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गुरुवार, 22 अप्रैल 2021

नादानी

 # नमन मंच🙏🙏🙏 

# साहित्य बोध 

# दिनांक- 22/04/2021

# दिन-वीरवार

#विषय- नादानी

#विधा - स्वैच्छिक

बचपन के दिन नादानी में बीते, 

न अच्छा का ज्ञान न बुरे का, 

हर पल खुशियाँ से रहा वास्ता, 

हर रिश्ता हमारे लिए बहुत प्यारा, 

हर कोई प्रेम से बुलाता, 

सारी शरारतों को नादानी बताता, 

हर नादानी सीख सिखाती, 

जीवन जीने की नई राह दिखाती, 

बचपन की नादानियों पर ,

कोई गिला शिकवा न करता, 

हर पल समझाने में रहता, 

बचपन की नादानियां को, 

हर कोई करता नजरअंदाज़, 

जवानी की नादानियां करती ,

जीवन को बर्बाद ,

न कोई समझाता , 

न समझ पाता, 

अपनी नादानियों पर , 

कोई अंकुश न लगाता, 

अपनी नादानियों पर, 

अंत में पछताता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू,जम्मू कश्मीर





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