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रविवार, 27 फ़रवरी 2022

मेरे भोले नाथ तुम्हारी सदा जय हो भोलेनाथ

 शीर्षक - मेरे भोले नाथ तुम्हारी सदा जय हो भोलेनाथ 

तुम हो अनाथों के नाथ,

रख दो सब पर अपनी कृपा का हाथ 

मेरे भोले नाथ तुम्हारी सदा............…........

जग के संकट सब हर लो 

सब ओर सुख शांति कर दो मेरी यह विनती सुन लो महाकाल

मेरे भोले नाथ तुम्हारी सदा............…........

सोमवार व्रत की महिमा अपरंपार

कर देते भक्त का क्षण में भवसागर से बेड़ा पार 

मेरे भोले नाथ तुम्हारी सदा............…........

देव देवी सब तुम को ध्याते 

तुम्हारी कृपा से ही जग में पूजे जाते

मेरे भोले नाथ तुम्हारी सदा............…........

जग के कण कण में तुम हो समाएं 

तुम्हारी महिमा को ऋषि मुनि नित गाएं 

मेरे भोले नाथ तुम्हारी सदा............…........


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला: सांबा, जम्मू कश्मीर










दादा दादी का प्यार

 शीर्षक - दादा दादी का प्यार 

विधा - आलेख( गद्य )

दादा दादी का प्यार सबको बचपन में खूब मिलता है । जब भी हमारे माता पिता हमें  हमारी गलती पर डांटने लगते हैं दादा दादी बीच में आकर हमारा बचाव करते हैं हम माता पिता की डांट से बच जाते हैं। दादा दादी की ज्ञान से भरी बातें हमेशा हमारा भविष्य में मार्गदर्शन करती है । दादा दादी का प्यार मनुष्य के लिए अनुपम उपहार है जिसकी तुलना किसी वस्तु से नहीं की जा सकती है ‌‌। 

आज के दौर में यह प्यार से भरा रिश्ता हमसे काफी दूर होता दिखाई दे रहा है ।क्योंकि आज के समय में सभी अलग अलग रहना चाहते हैं ।बूढ़े मां बाप को अपने साथ रखने के लिए कोई भी सहमति नहीं जताता है। कोई बच्चों की पढ़ाई का बहाना बनाकर मां बाप को ठोकरें खाने के लिए छोड़ देता तो कोई अपनी कामकाजी व्यस्तता का बहाना बनाता है।

इन सभी कारणों से छोटे बच्चे दादा दादी के प्यार से वंचित रह जाते हैं । दादा दादी ही अपने पोता पोतियों के पालन‌ पोषण में अपना पूरा योगदान देते हैं और उनकी भावनाओं को भलीभांति जानते भी हैं क्योंकि उनके पास बच्चों को पालन‌ का अनुभव अपने बहु बेटे से अधिक होता है।

बच्चे दादा दादी के साथ ही ज्यादा समय व्यतीत करते हैं क्योंकि उनके माता पिता घर के कामकाजों में व्यस्त रहते हैं उनके पास बच्चों के लिए अधिक समय निकाल पाना मुश्किल है। बच्चे दादा दादी के साथ ही हंसते खेलते हैं उनका प्यार पाकर हमेशा खुश रहते हैं।

स्वरचित एवं मौलिक

लेखक अमरजीत सिंह

जिला:सांबा , जम्मू कश्मीर

भोले बाबा माता पार्वती को ब्याहने चले

शीर्षक- भोले बाबा माता पार्वती को ब्याहने चले

भोले बाबा माता पार्वती को ब्याहने चले 
अपनी संगिनी बनाने चले 
भोले बाबा माता पार्वती को ब्याहने चले.....................

देवों के महादेव जिनका अनोखा है वेष 
शिव शंकर महादेवा
 भोले बाबा माता पार्वती को ब्याहने चले.....................

 तैंतीस करोड़ देवी देवता  नित शीश झुकाते
 वेद शास्त्र जिनकी महिमा है गाते 
भोले बाबा माता पार्वती को ब्याहने चले.....................

