पद्य


बचपन में मिट्टी बहुत भाती , 

इससे कई खिलौने बनाता, 

मिट्टी में खेलना बहुत सुहाता, 

एक दूसरे पर मिट्टी फेकने का बहुत मजा आता, 

मम्मी की बहुत डांट पड़ती , 

जब मिट्टी से पांवों भर जाते, 

भरें हुए पांव जगह जगह लगाते, 

मम्मी का गुस्सा और बढ़ाते, 

मिट्टी की खूशबू मन में उल्लास भरती, 

तन मन के सब दुख कलेश हरती, 

पक्के फर्शों पर खेलने का कोई आनंद नहीं आता, 

नीचे गिरने पर पक्का फर्श गहरी चोट पहुंचाता, 

मिट्टी में खेलने के दिन वापिस आयेगें, 

जीवन की वही खुशियाँ लौटेंगे । 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू,   जम्मू कश्मीर



स्वामी विवेकानंद

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार झारखंड इकाई

# दिनांक - 27/04/2021

# दिन - मंगलवार

# विषय - स्वामी विवेकानंद

# विधा - स्वैच्छिक

स्वामी विवेकानंद ने  नया राह दिखाया, 

सबको अधिकारों के साथ जीने का मतलब समझाया, 

सामाजिक समानता , सामाजिक स्वंत्रता को, 

समाज के उत्थान का कारण बताया, 

कर्म कांडों, बाह्य आडम्बरों के प्रति विरोध दिखाया, 

ईश्वर को अपने अंदर महसूस करने का मार्ग बतलाया, 

परिपूर्णता और  मुक्ति को , 

सब का जन्म सिद्ध अधिकार बतलाया, 

ज्ञान, शिक्षा, धन अर्जित करने का हक, 

सब मानवता का बताया, 

दुर्बलता को पाप, मृत्यु बताया, 

भारतीयों को निर्भीकता और  शक्ति संदेश सुनाया, 

भारत माता के चरणों में, 

अपने आप को समर्पित करने को बड़ा पुण्य बतलाया  । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू,  जम्मू कश्मीर


सोमवार, 26 अप्रैल 2021

महावीर हनुमान

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार  गुजरात इकाई

# दिनांक - 27/04/2021

# दिन - मंगलवार

# विषय - महावीर हनुमान

# विधा - गद्य - पद्य

संकट मोचन को याद करने से, 

मिट जाते सब पाप, 

जीवन में सब सुख मिलते, 

बंजरंग बली जिनके साथ, 

निशाचर सब हरा दिए, 

लंका की क्षण में राख, 

ऐसे महावीर हनुमान जी को, 

नित नित करो नमस्कार , 

लक्ष्मण को नव जीवन दिया, 

पर्वत पूरा एक हाथ से उठा लिया ,तेरा बल अपार, 

राम राम का सिमरन करते, 

राम रूप हो गए आप, 

तेरी महिमा अपरंपार , 

एक जिह्वा से कथन जाए, 

तेरे सिमरन से हनुमान जी ,

तन मन के सब दुख जाये। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर





आपके प्रेरणा स्रोत

 #नमन मंच 🙏🙏🙏🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार महाराष्ट्र इकाई

#दिनांक- 16/05/2021

#दिन - रविवार

#विषय - आपके प्रेरणा स्रोत

#विधा - स्वैच्छिक 

सतगुरु ने ऐसी सीख सिखाई, 

सब में दिखा एक ही साई, 

जात पात का भ्रम मिटाया, 

सब का पिता एक परमेश्वर बताया, 

मोह माया के बंधन तोड़े, 

इंसानियत के नाते जोड़े, 

सतगुरु की वाणी सुन मन में शीतलता आई, 

विकारों की अग्नि मिटाई, 

सतगुरु संग मन निर्मल भया, 

यमदूत का सब डर गया, 

सतगुरु से पाया नाम, 

पूरे होगे सारे मेरे काम, 

सतगुरु जी ने जीवन जीने की राह बतलाई, 

प्रेम प्यार सबसे करने की सीख सिखाई । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू, जम्मू कश्मीर




आओ मिलकर अस्पताल बनाएं

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार 

# दिनांक - 26/04/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - आओ मिलकर अस्पताल बनाएं

# विधा - गद्य - पद्य 

आओ मिलकर अस्पताल बनाएं, 

जीवन को रोग से मुक्त कराएं, 

गरीब को भी  मुफ़्त में मिलेगी दवाई, 

सब ओर लगेगा खुशियाँ आई, 

गंभीर से गंभीर रोग का होगा ईलाज, 

जब होगा अपना अस्पताल, 

कोई नहीं अब रोग से मरेगा, 

अस्पताल सब को स्वस्थ करेगा, 

अपने पैसे लगाकर पुण्य कमाएं, 

आओ मिलकर अस्पताल बनाएं। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर





मुस्कान

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार बिहार इकाई

# दिनांक - 26/04/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - मुस्कान

# विधा - गद्य - पद्य 

भूखे को खाना खिलाकर, 

उनकी तृप्ति की मुस्कान , 

हमेंहर्षित कर जाएगी । 

दीन दुखियों को मीठे बोल कर, 

थोड़ी सी की गई मदद , 

उनकी हल्की सी मुस्कान, 

हमें खुशी प्रदान कर जाएगी। 

रोगी को ठीक होने का दिलासा देकर, 

उसके चेहरे पर आई मुस्कान ,

हमें प्रसन्नता प्रदान कर जाएगी। 

परीक्षा की तैयारी करते बच्चों को , 

हमारे दी शाबाशी कामयाबी दे जाएगी, 

उनकी कामयाब होने की मुस्कान, 

हमें आनंदित कर जाएगी। 

परोपकार करने का स्वभाव बनाएं, 

मुस्कान से चेहरे की रौनक बढ़ाएं, 

एक दूसरे के हमेशा काम आए, 

मुस्कुराहट से भरा जीवन बिताए । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

 जम्मू, जम्मू कश्मीर






डॉक्टर

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार कर्नाटक इकाई

 दिनांक - 1/07/2021

दिन - गुरुवार

#विषय - डॉक्टर

विधा - गद्य - पद्य

डाक्टर को भी भगवान कहा जाता, 

 भयानक रोग से वही बचाता, 

दिलासा देकर जोश जीवन जीने का जगाता, 

हमारी तकलीफ को क्षण में समझ जाता, 

दवाइयों का उसकाे सार ज्ञान, 

जानता है हर रोग का निदान, 

कोरोना का भयानक समय आया, 

सब ने अपने आप को अंदर छुपाया, 

डॉक्टर बनकर योद्धा आया, 

अपना कर्तव्य खूब निभाया, 

डॉक्टर ने किया खूब काम, 

वो भी भारत माता का सपूत महान । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर





रविवार, 25 अप्रैल 2021

राम विवाह

# विषय - राम विवाह

# विधा - गद्य - पद्य

राजा जनक ने अपनी पुत्री जानकी का स्वयंवर रचाया, 

सभी राज वीरों को अपने देश बुलाया, 

सीता से विवाह करने की शर्त रखी भारी, 

जो धनुष उठायेगा ,

उससे ही विवाह करेंगी मेरी सुता प्यारी, 

सभी वीर राजाओं ने बहुत जोर लगाया, 

कोई भी धनुष को हिला न पाया, 

राजा जनक को चिंता ने घेरा, 

कौन पूरा करेगा प्रण मेरा, 

श्री राम ने धनुष झट से उठाया , 

सीता से ब्याह रचाया, 

माता सीता ने वरमाला श्री राम के गले में डाली, 

सब मिलकर बजाने लगे ताली, 

तभी वहाँ अचानक भगवान परशुराम आये, 

शिव को टूटा हुआ देखकर बहुत चलाये, 

धनुष तोड़ने वाले को मारने पर तूल आये, 

श्री राम ने अपना निज रूप दिखाया, 

परशुराम के मन को बहुत भाया, 

माता सीता के विवाह की यही कहानी, 

गाते है सभी मुनि ज्ञानी। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू,जम्मू कश्मीर











दहशत

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक - 25/04/2021

# दिन - रविवार

# विषय - दहशत

# विधा - स्वैच्छिक

कोरोना ने दहशत का जाल बिछाया, 

बेरोजगारी का आलम छाया, 

मुंह पर लगा लिया मास्क , 

यही सोचकर बैठे है कहीं बन जाए पास्ट, 

मृत्यु डाला ऐसा डेरा, 

लगता है कोई नहीं मेरा, 

शमशान तक भी नहीं मिलता किसी का साथ, 

कैसा वक़्त आया मेरे नाथ, 

गले मिलने का रिवाज मिटाया, 

ना जाने इस कोरोना ने कैसा कहर बरपाया, 

अपनों को खोने का सब ने गम मनाया, 

कोई कुछ कर नहीं पाया, 

वैक्सीन ने लोगों की उम्मीदों को बढाया, 

कोरोना की दहशत को दिलों से हटाया । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर











मोबाइल

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार बिहार इकाई

# दिनांक - 25/04/2021

# दिन - रविवार

# विषय - मोबाइल

# विधा - गद्य - पद्य (आलेख) 

आज मोबाइल हमारी दैनिक जरूरत बन गया है। हम एक क्षण भी मोबाइल से दूर नहीं रह सकते हैं। बूढ़े, जवान, बच्चे सब मोबाइल के दिवाने है इसमें सभी के मनोरंजन का सामान है । 

 बच्चे मोबाइल से ज्ञानार्जन कर सकते हैं जो ज्ञान किताबों से नहीं मिल पाता वो हम इंटरनेट के माध्यम से मोबाइल पर हासिल कर सकते । यूटूब के माध्यम से बड़े बड़े विद्वानों के भाषण सुन सकते हैं और एक ही विषय पर हमें अनेक विद्वानों के भाषण सुनने को मिल जाएगें। खाना बनाने की विधि,विद्यालय के प्रोजेक्ट बनाना आदि भी सीख सकते हैं। 

व्हाट्सएप मैसेंजर, फेसबुक ,इंस्टाग्राम के माध्यम से हम दूर बैठे मित्रों से आडियो वीडियो दोनों माध्यम से बात कर सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी कर सकते हैं, क्योंकि फेसबुक, इंस्टाग्राम में ऐसे बहुत सारे समूह बने होते है, जो हमारे ज्ञान में वृद्धि करते हैं और मुश्किल विषय पर हमारी सहायता भी करते हैं।

वृद्ध महिला ,पुरुष मोबाइल में भजन सतसंग सुनकर अपना समय गुजार सकते हैं और अपना मनोरंजन कर सकते हैं ।

मोबाइल विज्ञान की बहुत सुन्दर देन है, लेकिन इसका ज्यादा इस्तेमाल हमारी सेहत के लिए हानिकारक है । ज्यादा मोबाइल चलाने से हमारी आंखों पर असर पड़ता है। कई बार कई लोगों की आंखों की रोशनी कम हो जाती है । कई बच्चे दिनभर मोबाइल में वीडियो गेम खेलते रहते हैं, और अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते है । इसका परिणाम यह होता है कि या तो वो परीक्षा में अंक कम लेते हैं या परीक्षा में असफल हो जाते हैं । मोबाइल की लत लग जाने के कारण कई बच्चे खेलकूद की तरफ ध्यान नहीं देता है । इसके कारण भी उनका शारीरिक विकास भी रूक जाता है।

मोबाइल के कारण कई लोगों के पास अपने परिवार और रिश्तेदार के लिए समय नहीं होता है । वो पूरा दिन मोबाइल चलाने में ही बिताते है इसके कारण उनके संबंधों में दरार आनी स्वभाविक है । क्योंकि उनके पास अपनों से बात करने का समय ही नहीं होता है । ऐसे लोगों को बाद में पछताना पड़ता है।

मोबाइल विज्ञान का बहुत अनुपम उपहार है। आज कोरोना काल के समय इसी के माध्यम से बच्चों को शिक्षा प्रदान की जा रही हैं । कई लोगों को इसके माध्यम से रोजगार भी मिला । हमें मोबाइल का इस्तेमाल करना है पर जरूरत के अनुसार करना है । इसका ज्यादा इस्तेमाल हमारी सेहत और परिवार के लिए सही नहीं है।क्योंकि हमें बच्चों को ज्ञानवान और संस्कारी दोनों बनाना है।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू,जम्मू कश्मीर




