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बुधवार, 31 मार्च 2021

खुमारी रंग की


# नमन मंच 🙏🙏🙏

#  कलमकार कुम्भ

# दिनांक - 31/03/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - खुमारी रंग की

# शीर्षक - 

# विधा -  छंदमुक्त कविता 

होली के रंगों में मस्ती 

हर बात पर

निकलती हंसी

प्रेम रंग की

चढ़ गई खुमारी

भूल गए 

पीड़ा सारी

गिले शिकवे

मन से हट गए

प्रेम के बंधन में 

 सब बंध गए। 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू





देशप्रेम

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक - 31/03/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - देशप्रेम

# शीर्षक - प्यारा देश है मेरा

# विधा -  छंदमुक्त कविता

प्यारा देश है मेरा 

सबसे न्यारा देश है मेरा

लोकतंत्र शान हमारी

देश में बसती जान हमारी

नदियाँ इसकी  पवित्र पावन

करती मन को पुनीत

मीठी - मीठी बोली हमारी

दिलों में राज करते हम

माँ बाप यहाँ 

तीर्थ समान पूजे जाते

अतिथि को हम 

ईश्वर मान आदर देते

क्या क्या इसके गुण बताऊँ

इतना महान देश है मेरा । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू





मंगलवार, 30 मार्च 2021

ईमानदार

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान जम्मू & कश्मीर इकाई

# दिनांक - 31/03/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - ईमानदार

# शीर्षक - ईमान की खायेगा

# विधा -  छंदमुक्त कविता

ईमान की खायेगा, 

सदा तृप्ति रहेगा, 

चिंता फिक्र से , 

हमेशा निवृत्त रहेगा, 

ईमानदारी का मानता हूँ, 

अब कोई मोल नहीं है, 

बेईमानों का अब , 

बोलवाला है, 

सब समझते हैं, 

ईमानदार ही, 

बस भोला भाला है, 

बेईमानों की चतुराई, 

कहीं काम न आएगी, 

ईश्वर के दरबार में, 

सिर्फ शर्मीदगी दिलवाएंगी, 

ईमानदार ही सम्मान, 

पाता है, 

ईश्वर को हमेशा, 

अपने निकट पाता है । 

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर ,जम्मू



करवा चौथ

 # नमन मंच 🙏🙏🙏🙏

#साहित्य बोध 

#दिनांक- 30/03/2021

#दिन- मंगलवार

#साप्ताहिक प्रतियोगिता 

#विषय करवाचौथ 

#विधा कविता 

पति प्यारा है मुझको, 

झेल लूंगी दुख अपार, 

सलामत रहे वो हमेशा, 

व्रत रखूंगी हर बार, 

मेरी हर ख्बाइश को, 

पल में करता पूरी, 

ईश्वर हम पर कृपा करें, 

रिश्तों में ना आए दूरी, 

मेरे दिल की हर बात , 

बताने से पहले जान लेता , 

हर मुश्किल में , 

मुझे हिम्मत देता, 

एक व्रत क्या ❓

रखूं हज़ार, 

ऐसा पिया मुझे, 

मिले हर बार। 

स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर, जम्मू



सोमवार, 29 मार्च 2021

दुविधा

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान जम्मू & कश्मीर इकाई

# दिनांक - 30/03/2021

# दिन - मंगलवार

# विषय - दुविधा

# शीर्षक - 

# विधा -  छंदमुक्त कविता

मन की दुविधा का बुरा प्रभाव

काम रूक जाते, लग जाते साल

आत्मशक्ति का करती ये हनन

मन करता रहता अपने मनन

दुविधा में पड़कर ,

बन जाता कठपुतली

आम खा जाते सभी,  

रह जाती गुठली

समय अपना व्यर्थ गंवाता

जीवन के अंत में, 

बहुत पछताता

काम जो करने आया 

दुविधा में फंसा ,

कर नहीं पाया 

अमूल्य जीवन व्यर्थ गंवाया।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू, जम्मू कश्मीर 





नन्ही सी किलकारियां

 पुत्ररत्न प्राप्ति और होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

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# नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक - 29/03/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - चित्र आधारित (पुत्ररत्न) 