 देव , गंधर्व, भूत , प्रेत को ले चले अपनी बारात 
सब ओर है सिर्फ खुशी और उल्लास
भोले बाबा माता पार्वती को ब्याहने चले.....................

अपने तन‌‌ पर राख है लगाईं  
सबने मिलकर शिवशक्ति की महिमा गाई
भोले बाबा माता पार्वती को ब्याहने चले.....................
होकर नन्दी पर सवार  
गले में पहन‌‌ लिया बासुकी का हार
भोले बाबा माता पार्वती को ब्याहने चले.....................

माता पार्वती से मिलन की शुभघड़ी आई 
सबने मिलकर उमापति को दी है बधाई 
भोले बाबा माता पार्वती को ब्याहने चले.....................

शिव शंकर माता एक होने की रात्रि आई 
महाशिवरात्रि की सब को कोटि कोटि बधाई 
भोले बाबा माता पार्वती को ब्याहने चले.....................



स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा,  जम्मू कश्मीर




 




शनिवार, 26 फ़रवरी 2022

मेरी लाज रख लो दीनदयाल

 शीर्षक - तेरे दर पर आया हूं मेरी लाज रख लो दीनदयाल 

तेरे दर पर आया हूं मेरी लाज रख लो दीनदयाल 

मेरा कोई न सहारा राम 

तेरे दर पर आया हूं ............................

दर दर भटक कर आया हूं 

तेरी शरण मुक्ति के धाम 

तेरे दर पर आया हूं ............................

तेरा नाम अमृत को पा लूं

 विषय विकारों को तन मन से मिटा दूं 

तेरे दर पर आया हूं ............................ 

तेरे जनों की सतसंगति मैं जाऊं

अपने सगल पापों को धो आऊं

तेरे दर पर आया हूं ............................ 

तेरे बिना इस जग कोई नहीं मेरा अपना

यह सारा संसार है सपना 

तेरे दर पर आया हूं ............................


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला:  सांबा,  जम्मू कश्मीर 




गुरुवार, 24 फ़रवरी 2022

संसार में आना जाना

  नमन मंच 

 शीर्षक - संसार में आना जाना 

संसार में आना जाना ईश्वर का खेल है 

अच्छे कर्मों से होता ईश्वर से मेल हैं 

बिना ज्ञान‌ से सारा संसार जेल है 

गुरु ज्ञान ही करता ईश्वर से मेल हैं 

शरीर में जब तक ईश्वर की ज्योत है

तब तक इस काया का मोल है

बिना आत्मा के शरीर बेजान हो जाता है 

दफना ,जला दिया जाता है

जीवन‌ का मूल्य हर धर्म ग्रंथ बताता है 

बेसमझ‌‌ नादान समझ नहीं पाता हैं।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर 




मंगलवार, 22 फ़रवरी 2022

फ़रियाद

 शीर्षक - फ़रियाद 

मेरे साइयां तेरे दर पर खड़ा फ़रियाद करता हूं

मिट जाए मेरा अहम भाव‌ यही अरदास करता हूं 

दर पड़ हुए रख लें लाज यही फ़रियाद करता हूं

विकारों में फंसे मन को सतसंगति का सहारा दें 

यही मांग करता हूं तूं बन जा डोलते मन का सहारा

यही फ़रियाद मेरे सतगुरु तेरे से आठों पहर करता हूं 

कुसंग से मुझे बचा ले अपने नाम की रंगत चढ़ा दें 

अपनी याद को मेरे हृदय में बसा दें यही फ़रियाद करता हूं 

मोह माया का भ्रम मिटा दें मेरे हृदय में नाम की ज्योति जगा दे 

अपना मेरे घट में दर्शन करा दे यही फ़रियाद दिन रात करता हूं।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा,  जम्मू कश्मीर







तूं ही मेरा सहारा

 शीर्षक - तूं ही मेरा सहारा 

ओ सृष्टि कर्ता ,दुख हरता सब मनोरथ पूर्ण करने वाले 

सतगुरु परमेश्वर तूं ही मेरा सहारा

तूं लगता मुझ को सबसे प्यारा है 

ओ सृष्टि कर्ता ,दुख हरता........ ... ...........