शनिवार, 24 अप्रैल 2021

कोरोना को हराना है

 नमन मंच🙏🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार महाराष्ट्र इकाई

विषय - महामारी व बचाव

दिनांक - 29/04/2021

दिन - बृहस्पतिवार

विधा - स्वैच्छिक

कोरोना को  हराना है , 

भारत के लोगों को इससे बचाना, 

अंदर बैठे रहना जरूरी है, 

इससे सुरक्षा  होगी पूरी, 

सेनीटाइजर हमेशा हाथों पर लगाना है, 

कोरोना को दूर भगाना, 

दो गज की दूरी हमेशा दूसरों से बनायेंगे, 

सबको कोरोना से बचायेगें, 

मास्क से मुहं नाक छुपाना है, 

हमको मिलकर कोरोना को हराना । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर




एकता


# विषय - एकता

अनेकता में एकता पहचान हमारी, 

देश के शान लिए मर मिटना शान हमारी, 

एक दूसरे से हम करते बहुत प्रेम, 

चाहे हमारे धर्म, भाषाएँ अनेक, 

दिवाली, ईद, क्रिसमस, गुरूपर्व हम मिलकर मानते, 

एक दूसरे को गले लगाकर खुशी अपनी बढ़ाते, 

देश की एकता और अखंडता से हमारी पहचान, 

देश की उन्नति के लिए सब मिलकर करते काम, 

एकता हमारी ताकत, एकता हमारी जान, 

एकता को बनाए रखने के लिए कुर्बान करते अपने प्राण । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

सांबा ,  जम्मू कश्मीर




वरिष्ठ/बुजुर्ग आशीष का खज़ाना

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक - 23/04/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय - वरिष्ठ/ बुजुर्ग आशीष का खजाना

# विधा - स्वैच्छिक

बुजुर्ग घर की शान बढाते, 

छोटे बड़े झगड़े को घर के अंदर ही निपटाते, 

बुजुर्ग वटवृक्ष की छांव कहलाते, 

उनके आशीर्वाद से दुख सब टल जाते, 

बुजुर्ग होते हैं तीर्थ स्थल समान, 

उनकी आशीष से मिलता है जग में मान, 

बुजुर्गों की सेवा जो दिल से करता, 

उसके कारज को स्वयं ईश्वर पूरा करता, 

बुजुर्गों की हमेशा सेवा कमाये, 

सुख दोनों जहान के उनकी आशीष से पाये। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर



मानवता दिवस

 नमन मंच 🙏🙏🙏🙏🙏🙏

#नव साहित्य परिवार

दिनांक- 24/04/2021

दिन - शनिवार

विषय - मानवता दिवस

विधा - स्वैच्छिक

सदियों से ऐसा होता आये, 

मानवता की सेवा करने वाला, 

सबके दुखड़े हरनेवाला, 

दुष्ट राक्षस बुद्धिवाले लोगों के कारण , 

अपने प्राणों की कुर्बानी देता आया, 

मानवता की सेवा को महापुरुषों ने, 

जीवन का लक्ष्य बनाया, 

दीन दुखियों की सहायता करने में ,

पूरा जीवन बिताया, 

लोगों में भेदभाव खत्म करने के लिए, 

सबको एक ईश्वर की संतान बताया, 

रोगी बीमार लोगों के मुफ्त ईलाज के लिए , 

बहुत हस्पताल खुलवाए, 

जीवन का पल पल संत जी ने सेवा में बिताया, 

अपने प्राण भी मानवता की सेवा के लिए लुटाये । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर



पिता

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#गीत गौरव

# दिनांक - 20/06/2021

# दिन - रविवार

# विषय - पिता

# विधा - गद्य - पद्य ( छंदमुक्त कविता) 

परमपिता परमेश्वर तेरे चरणों में प्रणाम, 

तेरे ही कारण आते ही सबके शरीर में प्राण, 

तूं ही  सृष्टि का सृजनहार, पालनहार, संहारक, 

तूं ही सबका सच्चा मालिक, 

कण कण में मालिक बास तेरा, 

पूरे ब्रह्माण्ड में केवल एक राज तेरा , 

भेदभाव किसी से नहीं करता, 

सबसे बराबर प्रेम रखता, 

जात पात तेरा धर्म वर्ण न कोई, 

निरंकार पिता तेरा आकार न होई, 

तेरा दर्शन इन नयनों से देखा न जाता, 

फिर भी तूं सब जगह समाता, 

तूं सबको देता आहार, 

तेरे हमेशा भरे रहते भंडार, 

तेरे घर कोई कमी नहीं, 

तेरे दर पर आनेवाले को रहती कोई गमी नहीं, 

 पिता परमेश्वर तेरी मेहर पर करूँ मैं मान, 

तेरे ही कारण आये मेरे पिंड में प्राण । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर









असली सुंदरता

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार पत्रिका दिल्ली इकाई

# दिनांक - 23/04/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय - असली सुंदरता

# विधा - गद्य - पद्य (आलेख) 

मनुष्य को ईश्वर ने अपने स्वरूप में घडा है यह सभी धर्म ग्रंथों में

लिखा गया है  । ईश्वर ने ८४ लाख योनियो में मनुष्य को सबसे ज्यादा बुदि्धमान और चतुर बनाया है जिससे अपने अच्छे बुरे की पूरी समझ है कौन सा कार्य उसके लिए अच्छा है और कौन सा कार्य उसकी अवनति का कारण बन सकता है । इतनी समझ होने के बावजूद भी इंसान आज बहुत ज्यादा भटक गया है । वो सिर्फ अपने बाहरी स्वरूप को संवारने में ही लगा हुआ है। असली सुंदरता का ज्ञान शायद उसने भूला दिया है। 

बाहरी सुंदरता तो समय के साथ ढल जाती है । लेकिन इस असलीयत का ज्ञान होने के बावजूद असली सुंदरता को हम पहचानने की कोशिश ही नहीं करते हैं। जब हमें असली सुंदरता का ज्ञान हो जाएगा हमारे दिल की भटकना समाप्त हो जाती है हमें गहरी शांति का अनुभव होता है। 

जब हमें समस्त संसार में ईश्वर का रूप दिखाई देने लगे और हमें हर कोई अपना सा लगने लगे । दुखी इंसान को देखकर हमारे हृदय में दया की भावना जागृति होती है असल में यही असली सुंदरता है जो हमारे जीवन को ऊंचा उठाती है। हमें कोई भी इंसान छोटा या बड़ा दिखाई नहीं देते है। सबसे हम एक समान प्रेम करते हैं जाति धर्म, वर्ण को महत्व नहीं देते है  मानव सेवा ही हमारा अमली धर्म बन जाता है यह सुंदरता जीवन के समाप्त हो जाने पर भी समाप्त नहीं होती बल्कि सदियों तक लोगों को आकर्षित करती रहती है। 



स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर

शुक्रवार, 23 अप्रैल 2021

कवि होना सौभाग्य है

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार फरूखाबाद

# दिनांक - 10/06/2021

# दिन - बृहस्पतिवार

# विषय - कवि होना सौभाग्य है

# विधा - गद्य - पद्य (लेख) 

कवि समाज का दर्पण होता है । जो समाज की समस्याओं को समझाता हैऔर उन समस्याओं का समाधान करने के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहता है । क्योंकि कवि समाज से जुडा़ होता हैं वो साधारण से साधारण और अमीर से अमीर व्यक्ति की मानसिकता को समझता है क्योंकि वह भी उसी समाज में रहता और विचरता है। 

कवि की कल्पना का कोई  अंदाज नहीं लगा सकता कि वो कहाँ तक सोच सकता और क्या क्या लिखा सकता है। कवि को मान सम्मान पाने के भटकना नहीं पड़ता । उसकी लेखनी और उसका गहन चिंतन ही उसे समाज में सम्मान दिलाता है। 

वो  जीवन को समाज और देश सेवा के लिए समर्पित करता है। उसकी लेखनी समाज में बदलाव लाती है चिंतित, निराश लोगों को पुनः जोश से भर देती है और लोगों को देशहित कार्य करने के लिए प्रेरित करती है । 

कवि होना सौभाग्य की बात है क्योंकि कवि ही लोगों की विचारधारा में परिवर्तन ला सकता है और उन्हें अपनी रचनाओं के माध्यम से उनमें नवचेतन ला सकता है। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

 जम्मू,जम्मू कश्मीर






कैद

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# कलमकार कुम्भ

# दिनांक - 23/04/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय - कैद

# विधा - स्वैच्छिक 

कोरोना ने बहुत रुलाया, 

सबको घर के अंदर कैद कराया, 

मृत्यु ने सबको डराया, 

कोरोना ने आतंक मचाया, 

कोरोना बेरोजगारी  अपने साथ लाया, 

भूखे मरने का भयानक समय आया, 

कैद रहकर क्या खायेंगे, 

भूखे पेट बिना कोरोना के ही मर जायेंगे, 

कैद ने अहसास कराया, 

मनुष्य को भी कैद  पक्षियों का दर्द समझ आया, 

कैद जीवन को लाचार बनाती, 

आजादी पर अंकुश लगाती, 

कैद में रहकर पक्षी कितना दुख पाता, 

कोरोना काल का समय हमें समझाता। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू,  जम्मू कश्मीर




तिरंगा

 # नमन मंच🙏🙏🙏 

#हिंददेश परिवार बिहार इकाई

# दिनांक- 23/04/2021

# दिन- शुक्रवार

#विषय- तिरंगा

#विधा - गद्य/पद्म

देश की संस्कृति की यश गाता तिरंगा, 

देश की शान बढ़ाता तिरंगा, 

वीरों में जोश भरता तिरंगा, 

शांति का प्रतीक तिरंगा, 

हरियाली का संदेश देता तिरंगा, 

त्याग, बलिदान  की भावना दिलों में भरता तिरंगा, 

देश को आगे बढने की प्ररेणा देता तिरंगा, 

सब में प्रेम भरता तिरंगा, 

एक साथ रहने की सीख देता तिरंगा, 

नफरतों को दिलों से हटाने के लिए कहता तिरंगा, 

सब धर्मों का सम्मान करना सिखाता तिरंगा, 

देश की अखंडता और एकता पर मान करता तिरंगा, 

संविधान का मान सम्मान करने के लिए कहता तिरंगा, 

देश की आन बान शान मान तिरंगा । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर



गुरुवार, 22 अप्रैल 2021

जीवन शक्ति

 # नमन मंच🙏🙏🙏 

# साहित्य बोध 

# दिनांक- 23/04/2021

# दिन- शुक्रवार

#विषय- . जीवन शक्ति

#विधा - स्वैच्छिक

प्रभु कृपा से मनुष्य जन्म पाया, 

मोह माया में चित लगाया, 

सतलोक को भूल बिसराए , 

झूठे संसार से मोह बढ़ाया, 

मै मेरी का रट लिया जाप, 

आत्मा को लगता बहुत पाप, 

मनुष्य जीवन के मूल को पहचाने, 

प्रभु के हुक्म को हर पल मानें, 

पेड़ ,पौधे , नदियाँ, पहाड़

यह सब हैं ईश्वर का अनमोल उपहार, 

ईश्वर के उपहार रक्षा करना, 

अपने फायदा के लिए, 

 इनका नुकसान  न करना, 

नहीं तो तुम्हें रोना पड़ना, 

आध्यात्म की ओर कदम बढ़ाये, 

अपने मन के समस्त विकार मिटाये, 

सबको प्यार से गले लगाये, 

मन के मनमुटाव मिटाये, 

जीवन लक्ष्य की ओर धयान लगाये, 

अपने जीवन को सफल बनाये


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू,जम्मू कश्मीर




साहित्य चोरी

 # नमन मंच🙏🙏🙏 

# साहित्य बोध उतर प्रदेश इकाई

# दिनांक- 22/04/2021

# दिन-वीरवार

#विषय- साहित्य चोरी

#विधा - स्वैच्छिक

अपनी मौलिकता कभी न गंवाये, 

चुराकर लिखने से स्वयं को बचाये, 

चुराकर लिखने से अज्ञान बढता, 

ऐसा करने से कभी मान नहीं मिलता, 

अपने सोच विचार से लिखा ही साहित्य कहलाता, 

नकल से लिखा कभी मन को नहीं भाता, 

साहित्य से समाज सेवा की जिम्मेदारी निभाये, 

स्वरचित रचना से सच्चा सम्मान पाये  । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर 