# शीर्षक - नन्ही सी किलकारियां

# विधा -  कविता

नन्ही सी किलकारियां 

करती मन को बिभोर

खुशी की कोई सीमा नहीं

लाल मिला बहुत अनमोल

चांद सा मुखड़ा देखकर

भूल जाती सब दुनिया

सुंदरता देखकर लाल की 

फीकी सी लगती है परियाँ

बहन उठाकर बाहों मे

भाई पर प्यार लुटाती

भाई के आने की खुशी में

हमेशा रहती गीत गुनगुनाती। 

 

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू , जम्मू कश्मीर

शनिवार, 27 मार्च 2021

बाल मन

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान गुजरात इकाई

# दिनांक - 27/03/2021

# दिन - शनिवार

# विषय - बाल मन

# विधा - कविता 

पक्षी की भांति उड़ता जाता

मन बहुत सपने बनाता

हर  चीज में दिखता नयापन

हैरान हो जाते नयन

बात बात पर चिढ़ जाता

मन की बात कह नहीं पाता

हर किसी से चाहता प्यार

बारह जाने के लिए रहता बेकरार

सपनों की नींद में सोया रहता

अपने विचारों में, खोया नहीं थकता

बैर भाव का ना होता नाम

लगा रहता अपने काम

चिंता फिक्र न सताता

हर काम कल्पना से, बन जाता

बाल मन होता हरि धाम

जिसमें बसते प्रभु श्री राम। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर






मन

खुशी

 

# नमन मंच 🙏🙏🙏
# साहित्य संगम संस्थान तेलंगाना  इकाई
# दिनांक - 27/03/2021
# दिन - शनिवार
# विषय - खुशी
# विधा -  कविता

दुल्हन सी सजी धरती

  नमन मंच 🙏🙏🙏

# नव साहित्य परिवार

# दिनांक - 2/204/2021

# दिन -गुरुवार

# विषय - पृथ्वी दिवस

# विधा - स्वैच्छिक

पेड़ पौधों से हरी भरी

चंदन सी महकती 

शुद्ध हवा की दात्री 

दुल्हन सी सजी धरती। 

नदियों की जल की धारा

हरा भरा करती संसार

बांटती खुशियाँ हज़ार

दुल्हन सी सजी धरती । 

अपना सीना चीर कर 

अन्न उगाती है

सब की भूख मिटाने के लिए

हर दुख हंसते हंसते सह जाती है  । 

अपनी सुख सुविधा के लिए

मत इसको खोखला करते जाओ

भुगतने पडे़गे तुमको गंभीर परिणाम

सब बोलेगें त्राहि त्राहि 

दुल्हन सी सजी धरती। 

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर



शुक्रवार, 26 मार्च 2021

अभिमान

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान गुजरात इकाई

# दिनांक - 26/03/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय - अभिमान

#  विधा - कविता

भारत का अभिमान वीर सपूत बढ़ाते है

देश की रक्षा की खातिर कुर्बान हो जाते

बेटियां मान अभिमान बढाती मायक़े का

ससुराल में प्यार की महक फैलाती

देश का अभिमान होते वो नागरिक

जो देश के लिए जीते मरते हैं

धन दौलत का अभिमान  बुराई फैलाता

अच्छाई से कोसों दूर ले जाता

अभिमान भी कभी दुश्मन बन जाता है

रावण जैसे विद्वान से छल कर जाता

पांचाली के अभिमान ने उसे बचाया 

श्री कृष्ण ने तभी उस पर वस्त्र ओढा़या 

मैया सीता के अभिमान ने

रावण को रण में हराया था । 

श्री राम तभी तो

महाबलशाली रावण को मार पाया था । 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू, जम्मू कश्मीर










हमारा संविधान

 