घट घट में बसने वाले हर दिल की जाने वाले

हमारा रिश्ता तेरे से सबसे निराला

तेरे हुक्म में चलता ब्रह्मांड सारा है 

ओ सृष्टि कर्ता ,दुख हरता........ ... ...........

तेरे खेल में खेलता जग सारा 

प्रेम रंग में रंगा गीत  गाता 

तूं ही तो सिरजनहार हमारा

ओ सृष्टि कर्ता ,दुख हरता...........................

सारे आश्रय खत्म होने पर 

सब ओर से धक्के पड़ने पर 

एकमात्र बनता सबका तूं ही सहारा

ओ सृष्टि कर्ता ,दुख हरता........ ... ...........


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला: सांबा ,   जम्मू कश्मीर




सोमवार, 21 फ़रवरी 2022

मैं अवगुणों भरी नदी में डूबता चला जा रहूं

 नमन मंच

शीर्षक - मैं अवगुणों भरी नदी में डूबता चला जा रहूं 

मैं अवगुणों भरी नदी में डूबता चला जा रहा हूं

संसार के चकाचौंध के वश में अपनी हस्ती भुलाता जा रहा हूं 

मैं अवगुणों भरी नदी में डूबता चला जा रहूं...........

संसार में आने का मैंने मकसद भूला दिया

शरीर रचने वाला उस ईश्वर का परोपकार बिसार दिया 

मैं अवगुणों भरी नदी में डूबता चला जा रहूं...........

मोह माया की दलदल में मैं धंसता चला गया

बाहर निकालने का राह मन से भुला दिया 

मैं अवगुणों भरी नदी में डूबता चला जा रहूं..............

नेकी अच्छाई से नाता मैंने रखा न कोई

बेईमानी, खुदगर्जी को अपना स्वभाव बना लिया 

मैं अवगुणों भरी नदी में डूबता चला जा रहूं............

दोषों को दूसरे में देखने का आंखों पर चश्मा लगा लिया 

अपने आप को अच्छा दिखाने के लिए भक्ति को भी पाखंड बना दिया 

मैं अवगुणों भरी नदी में डूबता चला जा रहूं...........


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जिला: सांबा,   जम्मू कश्मीर 








रविवार, 20 फ़रवरी 2022

कर्मों का भुगतान

 शीर्षक - कर्मों का भुगतान 

कर्मों का भुगतान तुझे ही करना 

याद रख बंदे एक दिन तूने मरना है 

कर्मों का भुगतान तुझे ही करना .................

झूठे बोलकर जो जुबां गंदा को करता है

लोगों की निंदा चुगली का भार क्यों अपने सिर पर धरता है

कर्मों का भुगतान तुझे ही करना.................

पराई बहन‌ बेटी पर बुरी नज़र रखता है 

मन के कहें में आकर अपना चरित्र भ्रष्ट करता है 

कर्मों का भुगतान तुझे ही करना ................

झूठ बेईमानी फरेब से पैसा कमाता है

याद रख पगले कुछ भी साथ नहीं जाता है

कर्मों का भुगतान तुझे ही करना.............


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला- सांबा,  जम्मू कश्मीर









शनिवार, 19 फ़रवरी 2022

मेहनत करने वाले ही कामयाबियों को पाते हैं

 शीर्षक - कामयाबी 

मेहनत करने वाले ही कामयाबियों को पाते हैं

सपने नींद में देखने वाले ख्याली पुलाव बनातें हैं 

मेहनत ही कामयाबी की ओर बढ़ाती है

मंजिल को पाने की राह दिखलाती है

मेहनत करने वाले ही  रास्ते की विघ्न बाधाओं को हटा पाते है 

 कांटे भरे राहों पर चलकर सफलता को अपने निकट बुलाते हैं 

लक्ष्य की प्राप्ति करने से कोई उनको रोक नहीं सकता है

दिल से मेहनत करने वाले की ईश्वर भी सहायता करता है

मेहनत ही इंसान को बुलंदियों को छूने की ताक़त देती है 

हर बुलंदी  मेहनत की शक्ति बयान करती है।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला सांबा, जम्मू कश्मीर

 




आत्मा की आवाज

 शीर्षक - आत्मा की आवाज 

आत्मा की आवाज को कभी अनसुना मत करना 

नहीं तो पड़ेगा पूरी उम्र भुगतना 

आत्मा की आवाज को कभी........…

आत्मा की आवाज सही राह दिखलाती

भूले भटके मन‌ में सि्थरता लाती है 

आत्मा की आवाज को कभी............

