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शनिवार, 31 जुलाई 2021

कारगिल

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#भारतीय साहित्य संस्कृति

दिनांक - 31/07/2021

दिन - शनिवार

#विषय - कारगिल

विधा - छंदमुक्त कविता


कारगिल युद्ध शहीद जवानों की याद दिलाता, 

हर कोई उनकी शहादत पर नमस्तक  हो जाता, 

पाकिस्तान ने धोखे से हमारा क्षेत्र कब्जाया था, 

उग्रवादियों को वहाँ बसाया था, 

भारत के वीर जवानों ने पाकिस्तानी को वहाँ से भगाया, 

अपने क्षेत्र को उनसे मुक्त कराया, 

वीरों ने पहाड़ के बीच लड़ी लड़ाई, 

कई वीरों ने युद्ध में शहादत पाई, 

अड़े रहे डटे रहे अपने मोर्चों पर ,जीत उन्होंने पानी थी, 

उनकी कुर्बानियों ने ही लिखी ,जीत की कहानी थी, 

26 जुलाई को वीर जवानों ने जीत ली लड़ाई, 

भारत माँ के लालों ने अपने देश की शान बढ़ाई, 

पाकिस्तानियों को अब नानी याद आई, 

धोखा करने की  कीमत चुकाई, 

भारत माता के लालों की वीरता देख दुश्मन डर जाता, 

युद्ध करने से पहले हार मान जाता । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर





शुक्रवार, 30 जुलाई 2021

संदेह

 नमन मंच🙏🙏🙏 🌹🌼🌻🌺🌸💐

#नव साहित्य परिवार

दिनांक - 30-31/07/2021

दिन -  शुक्रवार से शनिवार

विषय - संदेह

विधा - छंदमुक्त कविता


संदेह रिश्तों की बुनियाद हिलाता, 

दिलों में नफरत भरता जाता, 

संदेह आपस में विश्वास की भावना घटाता, 

रिश्तों में दूरियाँ बढ़ाता, 

 संदेह करने से रिश्ते बिगड़ते जाते, 

टूटने की कगार पर आ जाते , 

संदेह की भावना से परिवार बिखर जाता, 

हर रिश्ता पराया - सा बनता जाता, 

संदेह की परत हृदय से जैसे हटती जाती, 

हर गलती का एहसास कराती, 

संदेह की जगह रिश्तों में विश्वास बनाना है, 

हर मुश्किल में एक दूसरे का साथ निभाना है। 



स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू,जम्मू कश्मीर










एहसास

  नमन मंच 🙏🙏🙏

#गूंज क़लम की झारखंड इकाई

दिनांक  - 30/07/2021

दिन - शुक्रवार

#विषय - एहसास

विधा - काव्य

हर श्वास तेरे पास होने का प्रीतम एहसास कराता, 

मेरा विश्वास तेरे लिए सदा बढ़ता जाता । 


एहसास ही रिश्ते को मजबूत बनाता, 

प्रीतम को देखने का चाह बढ़ता जाता। 


एहसास मेरी कमियाँ बताता, 

दूर करने की राह बतलाता। 


तेरे दूर होने का एहसास मुझे रुलाता, 

तेरी रहमत की कीमत बतलाता


तेरे मिलने का एहसास मुझे खुशनसीब बनाता, 

मेरे सारे दुख सुख भुलाता। 


एहसास ही इंसान को इंसान बनाता, 

मानवता के गुणों की सीख सिखाता। 


एहसास ही मनुष्य को गलतियां करने से बचाता, 

मनुष्य को देव तुल्य बनाता। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू  , जम्मू कश्मीर

गुरुवार, 29 जुलाई 2021

कैसे दिन दिखाए

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#नव साहित्य परिवार

 दिनांक - 27 - 29/07/2021

दिन- मंगलवार से गुरुवार

#विषय - कैसे दिन दिखाए

विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता) 


कोरोना ने सबको रुलाया, 

कईयों ने अपनों को गंवाया, 

कैसे भयानक दिन कोरोना ने दिखाएं, 

अपने ही बन गए पराये, 

हर कोई अपने प्राण बचाता, 

एक दूसरे से दूरी बनाता, 

इंसानियत को किया शर्मसार, 

कोई नहीं समझता दुख दर्द आज, 

भूखे प्यासे सब रो रहे हैं, 

अपने जीवन को खो रहे है, 

बेरोजगारी बन गई समस्या भारी, 

सबकी जेब अब खाली है, 

गरीबी को इसने और बढ़ाया , 

गरीबों को भूख ने बहुत रुलाया, 

कोरोना का भय सबको डराता, 

हर कोई अपना कर्तव्य भुलाता , 

हमदर्दी ना रही किसी को न किसी से, 

कैसे दिन कोरोना ने दिखाए, 

सब ओर गम ही गम नज़र आता, 

खुशी का संदेश कोई नहीं सुनाता , 

हे ईश्वर कैसा भयानक समय यह आया, 

इंसान ने मानवता के गुणों को भुलाया । 



स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर









बुधवार, 28 जुलाई 2021

उपहार

 नमन मंच 🙏🙏🙏

विषय-उपहार

पेड़ पौधे प्रकृति के अनमोल उपहार, 

इनकी करो सदा देखभाल, 

इन्होंने हमारे जीवन को सुखद बनाया, 

रोगों को कोसों दूर भगाया, 

शुद्ध हवा का  देते सबको उपहार, 

रोगों का उपचार भी इनके पास, 

जल ही जीवन कहलाता, 

हर प्राणी को यह मुफ़्त में मिल जाता, 

भूमि हमारी माता कहलाती, 

हमारा पेट भरने के लिए अनेकों दुख सह जाती, 

पहाड़ नदियाँ झरने भी प्रकृति के ही बहुमूल्य उपहार, 

जीवन में भरते खुशियाँ कई हज़ार, 

पहाड़ पर घूमने जाना सबको सुहाता, 

तन मन में नव उमंग भर जाता, 

पहाड़ धरती को सुंदर बनाते, 

उसकी सुंदरता में और निखार लाते, 

तेज हवाओं के आने पर रोक लगाते, 

सबको भारी नुकसान से बचाते, 

नदी नालो  का पानी अनाज उगाने के काम आता, 

बिजली की सुविधा घर घर पहुंचाता, 

प्रकृति के उपहारों का दिल से करो सत्कार, 

यही हमारा है प्रकृति माँ के लिए प्यार । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर






  



मिसाईल मैन ए. पी.जे.अब्दुल कलाम

  नमन मंच🙏🙏🙏 🌹🌼🌻🌺🌸💐

#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 27-28/07/2021

दिन - मंगलवार - बुधवार

विषय - मिसाईल मैन ए. पी.जे.अब्दुल कलाम

विधा - छंदमुक्त कविता


15 अक्तूबर 1931  तमिलनाडु के रामेश्वर में सौभाग्य का दिन आया, 

जैनुल्लाब्दीन और आशियम्मा को माता पिता के रूप में पाया, 

परिवार की आर्थिक स्थिति थी बहुत खराब, 

कभी न हारे अब्दुल कलाम , 

1954 में तिरुचिरापल्ली के सेंट जोसेफ़ कॉलेज से ग्रेजुएशन किया पास, 

उन्होंने जागती आंखों से देखें थे सुनहरे ख्वाब, 

1960 में  मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉज़ी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पूरी की पढ़ाई, 