#नमन मंच 🙏🙏🙏
# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान,भारत

# दिनांक - 26/03/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय - हमारा संविधान

# विधा - छंदमुक्त कविता 

डॉ. बी.आर. अंबेडकर पुरुष महान, 

भारत को दिया संविधान,  

संविधान में अनेक अधिकार

अब न कोई सहेगा अत्याचार

जात पात का खत्म हुआ झमेला

अब न कोई रहेगा अकेला

सब मिल बांटकर खाएंगे

खुशी से जीवन बिताएंगे

अब सब में बढ़ेगा प्यार

देश सेवा के लिए, हमेशा रहेगें तैयार

जुल्म करने वाला सजा पायेगा

गुनाह करने से हमेशा घबरायेगा

संविधान पवित्र ग्रंथ महान

जिसने बनाया सबको एक समान। 

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर ,जम्मू





मेरा जीवन परिचय

विषय - जीवन परिचय


मेरा नाम अमरजीत सिंह है । मेरा जन्म 10 दिसंबर 1987 ई• को जम्मू कश्मीर के जिला जम्मू में हुआ था ।  मेरे पिता जी का नाम सरदार तारा सिंह और माता का नाम श्रीमती  मनजीत कौर है  ।मेरी पत्नी का नाम बलविंदर कौर है  पुत्र का नाम तक्षप्रीत सिंह है और पुत्री का नाम परनीत कौर है ।बारहवीं कक्षा तक की पढ़ाई सरकारी विद्यालय से पूरी की थी स्नातक, स्नातकोत्तर और शिक्षा स्नातक पढ़ाई की जम्मू विश्वविद्यालय से पूरी की थी ।मै अभी एक निजी विद्यालय में हिंदी अध्यापक हूँ । मेरे  साहिति्यक सफर की शुरुआत सन 2015 में हुई जब मैने महाविद्यालय की पत्रिका के लिए कविता लिखना शुरू किया । मेरी पहली कविता  थी "बनना है तो इंसान बनो "मुझे अभी तक 40 से ऊपर ई सम्मान पत्र मिल चुके हैं । 


गुरुवार, 25 मार्च 2021

हम और हमारी नैतिक जिम्मेदारियां



# नमन मंच 🙏🙏🙏


# नव साहित्य परिवार


# दिनांक - 25/03/2021


# दिन - बृहस्पतिवार


# विषय -  हम और हमारी नैतिक जिम्मेदारियां


# विधा -  स्वैच्छिक-  छंदमुक्त कविता


 हम जिम्मेदारियों से बचते, 


दूसरों को जिम्मेदार ठहराते, 


कर्तव्य निभाने के समय, 


मुहं मोड़ निकल जाएगें


नदी, नालों में फैककर गंदगी


दोष दूसरों पर लगाते


अपने कर्तव्यों से विमुख होकर


दूसरों को कर्तव्य का पाठ पढ़ाते


अपनी नैतिक जिम्मेदारी कब निभा पाएंगे । 


निर्धन की निर्धनता देखकर


दया भाव का दिखावा कर


सरकार पर दोष लगाकर


नैतिक जिम्मेदारी नहीं निभा पाते । 


धर्म के नाम पर वोट  मांगकर,


कुर्सी की लालसा , 


नेता होने की नैतिक जिम्मेदारी , 


कब निभा पाएंगे। 


रोड पार करते बजुर्ग को देख

आगे ना बढ़ कर 

अपनी नैतिक जिम्मेदारी नहीं निभाता। 


स्वरचित एवं मौलिक 


अमरजीत सिंह


जम्मू कश्मीर ,जम्मू











बुधवार, 24 मार्च 2021

जल ही जीवन है

  नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार झारखंड  इकाई

दिनांक - 08/07/2021

 दिन - गुरुवार

#विषय - जल ही जीवन है

विधा - छंदमुक्त कविता


जल ही जीवन है, 

जल बिना होता न कोई काम। 

जल ही पूजा जाता, 

जल ही पतित पावनी गंगा कहलाता। 

जल ही करता समस्त पापों का नाश, 

जल ही करता आत्म प्रकाश। 

जल से ही फसल उग पाती, 

सभी प्राणियों की भूख मिटाती। 

जलचर जल से ही जीवन पाते, 

बिना इसके मृत्यु को पाते । 

जल बिन सूखा पड़ जाता, 

मृत्यु का  भय सब को सताता। 

मनुष्य जल बिन, एक पल नही रह पाता, 

प्यास का मारा बहुत चिल्लाता । 

जल ही है जीवन का आधार, 

यह है ईश्वर का अमूल्य उपहार। 

जल संरक्षण है बहुत जरूरी, 

बिना इसके न होगी जरूरतें पूरी। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर, जम्मू