क्या तेरे लिए अच्छा क्या बुरा 

इसका ज्ञान कराती है

आत्मा की आवाज को कभी............

तेरी दुविधा को दूर भगाती है 

अंधेरे में रोशनी की नई किरण दिखाती है 

आत्मा की आवाज को कभी.............

विषय विकारों में फंसने का नुक़सान बताती हैं

संयम से जीवन जीने का राह दिखलाती है

आत्मा की आवाज को कभी............... 

आत्मा की आवाज मनुष्य को जीवन‌ का मनोरथ बतलाती है

श्वासों को सफल करने की विधि ईश्वर स्तुति को बताती है

आत्मा की आवाज को कभी...................


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला -  सांबा , जम्मू कश्मीर




छत्रपति शिवाजी महाराज

 शीर्षक - छत्रपति शिवाजी महाराज 

छत्रपति शिवाजी जीजाबाई शाह की संतान थे

वो भारत माता की बढ़ाने आए शान‌ थे 

मराठा साम्राज्य को स्थापित करने के लिए लड़ाइयां लड़ते थे

मुगल उनकी  वीरता बहादुरी को देखकर डरते थे 

शिवाजी युद्ध लड़ाइयों में खूब पराक्रम दिखाते थे

दुश्मनों को हराकर देश का गौरव बढ़ाते थे 

मराठों का पहला छत्रपति होने का मान‌ उन्होंने पाया था 

मराठों की शक्ति देखकर औरंगज़ेब भी घबराया था

छत्रपति शिवाजी की वीरता की गाथाएं मुगल सल्तनत भी गाती थी

ऐसे वीर योद्धा के आगे कोई सेना टिक नहीं पाती थी।

हम ऐसे वीर योद्धा की महिमा नित नित मुख से गाते हैं

उनकी जयंती पर श्रृद्धा सुमन के फूल चढ़ाते हैं।



स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा,   जम्मू कश्मीर


















बुधवार, 16 फ़रवरी 2022

गुरु रविदास जी की हम महिमा गाते हैं

 शीर्षक - गुरु रविदास जी की हम महिमा गाते हैं


 गुरु रविदास जी की हम महिमा गाते हैं 

उनका आत्मिक उपदेश  सारे जग को सुनाते हैं

गुरु रविदास जी की हम महिमा गाते हैं.............

पिता संतोख माता कलसा देवी का भाग्य जगाते है 

उनकी संतान बनकर कुल का मान‌ बढ़ाते हैं 

गुरु रविदास जी की हम महिमा गाते हैं...........

मन‌‌ चंगा कठौती में गंगा जग को उपदेश सुनाते हैं

कठौती गंगा में प्रकट कर भक्ति की शक्ति का चमत्कार दिखलाते हैं

गुरु रविदास जी की हम महिमा गाते हैं....................

जात पात के भ्रम को सबके दिलों से मिटाते हैं

कर्मों से मनुष्य महान बनता सबको सिखलाते है

गुरु रविदास जी की हम महिमा गाते हैं......….......

अज्ञानता का अंधकार अपनी पवित्र वाणी से मिटाते हैं 

अपने पावन‌ उपदेशों से ईश्वर को पाने का राह दिखलाते हैं

गुरु रविदास जी की हम महिमा गाते हैं..….................



स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर







सोमवार, 14 फ़रवरी 2022

परम पारस गुरु रविदास जी

 शीर्षक - गुरु रविदास जी 

गुरु रविदास जी को नमन करता हूं बारंबार

सतगुरु तेरी वाणी ने कोटि-कोटि पापियों का ,

क्षण में किया उद्धार 

गुरु रविदास जी को.........…........