उस मेहनतकश इंसान ने अपनी हिम्मत स्वयं बढ़ाई, 

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन में वैज्ञानिक के तौर पर कार्य किया, 

भारतीय सेना के लिए छोटे हेलिकॉप्टर का डिजाइन बनाया, 

बैलिस्टिक मिसाइल के विकास के लिए दिया योगदान, 

मिल गया उनको मिसाईल मैन का नया नाम, 

1998 मेंपोखरन-द्वितीय परमाणु परीक्षण में कलाम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, 

उनके कारण ही भारत की गिनती परमाणु संपन्न देश में आई, 

पदम भूषण , पदम विभूषण , भारत रत्न  जैसा सम्मान उन्होंने पाया, 

भारत के बारहवें राष्ट्रपति का पद भार संभाला, 

27 जुलाई 2015 को मिसाईल मैन ने संसार को दिया त्याग, 

भारत माता के बहुत प्यारे है वो लाल । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू  , जम्मू कश्मीर













सोमवार, 26 जुलाई 2021

महानायिका फूलन देवी

 नमन मंच🙏🙏🙏 🌹🌼🌻🌺🌸💐

#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 26/07/2021

दिन - सोमवार

विषय - महानायिका फूलन देवी

विधा - छंदमुक्त कविता


10 अगस्त 1963 को जन्मी फूलन देवी, 

शुरू से ही जातिगत भेदभाव की हुई शिकार, 

ग्यारह वर्ष में ही विवाह दी गई, 

दुराचार का हो गई शिकार, 

सुसराल छोड़ भाग आई पिता के द्वार, 

मेहनत कर खाना खाने लगी ना बनी किसी के लिए भार, 

पंद्रह वर्ष की आयु में ठाकुरों ने कुकर्म कमाया, 

बलात्कार की घटना ने फूलन देवी को दुख पहुंचाया, 

फूलन ने न्याय पाने के लिए हर द्वार खटखटाया, 

न्याय न मिलने पर फूलन ने बंदूक को उठाया, 

सन 1981 में फूलन देवी में गैंगरेप का बदला चुकाया, 

बाईस स्वर्णजाति के पुरूषों को गोलियों से उड़ाया, 

1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने फूलन देवी को आत्मसमर्पण करने के लिए कह डाला, 

विक्रम मल्लाह की मौत ने फूलन देवी को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर कर डाला

आत्मसमर्पण करने पर फूलन ने सरकार सेअपनी सब शर्तें मनवाई , 

ग्यारह वर्ष की अवधि बिना सजा के जेल में बिताई , 

समाजवादी पार्टी की सरकार ने फूलन को रिहा करवाया , 

अपनी पार्टी के टिकट पर सांसद का चुनाव है लड़ाया, 

फूलन देवी ने दो बार चुनाव में जीत पाई, 

हमेशा ही लड़ती पिछड़े वर्ग के लिए लड़ाई, 

सन 2001 में उसने अपने प्राणों का दिया बलिदान, 

जुल्म न सहने की शिक्षा दे गई सबको वो महान  । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर

फूल














रविवार, 25 जुलाई 2021

जीना जरूरी या जिंदा रहना

 नमन मंच 🙏🙏🙏

ग्वालियर साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच

दिनांक - 31/06/2021

दिन- शनिवार

विषय - स्वतंत्र

शीर्षक  - जीना जरूरी या जिंदा रहना

विधा - लघुकथा

स्नेहा और रजनी दोनों काफी अच्छी सहेलियाँ थी। दोनों एक ही गाँव में रहती थी। दोनों के विचार जीवन के बारे में अलग अलग थे । दोनों को पढाई के बाद सरकारी अस्पताल में नर्स की नौकरी मिल गई । 

स्नेहा अपनी डयूटी पूरे कर्तव्य से निभाती थी। लेकिन रजनी सिर्फ वेतन के लिए अपना कर्तव्य निभाती थी। एक दिन स्नेहा और रजनी अपनी डयूटी से छुट्टी करने के बाद घर जाने ही लगी। तभी अचानक दर्द से तड़पता  एक लड़का अपने परिवार के साथ अस्पताल के अंदर आ गया। स्नेहा ने अपना बैग एक तरफ रखा लड़के का ईलाज करना शुरू कर दिया, लेकिन रजनी नहीं रूकी वह घर चली गई। 

एक दो घंटे के बाद डॉक्टर साहब भी आ गया । इन दोनों ने मिलकर लड़के का अच्छी तरह से ईलाज किया। लड़के का दर्द कम हो गया । डॉक्टर ने स्नेहा की पीठ थपथपाई और उसके प्रमोशन के लिए प्रमोशन पत्र आगे बड़े अधिकारियों को भेज दिया । डॉक्टर साहब स्नेहा की कर्तव्य पालन की भावना से बहुत ज्यादा प्रभावित हुए। 

दूसरे दिन स्नेहा ने रजनी को समझाए कि हमें सिर्फ अपने लिए ही नहीं जीना चाहिए, बल्कि दूसरे की नज़र में हमेशा जिंदा रहने के लिए अपने कर्तव्य को सर्वोपरि मानकर उसका पालन करना चाहिए । ताकि हमारा जीवन दूसरे के काम आ सके हमारा जीवन आदर्श मानव जीवन कह ला सके न कि हम पशु की तरह अपने लिए ही जीते रहे । रजनी के ऊपर स्नेहा की बातों का बहुत गहरा असर हुआ । अब रजनी भी अपने कर्तव्यों का दिल से पालन करने लगी  । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



सावन आया झूमकर

 नमन मंच 🙏🙏🙏

# गूंज क़लम की कटिहार इकाई 

दिनांक - 31जुलाई, 2021

दिन - शनिवार

#विषय - सावन आया झूमकर

विधा - स्वैच्छिक ( छंदमुक्त कविता) 


सावन आया झूमकर ठंडी ठंडी फुहार लाया , 

चारों ओर हरियाली की बहार लाया, 

बबीहा अपनी प्यास बुझा  पाता , 

नित्य सावन के आने की खुशी मानता है, 

बारिश की हर एक बूंद आस बन जाती , 

किसान के खेतों की पैदावार बढ़ाती , 

नव दुल्हन सावन का इंतजार बेसब्री से करती , 

विवाह का पहल सावन सखी सहेलियों के संग बिताती, 

सावन में सखियों संग झूला झूलकर, 

अपने नव जीवन के सपने सजाती, 

सावन में प्रिय के बिना नहीं रहा जाता, 

पल पल बिरहा सर्प सा डंसता जाता, 

सावन बिना पिया के बिल्कुल नहीं सुहाता, 

पल भर भी पिया से दूर रहना हृदय की व्याकुलता बढ़ाता, 

सावन की हर बूंद नव जीवन दे जाती, 

सूखे, निष्प्राण, निष्प्रभावी जीवन में  खुशहाली बढ़ाती । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर





शनिवार, 24 जुलाई 2021

संत कविश्रेष्ठ तुलसीदास

 सादर नमन मंच 🙏🙏🙏🙏

साहित्य सृजन संस्थान

सृजन के सारथी

समारोह क्रमांक-48

विषय- संत कविश्रेष्ठ तुलसीदास


राजापुर की धरती पर 1511 में तुलसी ने लिया अवतार, 

पिता आत्मराम दुबे, माता हुलसी की होनहार संतान । 


गंडमूल पैदा होने के कारण माता दिया त्याग

जीवन में झेलनी पड़ी मुसीबतें कई हजार । 


गुरु नरहरिदास से पाया वेद शास्त्रों का ज्ञान पाया, 

पत्नी के मोह में ईश्वर याद न आया। 


रत्नावली की फटकार ने विरक्त बनाया, 

तुलसीदास जी ने सारा जीवन श्रीराम की सेवा को कमाया।


रामचरितमानस ग्रंथ में भगवान राम की महिमा किया बखान, 

कण कण में दिखा दिया श्री राम का नाम । 


दोहावली कवितावली, गीतावली, विनय पत्रिका आदि अनेक ग्रंथ यही रचियता, 

वाणी इनकी सुनकर मन होता है पुनीता। 


1623 में तुलसी जी ने छोड़ा दिया संसार, 

रामनाम की महिमा से पहुँच गए हरि के द्वार। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

 जम्मू  , जम्मू कश्मीर



स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू   ,जम्मू कश्मीर





शुक्रवार, 23 जुलाई 2021

महादेव


विषय- शिव
विधा - कविता


जय भोले भंडारी, तेरी महिमा गाती दुनिया सारी, 

करते नंदी की सवारी, लगती सबको प्यारी । 


 गले में बासुकी की माला, बनाती रूप तुम्हारा निराला, 

आस ले कर तेरे द्वार आता, हमेशा झोली भरकर जाता । 


माता पार्वती से विवाह रचाया, कैलाश पर्वत को अपना घर है बनाया, कार्तिकेय गणेश पुत्र तुम्हारे, दोनों ने अनेक दुष्ट हैं मारे ।


हे महेश तुम स्वभाव से भोले वाले,खोलते हो बंद किस्मत के ताले, बेलपत्र चढ़ाने से  खुश हो जाते,अपने भक्तों के सोये भाग जगाते । 


देवों के देव महादेव कहलाते, सभी देव तुमसे ही शक्ति पाते, 

सारा ब्रह्माण्ड तूने रचाया, तूं कण कण में समाया। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर





बुधवार, 21 जुलाई 2021

मेरे मन की यह अभिलाषा

 #शीर्षक- मन की यह अभिलाषा

मेरे मन की यह अभिलाषा, 

सबको प्रेम की भाषा सिखाऊं

मन के अंदर की मैल हटाऊँ, 

मन मंदिर में हरिनाम की ज्योति जगाऊँ, 

सबको अपना मीत बनाऊँ, 

अपने पराये का भेद मिटाऊं, 

सबको स्नेह से गले लगाऊं, 

ऊंच नीच का अंतर  भुलाऊँ, 

धर्म के नाम पर लड़ने वालों को, 

धर्म की सही परिभाषा सिखाऊं, 

प्रकृति के कण -कण में ईश्वर की ज्योति दिखाऊँ, 

ईश्वर के सर्वव्यापी होने की निशानी बताऊँ, 

राजनीति में फैलाई स्वार्थ की भावना सबको बताऊँ, 

लोगों को आपस में लड़ने से बचाऊँ, 

भारतीय संस्कृति की खासियत सबको बतलाऊं, 

आने वाली पीढ़ियों को संस्कृति को संभालने के लिए कह जाऊँ, 

हर नागरिक को उसके कर्तव्य के बारे में बतलाऊं, 

अपने भारतीय होने का कर्तव्य निभाऊं, 

अपना श्वास श्वास मानव सेवा में लगाऊं, 

मानव होने का कर्तव्य निभा जाऊँ । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर




साहित्य और समाज

 नमन मंच🙏🙏🙏 🌹🌼🌻🌺🌸💐

#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 21/07/2021

दिन - बुधवार

विषय - समाज और साहित्य

विधा - आलेख

साहित्य समाज का दर्पण का होता है । समाज में जैसा साहित्य पढ़ा जाता है वैसा ही उनका रहन -सहन, संस्कार, संस्कृति होगी । साहित्य का प्रभाव मानव के मन पर गहरा पड़ता है और उसके नित्य के कार्यों से यह प्रभाव साफ -साफ दिखाई देगा। 

हमारे संतों, महापुरुष ने साहित्य के माध्यम से ही समाज में जागृति लाई ,और सदियों से चली आ रही मानव विरोधी परंपराओं का खंडन किया  ऐसी परंपराओं का खंडन किया जो मानव एकता की दुश्मन थी। जिसके कारण समाज जाति के नाम पर बंट गया था। उन्होंने साहित्य के माध्यम से इन परंपराओं का समूल नाश किया। साहित्य ही समाज को जागृत कर सकता है और मानव के विचारों में परिवर्तन ला सकता है। 

आजादी से पहले हमारा समाज जातियों और धर्मों में बंट चुका था। जिसका फायदा अंग्रेजी सरकार ले रही थी । फिर हमारे साहित्यकारों ने साहित्य के माध्यम से सब में देशभक्ति की भावना जागृत की सब को एक साथ आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार किया। तभी तो हमारा देश 15 अगस्त 1947 को आज़ाद हो सका। 

क़लम की ताक़त सबसे बड़ी मानी जाती है जो मुर्दा इंसान में भी जोश भर देती है। साहित्य ही हमारी संस्कृति और संस्कारों को अपने अंदर समेट कर रखता है। पीढ़ी दर पीढ़ी आगे पहुंचाता है । साहित्य और समाज का बहुत गहरा रिश्ता है इन दोनों को एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता। समाज साहित्य पर अपना प्रभाव छोड़ता है और साहित्य अपना प्रभाव समाज पर छोड़ता है। 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर

मंगलवार, 20 जुलाई 2021

मन

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#साहित्यिक महफ़िल परिवार

दिनांक - 21/07/2021 

दिन- बुधवार

#विषय - मन

विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता) 


मन मेरे टेक ले हरिनाम की, 

तब मिले तुझे विश्राम, 

हरिनाम से ऊपर कुछ कर्म नहीं, 

झूठा सब माया पसारा, 

कोई अपना पराया नहीं, 

सब हरि की संतान , 

तेरे मेरे का छोड़ दे जंजाल, 

मन बन जा हरि चरणन दास रे, 

कण कण सृष्टि का करता हरिनाम का जाप रे, 

तूं क्यों नहीं सुनता बहरे अंजान रे, 

डोलते मन का हरिनाम सहारा, 

बिना हरिनाम के होता ना भवसागर पार रे, 

मन रे हरिनाम को हृदय में बसा ले, 

भवसागर में तेरा बेड़ा क्षण में हो जाएगा पार रे । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर


सोमवार, 19 जुलाई 2021

मेरे हो तुम

 नमन मंच 🙏🙏🙏 

काव्य प्रभा अखिल भारतीय साहित्यिक मंच

दिनांक- 20/7/2021

क्रमांक-03

विषय- मेरे हो तुम


मेरे सतगुरु जी मेहर करो जी, 

मन की दुविधा का नाश करो, 

मेरे हो तुम सखा मीत, 

तुम हो मेरे दिल के करीब, 

हर मुश्किल क्षण में हल हो जाती, 

तेरी कृपा मन से अज्ञान मिटाती, 

मन को हमेशा डोलने से बचाते, 

मन के सारे विकार मिटाते, 

तेरे नाम की मन में भूख लग जाए , 

मन के सारे भ्रम मिटाए, 

तेरे दरस से मनुष्य जन्म सफल हो जाए, 

तन मन में खुशी भर जाए, 

तेरी सेवा जो हर पल कमाता, 

तन मन में तेरा नाम समाता, 

तेरी रहमत भवसागर पार कराती, 

मानव जीवन को सफल बनाती । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



भारतीय सैनिक

शीर्षक - भारतीय सैनिक

भारत के सपूत बहुत महान है , 

देश की सुरक्षा के लिए देते अपने प्राण है, 

अपने दुख सुख की चिंता छोड़, 

दिल से देश की सेवा कमाते , 

गर्मी सर्दी को सदा सहते , 

हर साँस अपनी देश सेवा में लगाते , 

घर बार की चिंता उसको भी सताती , 

देश के लिए समर्पण की भावना सब भुलाती , 

सैनिक का परिवार  घुट- घुट के जीता है, 

हर आंसू अंदर ही अंदर पीता है, 

बेटा मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना फर्ज निभाता है, 

शहीद का परिवार रो रो कर जीवन बिताता है, 

शहीद के बच्चे  बिना बाप के कैसे जीवन जीते हैं, 

माँ की सूनी मांग देखकर खून के आंसू पीते हैं, 

भारत माँ का सपूत अपना जीवन अमर कर जाता, 

माँ बाप बीबी बच्चों को दुखों से भरें संसार में अकेला छोड़ जाता, 

सैनिक अपना जीवन देश सेवा में लगाता, 

अपने प्राणों का बलिदान देकर अपना फर्ज निभाता। 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर







रविवार, 18 जुलाई 2021

क्रांतिवीर

 नमन मंच 🙏🙏🙏🙏

#क़लम की ताक़त साहित्यिक समूह, भारत

दिनांक - 17-18 जुलाई, 2021

दिन - शनिवार - रविवार

#विषय - क्रांतिवीर

विधा - स्वैच्छिक

देश पर मर मिटने वालों का हमेशा नाम रहेगा, 

हर कोई झुककर हमेशा उन वीरों को सलाम करेगा, 

अपने जीवन को मातृभूमि को समर्पित करनेवाले कैसे वीर है, 

उनकी गाथाएँ सुनकर लोग उनको कहते महावीर, 

उन वीरों की जाति धर्म सब महान है, 

जो देश के मान के लिए देते अपने प्राण है , 

देश की आज़ादी के लिए फांसी पर झूल गए, 

अपने दुख दर्द को देश के लिए भूल गए, 

रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, मंगल पांडे ने देश को आजाद कराने का बेड़ा उठाया, 

देश को आजाद कराने के लिए संघर्ष का मार्ग दिखलाया , 

भगत, चंद्रशेखर, सुभाषचंद्र ने आजादी की लड़ी लड़ाई, 

देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की बलि चढ़ाई, 

15 अगस्त 1947 का दिन उन वीरों की बदौलत आया, 

देश की आज़ादी के लिए उन वीरों ने अपने प्राणों को भारत के मां के चरणों में चढ़ाया

उन आज़ादी के मतवालों की यादें हमेशा आंखों में आंसू भरती जाएगी, 

सब के अंदर देशप्रेम की सच्ची भावना हमेशा भरती जाएगी। 



स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर

देश के बच्चे करें तरक्की

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 17-18/07/2021 

दिन- शनिवार - रविवार

#विषय - देश के बच्चे  करें तरक्की

विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता)


जब शिक्षा का प्रचार प्रसार होगा, 

ऊंच नीच  जब बच्चों में भेद न होगा, 

देश में कोई भेदभाव न होगा, 

 सब में  समानता का भाव होगा, 

बच्चों की शिक्षा में सुधार होगा, 

हर कोई तब ही पढ़ने के लिए तैयार होगा, 

बच्चों को तरक्की शिक्षा ही दे पाएगी, 

ऊंच नीच का भेद शिक्षा ही मिटा पाएगी, 

अज्ञानता का अंधेरा छटता जाएगा, 

हर कोई मानवता की भाषा समझता जाएगा, 

अमीर गरीब होने  की भावना दिलों से हटती जाएगी, 

सबको तरक्की की करने की नई राहें मिलती जाएगी, 

बच्चे ही देश का भविष्य संवारने का करेंगे काम, 

यही करते है देश का रोशन नाम, 

बच्चों को शिक्षा तब ही मिल पाएगी, 

जब निजी स्कूलों की मनमर्जी की वसूली पर सरकार लगाम लगाएगी , 

हर नागरिक जब ईमानदारी से अपने कर्तव्य निभाएगा, 

देश का हर एक बच्चा तब ही तरक्की कर पाएगा । 



स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



शनिवार, 17 जुलाई 2021

गणेश वंदना


 #विषय - गणेश वंदना

विधा - छंदमुक्त कविता


प्रथम पूज्य तुम कहलाते, 

जीवन के सब संकट मिटाते । 


चारों वेदों के तुम ज्ञाता, 

सब ज्ञान तुम में समाता । 


माता पार्वती के तुम दुलारे, 

शिव शंकर को प्राणों से प्यारे । 


एकदंत के नाम से पुकारे जाते, 

दुष्टों को क्षण में मार भागते । 


मंगलमय नाम तुम्हारा, 

भक्त जनों का तुम ही सहारा । 


 प्रेम प्रीत जो तुम को ध्याता , 

मनवांछित फल वो पाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर




शुक्रवार, 16 जुलाई 2021

गूंज क़लम की

नमन मंच 🙏🙏🙏

#गूंज क़लम की

दिनांक  - 28/09/2021

दिन - मंगलवार

 विषय - गूंज क़लम

विधा - छंदमुक्त कविता


गूंज क़लम की सब में जागृति लाएगी,

समाज को सुख समृद्ध बनाएगी, 

समाज में फैलाई बुराईयों को जड़ से मिटाएगी, 

सबको समानता का पाठ पढ़ाएंगी, 

लेखनी की स्वतंत्रता का महत्व सबको समझाएगी, 

स्वतंत्र लेखनी से समाज को खुशहाल बनाएगी, 

गूंज क़लम की चारों दिशाओं में गूंजायमान हो जाएगी, 

आशा की नई किरण सबको दिखाएगी, 

समाज में समानता का भाव जगाएगी, 

सबको समाज का दुख दर्द समझाएगी, 

गूंज क़लम की साहित्यकार को कर्तव्यनिष्ठा बनाएगी, 

साहित्य से समाज को उत्थान का मार्ग दिखाएगी । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर






भारतीय संविधान में नारी के अधिकार

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 16/07/2021 

दिन-  गुरुवार

#विषय  - भारतीय संविधान में नारी के अधिकार

विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता)


बाबा अंबेडकर ने नारी को समानता का अधिकार दिलाया, 

नारी पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज को उठाया, 

संविधान के अनुच्छेद14-15 में नारी को पुरुष के समान बताया, 

समाज में सम्मान से जीने का नया राह दिखलाया, 

अनुच्छेद 19 महिलाओं को स्वतंत्रता प्रदान करता, 

आवागमन, निवास, व्यवसाय का अधिकार सुनिश्चित करता, 

अनुच्छेद 23-24 नारी पर हो रहे शोषण को गलत बताता, 

शोषण करने वालो को हवालात पहुँचाता, 

अनुच्छेद 39 नारी को जीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त करने का अधिकार देता, 

समान वेतन प्राप्त करने को अधिकार बताया, 

अनुच्छेद 42 नारी को प्रसूति अवकाश प्रदान करता, 

नारी के जननी होने का सम्मान करता, 

अनुच्छेद 51 ऐसी प्रथाओं को खत्म करता, 

जो प्रथाएं नारी के सम्मान खिलाफ होती, 

अनुच्छेद 243 नारी को पंचायत चुनाव लड़ने का अधिकार देता, 

1/3 स्थान नारी के आरक्षित करता, 

अनुच्छेद 325 नारी को मतदान का अधिकार देता, 

उसके भी समान होने का सबूत सबको देता, 

भारतीय संविधान में  बहुत सारे कानून अब भी बनाए जाते, 

महिला को सुरक्षित जीवन का अधिकार दिलाते । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर















गुरुवार, 15 जुलाई 2021

मित्रता

 नमन मंच 🙏🙏🙏

गूंज क़लम की 

विषय - मित्रता

विधा - संस्मरण

बात आज से 25 साल पहले की है ।मै रोहित तब कक्षा चौथी में पढ़ते थे हम दोनों में बहुत ही प्यार था। हम एक दूसरे के बिना एक क्षण भी नहीं रह सकते थे। दोनों साथ मिलकर मैदान में खेलने जाते थे । खाने पीने की वस्तुएँ एक दूसरे से बांटकर खाते थे। 

एक दिन रोहित विद्यालय में रंगीन पुस्तक लेकर आया ,पुस्तक देखने में बहुत आकर्षित थी। मैंने पुस्तक भी पुस्तक को देखा मुझे पुस्तक बहुत ही सुंदर लगी । पुस्तक में हिंदू देवी देवताओं की तस्वीरें और उनकी कहानी थी । मैंने भी अर्ध अवकाश में पुस्तक में से कुछ कहानियों को पढ़ा, बाद में पुस्तक को रोहित को लौटा दिया । 

रोहित मेरे दिल की बात को बिना बताये है जान लेता था । उसने घर जाकर अपनी गुल्लक को तोड़ दिया और अपने पापा से उसी तरह की पुस्तक लाना के लिए बोल दिया। उसके पापा शाम को पुस्तक लेकर आ गए रोहित सुबह होने का इंतजार बेसब्री कर रहा था। 

सुबह होते ही रोहित मेरे पास आया ,मुझे अपने स्कूल बैग में से पुस्तक निकलाकर दी । मैंने बोला तुम्हे भूल नहीं पढनी क्या यह पुस्तक कहने लगा यार मेरे ऐसी दो पुस्तके है । इसलिए एक तुम्हारे लिए एक लेकर आया हूँ। मेरे हाथ में पुस्तक देखकर वह बहुत प्रसन्न हो रहा था । उसके बड़े भाई ने मुझे बता दिया था कि तुम्हारे लिए नई पुस्तक खरीद कर देने के लिए, रोहित ने अपनी गुल्लक को तोड़ दिया था । 

आज रोहित बेशक संसार से जा चुका है लेकिन उसकी निस्वार्थ मित्रता की यादें मेरी आँखों में पानी भर देती है । उसकी कमी मुझे जीवन में  हमेशा खलती रहेगी । उसके जैसा निस्वार्थ मित्र मिल पाना आज के जमाने में बहुत असंभव सा लगता है । जो बिना बोले ही अपने मित्र के मन की बात जान लेता है ,और एहसान जताए बिना अपने दोस्त की जरूरत को भी पूरा कर देता है। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर

मंगलवार, 13 जुलाई 2021

एहसान

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 13/07/2021 

दिन-  मंगलवार

#विषय  - एहसान

विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता)


इंसान हो तो एहसान करो धरती माँ पर, 

उसकी खूबसूरती को मत नष्ट करो, 

उसकी सजावट को बनाए रखने के लिए, 

अनगिनत पेड़ पौधों का रोपण करो, 

धरती माँ के किए एहसानों की कोई गिनती नहीं, 

एहसान फरामोशी करके मत अपने आप को कलंकित करो, 

पॉलिथीन का इस्तेमाल धरती माँ को बजर बनाता, 

मानव इस बात समझ नहीं पाता, 

अपने स्वार्थ में सब भूल जाता, 

मुसीबतें आने पर बहुत घबराता, 

गाडियों, कारखानों द्वारा वायु प्रदूषण बढ़ाता, 

पर्यावरण को शुद्ध रखने के उपाय बहुत कम अपनाता, 

आओ धरती माँ को पेड़ पौधों से सजाये, 

प्रदूषण से सबको निजात दिलायें, 

धरती माँ के एहसानों को हृदय में बसाये, 

अपनी धरती माँ को सुंदर और स्वच्छ बनाये । 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



चांद

#विषय- चांद

विधा - गद्य - पद्य


चांद तूं भी कभी पूरा या आधा होता, 

मेरा जीवन भी तेरी तरह कभी अधूरा होता, 

पूर्णता की तलाश में भटकता रहता हूँ, 

हर गम को भी खुशी से अपना लेता हूँ, 

मै भी तेरी तरह अकेला जीता हूँ, 

लाखों यार भी मेरेे मेरी तन्हाई को दूर नहीं कर पाते हैं, 

मेरे जीवन में भी कभी पूर्णिमा की रात आएगी, 

मेरे अधूरापन को पूर्ण कर जाएगी, 

चांद तेरी खूबसूरती सबको भाती है, 

तुझे पाने की चाह हृदय में बन जाती हैं, 

तेरी रोशनी अंधेरो भगाती है,

मन में आशा दीपक जलाती है, 

चांद चकोर तेरे प्रीत लगाता है, 

तूं उसकी भावनाओं को समझ नहीं पाता , 

तेरी अनदेखी उसे रुलाती है, 

जीवन जीने की आस उसमें घट जाती है, 

चांद मेरे पिया को मेरा संदेश पहुंचाना, 

बफा ना निभाने वाले को बेबफा कहता है जमाना । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर





रविवार, 11 जुलाई 2021

जब मानव प्रजापति एक, तो जातियाँ क्यों अनेक

#विषय  - जब मानव प्रजापति एक, तो जातियाँ क्यों अनेक

इंसान को ईश्वर का सृजन कहा जाता, 

सब योनियों में श्रेष्ठ कहलाता, 

ऊपर वाला तो इंसान बनाता, 

जात का भ्रम कौन फैलाता, 

सब धर्म मानव को ईश्वर की संतान बताते, 

जात पात का भेद कौन बनाते, 

जात पात के नाम नफरत फैलाई जाती, 

आपस में लड़ते भाई भाई, 

जात के नाम पर वोट मांगें जाते, 

अयोग्य उम्मीदवार को लोग जीतते, 

जात के नाम पर लोकतंत्र हार जाता, 

विकास का पहिया रूक ही जाता, 

कोई इस बात को समझ नहीं पाता, 

जात पात के चक्र में भाईचारा खत्म हो जाता, 

जात पात का कोई फायदा समझ नहीं आता, 

क्यों नासमझ इंसान जात पात के नाम पर अपनी एकता गंवाता, 

समाज के ठेकेदारों ने यह भेद बनाया, 

जाति के नाम पर लोगों को आपस में लड़वाया, 

उनको नहीं किसी से कोई वास्ता, 

सिर्फ यह कुर्सी पाने का रास्ता, 

अपनी मान प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए जात का कुआँ खुलवाते, 

नासमझ लोग उसमें गिरते जाते हैं, 

कुदरत ने कोई भेद भाव न किसी से अपनाया, 

जात पात का भेद कुछ लोगों ने अपने फायदे के लिए बनाया है। 

स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर






शनिवार, 10 जुलाई 2021

आंसू/ अश्क

  नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्यिक महफ़िल परिवार

दिनांक - 11/07/2021 

दिन- रविवार

#विषय  - आंसू/अश्क

विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता)


आंसू भी इंसान होने की पहचान रखते, 

दूसरे के गम को देखकर बह चलते, 

इनका बहना मन को पवित्र कर जाता, 

एक दूसरे के लिए प्यार जगाता, 

गम हो जा खुशी आंसू निकल आते , 

अपनी भावनाओं को छुपा नहीं पाते हैं, 

जब कोई बिछुड़ा सज्जन मिल जाता, 

  कोई न इनको रोक पाता, 

आंसुओ को सिर्फ बहना ही आता , 

भावनाओं को कोई दिलवाला ही समझ पाता, 

आंसुओं की कीमत का कोई मोल नहीं, 

दिलवालों के लिए बहुत ही अनमोल है, 

आंसुओं को व्यर्थ में नहीं बहाना, 

इसकी कीमत बारे में सबको बताना हैं । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर




शुक्रवार, 9 जुलाई 2021

समय की कीमत

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 10/07/2021

दिन- शनिवार

#विषय - समय की कीमत

विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता


समय हमेशा आगे बढ़ता, 

नासमझ इंसान इसकी गति समझ नहीं पाता, 

बीता हुआ समय वापिस नहीं आता, 

समय बीतने पर बहुत पछताता, 

समय की कीमत को मानव पहचान, 

तभी मिलेगा जग में मान, 

समय रहते जिसने अपना कारज कर लिया, 

अपना जीवन उसने सफल कर लिया, 

आज कल पर जो काम लटकाता, 

समय बीतने पर सदा पछताता , 

आलसी मनुष्य समय व्यर्थ गंवाता, 

अपना जीवन नर्क बनाता, 

हर किसी को समय का मोल समझ नहीं आता, 

पूरा जीवन रहता पछताता, 

समय की कीमत को जिसने समझ लिया, 

उसने ही अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर लिया। 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर




देवभूमि हिमाचल प्रदेश

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार हिमाचल प्रदेश इकाई

दिनांक - 09/07/2021 

दिन- शुक्रवार

#विषय  - देवभूमि हिमाचल प्रदेश

विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता)


देवभूमि को नमन बारंबार, 

इसके कण कण में ईश्वर का है बास, 

बर्फ से ढकी पहाड़ी चमकती कंचन समान, 

देवभूमि हिमाचल प्रदेश का हर कोई करता दिल से सम्मान, 

पांच शक्तिपीठ माता सती की दिलाते याद, 

देवभूमि पर स्वयं देवता करते बास, 

ब्रह्मा विष्णु महेश ने यही लगाया ध्यान, 

हर कोई देवभूमि को पूजता त्रिदेव का यही भक्ति स्थान, 

श्री हनुमान जी संजीवनी खोजने देवभूमि आएं, 

उसी संजीवनी से श्री लक्ष्मण के प्राण बचाएं, 

गुरु नानक ने गरम चश्मे में लंगर बनाया, 

वो पवित्र स्थान मणिकर्ण कहलाया, 

धर्मशाला में बौद्ध धर्म का बहुत बड़ा धार्मिक स्थान, 

वहाँ ही है बौद्ध धर्म गुरु का निवास स्थान, 

कुल्लू ,मनाली सभी घूमने आते, 

प्राकृतिक सुंदरता देखकर हैरान हो जाते, 

शुद्व वातावरण मन में शांति भर जाता, 

तन मन में नव स्फूर्ति लाता, 

देवभूमि सबको पास बुलाती, 

मन में श्रृद्धा भाव जगाती । 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू,जम्मू कश्मीर




गुरुवार, 8 जुलाई 2021

गौ माता

#विषय - गौ माता

गाय को हमारे देश में पूजा जाता, 

हर कोई उसको गौ माता बुलाता, 

तैंतीस करोड़ देवी देवता इसमें बास , 

इसकी सेवा से लगता बैकुंठ धाम पास, 

इसकी परोपकारी वृत्ति को सब प्रणाम करते, 

महिमा इसकी गाते नहीं थकते, 

अमृत रूपी दूध इसका शरीर में ताकत भरता, 

हर किसी को बहुत स्वादिष्ट लगता, 

गोबर इसका बहुत काम आता , 

फसल की उपज बहुत बढ़ाता, 

गोबर से उपले बनाए जाते, 

खाना बनाने के काम आते, 

गौ मूत्र औषधि का करता काम, 

शरीर से भाग जाते रोग मिलता आराम, 

गौ माता हमारे लिए खुशियों का खज़ाना है, 

इसको सेवा को दिल से कमाना है  । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू  , जम्मू कश्मीर




तपस्या का फल

   नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार उतराखंड इकाई

दिनांक - 08/07/2021 

दिन- गुरुवार

#विषय  - तपस्या का फल

विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता)