मंगलवार, 23 मार्च 2021

नश्वर है यह संसार

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार जम्मू कश्मीर

# दिनांक - 22/03/2021

# दिन - मंगलवार

# विषय - नश्वर है यह संसार

# विधा - आलेख 

संसार में हर एक वस्तु नाशवान है पर इस सच्चाई को मनुष्य कभी स्वीकार नहीं करता है। जाने अनजाने ऐसे कर्म कर देते है, बाद में उसको पछताना पड़ता है   हमेशा मोह माया के जाल में फंसकर  अपना मार्ग भटक जाता है और अपने आप को दुखी मान लेता है । उसे यह भी ज्ञात नहीं रहता कि उसे भी एक दिन संसार को छोड़कर जाना है। 

अगर मनुष्य को जीवन की सच्चाई  समझ आ जाए तो जीवन आनंदमय बन जाए वो किसी के साथ भेदभाव नहीं करेगा न ही जात पात के नाम पर लड़े झगड़े  नहीं। वे संसार में प्रेम, भाईचारा, सद्भावना से रहता और संसार को सुखी बनाने में अपना भरपूर योगदान देता  । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

 जम्मू कश्मीर जम्मू



शहीदी दिवस

# नमन मंच 🙏🙏🙏

# वाह वाह क्या बात है

# दिनांक - 24/03/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - चित्र लेखन

महान शहीदों को नमन करते बारंबार, 

जिनके कारण हम जी रहे आजाद, 

फांसी पर चढ गए, 

भारत माता के लाल, 

मान देश का बढ़ा गए, 

शहादत उनकी बेमिसाल, 

हर किसी का शीश झुक जाता  ,

ऐसी सुन कुर्बानी, 

हर कोई गाता है, 

वीरों की अमर कहानी, 

फांसी के फंदे पर झूला झूल गए, 

देश  आज़ाद कराने के लिए, 

मौत को कबूल गए । 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर जम्मू

सोमवार, 22 मार्च 2021

ओ मेरे हमजोली, आ मिलकर खेले होली

#नमन मंच 🙏🙏🙏

#कलम की ताकत साहित्यिक संस्थान भारत 

दिनांक - 16/03/2025

दिन - रविवार 

विषय - होली

# शीर्षक - ओ मेरे हमजोली, आ मिलकर खेले होली

# विधा - स्वैच्छिक 

ओ मेरे हमजोली, आ मिलकर खेले होली

ओ मेरे हमजोली........ 

एक दूसरे को रंग लगाएंगे,

 प्यार के गीत गाएंगे, 

ओ मेरे हमजोली..... 

हर  कोई खुशी मनाएगा ,

 प्रेम के रंग में रंग जाएगा, 

ओ मेरे हमजोली...... 

जिंदगी रंगीन बनाएंगे,

 हर पल नाचे गाएंगे, 

ओ मेरे हमजोली..... 

गिले शिकवे दिलों से हटाते जाएगें, 

सबको अपना मीत बनाते जाएगें, 

ओ मेरे हमजोली........ 

हर कोई हमारे साथ गाएंगे, 

जिंदगी खुशी से बिताएंगा, 

ओ मेरे हमजोली......... 

फीकी सी जिंदगी रंगीन बनती जाएगी,

 प्यार के रंग से सबको रंगती जाएगी.