गुरु रामानंद जी से नाम दीक्षा ली,

 नाम का आठों पहर किया अभ्यास 

नाम का प्रकाश चार दिशाओं में फैल रहा

 ऐसे महान संत गुरु रविदास 

गुरु रविदास जी को.........…........

संसार को नश्वर मानकर ,

मोह-माया का किया त्याग 

अंतर हृदय में ही पा लिया,

 प्रभु का प्रेम रस अपार

गुरु रविदास जी को.........…........

गृहस्थ जीवन में रहकर भजन कीर्तन करो 

सबसे करो प्रेम प्यार

इस जग में कोई छोटा बड़ा नहीं 

सब है एक ईश्वर की संतान

गुरु रविदास जी को.....................

अभिमान से हमेशा दूर रहें 

करता समस्त पुण्यों का नाश 

अमूल्य उपदेश गुरु रविदास 

करता है संसार सागर से बेड़ा पार।

गुरु रविदास जी को.........…........


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर






मन को भी जीत ले

 शीर्षक - मन को भी जीत ले

जग  जीतने को चला रे 

मन को भी जीत ले 

जग जीतने को.........

जो विषय विकारों में फंसा रे 

उस मनचले को सतगुरु की सीख दे 

जग जीतने को ..........…

सत्संग में प्रभु प्रेम के गीत गा ले

अपने मन को सतसंगति का रंग लगा रे 

जग जीतने को..........

मन पक्षी को सही दिशा में जाना सीखा दे 

मन के सब भ्रम सत्संग में मिटा ले 

जग जीतने को.............. 

दुनिया के खेल तमाशे को समझ रे 

मायाजाल से मन को निकाल लें 

जग जीतने को.........….... 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा,  जम्मू कश्मीर












गुरु हरराय दयासागर

 शीर्षक - गुरु हरराय दयासागर

गुरु हरराय दयासागर पुरुष महान  

बाबा गुरदिता माता निहाल कौर की होनहार संतान

नाम रस में हमेशा रहते मगन 

ऐसी लगी उनको ईश्वर से लग्न

दया भाव है गुरु हरराय जी का गहना

सबको सिखाते ईश्वर के हुक्म में रहना

दुश्मन पर भी दया दिखाना 

परिपूर्ण होते हुए भी विनम्रता में रहना

पशु पक्षियों पर  भी दयासागर मेहरबान

सतगुरु हरराय जी के गुण गाता सगल ज़हान।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा ,  जम्मू कश्मीर


 



रविवार, 13 फ़रवरी 2022

चलो मतदान करते हैं

 शीर्षक - चलो मतदान करते हैं  

परिवर्तन करने को आगे बढ़ते हैं

देश के विकास के लिए हम भी कुछ करते हैं

अच्छा सेवादार  चुनने का काम करते हैं

देश की खुशहाली के लिए चलो.................

सत्ता के लोभियों को आईना दिखाते हैं

झूठे वादे करने वाले को देश के गद्दारों को 

बाहर का रास्ता दिखाते हैं 

देश की खुशहाली के लिए चलो..................

जाति ,धर्म ,भाषा के नाम पर वोट मांगने वालों को

कुर्सी से प्यार करने वाले को 

समाज में गंदगी फैलाने वाले सफेद पोशो से सावधान करते हैं 

देश की खुशहाली के लिए चलो .......…........

वोट का महत्व सबको समझाते है 

अच्छा नेता चुनने का अवसर पांच साल बाद पाते हैं

क्यों झूठे वादे वालों क्यों हम यकीन कर जाते हैं

देश की खुशहाली के लिए चलो ......….............


