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रविवार, 29 मई 2022

नशा मुक्ति

 शीर्षक - नशा मुक्ति 

चलो सारे संसार को नशा मुक्त बनाते हैं

सबको नशा से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में बताते हैं

संत महापुरुष भी अपनी वाणी में नशा से बचने के लिए कहते हैं 

नशा करने से लोक परलोक बिगड़ जाता है सबको सच्चाई बयान करते हैं

नशा घर गृहस्थी की तबाही का कारण बनता है 

करोड़ों लोगों का घर इसी कारण उजड़ता है 

लाखों बच्चे अनाथ हो जाते हैं

उनके ऊंचे उठने के सपने धरे धरे के रह जाते हैं

मां बाप का सहारा बनने वाला नशे की बलि चढ़ जाता है 

अपने मां बाप को रोता बिलखता छोड़ जाता हैं

सरकार को कुंभकर्णी नींद से जगाते हैं

नशा बेचने बनाने वाली फैक्ट्रियों में ताला लगाता है 

जब नशा बेचने वाले , बनाने वाले ही खत्म हो जाएंगे 

तब ही हम संसार को हम नशा मुक्त बना पाएंगे।

चलो सबको नशे की लत से बचाते हैं

कलमकार होने का धर्म निभाते हैं ।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला -सांबा, जम्मू कश्मीर


शुक्रवार, 27 मई 2022

मेहनत रंग लाती है

 शीर्षक - मेहनत रंग लाती है

परिश्रम पर विश्वास करने वालो की 

एकाग्रता से कार्य करने वालो की 

जगाती हुई आंखों से सपने देखने वालो 

एक दिन मेहनत रंग लाती है।

मुश्किलों का हॅंस कर सामना करने वालो की 

कठिनाइयों से न घबराने वालो की 

लक्ष्य की ओर ही ध्यान केंद्रित करने वालो की 

एक दिन मेहनत रंग लाती है।

दिल में कुछ पाने की चाह रखने वालो की 

अपने मार्ग से न भटकने वालो की 

दुनिया की बातों की परवाह न करने वालो की 

एक दिन मेहनत रंग लाती है।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर








गुरुवार, 26 मई 2022

मानव तन

 शीर्षक - मानव तन 

मानव तन प्रभु का अमूल्य उपहार 

नासमझी में समय न करो बर्बाद 

मानव तन देव भी चाहते 

पर हासिल नहीं कर पाते 

मानव तन प्रभु मंदिर कहलाता

पावन‌ पवित्र माना जाता

मानव तन में रहकर ही प्रभु भक्ति होती 

अवसर खोकर चौरासी लाख योनियां भोगनी पड़ती 

जैसे पत्ता पेड़ से गिरकर दुबारा लग नहीं पाता 

वैसे मानव तन अवसर बीतने पर नाश हो जाता

मानव‌ तन में रहकर परोपकार कमाते हैं

दुनिया की सेवा कमाकर इसे सफल बनाते हैं ।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा,जम्मू कश्मीर












सोमवार, 23 मई 2022

मेरा गुरु मेरा परमेश्वर है

 शीर्षक - मेरा गुरु मेरा परमेश्वर है 

मेरा गुरु मेरा परमेश्वर है

सतगुरु तूं ही सारे जग का ज्ञानेश्वर है 

सब जीवों पर तुम दया दिखाते 

सब पापों को मूल से मिटाते

वैर विरोध करना मेरे दयालु सतगुरु को न भाता

तुम्हारी महिमा को जग का जन जन गाता

अवगुणों को हृदय से दूर करते

मोह माया के खोल देते सब पर्दे 

प्रभु सिमरन की विधि बताते

अंतर तीर्थ में स्नान करना सिखाते 

प्रभु की सतगुरु महिमा गाते 

सबके मन‌ में प्रभु भक्ति की भूख लगाते 

सतगुरु जी की सतसंगति मुक्ति द्वार 

भवसागर से हो जाता बेड़ा पार ।



स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा , जम्मू कश्मीर




रविवार, 15 मई 2022

गुरु अमरदास जी

शीर्षक - गुरु अमरदास जी महाराज

 गुरु अमरदास जी बहुत महान 

महिमा गाता सारा जहान 

मानवता की सेवा सतगुरु जी ने कमाई 

जात पात की मिटा दी लड़ाई

एक पंक्ति में लंगर खाने की मर्यादा बनाई 

ऊंच नीच की सबके अंदर से दीवार गिराई

सती प्रथा के खिलाफ सतगुरु जी ने अपनी आवाज को उठाया

नारी को जीने का हक दिलाया 

बाउलियों का सतगुरु जी ने निर्माण करवाया 

सब जातियों के जगह से पानी पीने का हुक्म सुनाया 

गुरु अमरदास जी ने मानवता की सेवा कमाई 

महिमा गाता सारा संसारा मेरी माई।

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर





शनिवार, 14 मई 2022

ईश्वर

 शीर्षक - ईश्वर 

हे सर्वेश्वर , हे जगतेश्वर  , हे कालेश्वर 

तेरे पावन चरणों में करूं नमस्कार 

भवसागर से मेरा कर‌ दे बेड़ा पार।

हे दीनानाथ, हे दीनबंधु, हे दुखहर्ता 

ये संसार तेरी माया, मोह माया में मैंने तुझे भुलाया

मन में कैसा अंधकार छाया, माया जाल में खुद को उलझाया।

हे कृपानिधि, हे करूणानिधान,हे कृपानाथ

मुझे अपने नाम कर दो‌ दान 

आठों पहर जपता रहूं तेरा नाम 

हे दयानिधान,हे दयासागर , हे दयानिधि 

मेरे समस्त पापों करो नाश 

हृदय में दिखा दो अपना प्रकाश

हे पापनाशक, हे अवगुणखंडन , हे गुणीनिधान 

कण कण में अपना रूप दिखाओ 

मन पर पड़ा माया का  जाल हटाओ।



स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर






शुक्रवार, 13 मई 2022

नियति

         नियति 


नियति ने कैसा खेल रचाया 
इंसा को इंसा‌ का दुश्मन बनाया 
जात -पात  का भ्रमजाल फैलाया 
सब ओर अज्ञान का अंधकार छाया