ओ मेरे हमजोली........... 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू






भूख


# नमन मंच 🙏🙏🙏


# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत


# दिनांक - 22/03/2021


# दिन - सोमवार


# विषय - भूख


# शीर्षक - 


# विधा - कविता


रोटी खाने की खातिर, हर कोई कमाता, 


बिना खाएं जी नहीं  पाता । 


भूख के मारे निकलती जान , 


कैसे बचा पाएंगे गरीब इंसान । 


मंहगाई की मार कर रही, 


हमारा जीवन दुश्वार। 


बच्चों को कैसे खाना खिलायेंगे, 


कैसे उन को बलवान बनायेंगे। 


गरीब भूखा भूखा ही मर जाता, 


अपने आंसू हमेशा छिपाता । 


भूख के मारे चल नहीं पाता, 

सारा जीवन परेशानी उठाता। 


गरीब इंसान कैसे भूख मिटाएंगे, 

कैसे चैन की नींद सो पाएगा। 


इसके लिए सब प्रयास करे, 

खाने पीने की चीजों का दान करें । 


हर कोई भरपेट खाना खाएगा, 

तभी देश खुशहाल बन पाएगा। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू



रविवार, 21 मार्च 2021

बिहार दिवस

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार जम्मू कश्मीर

# दिनांक - 22/03/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - बिहार दिवस

# विधा - स्वैच्छिक -छंदमुक्त कविता

वंदनीय धरती है बिहार की, 

माता सीता ने लिया यहाँ अवतार । 


पतिव्रता का धर्म निभाएं, 

अपने पुण्य प्रताप से ,जन्म धरा का मान बढाएं। 


नालंदा विश्वविद्यालय ने विश्व को ज्ञान दिया, 

जीवन को आगे बढाने का नया पैगाम दिया  । 


पटना में हुआ गुरु गोविंद सिंह का अवतार, 

देश कौम के लिए कुर्बान किया पूरा परिवार। 


बिहार धरा को कोटि कोटि प्रणाम, 

जिसने देश को दिए बहुत विद्वान । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू












परिवार

नमन मंच 🙏🙏🙏🙏

#गूंज क़लम की 

दिनांक- 17/07/  2021 

दिन - शनिवार

#विषय- परिवार

विधा- छंदमुक्त कविता

============= 

सदस्यों से बनता परिवार, 

बना रहे सभी में प्यार । 

सुख दुख के सभी बने साथी, 

जैसे झुंड बनाकर चले हाथी। 

एक दूसरे की भावना का करे सम्मान, 

तभी बढ़ेगा परिवार का मान। 

बजुर्गों की  करो हमेशा सेवा, 

भगवान भी देगा दुगना मेवा। 

आओ सभी प्रेम का पौधा लगाएं, 

मिलजुलकर संयुक्त परिवार बनाएं। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर, जम्मू





कर्म ही भाग्यविधाता है

# नमन मंच 🙏🙏🙏
# हिंदी साहित्य संगम संस्थान
# दिनांक - 21/03/2021
# दिन - रविवार
# विषय - कर्म ही भाग्यविधाता है
# विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता
 
कर्म ही भाग्यविधाता है, 
यही सबको सफल बनाता है। 

जात पात का कोई काम नहीं, 
महान कर्म ही ,महान पुरुष बनाता है। 

नीच कर्म ही नीच बनाता है, 
मनुष्य भाग्य क्यों दोष लगाता है। 

वर्ण, कुल का नाम काम नहीं आता, 
जो कर्म करता उसका फल पाता हैं। 

समय गुजरने पर पछताता है, 
पछताना ही भाग्य बन जाता। 

स्वरचित एवं मौलिक 
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर, जम्मू


शनिवार, 20 मार्च 2021

स्व अधिकार

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक - 20/03/2021 से 21/03/2021

# दिन - शनिवार से रविवार

# विषय - स्व अधिकार

# विधा - स्वैच्छिक -छंदमुक्त कविता

संविधान है भारत की शान, 

इसमें लिखे गए कानून महान   । 

हर व्यक्ति स्व अधिकार पाता, 

अपना जीवन सुखी सुखी बिताता  । 

भेदभाव किसी से नहीं करता, 

सबको लेकर आगे बढ़ता । 

शिक्षा का सबको मिलेगा अधिकार, 

नौकरी करेंगे सब सरकारी दरबार। 

स्व अधिकार का सब को ज्ञान कराया , 

संविधान ने भारत को आगे बढ़ाया। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू

पुरूषार्थी बनता पुरूषोत्तम

#विषय - पुरूषार्थी बनता पुरषोत्तम

# विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता 

दुख दर्द से नहीं घबराता , 

हर संकट से वो टकराता । 

हमेशा आगे बढ़ता जाता, 

सच्चा पुरूषार्थी वही कहलाता। 

मान मर्यादा का हमेशा रखता ध्यान, 

वो ही पाता जग में सम्मान। 

धर्म की खातिर जो लड़ता, 

देश कौम के लिए मरता है। 

सच्चा पुरुष पुरूषार्थी जीवन जीता , 

हर पल हर दम, 

देश धर्म के लिए जीता है। 


 स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर, जम्मू


















शुक्रवार, 19 मार्च 2021

हंसे और हंसाये संसार को खुशहाल बनाएं

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार जम्मू कश्मीर

# दिनांक - 19/03/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय - हंसे और हंसाये संसार को खुशहाल बनाएं

# विधा - स्वैच्छिक - 

हंसना हंसाना, 

गम को दिल से भूलाना  

हर किसी को हंसाना, 

दुख में कभी नहीं घबराना। 

नफरत से हमारा नहीं ,

कोई वास्ता । 

हंसना हंसाना ही, 

जीवन जीने का रास्ता। 

हंसने हंसाने को, 

जीवन का अंग बनाइए। 

अपने जीवन को ,

खुशहाल बनाइए। 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर ,जम्मू



गुरुवार, 18 मार्च 2021

जुनून

# नमन मंच 🙏🙏🙏

# कलमकार कुम्भ साहित्य संस्थान दिल्ली

# दिनांक - 18/03/2021

# दिन - गुरुवार

# विषय - जुनून

# विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता

बिना जुनून के होता न, कोई काम, 

सोये रहते सब करते आराम

बिना जुनून के कोई , पर्वत पर न चढ़ पाता, 

ना कोई बना पाता इतिहास । 

 बिना जुनून के कोई पढ़ नहीं पाता, 

परीक्षा में कैसे सफल हो पाता। 

बिना जुनून के कोई लक्ष्य न बनाता

मंजिल पर कैसे पहुँच पाता। 

बिना जुनून के ईश्वर नहीं मिलता, 

हृदय कमल कैसे खिलता। 

बिना जुनून के कोई न करता अविष्कार , 

अंधेरे में डूबा रहता संसार। 

बिना जुनून के योद्धा युद्ध लड़ नहीं पाता, 

कैसे वो वीर कहलाता। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

 जम्मू कश्मीर ,जम्मू

बचपन

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार बिहार इकाई

# दिनांक - 05/07/2021

# दिन - सोमवार

#विषय - बचपन

# विधा - स्वैच्छिक -छंदमुक्त कविता

कभी हंसता, 

कभी रोता है । 

बचपन ऐसे ही , 

व्यतीत होता है। 

माँ का आंचल ही, 

संसार लगता हैं । 

माँ की लोरी, 

 लगती बहुत प्यारी। 

दिल करता सुनते रहे, 

जिंदगी सारी। 

खिलौनों से, 

होता है रिश्ता। 

हर अपना, 

 लगता है फरिश्ता। 

दादा दादी का, 

 खूब मिलता प्यार। 

शरारतें करने में, 

हमेशा रहता ध्यान। 

सबको उलझाए रखते , 

अपने काम। 

गलती करने पर , 

मुंह छिपाना । 

जीभ निकालकर, 

 दोस्तों को चिढ़ाना। 

आगे पीछे घूमता, 

 सारा परिवार । 

जात पात की न होती, 

कोई बात । 

सब मिलकर, 

खेलते साथ। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू










बुधवार, 17 मार्च 2021

ओ मेरी माँ

# नमन मंच🙏🙏🙏 

# साहित्य बोध जम्मू कश्मीर इकाई

# दिनांक- 11/05/2021

# दिन- मंगलवार

#विषय- माँ

#विधा - स्वैच्छिक


ओ मेरी माँ, ओ मेरी माँ , 

सबसे सुंदर , सबसे न्यारी , 

लगती सबसे प्यारी है, 

ओ मेरी माँ.......... 

 पुचकारती है,  दुलारती है, 

प्यार से डांटती है, 

ओ मेरी माँ......... 

दिल की अच्छी है, मन की सच्ची है, 

हर पल प्यार लुटाती है, 

ओ मेरी माँ....... 

मेरा हर दुख , अपने पर ले लेती है, 

मेरे हर सुख का, कारण बनती हैं, 

ओ मेरी माँ........ 

