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शनिवार, 29 जुलाई 2023

घड़ी घड़ी का लेखा देना

 #घड़ी घड़ी का लेखा देना 

घड़ी घड़ी का लेखा देना , 

कर्मों का फल खुद ही भुगतना पड़ना 

ऐसा क्यों ही करना 

जीवन को दुखों से भरना 

बुरे कर्म  के कारण शीश झुकाना 

आवागमन के चक्र में फंस जाना 

रचनाकर को स्मृति से भुलाना 

रचना के भ्रमजाल में जीवन बिताना 

कर्मों ने है रुलाने 

मन मेरे तूने बहुत है पछताना 

जीवन है सिर्फ आना जाना 

मन को अब यही है समझाना

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा, जम्मू-कश्मीर 


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