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शनिवार, 29 जुलाई 2023

घड़ी घड़ी का लेखा देना

 #घड़ी घड़ी का लेखा देना 

घड़ी घड़ी का लेखा देना , 

कर्मों का फल खुद ही भुगतना पड़ना 

ऐसा क्यों ही करना 

जीवन को दुखों से भरना 

बुरे कर्म  के कारण शीश झुकाना 

आवागमन के चक्र में फंस जाना 

रचनाकर को स्मृति से भुलाना 

रचना के भ्रमजाल में जीवन बिताना 

कर्मों ने है रुलाने 

मन मेरे तूने बहुत है पछताना 

जीवन है सिर्फ आना जाना 

मन को अब यही है समझाना

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा, जम्मू-कश्मीर 


शुक्रवार, 28 जुलाई 2023

नाम दौलत कमा लें बंदे

 #नाम दौलत कमा लें बंदे 

नाम दौलत कमा लें बंदे ,

यही जीवन का सार ।

विषय विकारों भोगों में फंसना, 

 करता है जीवन बेकार ।

गुरु परमेश्वर को बने ले अपना  यार,

 बाकी सब तो है सिर्फ सपना।

आठों पहर एक को जपना ,

 भवसागर से बेडा पार लगा ले अपना ।

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा , जम्मू-कश्मीर 


शुक्रवार, 21 जुलाई 2023

पावस ॠतु

 #पावस ॠतु

साजन अब घर लौट आना 

मोहे अब बिरहा में मत जलाना 

साजन अब घर लौट आना ..................

सावन की बरसात में मेरे नयन की प्यास बुझाना 

मेरे हृदय में सदा के लिए बस जाना 

साजन अब घर लौट आना .................. 

मेरा तेरे बिना नहीं कोई ठिकाना 

मेरे भावों की तूँ ही कीमत लगाना

साजन अब घर लौट आना .................. 

साजन मेरी जन्मों जन्मों की प्यास बुझाना 

प्रेम रस मेरे रोम रोम में भर जाना

साजन अब घर लौट आना .................. 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा,  जम्मू-कश्मीर 




गुरुवार, 13 जुलाई 2023

कलम की ताकत

 #कलम की ताकत 

सब ओर सताए जाने वालो की ढाल हूँ 

कलम नहीं मैं तलवार हूँ 

देश के जन जन की मै आवाज हूँ 

कलम नहीं मैं तलवार हूँ 

शोषण करने वालो के लिए तीखी धार हूँ मै।

कलम नहीं मैं तलवार हूँ 

मैं माँ भारती के कर कमलों का श्रृंगार हूँ 

मैं कलम नहीं मैं तलवार हूँ 

कुरीतियों का करती समूल नाश हूँ मैं

कलम नहीं मैं तलवार हूँ 

रूढ़िवादी सोच पर करती हूँ मैं बदलाव का प्रहार 

कलम नहीं मैं तलवार हूँ ।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा ,जम्मू-कश्मीर 





गुरुवार, 6 जुलाई 2023

संत कबीर साहेब महिमा

 #संत कबीर साहेब महिमा 

राम कबीरा एक है सच लिया यह जान 

सब में एक ही रम रहा सबने लिया पहचान। 

भजन बंदगी ही जीवन का एक मात्र उद्देश्य 

जात पात सब भ्रमजाल है यह कबीर का उपदेश। 

कर्म-काण्ड का तन मन से  करे त्याग 

कहे कबीर मूर्ख मानव अब तो गहरी नींद से जाग। 

ऊँच नीच का भेद सब है जग का धंधा 

सब में एक ज्योति को देखा पाता  कबीर वो नर अक्ल का अंधा।

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

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