मेरे मन की, हर बात समझती, 

जान लेती है, मेरे मन की हर बात, 

ओ मेरी माँ..................... 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर ,जम्मू



मीठी बोली है औषधि

 नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार महाराष्ट्र इकाई

# दिनांक - 31/05/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - मीठे बोले

# विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता

मीठे बोल होते  बहुत अनमोल, 

बिगड़े काज बना जाते , 

मन मुटाव हृदय से मिटा जाते। 

मीठे बोल करते हैं औषधि का काम, 

हृदय को पहुंचाते बहुत आराम। 

कटु बोलों से बनाएं रखे दूरी, 

कभी नहीं आएगी रिश्तों में दूरी। 

मीठी बोली मिश्री सी घूल जाती, 

सबसे हमारा प्रेम बढ़ाती । 

रिश्तों में कभी नहीं पड़ती दरार, 

हमेशा बढ़ता जाता सब में प्यार। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू







मेहमान

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान

# दिनांक - 17/03/2021 से 18/03/2019

# दिन - बुधवार से गुरुवार

# विषय - मेहमान

# विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता

 इंसान भी  संसार में मेहमान 

कहते सभी ग्रंथ महान है

कुछ समय की मोहलत लेकर आया 

फिर भी संसार में उत्पात मचाया

 संसार रूपी अतिथिशाला में प्यार फैलाता

नफरतों बैर भाव को मन से भुलाता

मेहमान वो ही सम्मान पाता है

जो अतिथिगृह को कर्मो द्वारा महकाता है

आना जाना उसी का ,सफल माना जाता

अतिथिशाला में प्यार के बीज बीजता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

 जम्मू कश्मीर ,जम्मू


मंगलवार, 16 मार्च 2021

कहो न प्यार है

 # नमन मंच 🙏🙏

# दिनांक - 05/05/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - love/प्यार

# विधा - कविता

दिल रहता बेचैन देखते तुम को हमेशा ढूंढते नयन 

कहो न प्यार है

मुलाकात कब होगी दिल पूछता तुमसे

कहो न प्यार है

इशक़ मोहब्बत का कब करोगे इकरार कब मिलेगा मुझको तुम्हारा प्यार

कहो न प्यार है

तरसते नयनों की कब प्यास बुझाओगे कब मिलन की बेला लाओगे

कहो न प्यार है

प्यार तुम्हारा पाने के लिए हूँ अधीर कब मिलोगे मेरे पीर

कहो न प्यार है । 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर ,जम्मू

जो बीत गयी सो बात गयी

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार अमेरिका इकाई

# दिनांक - 05/07/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - 

# विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता

जो दिन बीत गया

वापिस नही आता है

नादान ही उसका शोक मानता

बीता हुआ वक़्त 

नई सीख सीखता

नया इतिहास रचने के लिए

बुद्धिमान हमेशा आगे बढ़ता जाता । 

जो बीत गयी सो बात गयी 

उसको भूल जाना अच्छा

बीते हुए वक़्त से

कभी कोई पूर्ण नहीं होती इच्छा। 

जीत थी या हार

जीवन के लिए पाठ थी

उसके लिए खुशी या दुख मनाना 

 व्यर्थ में समय गंवाना है

जो बीत गया लौट कर ना आएंगे

नासमझ ही 

अपना कीमती वक़्त गंवायेगा


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू



दगा/ फरेब/धोखा

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य बोध मंच

# दिनांक - 16/03/2021

# दिन - मंगलवार

# विषय - दगा/फरेब/धोखा

# विधा - छंदमुक्त कविता

दूसरों को दिखावा करके दिखाना, 

धोखा ही तो है । 

सेवा के नाम पर , 

खुद का नाम प्रचारित करना, 

धोखा ही तो है। 

हिंदी के विकास की बात करना, 

भाषण अग्रेजी में देना, 

धोखा ही तो है। 

धर्म पर दंगा फसाद फैलना, 

खुद को समाज सेवी कहलाना, 

धोखा ही तो है। 

रिश्तों की मर्यादा न समझना, 

गिले शिकवे दिल में रखना, 

धोखा ही तो है । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू







सोमवार, 15 मार्च 2021

फाग महोत्सव: होली विशेष

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान महाराष्ट्र इकाई

# दिनांक - 16/03/2021

# दिन - मंगलवार

# विषय -  फाग महोत्सव: होली विशेष

# विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता 

  होली के दिन सबको रंग लगायेंगे

गिले शिकवे दिलों से मिटायेंगे

बेरंग ज़िंदगी रंग जायेगी

दुख सब भूल जाएगी

बैर विरोध सब दिलों से बिसरेगे

प्यार से सब गले मिलेगें

पानी की होगी बौछार

रंगों में रंग जाएंगे। 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह, जम्मू कश्मीर, जम्मू