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर 

9596093436









अमूल्य जीवन

 शीर्षक - अमूल्य जीवन 

हीरे जैसा अनमोल यह जीवन, क्यों व्यर्थ गंवाता है

अवसर बीत जाने पर हाथ मलता रह जाता है

रात दिन झूठ जो तूं कमाता है 

दुख दर्द से क्यों घबराता है 

बुरे कर्मों का फल बुरा ही होता हैं

 यही  विधान विधाता बनाता है

काम ,क्रोध ,लोभ के जाल में फंसा मन ईश्वर से दूर होता जाता

अंत काल में बहुत पछताता है 

शरीर के रस तुझे बहुत भाते हैं

ये रस पगले तेरी दूरी प्रभु स्वामी से बढ़ाते है 

बुरी संगति नादान नरक ले जाती है

अशुभ गुणों की पटोली यमदूतों से दंड दिलवाती है 

नरक की घोर सज़ाए न झेली जाती है

अमूल्य मानस जन्म को व्यर्थ खोने की यादें तब बहुत रुलाती है।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर










शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2022

हृदय का बसंत

 नमन मंच

शीर्षक - हृदय का बसंत 

सतगुरू मेरे हृदय का बसंत सदाबहार बन‌ जाए 

कोटि पतझड़ आने पर भी न मुर्झाए 

दया भाव का फूल  सदा खिल खिलाए

जात पात धर्म का भेद मेरे हृदय में न आए।

 हवा की तरह हर जगह जाऊं

फूलों की खुशबू जैसे सबकी सांसों में समाऊं 

कण कण में बसने वाले भगवान का दर्शन हृदय में पाऊं

अपने शुभ गुणों से बसंत ऋतु जैसी बहार संसार में लाऊं।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर



बुधवार, 9 फ़रवरी 2022

कर्मों का लेखा जोखा

 शीर्षक - कर्मों का लेखा जोखा 

कर्मों का लेखा जोखा जीवन के अंत में होना है

नासमझ इंसान तूने अपने बुरे  कर्मों याद कर रोना है 

क्या मुख लेकर ईश्वर के द्वार जाएगा 

 बुरे कर्मों का भार तुझ से उठाया न जाएगा 

दया भाव तुझे देवता बनाएगा 

ईश्वर के द्वार पर सम्मान बहुत पाएगा 

भूखे प्यासे की सेवा तेरे काम आएगी 

लोक परलोक में तेरा मान सम्मान बढ़ाएगी

जात पात का भ्रम ईश्वर से दूर ले जायेगा 

अपने हृदय में परमात्मा का दर्शन कैसे पायेगा 

साधु संगति बिना कैसे जीवन की सच्चाई जान पाएगा

झूठी माया में फंसकर अमूल्य जीवन व्यर्थ गंवायेगा।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

सांबा , जम्मू कश्मीर










मंगलवार, 8 फ़रवरी 2022

लता मंगेशकर

 शीर्षक - लता मंगेशकर 

माता सरस्वती की पुत्री तूं है भारत का  मान ,

मधुर आवाज से बनाई जिसने अपनी पहचान ।

जादुई आवाज ने सबको दिवाना बनाया,

स्वरकोकिला का नया नाम जग से पाया।

लता जी ने संगीत जगत में अपना नाम बनाया,

अपनी आवाज के बलबूते पर हर मुकाम को पाया।

भारतपुत्री का जाना सबकी आंखों से आंसू बहाया गया,

मधुर मधुर स्वर‌ उनका अमरता पा गया।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर

















सोमवार, 7 फ़रवरी 2022

छोटी सी आशा

 शीर्षक - छोटी सी आशा 

  छोटी सी आशा से जीवन आगे बढता है 

कोशिशें करने से समस्याओं का हल निकलता है 

     हर समस्या से लड़ना इंसान को मजबूत बनाता है

      मजबूत इरादों वाला ही जीवन में सफलता पाता है 

छोटी सी आशा जीवन को रंग जाती है 

सोये हुए अरमानों को दुबारा जगाती हैं

      कुछ कर गुजरने की हिम्मत बढ़ाती है

      आशा का दामन आशावादी नहीं छोड़ता है

 मुश्किलों से लड़कर ही मंजिल पर पहुंचने का रास्ता बनता है

छोटी सी आशा इंसान को बुलंदियों तक पहुंचाती हैं

   रूकावटों को जीवन से हटाने की शक्ति जगाती हैं

   आशा जीवन का अभिन्न अंग कहलाती है

    जीवन में आने कठिनाइयों से जूझने की हिम्मत बढ़ाती हैं।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर












शनिवार, 5 फ़रवरी 2022

बाबा दीप सिंह जी शहीद

 शीर्षक - बाबा दीप सिंह जी शहीद

बाबा दीप सिंह जी ने गुरु शब्द को सांस सांस कमाया

गुरसिख होने का हर कर्तव्य निभाया 

गुरु गोविंद सिंह जी महाराज से बहुत प्यार पाया

सतगुरु की सेवा को ही जीवन का उद्देश्य बनाया

गुरु  महाराज जी ने बाबा दीप सिंह जी को दमदमा साहिब का जत्थेदार बनाया

गुरु ग्रंथ साहिब जी के चार हस्तलिखित स्वरूपों को लिखवाया 

बाबा दीप सिंह जी ने विनम्रता को अपना गहना बनाया

अपनी निष्काम भाव सेवा से ईश्वर का हृदय में पाया

अब्दाली ने जब जुल्म कमाया अमृतसर सरोवर को मिट्टी से भरवाया

बाबा दीप सिंह जी खंडा उठाया पापियों को दंड देने का बेड़ा उठाया

 बाबा दीप सिंह का शीश युद्ध करते  धड़ से अलग हुआ  

बाबा दीप सिंह जी ने शीश हथेली पर रखकर युद्ध लड़ा 

हर अधर्मी को उसके पाप का दंड दिया 

अपना पावन‌ शीश गुरु रामदास जी के चरणों में समर्पित किया।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला -  सांबा , जम्मू कश्मीर





शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2022

कुर्सी की चाहत

 शीर्षक - कुर्सी की चाहत 

कुर्सी की चाहत नेताओं को नौटंकी बाज बनाती है

बिना साज बाजे के नाच नचाती  है

 जनता भी बेचारी अपना अमूल्य वोट गंवाती है।

हर कोई नेता अपना उल्लू सीधा करता है

अपनी इच्छा को पूरा करने का हर हथकंडा अपनाता है

अपने पखंड से जनता का हितकारी बनने की नौटंकी रचता है।

कुर्सी की चाहत नेताओं को नौटंकी बाज बनाती है

मदारी के बंदर जैसा नाच नचाती हैं

हर किसी को भ्रमजाल में फंसाती है।

हर नेता जाति, धर्म , भाषा को माध्यम बनाता है

जनता की भावनाओं का ग़लत फायदा उठाता है

अपनी कुर्सी की खातिर सबको बेबकूफ बनाता है।

नेताओं की कुर्सी की चाहत लोकतंत्र की मजबूती घटाती है

जनता भी बेचारी मजबूर सी बनती जाती है

अपना अमूल्य वोट खोकर सदा पछताती रहती है।

शराब , पैसे से  वोट हमेशा खरीदा जाता है 

कुर्सी पाने के लिए चोर मूचका यह तरीका भी अपनाता हैं

अपनी राजनीति को चमकाने के लिए देश हित भूल जाता हैं।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर









बुधवार, 2 फ़रवरी 2022

बसंत ऋतु

 शीर्षक - बसंत आया सखी

बसंत आया सखी हरियाली खुशहाली का  संदेश लाया

सूखे हुए पेड़ों पर नवयौवन फिर से लाया

निराशा से भरे हुए हृदय में आशा की किरण लाया

ऐसा मधुर संगीत सुनाने आया 

बसंत आया सखी...............

फिर से फल फूल में नवीन जीवन‌ की शुरुआत लाया

कुदरत की सुंदरता में चार चांद लगाने आया 

पीली पीली सरसों के फूल पर सोने का पानी चढ़ाने वाला 

हर मन‌ में खुशी का एहसास करने वाला महा उत्सव आया 

बसंत आया सखी...............

कोयल जब मधुर गीत सुनाती, हर दिल में अरमान‌ भर आता

खोये हुए सपनों को पुनः पाने का एहसास कराता

जीवन‌ के पल पल में नवस्फूर्ति का नवसंदेश लाता 

हर मन‌ में नव आशा का दीपक जलाता

बसंत आया सखी.....…..


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर











साधु-संत का संग

 साधु-संत का संग ,मिटाता कोटि पाप  वचन मान भक्ति कर, मिट जाता आपा भाव