पायल

 # नमन मंच🙏🙏🙏 

# हिंददेश परिवार बिहार इकाई

# दिनांक- 22/04/2021

# दिन-वीरवार

#विषय- पायल

#विधा - स्वैच्छिक

मेरी पायल पिया  को भाती , 

मेरे पास होने का अहसास कराती, 

पायल की छम छम की आवाज, 

पिया मिलन की तड़प बढ़ाती, 

मेरी पायल घर की रौनक बनती, 

पिया के मन की चिंता हरती, 

पायल की छमक छमक सासु माँ को भाती, 

मेरी सुंदरता में चांद चांद लगाती, 

पायल मेरे श्रृंगार को पूरा करती, 

पिया हृदय में मेरी छवि सदा बसती


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर









नादानी

 # नमन मंच🙏🙏🙏 

# साहित्य बोध 

# दिनांक- 22/04/2021

# दिन-वीरवार

#विषय- नादानी

#विधा - स्वैच्छिक

बचपन के दिन नादानी में बीते, 

न अच्छा का ज्ञान न बुरे का, 

हर पल खुशियाँ से रहा वास्ता, 

हर रिश्ता हमारे लिए बहुत प्यारा, 

हर कोई प्रेम से बुलाता, 

सारी शरारतों को नादानी बताता, 

हर नादानी सीख सिखाती, 

जीवन जीने की नई राह दिखाती, 

बचपन की नादानियों पर ,

कोई गिला शिकवा न करता, 

हर पल समझाने में रहता, 

बचपन की नादानियां को, 

हर कोई करता नजरअंदाज़, 

जवानी की नादानियां करती ,

जीवन को बर्बाद ,

न कोई समझाता , 

न समझ पाता, 

अपनी नादानियों पर , 

कोई अंकुश न लगाता, 

अपनी नादानियों पर, 

अंत में पछताता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू,जम्मू कश्मीर





बुधवार, 21 अप्रैल 2021

कोरोना

 नमन मंच 🙏🙏🙏🙏🙏

#वाह वाह क्या बात है

विषय - चित्राभिव्यक्ति काव्य सृजन

विधा - पद्य

शीर्षक - कोरोना

दिनांक - 20/04/2021

दिन - बुधवार

कोरोना ने ऐसा कोहराम मचाया, 

सबने मुहं पर मास्क लगाया, 

अपनों को खोने का, 

सब ने दुख मनाया, 

अंतिम संस्कार में कोई, 

शामिल नहीं हो पाया, 

रिश्तों में कैसी ,

इसने बनाई दूरी, 

एक दूसरे को गले नहीं लगाना ,

बन गया मजबूरी, 

गरीबी को इसने बहुत बढ़ाया, 

भूख ने सबको बहुत रुलाया, 

महंगाई की पड़ी बहुत मार, 

बिना पैसे के कैसे खरीद पायेंगे,

 खाने का आहार, 

रोजगार सबका इसने छीना

भूल गए सब खाना पीना

कोरोना का सकंट बहुत भारी

यह है बहुत गंदी बीमारी

मास्क पहनना, 

दो गज की दूरी हमारे लिए हितकारी, 

यही बात हमको लगती बहुत प्यारी, 

कोरोना से बचने का यही मंत्र, 

इसको रोकने के लिए , 

लगा सारा तंत्र  । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर













मंगलवार, 20 अप्रैल 2021

गुलाब

 # नमन मंच

#हिंददेश परिवार बिहार इकाई

# दिनांक- 21/04/2021

# दिन-बुधवार 

#विषय- गुलाब

#विधा - स्वैच्छिक

जीवन में गुलाब ही बनाना, 

हर किसी को आकर्षित करना, 

कांटों में ही रहकर , 

वातावरण को सुगंधित करना, 

अपनी मनमोहक खूशबू से , 

सबको पास बुलाता, 

हर मुश्किल में, 

अपने धर्म पर अडिग रहने की , 

सीख सिखाता, 

टूट जाने पर भी ,

भगवान के चरणों में स्थान पाता, 

शहीदों के शरीर पर ,

श्रृद्धांजलि देने के लिए  चढ़ाया जाता

पानी में उबालने के बाद भी, 

आंखों की जलन बुझाता, 

मनुष्य तुम भी अपना जीवन, 

 गुलाब की तरह बनाओं, 

अपने शुभ गुणों से, 

संसार को महकायो । 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर


सम्राट अशोक

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक - 20/04/2021

# दिन - मंगलवार

# विषय - सम्राट अशोक

# विधा - स्वैच्छिक

महान पुरुष ही महान कार्य करते

आने वाली नस्लों के लिए मिसाल बनते

उनकी महानता की कथा कौन लिख पाएगा

याद करके परोपकार उनके नित शीश झुक जाएगा

मौर्या राजवंश का सम्राट अशोक बहुत महान 

निडरता और दृढ़ता उसकी पहचान

भारत के सभी महाद्वीप पर राज करता

हर कोई उसके आगे झुकता

कंलिग के युद्ध ने हृदय बदल दिया

एक साथ एक लाख मौत ने हृदय हिला दिया

युद्ध कभी न करने का प्रण ले लिया

तभी तो बौद्ध धर्म अपना लिया

तन मन से बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार किया

शांति अहिंसा का संदेश पूरे विश्व में दिया


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मूजम्मू कश्मीर

सिद्धिदात्री माता

# नमन मंच 🙏🙏🙏
# गूंज क़लम की
# दिनांक - 14/10/2021
# दिन - बृहस्पतिवार
# विषय - सिद्धिदात्री
# विधा - स्वैच्छिक

सब सिद्धियों की तुम ही दात्री, 
कमल पर आसीन रहती, 
हाथ में चक्र, 
गदा, शंख, कमल पुष्प धारण करती, 
तुम्हारी कृपा से मां, 
भगवान शिव अर्द्धनारीश्वर कहलाये, 
समस्त सिद्धियाँ, 
भगवान शिव ने तेरे से पाई, 
भक्त के कठिन से कठिन कार्य , 
माँ तेरी अराधना से सरलता से हो जाते, 
माँ तेरा सिमरन ,
संसार की असारता का बोध कराता, 
माँ तेरा उपासक ,
अमर पद पाता । 

स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर

जीत

# नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार बिहार  इकाई

# दिनांक - 20/04/2021

# दिन - मंगलवार

# विषय - जीत

# विधा - स्वैच्छिक

जीतने के लिए हर प्रयास करेगा, 

हर मुश्किल, हर बाधा को स्वयं पार करेगा, 

जीवन में कुछ पाने के लिए, संघर्ष करेगा, 

सब को आगे बढने के लिए प्रेरित करेगा, 

जीत उसी को मिलती, जिसके हौसले बुलंद, 

खुदा भी जीत उसी को देता, हर दुख में हंसता, 

अपना पूरा जीवन दूसरों के नाम करता , 

जीवन का सही मनोरथ , हासिल करता, 

दूसरों पर उपकार करने वाला, जीवन को सफल बनाता, 

जीवन की बाजी को , जीत कर जाता । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर







जन्मदिन

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य बोध जम्मू कश्मीर इकाई

# दिनांक - 20/04/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - जन्मदिन

# विधा - स्वैच्छिक

जन्मदिन की सभी देते बधाई, 

सब मिलकर खाते मिठाई, 

सब भेजते हैं मोबाइल से बधाई संदेश, 

दिल की तह में पा लेते प्रवेश, 

हर कोई मुबारकबाद कहने के लिए रहता बेचैन, 

हम खुश देखकर उनका बढ़ता सुख चैन, 

जन्मदिन के दिन ही ,पूरे साल का हिसाब लगाता, 

जीवन में कुछ पाने या खोने का , निर्णय कर पाते

जन्मदिन को कुछ निराले ढंग से मनाएं, 

गरीब अनाथ बच्चों को उपहार देकर आए । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर





सोमवार, 19 अप्रैल 2021

महागौरी

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# गूंज क़लम की

# दिनांक - 13 अक्तूबर, 2021

# दिन - बुधवार

# विषय - महागौरी

# विधा - स्वैच्छिक

जय माता महागौरी, जय माता महागौरी, 

तेरी भक्ति से मां, भक्त मन चाहा फल पाता, 

गौर वर्ण के कारण, माँ महागौरी कहलाई, 

श्वेत आभूषण , वस्त्र धारण करती, 

माँ श्वेताम्बरधरा के नाम से , तुम पूजी जाती, 

वृषभ वाहन तेरा,  माँ वृषारूढ़ा कहलाती, 

तेरी भक्ति माँ, भक्त का तप, त्याग, वैराग्य बढ़ाती, 

तेरी कृपा से माँ, हर कष्ट दूर जाता, 

जो भी मन से तुझे अराध्य, मनचाहा जीवनसाथी पाता, 

जय माता महागौरी, जय माता महागौरी । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर


गुरु वंदना

नमन मंच 🙏🙏🙏

गुरुदेव को नमन बारंबार, 

जिसे पूजता सारा संसार । 


गुरु बिन कोई ज्ञान नहीं देता, 

अज्ञान रूपी अंधकार में ज्ञान रूपी ज्योति गुरु ही दिखाता। 


गुरु बिना कोई विद्वान न बनाता, 

न कोई अच्छे बुरे का फर्क बताता। 


गुरु ही ज्ञान का सागर,

हर समय करो गुरु का आदर। 


गुरु शिष्य का भविष्य संवारता, 

गुरु की अज्ञा मनाने वाला कभी नहीं हारता। 


गुरु की स्तुति करते सब ग्रंथ , 

गुरु की महिमा है बहुत बेअंत। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू




रविवार, 18 अप्रैल 2021

कालरात्रि

 # नमन मंच 🙏🙏

# दिनांक - 12 अक्तूबर, 2021

# दिन - मंगलवार

# विषय - कालरात्रि

# विधा - स्वैच्छिक

श्यामल स्वरूप

बिखरे बिखरे बाल, 

क्षण में करती, 

दुष्टों का संहार, 

गले की माला, 

विद्युत सी चमकती, 

भक्तों के हमेशा , 

भय डर का, 

नाश करती, 

तेरे नाम स्मरण , 

मात्र से, 

भूत, प्रेत, राक्षस, 

भाग जाते, 

तीन नेत्र वाली माँ, 

त्रिनेत्रा कहलाती, 

माँ गर्दव की, 

करती सवारी, 

तेरी लीला , 

बहुत प्यारी, 

माँ तेरी अराधना, 

रिद्धि सिद्धि का द्वार खोलती, 

सबसे प्यार के बोल बोलती । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू,जम्मू कश्मीर



समाज हमारा परिवार है

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक - 17/04/2021

# दिन - रविवार

# विषय - समाज हमारा परिवार है

# विधा-  स्वैच्छिक

समाज हमारा परिवार, 

दुख दर्द बांटता, हमारा हर बार, 

जब भी कोई मुश्किल आती, 

हम सबको एक कर जाती, 

भाई बहनों की तरह हम रहते, 

एक दूसरे के लिए जीते मरते, 

कोई भी समस्या हम मिल जुलकर सुलझाते, 

सब एक दूसरे का हौंसला बढ़ाते, 

प्रेम समर्पण की भावना से ,रिश्ता निभाते, 

दिल खोलकर प्यार लुटाते, 

नफ़रत करना हमें भाता नहीं, 

हर किसी के लिए जान लुटाना आता। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर


मतदान

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार बिहार इकाई

# दिनांक - 18/04/2021

# दिन - रविवार

# विषय - मतदान

# विधा - स्वैच्छिक


मतदाता ही सरकार बनाता, 

नेताओं को अपने, आगे पीछे घुमाता, 

मतदान ही ,नागरिक की महता बताता, 

देश में, नए नए बदलाव लाता, 

जो नेता पसंद नहीं आता, 

उसे मत न देकर, कुर्सी से हटाता, 

चोर, भ्रष्टाचारियों नेता से रहता सावधान, 

वो मतदाता अपना मत व्यर्थ न गंवाता, 

जो मतदाता जाति धर्म से, उठकर करता मतदान

वो ही चुन पाता अच्छी सरकार

अच्छी ईमानदार सरकार ही, देश को मजबूत बनाती, 

 सभी सुविधाएं नागरिकों को दें पाती । 



स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू, जम्मू कश्मीर






शनिवार, 17 अप्रैल 2021

माता रानी

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान तेलंगाना इकाई

# दिनांक - 18/04/2021

# दिन - रविवार

# विषय - माता रानी

# विधा - वर्ण पिरामिड

जय 

माँ

दयामयी

दयाकर मेरे 

पापों नाश कर

माँ मेरा भवसागर 

डूबता बेड़ा पार कर । 


माँ

मुझे

अपने चरणों

की धूली बनाओं

मेरे सब अवगुणों

को तुम भुलाकर 

मुझे अपने चरणों में

बिठाकर मेरा उद्धार करो । 


दीन

दुखियों

का 

तूं ही सहारा

हर कोई तेरे 

से मन वांछित

फल क्षण में पाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर





 




कात्यायनी

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#गूंज क़लम की

# दिनांक - 11 सितम्बर, 2021

# दिन - सोमवार

# विषय - कात्यायनी

# विधा - स्वैच्छिक

महर्षि कात्यायन की सुता तूं, 

कात्यायनी कहलाती, 

चार भुजाएँ तेरी, 

चतुर्थभुजा कहलाती, 

वाहन तेरा सिंह, 

दुष्टों को ललकारता, 

तेरा स्वरूप भव्य और दिव्य, 

 स्वर्ण समान दिखलाई देता, 

तेरी भक्ति से माँ अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष, 

आसानी से मिल जाता, 

रोग, शोक, संताप, भय का, 

पल में नाश करती, 

तेरी कृपा से माँ, 

साधक परमपद पाता, 

तेरी महिमा माता, 

सृष्टि का कण कण गाता । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर




माता वैष्णो देवी


# विषय - माता वैष्णो देवी

# विधा - कथा 

श्रीधर माता वैष्णो देवी के अनन्य भक्त थे। एक बार भक्त जी ने घर पर कन्या पूजन किया ,उन कन्याओं में एक दिव्य कन्या थी, जिस का मुखमंडल सूर्य के समान चमक रहा था । पूजन के बाद बाकी कन्या घर लौट गई, लेकिन दिव्य कन्या वही खडी़ थी। उसने श्रीधर से कहा तुम अपने घर पर माता के भंडारे का आयोजन करो ,श्रीधर सोच में पड़ गया और कहने लगा दिव्य कन्या मैं इतने सारे लोगों को खाना कैसे खिला सकता हूँ ,मेरे घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है । दिव्य कन्या बोली भक्त जी आप सिर्फ न्यौता दो ,बाकी सब माता रानी पर छोड़ दो वो स्वयं आपका कारज संवार देगी । 

श्रीधर जी ने कन्या के कहने पर सब को भंडारे का न्यौता दे दिया । सभी लोग श्रीधर के घर भोजन ग्रहण करने के लिए आने लगे, दिव्य कन्या भी आ गई। वो सबको भोजन परोसने लगी इन भोजन ग्रहण करने वालों गुरु गोरखनाथ का शिष्य भैरवनाथ भी था । वो दिव्य कन्या से मांस मदिरा की मांग करने लगा ,दिव्य कन्या ने उसे समझाया कि यह बाह्यण के घर का भंडारा है यहाँ केवल वैष्णो भोजन ही मिलेगा। भैरवनाथ ने दिव्य कन्या का हाथ पकडना चाहा ,वो पवन रूप धारण कर त्रिकुटपर्वत की ओर चली गई । भैरवनाथ भी दिव्य कन्या को पकड़ने के लिए उसके पीछे भागने लगा। 

माता वैष्णो देवी ने ही दिव्य कन्या का रूप किया हुआ था । माता की सहायता के लिए अभी हनुमान जी भी उनके साथ थे। जब हनुमान जी की प्यास बुझाने के लिए माता ने बाण मारकर पानी निकाला उस स्थान को बाणगंगा के नाम से पुकारा जाने लगा । वहाँ माता का सुंदर मंदिर भी बनाया गया  ।

भैरवनाथ ने माता का पीछा नहीं छोड़ा वो माता के पीछे यहाँ भी पहुँच गया । माता ने यहाँ मुड़कर भैरवनाथ को देखा वहाँ माता के चरणों के चिन्ह आज भी है वो स्थान चरणपादुका के नाम से पूजे जाते है। माता ने यहाँ नौ महीने गुफा मे रहकर आराम किया वो स्थान गर्भजून के नाम से जाना जाता है। 

भैरवनाथ नाथ माता के पीछे पीछे भागता दिव्य गुफा के पास पहुंच गया। वहाँ एक तपस्वी ने उसे समझाया जिस कन्या के पीछे तुम भाग रहे वो कोई साधारण कन्या नहीं ,वो आदिशक्ति माता दुर्गा है। वो जबरदस्ती गुफा में घुसने प्रयत्न लगे, हनुमान जी और भैरवनाथ में युद्ध आरंभ हो गया । माता को बहुत क्रोध आ गया । माता ने कालिका का  रूप धारण करके भैरवनाथ का सिर धड़ से अलग कर दिया । 

धड़ से शीश अलग होने पर भैरवनाथ के शीश में जान बाकी थी। वह अपनी गलतियों के लिए माता से क्षमा मांगने लगा, उसकी विनम्र विनती सुनकर  माता रानी को उस पर दया आ गई ,और माता ने उसे वरदान दिया जो भी भक्त मेरे दर्शन करने के बाद तुम्हारा दर्शन करेंगे तभी उसकी यात्रा सफल होगी । 

उसी गुफा में माता महालक्ष्मी महाकाली और महासरस्वती की पिण्डी के रूप में अंतर्धान हो गई। 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर





मातृ वंदना

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार बिहार इकाई

# दिनांक - 21/04/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - मातृ वंदना

# विधा - गीत

जय माँ बाबे वाली ,जय माँ बाबे वाली


मेरा दुख ही जाने , 

तू ही सहारा माँ, 

जय माँ बाबे वाली ,जय माँ बाबे वाली... 


मन की बात तुझे सुनाऊँ , 

तेरे ही सहारा जीवन बिताऊं, 

जय माँ बाबे वाली ,जय माँ बाबे वाली ... 


तेरे दर से कोई खाली न जाता, 

मन वांछित फल पाता , 

जय माँ बाबे वाली ,जय माँ बाबे वाली..... 


तेरे घर कोई कमी नहीं, 

तेरे भरे रहते भंडार माँ, 

जय माँ बाबे वाली ,जय माँ बाबे वाली.... 


तेरे दर्शन मुक्ति दिलाते, 

जीवन के सब दुख मिटते जाते, 

जय माँ बाबे वाली ,जय माँ बाबे वाली.... 


तेरे भक्त को दुख नहीं सताता, 

दिन रात तेरी महिमा गाता, 

जय माँ बाबे वाली ,जय माँ बाबे वाली..... 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू





शुक्रवार, 16 अप्रैल 2021

स्कंदमाता

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान जम्मू कश्मीर इकाई

# दिनांक - 17/04/2021

# दिन - शनिवार

# विषय - स्कंदमाता

# विधा - स्वैच्छिक

तेरी सदा ही जय माँ, तेरी सदा ही जय माँ, 

कमल पर विराजित रहती, 

पद्मासना कहलाती, 

भगवान स्कंद की, तुम ही जननी, 

स्कंदमाता कहलाती, 

कमल पुष्प कर में धारण करती, 

वात्सल्य प्रेम से संसार को महकाती , 

तेरी कृपा से माता, 

मूढ़ ज्ञानी बन जाते, 

तेरी अराधना से माता, 

भक्तजनों का लोक परलोक सफल हो जाता। 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर






हम और संविधान

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#  कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक - 16/04/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय - हम और संविधान

# विधा - स्वैच्छिक -छंदमुक्त कविता

संविधान भारत की शान बढाता, 

सबको देश के लिए जीना सिखाता। 

संविधान ने सबको समान बनाया, 

जात पात का भ्रम मिटाया। 

नारी को भी दिया शिक्षा का अधिकार, 

वो भी है जायदाद की हकदार। 

वोट देने का दिया अधिकार, 

अपनी मर्जी की चुनेंगे सरकार  । 

स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

    जम्मू,जम्मू कश्मीर



माता की चौकी

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान तेलंगाना इकाई

# दिनांक - 16/04/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय - माता की चौकी

# विधा - हाइकु


जगत जननी

भक्त वत्सल कूष्माण्डा

माँ


शक्ति स्वरूपा

दुष्टों की संहारक

माँ


रिद्धि सिद्धि 

निधियों की दात्री

माँ


तेरी हंसी

करती ब्रह्मंड निर्माण

माँ


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

 जम्मू,जम्मू कश्मीर





लॉकडाउन

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य बोध

# दिनांक - 08/05/2021

# दिन - शनिवार

# विषय - लॉकडाउन

# विधा - संस्मरण

22 मार्च 2020 का दिन कभी नहीं भूलता  ।जब पूरे भारत में लॉकडॉउन लग गया था । मै और मेरा मित्र पटना में थे सारी रेल रद्द हो गई थी। बसें भी चलना बंद हो गई हम दोनों पटना रेलवे स्टेशन में फंस गए थे। इस सोच पडे़ थे, घर कैसे पहुँचा जाए हमारे पास पैसे भी बहुत कम थे अगर पैसे ज्यादा होते तो कोई स्पैशल गाड़ी ही कर लेते, कोरोना के कारण सब वस्तुओं के मूल्य बढ़ गए थे ।
लोगों को कोरोना वायरस की अधूरी जानकारी  थी, लोग बहुत परेशान थे उनको लॉकडाउन और कर्फ्यू का अंतर पता नहीं था ।उनका यह भी पता नहीं था लॉकडाउन उनकी बेहतरी के लिए लगाया गया है। कोरोना वायरस से और लोग संकम्रित न हो ।
हम अपनी परेशानी लिये बैठे थे कि हम जम्मू कैसे पहुंचे तभी वहाँ एक सज्जन पुरुष आए मेरे से पूछने लगे आप परेशान क्यों हो ?मैंने बोला  श्रीमान, मैं और मेरा मित्र पटना घूमने आए थे, सरकार ने पूरे भारत देश में लॉकडाउन घोषित कर दिया है । अब हमारे पास घर वापिस जाने का कोई साधन नहीं ,पैसे भी हमारे पास बहुत कम है। मैं अपनी बात कहकर चुप हो गया । वो सज्जन पुरुष हम दोनों से कहने लगे कि मैं भी जम्मू शहर से हूँ ,पटना घूमने आया था मैं अपनी गाड़ी साथ लेकर आया हूँ अगर आप मेरे साथ जम्मू जाने चाहते है तो मुझे अच्छे लगेगा और साथ में मुझे आपका साथ मिल जायेगा । हम दोनों तुरंत हां कर दी ,हमारी तो समस्या का समाधान हो गया।
मुझे आज भी वो दिन कभी नहीं भूलता  और   साथ मुझे संदेश मिला कि आज भी अच्छे इंसानों की कमी नहीं है ।

स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
  जम्मू, जम्मू कश्मीर


गुरुवार, 15 अप्रैल 2021

कूष्माण्डा

# नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान जम्मू कश्मीर  इकाई

# दिनांक - 16/04/2021
# दिन - शुक्रवार
# विषय - माँ  कूष्माण्डा
# विधा - स्वैच्छिक


जय माँ  कूष्माण्डा, जय माँ कूष्माण्डा,
मेरी एक विनती सुनो,
भवसागर से मेरा बेड़ा पार करो,
इस संसार में तेरा ही सहारा माँ ,
अष्ट भुजाओं वाली ,
तूं ही अष्टभुजा कहलाती,
सिंह पर विराजित होकर
सब पापियों का नाश करती