जीवन में सत्य कमाना,  

झूठ के साथ कभी नहीं जाना, 

अपना पराया का भाव मन में नहीं जगाना, 

हर किसी को गले लगाना, 

प्रेम प्रीत का संदेश सारे संसार में पहुँचाना, 

विकारों से सावधान हो जाना, 

अंतर में ही ईश्वर को पाना, 

चुगली निंदा से अपने आप को बचाना, 

पराई निंदा का भार नहीं उठाना, 

सकारात्मक से रिश्ता बनाना, 

नकारात्मक से पीछा छुड़ाना, 

पूरे विश्व से प्रेम हो जाना, 

संसार को सुंदर बनाने में जी जान से लग जाना, 

यही ईश्वर की तपस्या का फल, 

मुझे लगता है यही सारी समस्याओं का हल । 


 स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर



बुधवार, 7 जुलाई 2021

बच्चे मन के सच्चे

   नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार फरुखाबाद इकाई

दिनांक - 07 /07/2021 

दिन- बुधवार

#विषय - बच्चे मन के सच्चे

विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता)


ऐ बच्चे मन सच्चे, 

सब से प्यार पाते हैं, 

हर एक के मन को भाते है, 

सबसे लाड लगाते है, 

छल कपट इनको नहीं आता है, 

हर किसी को अपना समझते हैं, 

खेल कूद समय बिताते  है, 

शरीर को मजबूत बनाते हैं, 

विचार इनके शुद्ध होते हैं, 

सबके प्यारे होते हैं, 

माँ बाप की आंखों के तारे होते हैं, 

इनका हर एक शब्द भाता है, 

मन में इनके लिए और प्यार जगाता है, 

बड़ों की डांट को सीख समझते हैं, 

अपनी जिंदगी को बेफ्रिकी से जीते है , 

रूठे साथी को मानने में कभी देर नहीं करते है, 

किसी के लिए कोई गिला शिक़वा दिल में नहीं रखते हैं, 

इनको ईश्वर का रूप कहा जाता है, 

स्वच्छ हृदय इनको ईश्वर का रूप बनाता है । 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

जम्मू  , जम्मू कश्मीर








कश्मीर की सुंदरता

  नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार जम्मू कश्मीर इकाई

दिनांक - 07 /07/2021

दिन- बुधवार

#विषय - कश्मीर की सुंदरता

विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता) 


धरती का स्वर्ग कहलाता, 

अपनी खूबसूरती की खूशबू पूरे संसार में फैलाता, 

कश्यप ऋषि का तप स्थान यही है, 

कश्मीर के नाम से जाना जाता, 

इसकी सुंदरता बहुत निराली, 

बलिहारी जाती दुनिया सारी, 

शिवशंकर ने भी यहाँ ध्यान लगाया, 

वो पवित्र स्थान अमरनाथ कहलाया, 

अखरोट, बादाम मेवों का करता उत्पाद, 

केसर की खूशबू से महकाता पूरा संसार, 

सेब जैसी ही मीठी इधर लोगों की बोली, 

मिलकर सब धर्मों के लोग रहते जैसे हो हमजोली, 

सफेद बर्फ से ढके पर्वत  इसकी सुंदरता बढ़ाता, 

सूर्य की किरणें पड़ने से सोने जैसे चमक जाते, 

डल झील में शिकारे की सवारी करनी सबको भाती, 

तन मन में नव उत्साह भर जाती, 

दम आलू, पालव का स्वाद सबको भाता, 

पेट में खाने की भूख को और बढ़ाता, 

कश्मीर भारत का सि्वटज़रलैंड कहलाता, 

अपनी सुंदरता के लिए पूरे विश्व में जाना जाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर







मंगलवार, 6 जुलाई 2021

अनाथ बच्चों की व्यथा

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 06/07/2021

दिन- मंगलवार

#विषय - अनाथ बच्चों की व्यथा

विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता


अनाथ का बुरा होता हाल, 

कोई देता उनको दुलार, 

माँ बाप के स्नेह से वंचित रहते, 

जीवन में बहुत दुखड़े सहते, 

कोई रखता उनके सिर हाथ, 

सब कहते उनको अनाथ, 

रिश्तेदार उनसे न करते प्यार, 

कही न जाए इनका हम पर भार, 

कोई नहीं उनकी जिम्मेदारी उठाता, 

हर कोई उनसे मिलने से कतरता, 

रोटी कपड़ा उनको मिल नहीं पाता, 

हर कोई उनको खरी खोटी सुनाता, 

माँ बाप की कमी उनको रुलाती, 

हर पल उनकी याद सताती, 

अनाथ बच्चों के जीवन में दुख तकलीफ़ बहुत आती, 

उनको अनाथ होने का अहसास कराती। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर


सोमवार, 5 जुलाई 2021

आओ खुशियाँ बांटें

   नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार हरियाणा इकाई

दिनांक - 05 /07/2021

दिन- सोमवार

#विषय - आओ खुशियाँ बांटें

विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता) 


आओ मिलकर खुशियाँ बांटें, 

धरती पर स्वर्ग बनाएं, 

दिल से दर्द दुख मिटाकर, 

प्रेम का स्नेह लेप लगाएं, 

संसार रूपी उपवन में, 

प्रेम प्रीत का पौधा लगाकर, 

इसकी सुंदरता और बढ़ाए, 

गिले शिकवे के भाव को दूर भगाकर, 

सबको गले लगाएं, 

सकारात्मक सोच की शक्ति दिखाएं, 

संसार को खुशहाली की ओर ले जाएं  । 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर





पशु संरक्षण

  नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार मध्यप्रदेश इकाई

दिनांक - 05/07/2021

दिन- रविवार

#विषय - पशु संरक्षण

विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता) 


 पशु प्रकृति का अनुपम उपहार, 

इनको न समझो बेकार, 

जीवन में कई काम यह करते है, 

न जाने फिर क्यों ना शुकरे लोग इनके प्राण हरते, 

गाय, भैंस, बकरी अमृत रूपी दूध सबको पान करती, 

मानव शरीर को खूब बलवान बनाती, 

कुत्ता भी बहुत ईमानदार दिखाता, 

घर की रक्षा के अपनी नींद गंवाता है, 

पशु पक्षी भी धरती को सुंदरता को बढ़ाता है, 

धरती को स्वच्छ रखने में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं, 

घोड़ा, गंदा ,बैल थोड़ा खाकर , 

अपने मलिक के लिए पैसा बहुत कमाता है, 

जंगल को कटने से बचाना है, 

पेड़ों को कटाने वाले को हवालात पहुंचाना है, 

 जंगल में शिकार करने वाले को उचित दंड दिलवाना है, 

पशु पक्षियों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज को उठाना है । 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

जम्मू, जम्मू कश्मीर




रविवार, 4 जुलाई 2021

भ्रूणहत्या रोकें हम सब

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 04/07/2021

दिन- रविवार

#विषय - भ्रूणहत्या रोकें हम सब

विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता


औरत को देना है पूरा सम्मान , 

उसकी भी है अपनी पहचान, 

मकान को घर बनाने का करती है काम, 

घर को संवारने के लिए भूल जाती करना विश्राम, 

बेटी बनकर माँ बाप का मान बढ़ाती, 

सबको प्रेम प्यार से बुलाती, 

बाप की वो पगड़ी कहलाती, 

उसकी इज़्ज़त हमेशा बढ़ाती, 

माँ का हर काम में हाथ बंटाती , 

कभी किसी काम से जी न चुराती, 

माँ बाप बेटी को बहुत करती प्यार, 

उनको खुश करने के करती है यत्न हज़ार, 

पराया घर में भी जाकर सबको वो अपनाती, 

अपना हर फर्ज खुशी खुशी निभाती है, 

बच्चों को जन्म देकर वंश रेखा आगे बढ़ाती, 

बच्चों को अच्छे संस्कार देकर अच्छा इंसान बनाती, 

तो भी वो कोख में ही मार दी जाती, 

औरत ही तो परिवार को आगे बढ़ाती, 

भ्रूणहत्या रोकने का सब करें प्रयास, 

तभी होगा औरत के साथ इंसाफ़, 

औरत के लिए अपनी सोच को बदलना होगा, 

औरत को जन्म लेने का अधिकार देने के लिए  लड़ना होगा । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर









शनिवार, 3 जुलाई 2021

जन्मदिन

शीर्षक - जन्मदिन

विधा - लघुकथा

कुसंगति और माँ बाप जयादा का प्यार बच्चे को बिगाड़ देता है। बच्चे की गलती को कभी नजर अंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि बच्चे को थोड़ा डांटकर और थोडे़ प्यार से समझाना चाहिए, ताकि वे दुबारा ऐसी गलती न करें। 

विनोद अपने माँ बाप का इकलौता पुत्र है, लेकिन माँ बाप के प्यार से उसे बिगाड़ दिया। समय के साथ उसकी आदतें बिगड़ने लगी । कुसंगति में पड़कर नशा करने लगा माँ बाप की इज़्ज़त करना भी भूल गया । 

माँ बाप ने सोचा अगर हम इसकी शादी अच्छी लड़की से कर देते है । शायद इसके स्वभाव में कोई परिवर्तन आ जाए  । विनोद की शादी अच्छे परिवार में हो गई । विनोद की पत्नी भारती बहुत संस्कारी , सुशील और धार्मिक प्रवृत्ति की लड़की थी । 

भारती नित्य मंदिर जाती और घर में सुबह शाम भगवद्गीता और रामायण पाठ करती । एक दिन विनोद बहुत बीमार हो गया लगता था ,अभी प्राण छोड़ जाएगा । भारती ने दिन रात विनोद की सेवा की। कुछ दिनों में वो स्वस्थ हो गया । भारती की संगति ने उसे भी संस्कारी बना दिया उसने भी नित्य मंदिर जाना शुरू किया । 

अपने माँ बाप से विनोद ने कहा कि मैं अपना जन्मदिन मानना चाहता हूँ । उसके माँ बाप हैरान हो गए ,और कहने लगे बेटा तुम्हारा जन्मदिन तो तीन महीने पहले हो चुके हैं । वो बोला माँ मुझे लगता है कि मेरा जन्म आज ही हुआ, क्योंकि मुझे आज ही अपनी गलतियों का अहसास है और मैने खुशियों और प्यार से भरे जीवन में प्रवेश किया है  मेरे लिए आज का दिन ही नव जीवन की शुरुआत हैं और मेरा जन्मदिन है । 


 स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर


शुक्रवार, 2 जुलाई 2021

शांत मन

  नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश बिहार इकाई

दिनांक - 03/07/2021

दिन- बुधवार

#विषय - शांत मन

विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता) 


शांत मन शांति फैलाता, 

सबसे प्रेम करना सिखाता, 

नफरत करना उसको नहीं भाता, 

संसार रूपी उपवन को अपनी खूशबू से महकाता, 

दया भावना उसका स्वभाव बन जाता, 

दूसरों की पीड़ा देखकर सहानुभूति दिखाता, 

मानव सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाता, 

ऊंच नीच का मन से भेद मिट जाता, 

प्रकृति के कण कण से हो जाता प्यार, 

सारा संसार उसको दिखता एक परिवार, 

शांत मन ही संसार को सुंदर बनाने का करता काम, 

धरती को ही बना देता बैकुंठ धाम । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर

हृदयस्पन्दन

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार जम्मू कश्मीर इकाई

दिनांक - 03/07/2021

दिन- शनिवार

#विषय - हृदयस्पन्दन ( दिल की धड़कन) 

विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता) 

श्वास श्वास सिमरन तेरा करता जाऊँ, 

हे स्वामी हर श्वास तुम्हारी कृपा से लेता हूँ, 

तेरी कृपा से मानुष देही पाई, 

तूं ही बाप तूं ही मेरी माई, 

तेरे परोपकार को कैसे भूल जाऊँ, 

तेरी कृपा से ही जीवन पाऊँ, 

शरीर के रोम रोम में तेरा नाम बस जाए, 

यही मेरे जीवन का उद्देश्य बन जाए, 

हृदयस्पन्दन के महत्व को पहचानना बहुत जरूरी, 

इससे ही होगी मानव जीवन के उद्देश्य की पूर्ति । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर





गुरुवार, 1 जुलाई 2021

सावन आया झूम के

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#नव साहित्य परिवार

दिनांक - 17 जुलाई, 2021

 दिन -  शनिवार

#विषय - 

विधा - स्वैच्छिक


हे सखी सावन आया झूम के, 

पिया की याद सताती, 

पिया मिलन की तड़प बढ़ती जाती, 

पिया कब घर आओगे, 

मेरे अतृप्त नयनों की प्यास बुझाओगे , 

पिया तेरे संग झूला झूल कर, 

मन अपना प्रसन्न कर लूंगी , 

सावन ने मेरे मन की प्यास को बुझाया, 

पिया का हृदय में ही दर्शन कराया, 

हरियाली को सावन ने बढ़ाया, 

चारों ओर खुशहाली लाया, 

सावन ने धरती को नवयौवना बनाया, 

उसकी खूबसूरती में चार चांद लगाया । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर




गलत/बुरी जो है परंपरा, अवसान होना चाहिए

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 01/07/2021

दिन- गुरुवार

#विषय - गलत/बुरी जो परंपरा है, अवसान होना चाहिए

विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता


बुरी परंपरा जो समाज को नुकसान पहुंचाये, 

इंसान को इंसानियत भुलाये, 

जातिवाद ने कोहराम मचाया, 

मानवों में ऊंच नीच का भेद है बनाया, 

संत, महापुरुषों ने इस परंपरा के खिलाफ आवाज़ है उठाई, 

वाहियात परंपरा खत्म करने की कसम उन्होंने खाई, 

दहेज प्रथा ने नारी के सम्मान को घटाया, 

नारी को जीवन को बहुत मुश्किल है बनाया, 

दहेज प्रथा को खत्म करने का बेड़ा उठाया, 

संविधान में दहेज मांगने वाले के लिए दंड का प्रावधान बनाया, 

जन्म, मरण, विवाह के अवसर पर ऐसी रस्में बनाई, 

गरीब को और गरीब बनाने की नई रस्में आई, 

ऐसी परंपराएं जो समाज को कमजोर बनाएं, 

मानव को मानव से दूर ले जाए, 

समाज की उन्नति में रोडे़  अटकाए, 

ऐसी को परंपराओं को जड़ से खत्म होना चाहिए । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर


प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...