#विषय - गणेश वंदना
विधा - छंदमुक्त कविता
प्रथम पूज्य तुम कहलाते,
जीवन के सब संकट मिटाते ।
चारों वेदों के तुम ज्ञाता,
सब ज्ञान तुम में समाता ।
माता पार्वती के तुम दुलारे,
शिव शंकर को प्राणों से प्यारे ।
एकदंत के नाम से पुकारे जाते,
दुष्टों को क्षण में मार भागते ।
मंगलमय नाम तुम्हारा,
भक्त जनों का तुम ही सहारा ।
प्रेम प्रीत जो तुम को ध्याता ,
मनवांछित फल वो पाता ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर
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