तेरी हल्की सी मुस्कान ने ही,
ब्रह्मंड सृजन किया,
तेरे हाथों में रिद्धियां सिद्धियाँ निधियाँ
भक्त मन वांछित फल पाता,
तेरी कृपा से माँ,
लोक परलोक संवर जाता,
जय माँ कूष्माण्डा, जय माँ कूष्माण्डा ।

स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर, जम्मू


बुधवार, 14 अप्रैल 2021

माँ चंद्रघंटा

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार झारखंड इकाई

# दिनांक - 22/04/2021

# दिन - बृहस्पतिवार

# विषय - मातृ शक्ति

# विधा - सायाली छंद

१. जय, 

माँ चंद्रघंटा, 

तेरी कृपा अपार, 

सबसे करती, 

प्यार। 

२. मां , 

करती हो , 

दुष्टों का संहार, 

तेरी महिमा , 

अपरंपार। 

३. माँ, 

सिंह तेरी, 

सवारी बैठी लगती, 

तूं सबसे, 

प्यारी। 

४. हर, 

कोई तुझे, 

दिन रात सिमरता , 

तेरी महिमा, 

गाता। 

५. माँ, 

तेरी भक्ति, 

तेरे भक्तों का , 

पूरा जीवन, 

संवारती। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू

मंगलवार, 13 अप्रैल 2021

ब्रह्मचारिणी

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#गूंज क़लम की

# दिनांक - 08/10/21

# दिन - मंगलवार

# विषय - माँ ब्रह्मचारिणी

# विधा - कविता

माँ ब्रह्मचारिणी कठिन तप किया, 

तब ही शिव को पाया, 

दाहिने हाथ में माला सजे, 

शिव शिव जपत दिन रात, 

बाहिने कर में कमंडल सजा, 

अमृत वर्षा होये, 

साधक को सुख शांति मिले, 

तेरे स्वरूप का धरे ध्यान, 

माँ तेरे जैसा कोई नहीं, 

जिसकी करे हम आस , 

तेरी कृपा से होता माँ, 

सब पापों का नाश, 

भक्तों को सर्वसिद्धि मिले , 

माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा हो । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर



प्रशंसा


# नमन मंच 🙏🙏🙏


# साहित्य संगम संस्थान तेलंगाना  इकाई


# दिनांक - 13/04/2021


# दिन - मंगलवार


# विषय - प्रशंसा


# विधा - कविता


अध्यापक भी प्रशंसा का हथियार अपनाता, 


शिष्यों को तभी पढ़ा पाता, 


प्रशंसा शिष्यों का हौंसला बढ़ाती, 


ज्ञानार्जन के लिए प्रेरित करती, 


पत्नी अपने लिए प्रशंसा के बोल सुनती, 


अपनी जान से ज्यादा पति को चाहती, 


रण में लड़ता योद्धा प्रशंसा  पाता, 


जीतने के बाद नगाड़ा बजाया जाता, 


नगाड़े की आवाज उसमें जोश जगाती, 


 शक्ति और ताकत को, और अधिक बढ़ाती, 


हर कोई प्रशंसा चाहता, 


महान कार्य कर नहीं पाता, 


झूठी प्रशंसा अहंकार को जन्म देती, 


नैतिक पतन का कारण बनती। 


स्वरचित  एवं मौलिक


अमरजीत सिंह 


जम्मू, जम्मू कश्मीर



डां. भीमराव अंबेडकर

विषय - डा. भीमराव अंबेडकर जयंती

विधा - स्वैच्छिक

बचपन भी संघर्ष  में बिताया

दलित होने का दंड बहुत पाया

शिक्षा को पाने के लिए

उनको करना पड़ा संघर्ष 

संघर्ष को ही जीवन का सारथी बनाया

तभी तो वह महान कार्य कर पाया

समानता की  हमेशा करते बात 

औरतों को हक़ के लिए लड़ते

शिक्षा को सब का अधिकार माना

इसको सब के लिए जरूरी जाना

कानूनों का उनको बहुत ज्ञान

भारत को दिया संविधान ग्रंथ महान

बाबा साहेब पुरूष महान

सबको अधिकार दिए एक समान ।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर









शैलपुत्री

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

गूंज क़लम की

# दिनांक - 07 अक्तूबर 2021

# दिन - बृहस्पतिवार

# विषय - शैलपुत्री

# विधा - स्वैच्छिक

शैलराज के घर अवतार लिया, 

शैलपुत्री पड़ गया नाम, 

भक्तों के मनोरथ पूरे करती, 

श्रृद्धा से जपते तेरा नाम, 

 माँ दाएं हाथ में  माँ तेरे त्रिशूल , 

बाएं हाथ में कमल सुशोभित, 

वृषभ की करती सवारी, 

तब ही वृषरुढ़ा कहलाती, 

शिव की अर्धांगिनी बन पर, 

माँ पार्वती के नाम से पूजी जाती। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

 जम्मू, जम्मू कश्मीर

नववर्ष

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान तमिलनाडु इकाई

# दिनांक - 13/04/2021

# दिन - मंगलवार

# विषय - चित्र चिंतन

# विधा - स्वैच्छिक

नववर्ष का आरंभ ,

खुशियाँ लाता अंनत

सब मिलकर मिठाइयां खाते

नववर्ष की खुशियाँ मिलकर मानते

घरों में रंग बिरंगी रंगोली बनाते

सबको प्यार से गले लगाते

नारियाँ हलदी तन पर लगाती

नदियों में नहाने जाती

सब मिलकर नववर्ष के आने का 

स्वागत करते

एक दूसरे के गले मिलते


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर







सोमवार, 12 अप्रैल 2021

वैसाखी

# विषय - वैसाखी

# विधा - स्वैच्छिक

वैसाखी के दिन ही, 

दशमेश पिता ने खालसा पंथ सजाया। 


एक पात्र से सब को अमृत पिलाकर, 

जात पात का भ्रम मिटाया। 


अपने ही शिष्यों से अमृत पीकर, 

शिष्यों का मान बढ़ाया। 


नारी को भी अमृत पिलाकर, 

स्वयं के लिए लड़ना सिखाया। 


सबको जुल्म के खिलाफ लड़ने का, 

सतगुरु ने पाठ पढ़ाया। 

वैसाखी का त्यौहार किसान के,

 चेहरा पर प्रसन्नता लाता । 


फसल पकने का समय जब आता, 

किसान की खुशी बढ़ाता। 


अपनी मेहनत का जब फल पाता, 

नाच गाकर अपनी खुशी जताता । 







स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

 जम्मू, जम्मू कश्मीर









नवरात्रि

  नमन मंच 🙏🙏🙏 

विषय - नवरात्रि

नवरात्रि का पवित्र त्योहार आया, 

जीवन में उल्लास भर लाया। 

सब माँ दुर्गा की स्तुति मन से गाएंगे, 

अपना जीवन की घडियाँ सफल बनाएंगे। 

माँ करेंगी, सबके जीवन से कल कलेशों का नाश, 

पापियों का करती है अपने हाथों से विनाश। 

सब मिलकर , एक साथ पूजा करेंगे , 

अपना  जीवन को प्रेम भक्तिभाव से भरेंगे।

माँ सब की कामनाएं पूरी करेंगी , 

तन मन की सब चिंताएं हरेगी । 

माँ दुर्गा का दरबार सजाएंगे 

माँ से मन वांछित फल पाएंगे। 

माँ  करती है अपने भक्तों पर कृपा अपार, 

पापियों का भी हो जाता उद्धार । 

नवरात्रि पर्व  माँ नवदुर्गा की पूजा का त्योहार 

माँ का तेरी महिमा अपरंपार । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर






निंदक

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान तेलंगाना इकाई

# दिनांक - 12/04/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - निंदक

# विधा - स्वैच्छिक

निंदा करने वाला निंदक कहलाता, 

सबके पापों का बोझ उठाता, 

निंदक को हर एक दोष नज़र आता, 

निंदा करना उसे सुहाता, 

कोई न उसे पास बिठाता, 

सबसे अपना अपमान करवाता, 

दिल को मैल से भरकर रखता, 

सुधरने का कोई यत्न न करता, 

निंदा उसको नर्क पहुंचाती, 

जीवन उसका निष्फल बनाती


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर




आंखें

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार बिहार इकाई

# दिनांक - 12/04/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - आंखें

# विधा - स्वैच्छिक

आंखें ही संसार दिखाती

प्रकृति से हमारा रिश्ता बनाती

आंखें ईश्वर का अनमोल उपहार

हमेशा करो उसका धन्यवाद

आंखें ही रंगों का भेद बताती

अच्छे बुरे की परख सिखाती

आंखों से देखा मन पर असर करता

मन में भले बुरे विचार पैदा करता

अच्छा देखने का हमेशा प्रयत्न करें

आंखों को हमेशा नियंत्रित रखें

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू,जम्मू कश्मीर 





पुत्रवधु

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य बोध

# दिनांक - 12/04/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - पुत्रवधु

# विधा - स्वैच्छिक

मायके को मुसकान से महकाती

ससुराल जाकर क्यों सहम जाती

पुत्रवधु घर की जिम्मेदारियों उठाती

अपने फर्ज को खूब निभाती

ससुराल जाकर पुत्रवधु बन जाती

सास ससुर की मन से सेवा  करती 

अपने लिए सिर्फ सम्मान चाहती

पति को परमेश्वर जानकर पूजा करती

उसके लिए जीते मरती । 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

जम्मू,जम्मू कश्मीर



रोटी

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान जम्मू कश्मीर इकाई

# दिनांक - 12/04/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - रोटी

# विधा - कविता

दिनभर मेहनत करने के बाद  ,

मजदूर  रोटी खा पाता, 

बिना इसके चल नहीं पाता, 

रोटी के कारण ,

दर दर भिखारी भटकता, 

रोटी के करण ,

सभी के ताने सुनता, 

घर से कोसों दूर रहता, 

रोटी के कारण ही ,

अपना का वियोग सहता, 

रोटी तरह तरह का काम कराती, 

बिना उत्सव के नाच नचाती । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर



रविवार, 11 अप्रैल 2021

ज्योतिबा फुले

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक - 12/04/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - राष्ट्रपिता महात्मा ज्योतिबा फुले

# विधा - स्वैच्छिक

नारी शिक्षा की आवाज उठाई , 

सब के हक़ के लिए लड़ी लड़ाई, 

असमानता का विरोध किया, 

समानता लाने का प्रण लिया, 

विधवा का विवाह  करवाया, 

पुरानी रूढ़ियों को, खत्म करने का बीड़ा उठाया, 

मानव मानव का भेदभाव मिटाया, 

सब को सम्मान से, जीने का हक़ दिलाया, 

संघर्षो में पूरा जीवन बिताया, 

मानव सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाया । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

 जम्मू, जम्मू कश्मीर






धर्म और आस्था

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य बोध असम इकाई

# दिनांक - 20/05/2021

# दिन - गुरुवार

# विषय - धर्म

# विधा - स्वैच्छिक 

सब धर्मों ने ,

दया को धर्म का मूल बताया। 

मानव सेवा को ,

जीवन का लक्ष्य बनाया। 

दीन दुखियों के, 

 दर्द को बांटना सच्चा कर्म बताया। 

आस्था यही बन जाती, 

सब इंसानों में समानता दिख आती। 

जात पात का भेद मिटाती, 

सब में एक ईश्वर की ज्योति दिखाती। 

धर्म ईमानदारी की सीख सिखाता, 

पराया हक खाने से बचाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू, जम्मू कश्मीर




ज्योति

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान तेलंगाना इकाई

# दिनांक - 11/04/2021

# दिन - रविवार

# विषय - ज्योति

# विधा - स्वैच्छिक

ज्ञान की ज्योति राह दिखाती, 

मंजिल के राह को सुगम बनाती, 

जीवन के अंधेरे घटाती, 

जीने का हौंसला बढ़ाती, 

मुश्किलों, बाधाओं से लड़ना सिखाती, 

जीवन का नया पाठ पढ़ाती, 

हार को जीत में बदलने का तरीका बताती, 

हर एक को आगे बढ़ने का राह दिखलाती। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