स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह 
सांबा, जम्मू कश्मीर


गुरुवार, 12 मई 2022

इच्छा

                  इच्छा

मेरी इच्छा प्रभु तेरे चरणों की बन धूल जाऊं 

आठों पहर तेरे नाम की महिमा गाऊं 

नाम रस का करूं आहार 

प्रभु तेरे गुण बेअंत अपरंपार।

         


मंगलवार, 10 मई 2022

कुछ तुम बदलो, कुछ हम बदलें

 शीर्षक -  कुछ तुम बदलो, कुछ हम बदलें 

मिलकर जीवन की मुश्किलों को सुलझाते है

एक दूसरे के साथ होने का एहसास कराते हैं 

मेरे मनमीत हंसते हंसते जीवन बिताते हैं

कुछ तुम बदलो कुछ हम बदलें.........

घर का कोना कोना प्रेम प्यार से महकाते हैं

नफ़रत को दिल के आंगन से हटाते हैं 

प्रेम का फूल हृदय में खिलाते हैं

कुछ तुम बदलो कुछ हम बदलें............

मन‌ से गिले शिकवों को भूलाते है

एक दूसरे की भावनाओं को समझते समझाते हैं

जिंदगी भर एक दूसरे का सुख दुख में साथ निभाते हैं

कुछ तुम बदलो कुछ हम बदलें..........

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर



सब्र का फल मीठा होता है

 शीर्षक - सब्र का फल मीठा होता है

सब्र से काम करने वाला 

फल मीठा पाता 

सब्र, धैर्य खोकर इंसान हमेशा पछताता 

सब्र रखकर ही हम सोच पाते हैं

नई बुलंदियों को छूने का राह ढूंढ पाते हैं

भक्तजन सब्र रखकर ही ईश्वर को पाते हैं

हर समय अपने अराध्य का ध्यान लगाते हैं

विद्यार्थी भी सब्र रखकर मेहनत करता है 

तब ही परीक्षा में परिणाम में अव्वल बनता है

ऐवरेस्ट पर चढ़ने वाले भी सब्र रखते हैं

बेसब्री से पर्वत पर चढ़ने वाले गिरकर मरते हैं 

सब्र करने वाला हमेशा मीठा फल पाता है 

अपने इसी शुभ गुण से जीवन सुखमय बिताता है।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा,  जम्मू कश्मीर

मंगलवार, 3 मई 2022

हम डगर के दो मुसाफिर

 शीर्षक : हम डगर के दो मुसाफिर

हर मुश्किल में साथ निभाना

कभी अकेला छोड़कर मत जाना 

हर ग़म में भी मुस्काना

हम डगर के दो मुसाफिर।।

सात जन्मों का हमारा नाता 

हर पल को खुशी खुशी से जीना चाहता 

एक दूसरे के दिल की बात हमेशा समझ जाते

हम डगर के दो मुसाफिर।।

तेरा साथ मेरी हिम्मत बढ़ाता 

हर मुश्किल से मैं लड़ जाता 

तेरी तारीफ के गीत मेरा दिल है गाता

हम डगर के दो मुसाफिर।।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर




सोमवार, 2 मई 2022

प्रभु प्रेम का सागर है

 शीर्षक - प्रभु प्रेम का सागर है

प्रभु प्रेम का सागर है

तेरा साथ मेरा जन्मों का नाता है 

तेरा मेरा रिश्ता जगत में निराला है

प्रभु प्रेम का सागर है.............

माता के गर्भ में तूं ही रक्षा करता है 

मेरे सब दुख तूं ही हरता है

प्रभु प्रेम का सागर है...............

मेरी हर ग़लती को नजरंदाज करता है

जीवन में सुधरने का हर  मौका तूं ही देता है

प्रभु प्रेम का सागर है...............

जब मैं हिम्मत हार जाता हूं 

दिलासा तूं ही देता है

प्रभु प्रेम का सागर है..............

प्रभु मुझे भी प्रेम करना सीखा देता 

मुझ पापी को अपने में मिला लेता 

प्रभु प्रेम का सागर है.............. 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर




रविवार, 1 मई 2022

मजदूर

 शीर्षक  मजदूर

मजदूर ही सर्दी गर्मी को शरीर पर सहता 

मेहनत करने से कभी नहीं डरता 

ईंट पत्थर कंकड़ों को जोड़कर मकान बनाता 

अपनी मेहनत की कमाकर खाता 

ठेकेदार मजदूर का हक का खा जाते 

मजदूर के बच्चे दो पहर की रोटी भी नहीं खा पाते  

अमीर लोग मजदूरों से नफ़रत क्यों करते 

मजदूर की मेहनत से ही अपने  घरों में   पैसा भरते 

मजदूर दिवस हर हम वर्ष मनाते 

लेकिन मजदूर की मजबूरियों को कम नहीं कर पाते 

मजदूर दिवस मनाना तभी सार्थक बन जाता 

मजदूर को भी मेहनत का पूरा फल मिल पाता 

आओ मिलकर मजदूर के हक दिलाते 

अपनी कलम से सरकार को जगाते।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जिला -  सांबा,  जम्मू कश्मीर



प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...