 जम्मू, जम्मू कश्मीर



शब्दों की गरिमा और हम

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान उड़ीसा इकाई

# दिनांक - 11/04/2021

# दिन - शनिवार

# विषय - शब्दों की गरिमा और हम

# विधा - स्वैच्छिक 

शब्द ही ईश्वर से मिलाता, 

आत्मा परमात्मा का मेल कराता । 

शब्द ही ज्ञान देता, 

अज्ञान का नाश करता। 

शब्द ही विद्वान बनाता, 

सबको अच्छा इंसान बनाता। 

शब्द अच्छे बुरे की परख सिखाता, 

बुरे कर्मो से हमेशा बचाता। 

शब्दों ही महान ग्रंथ बनाते, 

सब को संस्कारी बनाते । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर






शनिवार, 10 अप्रैल 2021

जीवन एक उत्सव

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# दिनांक - 29/04/2021

# दिन - बृहस्पतिवार

# विषय - जीवन एक उत्सव 

# विधा - स्वैच्छिक ( छंदमुक्त कविता)  

जीवन यात्रा को उत्सव बनाये, 

मानव सेवा का वृक्ष लगाये। 

प्रेम प्रीत की रीति चलाये, 

हर एक प्यार से गले लगाये। 

जात पात का भेद मिटाये, 

समानता का नारा लगाये। 

ईमानदारी से अपने कर्तव्य निभाये, 

धरती को ही स्वर्ग बनाये। 

देश सेवा को तन मन धन से निभाये, 

जीवन यात्रा को सफल बनाये। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

 जम्मू, जम्मू कश्मीर



विरह

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# सारथी ग्रुप

# दिनांक - 29/04/2021

# दिन - बृहस्पतिवार

# विषय - विरह

# विधा - लघुकथा

सरोज ख्यालों में खोई रहती है । अपने पति से दूरी उसके बर्दाश्त के बाहर हो रही थी, पति को विदेश गए कई साल हो गया है शादी के तीन बाद ही चले गए थे । अब तो बच्चे भी बड़े हो गए थे ,दस साल से पति  आने का इंतजार कर रही थी। 

एक औरत का अकेले बच्चों को पालन कितना मुश्किल होता हैं, यह सरोज ही बता सकती है।पति से मिलन के लिए वह तड़प रही थी ,लेकिन वह अपनी भावनाओं को छिपाकर अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं । 

जब पति विदेश का रवाना हुए थे। उस समय बड़ा दो साल और छ: मास की ही थी। बच्चों ने पिता को कभी देखा ही नही था, तस्वीर को देखकर ही मन को बहला लेते थे । बच्चों को द्वारा यह पूछना पापा कब वापिस आयेगें सरोज के बिरह की वेदना को ओर बढ़ा देता था। 

अब सरोज की आंखे भी पति का इंतजार करते थक गई थी। अब वह अपने पति के साथ ही शेष जीवन व्यतीत करना चाहती थी।उसे इस बात कोई ज्ञान नहीं था उसकी विरह अवस्था कब अंत होगा। 

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू








दुल्हन

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#भारतीय

दिनांक - 17/07/2021

दिन - शनिवार

#विषय - दुल्हन

विधा - छंदमुक्त कविता

सोलह श्रृंगार ने सुंदरता निखारी, 

लगता है कोई अप्सरा धरती पर उतर आई। 

चेहरा उसका सोने सा चमकता, 

माथा हमेशा रहता दमकता। 

हर कोई उसकी खूबसूरती करता बखान, 

चौबीस घंटे पिया का रहता उसमें ध्यान। 

पिया पर प्यार बरसाती, 

अपने सपने पिया संग सजाती। 

दुल्हन का चेहरा पिया को भाता , 

हृदय प्यार से भर जाता। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर










मैं जिंदा हूं

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान गुजरात इकाई

# दिनांक - 09/04/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय - मै जिंदा हूं

# विधा - स्वैच्छिक

इंसानियत के गुण लिए, 

दया की भावना रखें, 

वफादारी की सीख सिखाती , 

मैं भारत माता की आत्मा, अभी भी जिंदा हूं। 


दीन दुखियों की दशा देख, 

उनकी मजबूरियों को समझकर, 

सब की मददगार बनती , 

मैं भारत माता की आत्मा अभी भी जिंदा हूं । 


 पश्चताप करते वो मतदाता देखकर, 

उनके सुनहरे सपनों को टूटते  देखकर, 

दुख भरी सिसकियों को महसूस कर, 

मैं भारत माता की आत्मा अभी भी जिंदा हूं। 

भारत की तरक्की देखने के लिए, 

सब के ईमान को जगाने के लिए, 

देश को खुशहाल और समृद्ध बनाने के लिए, 

मैं भारत माता की आत्मा अभी भी जिंदा हूं। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

 जम्मू,जम्मू कश्मीर






चित्रकार

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# कलमकार कुम्भ साहित्य संस्थान, भारत

# दिनांक - 10/04/2021

# दिन - शनिवार

# विषय - चित्रकार

# विधा - स्वैच्छिक

ईश्वर तूं भी महान चित्रकार, 

जिसने रंग बिरंगा संसार बनाया । 


हर किसी को अलग अलग आकार देकर, 

पहचानने का राह सुगम बनाया। 

 

रंग बिरंगे फूल बनाकर , 

संसार को महकाया। 


नदियों ,नालों ,झरनों की निर्मल धारा, 

पवित्र करती जग सारा। 


विभिन्न प्रकार के पशु पक्षी बनाकर, 

सृष्टि को अनेक रंगों से सजाया। 

 

तेरी चित्रकारी बहुत प्यारी, 

कारीगरी सबसे न्यारी। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर







शुक्रवार, 9 अप्रैल 2021

प्रेरणा

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार गाजियाबाद इकाई

# दिनांक - 05/07/2021

# दिन - सोमवार

#विषय -प्रेरणा

# विधा -  छंदमुक्त कविता

दस गुरुओं का जीवन प्रेरणा देता, 

सच बोलने के लिए प्रेरित करता। 

झूठ पाखंड का विरोध करता, 

सत्य ज्ञान का मार्ग दिखलाता। 

मानवता की सीख सिखाता, 

सब का हक बराबर बताता। 

सब धर्मों से प्यार करना सिखाता, 

सब को एक ईश्वर की संतान बताता। 

संगत पंगत सब को सिखाया, 

जात पात का भेदभाव मिटाया। 

स्वार्थपन से ऊपर उठाया, 

 देश धर्म की रक्षा के लिए सर्वस्व लुटाया। 

प्रेरणा बना गया उनका जीवन, 

सबको मानव सेवा का नया पाठ पढ़ाया। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर







आंतकी हादसा

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान जम्मू कश्मीर इकाई

# दिनांक - 09/04/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय - आंतकी हादसा

# विधा - लघुकथा

रजनी और आरती आपस में बातें कर रही थी। तभी अचानक दडमम दडमम की आवाज आना शुरू हो गई । दोनों डर से कांपने लगी तभी रजनी टीवी का स्वीच लगाया समाचार में बता रहे थे कि  आम्री छावनी कालूचक जम्मू में आतंकवादियों ने हमला कर दिया।  यह समाचार सुनकर रजनी का डर और अधिक बढ़ गया क्योंकि उनका घर छावनी के बिल्कुल नजदीक था । 

दोनों खिड़की के पास आकर खडी़ हो गई  । आतंकी छोटे -छोटे बच्चों को छत से नीचे फैक रहे थे ,और अंधाधुंध फायरिंग कर रहे थे । इस हमले में बहुत सारे लोगों ने अपनी जान गंवाई और बहुत सारे जवान शहीद हो गए । 

जवानों ने हौसला नहीं  हार और सभी आतंकियों को मार गिराया । रजनी और आरती ने आतंकियों के मारे जाने की खबर सुनी तो उनकी जान में जान आ गई । 

अब दोनों हमले में मारे गए ,लोगों की मृत्यु पर अफ़सोस प्रकट करने लगी । 

स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर


नारी का सम्मान

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान तेलंगाना इकाई

# दिनांक - 09/04/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय -नारी का सम्मान

# विधा - कविता

नारी ही गृह की शोभा बढ़ाती, 

हर काम में हाथ बटाती । 

परिवार के लिए जीते मरती, 

हर कार्य हृदय से करती। 

कुर्बानी की मूरत न्यारी, 

कुदरत जाती सारी बलिहारी। 

राम, कृष्ण, नानक की यही महतारी, 

गोद में समाई है सृष्टि सारी। 

यही दुर्गा, यही माँ काली, 

यही महादेव की अर्धांगिनी प्यारी। 

साम्मान करता जग सारा, 

ऋण कैसे उतर पायेगा इसका जग सारा। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर








गुरुवार, 8 अप्रैल 2021

स्वास्थ्य

 नमन मंच 🙏🙏🙏🙏🙏

#साहित्य सृजन संस्थान बिसवाँ

सृजन के सारथी क्रमांक (43)

#विषय - स्वास्थ्य 

विधा-कविता

दिनांक-09/04/2021

दिन - शुक्रवार


स्वास्थ्य का स्वयं ध्यान रखना, 

फास्टफूड़ खाने से बचना। 

नित्य स्नान करना, 

प्रभु का नाम सिमरना। 

कसरत व्यायाम करने से नहीं कतराना,

हर बिमारी से शरीर को बचाना। 

पेड़ पौधों को खूब लगाना, 

पर्यावरण को शुद्ध बनाना 

आराम आराम से खाने को खाना, 

जल्दी जल्दी अंदर नहीं ठुसाना। 

स्वस्थ रहने का यही मंत्र अपनाएं, 

नित्य योगाभ्यास की क्लास लगाएं। 


स्वरचित एवं अप्रकाशित

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू








                  

मैं भी प्रधान बनूंगा

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# नव  साहित्य परिवार

# दिनांक - 08/04/2021

# दिन - बृहस्पतिवार

# विषय - मैं भी प्रधान बनूंगा

# विधा -  छंदमुक्त कविता

मैं भी प्रधान बनूंगा, 

गाँव की खुशहाली के लिए हर काम करूँगा। 

शिक्षा का दीपक जलाऊँगा, 

अज्ञान का अंधेरा मिटाऊंगा। 

बेरोजगारी का नाम न होगा, 

हर किसी के पास अपना रोजगार होगा। 

भूखा कोई न सोयेगा, 

हर कोई चैन की नींद में खोयेगा। 

लड़ाई झगड़े का गाँव में नाम होगा, 

मेरे जैसा जब प्रधान होगा। 

सब के स्वास्थ्य का ध्यान रखूंगा , 

डाक्टर को अपने साथ रखूंगा। 

हर कोई खायेगा मीठे पकवान, 

जब मैं बन जाऊँगा प्रधान। । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू



चित्र चिंतन

#नमन मंच 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

#साहित्य संगम संस्थान पंजाब इकाई

#दिनांक - 09.04.21 

#दिन- शुक्रवार

#विषय - चित्र  आधारित

#विधा- स्वैच्छिक

गौरैया की चीं चीं की आवाज

करती सुबह होने का आगाज

मंद मंद पवन सुख का अहसास कराती

तन मन की थकान मिटाती

पेड़ पौधों  धरती की शोभा बढ़ाते

उसकी सुंदरता में चांद चांद लगाते

नदियों की निर्मल धारा 

करती धरा को हरा भरा

गगन में टिम टिमाते तारें

सब को लगते बहुत प्यारे

प्रकृति माँ से हमारा रिश्ता न्यारा

वो लूटाती है स्नेह अपना सारा

इस रिश्ते को मजबूत बनायेंगे

धरतीपुत्र होने का फर्ज निभायेंगे। 


 स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू








बारहमासी चिंताएं

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान गुजरात इकाई

# दिनांक - 08/04/2021

# दिन - बृहस्पतिवार

# विषय - बारहमासी चिंताएं

# विधा -  कविता

बारह मास सताया, 

कोरोना ने बहुत रुलाया । 


रोजगार को छीना , 

भूल गया खाना पीना। 


कोरोना का सिर्फ बहाना है, 

हर पल मुश्किलों में बिताना। 


गरीब का कोई नहीं सोचता, 

वो भी अपने हक के लिए नहीं बोलता। 


बारहमास गरीबी में रहता, 

भूख प्यास को चुपचाप सहता। 


बच्चों के भविष्य की चिंता दिन रात, 

बेबस गरीब कुछ कर नहीं पाता। 


बारहमास  यही चिंताएं, 

जो गरीब का सुख चैन चुराए। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर








यादें

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहिति्यक महफ़िल परिवार

# दिनांक - 03/06/2021

# दिन - बृहस्पतिवार

# विषय - यादें

# विधा - स्वतंत्र

यादें बीते समय का साया, 

जिसने कभी हंसाया रुलाया। 


हर पल मन खोया रहता , 

हर याद को हृदय हार में पिरोया। 


जो चले गए उनकी यादें बहुत रुलाती, 

मन में दुख की वेदना भर जाती। 


बिछुड़े गए जो अपने, उनके होने का आभास कराती, 

यादों की चुभन हृदय को, शोकाकुल बना जाती। 


यादें जीवन के हर पल का अहसास कराती, 

जीवन का खालीपन दूर कर जाती  । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, , जम्मू कश्मीर




बुधवार, 7 अप्रैल 2021

कम बोले मीठा बोले

 #नमन मंच 🙏🙏🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार उतराखंड इकाई

# दिनांक - 07/04/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - कम बोले मीठा बोले

# विधा - स्वैच्छिक

कम बोले मीठा बोले, 

शब्दों की मिठास घोले, 

कडवे बोल अपमान का कारण बनते, 

ऐसा लगता प्राण है हरते, 

मीठे बोल सब काम बनाते, 

सब से सम्मान दिलवाते, 

सोच समझकर बोले, 

शब्दों का हमेशा तोल तोले, 

शब्दों की मर्यादा जाने, 

हर शब्द का मोल पहचानें, 

मीठे बोल  औषधि का काम करते, 

तन मन के सब रोग हरते, 

कम बोलने वाले हमेशा सब को सुहाते, 

 मीठा बोलने सभी के हृदय में स्थान पाते। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर

मेरे शाम

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान जम्मू कश्मीर  इकाई

# दिनांक - 07/04/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - मेरे शाम

# विधा -  गीत

मेरे शाम जी, बांसुरी बजाना 

मेरी सोयी हुई ,आत्मा को जगाना

तेरी गोपी हूँ, तेरे गुणों को ,हृदय में पिरोती हूं

एक दरस दिखाना ,नयनों की प्यास बुझाना

न मैं राधा हूँ ,न रूकमणि

प्यार करती हूँ ,तुझसे हर घड़ी

भवसागर में ,तेरा ही सहारा

तेरी कृपा से, उतरूं पारा

मेरे अवगुणों को ,चित न धरना

मेरा पार उतारा, तुम ही करना। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू, जम्मू कश्मीर

हम कर्तव्य निभायेंगे

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत 

# दिनांक - 07/04/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - हम कर्तव्य निभायेंगे

# विधा -  स्वैच्छिक

सब अपना कर्तव्य निभाते

समाज को खुशहाल बनाते

जब विद्यार्थी 

बच्चों को अच्छे अच्छे संस्कार सीखाते

अपना कर्तव्य निष्ठा से निभाते

देश के कानूनों का सत्कार करते

कर्तव्यों का पालन हृदय से करते

पति पत्नी को पूरा सम्मान देता

पूरे उसको अधिकार देता 

 माता पिता की सेवा करता

अपने कर्तव्यों का अच्छे से पालन करता

हर कोई जब कर्तव्य निभाता

तब ही देश तरक्की कर पाता। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर





 





मंगलवार, 6 अप्रैल 2021

बादल


# विषय - बादल


काले बादल, मतवाले बादल

धरती को हरा भरा, करते बादल 

किसान की मुसकान ,कारण बनते बादल

बादल देखकर ,सब ओर प्रसन्नता आती

मीठे मीठे पकवानों की ,खुशबू घर को महकाती

बादलों का छाना, वर्षा का संदेशा लेना

पानी से ,खेतों का भर जाना

बच्चों का ,चीखना चिल्लाना

वर्षा के पानी में , कश्तियाँ तैराना

बादलों की आमद ,खुशियाँ लाई

दामिनी ने भी गरज कर, अपनी प्रसन्नता जताई

वर्षा का पानी, धरा पर बहार लायेगा

सब के मन को, सुख का अहसास करायेगा । 



स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू, जम्मू कश्मीर







सागर किनारे

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान उड़ीसा इकाई

# दिनांक - 06/04/2021

# दिन - मंगलवार

# विषय - सागर किनारे

# विधा - पद्म


हे प्रभु मुझ डूबती नैया को, 

तुम पार लगाओ, 

 इस भवसागर में, तूं ही सहारा, 

कैसे पाऊँ मैं ,सागर किनारा, 

मुझ निर्धन तुम ही खजाना, 

तेरे बिन कोई दूजा न जाना, 

सागर गहरा नाव मेरी छोटी, 

अवगुण मेरे कोटि कोटि, 

बीच मझधार न छोडो़ नाथ, 

मोहे अनाथ न छोड़ो साथ, 

सागर किनारा बहुत निकट दिख आया, 

तुमरी कृपा मुक्त द्वारा पाया । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर






कर्म

  नमन मंच 🙏🙏🙏

#

# दिनांक -15/09/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - कर्म 

विधा -  गद्य- पद्य

कर्म ही हमेशा भाग्य बदलता

जीवन को नई दिशा प्रदान करता

बिना कर्म के कोई काम नहीं बन पाता

कैसे कोई मंजिल को हासिल करता

कर्म ही हौसलों को उड़ान देता

जीवन को जीने का नया आयाम मिलता

शस्त्रों को सीखकर मनुष्य वीर कहलाता

बिना लड़े कैसे युद्ध को जीत पाता

एडीसन अगर कर्म न करता

सारा संसार अंधेरे में रहता

वैज्ञानिक भी बैठे रहते भाग्य भरोसे

सुख के सारे साधन न बनते

ज्ञानी न करते लिखने का कर्म

कैसे पढ़ पाते हम महान ग्रंथ

कर्म ही भाग्य निर्माता है

बिना कर्म के कोई महान नही बन पाता  ।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू,  जम्मू कश्मीर 



सोमवार, 5 अप्रैल 2021

प्यारी बहना

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान 

# दिनांक - 05/04/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - प्यारी बहना

# विधा -  कविता

सबसे प्यारी लगती है 

मुझे से बहुत प्यारी करती 

दिल की हर बात करती

ओ मेरी प्यारी बहना ओ मेरी प्यारी बहना


मुझे वो चांद लगती है

हर पल मेरे लिए दुआ करती 

हर बोल में मिठास घोलती 

ओ मेरी प्यारी बहना............ 


हर दिल में राज करती 

अपने ससुराल हर काम करती

मुश्किलों में सबका साथ देती

ओ मेरी प्यारी बहना.......... 


हर कर्तव्य को निष्ठा से निभाती

परिवार की खुशी के लिए हर कष्ट सह जाती

अपने सुख सब पर लुटाती

ओ मेरी प्यारी बहना......... 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर






भागीदारी

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक - 05/04/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - भागीदारी

# विधा - स्वतंत्र 

देश हित में कार्य करना, 

देश के लिए जीना मरना, 

हर श्वास से देश सेवा करनी, 

कथनी करनी में बदलनी, 

देश के कानून का सम्मान करना, 

हर कर्तव्य का पालन करना, 

देश की आन बान शान बढ़ाने के लिए, 

निष्काम भाव से सेवा करनी, 

जात- पात भेद नहीं करना, 

विनम्रता से सब से बात करना, 

छोटे बड़े का सम्मान करना, 

अभिमान का त्याग करना, 

देश के लिए यही हमारी भागेदारी, 

इसी से हटेगी भेदभाव की बिमारी। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू, जम्मू कश्मीर




चांदनी रात

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार झारखंड इकाई

# दिनांक - 01/06/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - चांद

# विधा - छंदमुक्त  कविता

चांदनी रात में ,

बिरहा बहुत सताता, 

पल पल पिया की, 

याद दिलाता, 

एक क्षण भी , 

प्रीतम बिन रहा नहीं जाता, 

चौकर के जैसे चांद को निहारूँ,

 पर मिल नहीं पाऊँ, 

चांद की रोशनी सोने नहीं देती,

 मुझे कहीं खोने नहीं देती, 

कब पिया मिलन की, रात आएगी

मेरे मन तन की प्यास बुझायेगी , 

हर पल रोती बिलखती हूँ,  

पिया मिलन के लिए तड़पती हूँ, 

जब पिया पिया का ,

मुझसे मिलन हो होगा, 

चांदनी रात का, 

उस दिन अलग ही रंग होगा । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर




मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम

# विषय- श्री राम

# विधा - स्वैच्छिक (भजन) 


सबसे प्यारे सबसे न्यारे , नाम जपूँ तेरा आठों याम 

हे राम हे राम .......... 

दशरथ के प्यारे, माँ कौशल्या के दुलारे

हे राम हे राम......... 

गुरु विश्वामित्र से शिक्षा पाई, ज्ञानवान हो गया चारों भाई

हे राम हे राम.......... 

ताड़का दुष्टा आप संहारी ,परम गति उसने पाई, 

हे राम हे राम........ 

शिवधनुष तोड़  स्वयंवर जीता, माता सीता से शादी रचाई

हे राम, हे राम....... 

पिता के वचन का मान बढाया,  वन जाकर घर है बसाया

हे राम, हे राम..... 

रावण को रण में हराया, दुष्ट को नर्क का द्वार दिखाया

हे राम हे राम ........ 

तेरी महिमा अपरंपार कैसे करूँ तेरे गुणों का बखान

हे राम हे राम............. 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर




रविवार, 4 अप्रैल 2021

अरमानों का गुबार

#विषय - अरमानों का गुबार

# विधा -  कविता   

किसान बीज बीजता, 

प्रेम जल से, उसे सींचता , 

अरमान जागते है ,उस के मन में, 

ठंडी हवा मानूँगा मैं, 

ठंडी छाया में बैठूँगा मैं, 

कीकर का पेड़ उग आया, 

सारे अरमानों को धूल में मिलाया, 

माँ बाप बच्चों को नाज से पालते, 

अपना सारा प्यार धन लूटाते, 

बड़े होने पर बच्चे मुंह फेर जाते, 

माँ बाप के अरमानों को धूल में मिलाते, 

माँ बाप के अरमानों की कदर न करते, 

जिंदगी में सुख वो भी नहीं पाते । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू, जम्मू कश्मीर




स्व परिचय


नाम -अमरजीत सिंह

जन्मतिथि - 10 -12- 1987

जन्म स्थान - जम्मू, जम्मू कश्मीर, भारत

पिता - सरदार तारा सिंह

माता - सरदारी मनजीत कौर

पत्नी -सरदारी वलविन्दर कौर

संतान - तक्षप्रीत सिंह ,परनीत कौर 

दसवीं कक्षा - सरकारी हाई स्कूल ब्रिज नगर, मीरा साहिब ,जम्मू

बाहरवीं कक्षा - सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल गांधी नगर, जम्मू

स्नातक - सरकारी मौलाना आजाद स्मारक महाविद्यालय विक्रम चौक, जम्मू

स्तानकोतर - एम. ए. हिंदी, जम्मू विश्वविद्यालय जम्मू 

शिक्षा स्नातक- संत मेला सिंह शिक्षा स्नातक महाविद्यालय, डिगि्याना जम्मू

स्तानकोतर - एम. ए. हिंदी, इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय नई दिल्ली

व्यवसाय- द पाॅथसीकर्स इंटरनेशनल स्कूल रामगढ़ , सांबा (जम्मू-कश्मीर) में हिंदी अध्यापक कार्यरत 

लेखन की शुरुआत - 2014 से 

संस्थापक क़लम की ताक़त साहित्यिक संस्थान भारत

अध्यक्ष संस्थापक - रूहानी उपदेश साहित्यिक संस्थान जम्मू कश्मीर 

ई सम्मान पत्र- विभिन्न पटलों से 700 से ऊपर ई सम्मान पत्र मिल चुके हैं । 

विधा-पद्य - छंदमुक्तकविता । 

गद्य- कहानी, संस्मरण, लघुकथा, कथा आदि । 

साहित्य में अन्य विधाओं को सीखने का प्रयास कर रहा हूँ।

ईमेल -amarjeetsingj1012@gmail.com

फेसबुक -https://www.facebook.com/profile.php?id=100050081662446

मोबाईल नंबर- 9596093436


















शनिवार, 3 अप्रैल 2021

04/04/2021

 नमन मंच 🙏🙏🙏 सभी रचनाकारों को मेरा विनम्र प्रणाम

#साहित्य संगम संस्थान जम्मू कश्मीर इकाई #दिनांक-04.04.2021  

#दिन- रविवार

# विषय प्रदाता /प्रवर्तक-आ.अमरजीत सिंह

#विषय - स्वैच्छिक - 

# विधा - स्वैच्छिक

आइये आज रविवार की छुट्टी का आनंद मानते है और अपनी कलम को विषय और विधा के बंधन से मुक्त रखते हुए अपने हृदय के भावों को शब्दों के रूप में लिखकर पटल को सजाते है।  नोट-अपनी रचना पोस्ट करने के साथ - साथ साथी रचनाकारों की रचना पढ़कर टिप्पणी अवश्य दें । 

अपनी रचना विषय पोस्टर के कमेंट्स बॉक्स में ही प्रेषित करें।         # का प्रयोग अवश्य करें ।

आपका ही

अमरजीत सिंह




देश का चौकीदार

नमन मंच 🙏🙏🙏
#हिंददेश परिवार महाराष्ट्र इकाई
दिनांक - 09/06/2021
दिन - शनिवार
विषय - देशप्रेम
 विधा -  स्वैच्छिक

देश की आन
शान के मान 
शान के
अभिमान के
हम है चौकीदार
इसकी आन की खातिर
मर मिटेंगे
हर साँस में अपनी
भारत माता की जय लिखेंगे
हिम्मत नहीं किसी में
जो मेरे देश को, 
तीखी नजर से देखे
हम देश की सुरक्षा के लिए
प्राण हथेली पर लेकर चलते
हम भारत के चौकीदार
हमेशा देश के लिए
जीते मरते हैं । 

स्वरचित एवं मौलिक
 अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर, जम्मू

सामाजिक न्याय

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक - 03/04/2021

# दिन - शनिवार

# विषय - सामाजिक न्याय

# विधा - छंदमुक्त कविता

सब ओर अन्याय का बोलबाला

पीसता वही है, 

जो किस्मत का मारा है

न्याय के लिए, 

गरीब गुहार लगता है

वकीलों की ,

फीस भर भर कर

ईमानदारी से कमाया पैसा, 

व्यर्थ गंवाता है

न्याय मिलने पर ,

रोता चिल्लाता है

सामाजिक न्याय की रीढ़

सब सीधी होगी

 जब न्याय करना ही 

धर्म बन जाएगा

तब ही हर किसी को, 

न्याय मिल पाएगा


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर




किसान की हालत

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक - 29/04/2021

# दिन - बृहस्पतिवार

# विषय - किसान की मजबूरी

# विधा -  स्वैच्छिक ( गद्य- लघुकथा) 

भानू कुछ सोच में डूबा बैठा था तभी अचानक उसका पडोसी मानू आ गया, मानू ने भानू से पूछा ,भाई किस सोच में डूबे हो? क्या बात है ?मैं तुम्हें बहुत दिनों से देख रहा हूँ तुम कुछ परेशान से दिखाई दे रहे हो ,मुझे बताओ तुम्हारी परेशानी कारण क्या है? 

भानू बोला भाई क्या बताऊँ शाह जी से बहुत सारा धन ब्याज पर ले लिया था, लेकिन अब धन वापिस कैसे करूँ खेतों से जो कमाई आती है उससे घर का निर्वाह करना भी मुश्किल हो रहा है। बेटियां भी जवान हो गई है उनके भी हाथ पीले करने है । अब शाह जी भी पैसे मांग रहे है और धमका रहे हैं कि अगर तुमने मेरे पैसे जल्दी नहीं लौटाया तो तुम्हारे खेतों पर कब्जा कर लूगां

इसी चिंता से कई दिनों से चैन से सो नहीं पाया। अगर सरकार हम किसानों को फसलों के उचित दाम दिलवा देती तो हमारी यह हालत न होती न ही कोई किसान कर्जदार होता न ही उसको आत्महत्या करने की आवश्यकता पड़ती । देश आजाद हो गया लेकिन किसान आज भी गुलामों जैसी जिंदगी व्यतीत कर रहा है अगर सरकार को किसानों के हालत सुधारने की चिंता होती तो फसलों के न्यूतम मूल्य तय न कर देते और आज हम किसान भी खुशहाली से जीवन जी रहे होते। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

 जम्मू, जम्मू कश्मीर





श्रम

# नमन मंच 🙏🙏🙏
# हिंददेश परिवार
# दिनांक - 02/05/2021
# दिन - रविवार
# विषय - 
# विधा -  स्वतंत्र ( छंदमुक्त कविता) 

तदबीर से तकदीर बदलती , 
परिश्रम से परीक्षा पास होती , 
बिना मेहनत के , 
कुछ हासिल नहीं होता, 
किस्मत पर भरोसा रखनेवाला , 
अपना आप डूबोता है, 
चींटी अगर किस्मत पर करती भरोसा, 
कैसे दीवार पर चढ़ पाती, 
ना दूसरों के लिए मिसाल बन पाती, 
परिश्रमी ही मंजिल को पाता, 
राह की कठिनाईयों दूर कर , 
नया मार्ग बनाता। 

स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू , जम्मू कश्मीर


शुक्रवार, 2 अप्रैल 2021

बदलता इतिहास

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान गुजरात इकाई

# दिनांक - 02/04/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय - बदलता इतिहास

# विधा - स्वतंत्र ( छंदमुक्त कविता) 

वीर शूरवीर ही बदलता इतिहास को

साहस , आत्माविश्वास का उपदेश देता संसार को

हर मुश्किल को सीख समझता

इतिहास को बदलने की

गुलामी को आजादी में बदलता

अपने बुलंद हौसलों से

हर कुर्बानी करता है

इतिहास के बदलाव के लिए

दिन रात कर्म अपना 

निष्ठा से करता रहता

समाज के बदलाव के लिए

इतिहास हमेशा बदलता रहा 

वीरों के बलिदान से। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर



वृक्षारोपण

नमन मंच 🙏🙏🙏

#क़लम की ताक़त साहित्यिक समूह, भारत

दिनांक - 19/07/2021

 दिन -  सोमवार

#विषय - वृक्षारोपण

विधा - स्वैच्छिक


पेड़ पौधों का जीवन में, 

अहम स्थान, 

बिना आक्सीजन के , 

नहीं बच पाते प्राण । 

पेड़ लगाओ, 

जीवन बचाओ, 

जीवन में, 

खुशहाली लाओ । 

बचपन का पालना, 

लकड़ी से बनता, 

विद्यालय के डेस्क, 

लकड़ी से निर्मित होते। 

फल , औषधियाँ, 

पेड़ पौधों से मिलते, 

 फर्नीचर से घर, 

सुंदर लगता, 

वो भी लकड़ी से, 

 बनता । 

जीवन में लकड़ी, 

बहुत काम आती, 

जीवन के अंत , 

चिता है सजाती। 

पेड़ पौधों को, 

लगाना है जरूरी , 

इससे होगी , 

धरती माता की सजावट पूरी। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर









गजल

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#  साहित्य संगम संस्थान जम्मू कश्मीर इकाई

# दिनांक - 02/04/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय - स्वतंत्र

# विधा -  गजल

आंसूओ को पीना, बहुत मुश्किल है, 

गम को सहना भी, बनाता जिंदगी को  अविचल है । 


हर गम जिंदगी को नई सीख दे चला है, 

हर गम अब दवाई बन चला है। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू,जम्मू कश्मीर 





धैर्य/धीरज

 नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार

दिनांक - 07/07/2021

दिन - बुधवार

#विषय - धैर्य सबसे बड़ा धन है

विधा -  स्वतंत्र ( छंदमुक्त कविता) 


धैर्य से काम लो हमेशा, 

जीवन के मार्ग की विघ्न बाधाएं , 

स्वयं ही हटती जाएगी, 

तुम्हें नया रास्ता दिखाएगी, 

बिना धैर्य के जीवन जीने वाला, 

अपना समय ही व्यर्थ गंवायेगा , 

धीरज से बड़ा कोई गुण नहीं, 

धैर्यवान बनने से बड़ा कोई कर्म नहीं , 

धैर्य ही हमें मजबूत बनाता, 

कमजोरियों को दूर करने का राह बताता, 

धैर्य ही तकदीर को बदलता है, 

परिश्रम से हौंसले बुलंद करता है, 

धैर्य इंसान को सोचने समझने की सीख सीखता, 

मंजिल को हासिल करने में अपनी अहम भूमिका निभाता है । 




स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर, जम्मू






गुरुवार, 1 अप्रैल 2021

हम भारत के लोग

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#  समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक - 01/04/2021

# दिन - बृहस्पतिवार

# विषय - हम भारत के लोग

# शीर्षक - 

# विधा -  छंदमुक्त कविता 


एक दूसरे के लिए  

जीते मरते है

देश की आन शान

बनी रहे

अपने प्राण निछावर करते

हम भारत के लोग। 

गिले शिकवे 

दिलों से हटाकर

हर त्यौहार 

मिलकर मनाते है

हम भारत के लोग । 

धर्म हमारे 

अलग अलग

फिर भी 

प्रेम से रहते हैं

हम भारत के लोग। 

तरह तरह की

भाषा बोलते

हर शब्द से 

मिठास घोलते

हम भारत के लोग। 

शांति के

हम पूजारी

अहिंसा से 

करते प्यार

हम भारत के लोग । 

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू




समझौता

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#  कलमकार  कुम्भ

# दिनांक - 01/04/2021

# दिन - बृहस्पतिवार

# विषय - समझौता

# विधा -  छंदमुक्त कविता 

जिंदगी जीनी पड़ती है

समझौतों के साथ

हर काम बनता है

समझौतो के साथ

नहीं  तो दरारें बन जाती है

अपनों के साथ

जो समझौता करता नहीं

जीवन में कुछ नहीं कर पाता 

अपने ही अहंकार में

जीवन व्यर्थ गंवाता

समझौता जीवन में, 

हर किसी महत्व बताता

अकेले रहकर ,

कोई काम नहीं बन पाता

समझौता जीवन जीने की

नई सीख सिखाता

बिना समझौते के

जीवन का चक्र 

चल नहीं पाता। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू


रंग रसिया

  नमन मंच 🙏🙏🙏

#  कलम✍ बोलती है" साहित्य मंच"

# दिनांक - 01/04/2021

# दिन - बृहस्पतिवार

# विषय - रंग रसिया

# शीर्षक - 

# विधा - छंदमुक्त कविता

ओ रंग रसिया, ओ रंग रसिया, 

मोहे प्रेम रंग में रंग दो, 

राधा के संग खेलत होली, 

करते हो आंख मिचोली, 

प्रेम रंग मोहे गहरा लगाओ, 

रोम रोम में तेरा, 

नाम बस जाए, 

तेरे संग नाचे गाए

जन्म जन्म की, मैल गवाएं

रंग रसिया ऐसी कृपा करो

जन्म मरण का दुख हरो । 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू


मेरा गाँव

 नमन मंच🙏🙏🙏

समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान भारत 

दिनांक - 04/12/2021

दिन - शनिवार

#विषय -  मेरा  प्यारा गाँव

विधा - छंदमुक्त कविता


मेरा गांव सबसे प्यारा, 

बहती यहाँ तवी की निर्मल धारा, 

चावल राजमा , 

चाव से खाते, 

नहाने रोज कुएँ पर जाते, 

हर कोई मुझसे करता प्यार

बन गया हूँ, 

गले का हार

कामकाज की कोई कमी नहीं

खेतों में रहती हरियाली

सो जाते वहीं पर

डालकर पराली

धन संचित करने का, 

लोभ नहीं है

मिल बांटकर खाने का, 

रिवाज यही है

हर कोई खाने को कहता

दिखावे पर विश्वास नहीं करता

दुख सुख के सभी साथी

हर विपत्ति हमारे, 

आगे हारती । 



स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

 सांबा, जम्मू कश्मीर


प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...