खामोश हिंसा

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान मध्यप्रदेश इकाई

# दिनांक - 15/03/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - खामोश हिंसा

# विधा - स्वैच्छिक छंदमुक्त कविता

पशु पक्षियों के जीवन का , 

कोई मोल लगाएं। 

न जिह्वा के स्वाद के लिए , 

बेकसूरों को मारते जाए। 

इस हिंसा के खिलाफ, 

आती न कोई आवाज़

कोई नहीं देता 

इनको जीने का अधिकार। 

खामोशी से होते 

इन पर अत्याचार

 सब चलाते अपना कारोबार। 

पशु पक्षियों पर हो रही हिंसा 

बंद कराइये

अपना कर्तव्य खूब निभाइए। 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू





इच्छा शक्ति

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान गुजरात इकाई

# दिनांक - 15/03/2021

# दिन - सोमवार

# विषय -इच्छा शक्ति

# विधा - काव्य   

इच्छा शक्ति जीवन का आधार 

सारे सपने करती साकार

बिना इसके कुछ संभव नहीं

ना राह मिलती सफलता की

ना कोई ऐवरस्ट पर चढ़ पाता

ना सुनहरा इतिहास बना पाता

नदी न पहुँच पाती सागर में

अटक जाती पहाड़ों में

इच्छा शक्ति जीवन का सार 

इसके बिना सब जाते हार

यही मनुष्य को राह दिखाती हैं

मंजिल पर पहुँचाती है। 

स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू



प्रकृति

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान तमिलनाडु इकाई

# दिनांक - 15/03/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - प्रकृति

# विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता

फल फूल जीव जंतु, 

प्रकृति का अनुपम उपहार 

नदी ,नालों ,झरनों की धारा

स्वर करती अति प्यारा

पेड़ पौधों की छाया

दुख सारा भूलाया

फूलों की भीनी भीनी खुशबू से

महकाता सारा संसार

फलों का मीठा मीठा स्वाद

भरता चित में उल्लास 

प्रकृति ईश्वर की छाया 

हमेशा इसने माँ सा, 

प्यार लुटाया। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह ,

जम्मू कश्मीर, जम्मू






व्यक्ति निर्माण से सृष्टि निर्माण

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार जम्मू कश्मीर

# दिनांक - 15/03/2021

# नमन हिंददेश परिवार जम्मू कश्मीर

# विषय - व्यक्ति निर्माण से सृष्टि निर्माण

# विधा - स्वैच्छिक - आलेख

संसार की रचना ईश्वर ने अपनी मौज में की है और इस खेल को वो स्वयं देख रहा है हम इंसान ईश्वर की सर्वोतम रचना है ,जिसे ईश्वर ने अपने रूप में घडा़ है । संसार को सुंदर और खुशहाल बनाने के लिए मनुष्य का योगदान परमावश्यक है। इसके योगदान के बिना सुंदर और खुशहाल संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। 

मनुष्य में शुभ गुण का समावेश साहित्य, संगति, आध्यात्मिक ज्ञान द्वारा ही हो सकता हैं । साहित्य मनुष्य को समाज के साथ जोड़ता है और समाज की समस्याएं, रीति रिवाजों, कुरीतियों की जानकारी देता है ,और उसका ज्ञानवर्धन करता है धार्मिक साहित्य मनुष्य के अंदर दया, करूणा, सहनशीलता, क्षमाशील, भक्ति जैसे गुणों का संचार करता है और उसे सत्य मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। 

शुभ गुणों से ओतप्रोत मनुष्य ही खुशहाल और समृद्ध समाज की स्थापना कर सकता है और संसार की उन्नति में अपना योगदान दें सकता है। अच्छे और सच्चे मनुष्य द्वारा ही खुशहाल और समृद्ध समाज का निर्माण हो सकता है। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू


जीवन के रंग

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान उड़ीसा इकाई

# दिनांक - 15/03/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - जीवन के रंग

# विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता

जीवन के रंग एक जैसे नहीं रहतें, 

हमेशा रहते बदलते, 

दुख की छाया

सुख का रंग फीका कर जाती । 

सफलता का ऐसा गहरा रंग , 

जीवन रंगीन कर जाता, 

सफलता की खुशी , 

मन पर छाती, 

खुशहाल जीवन को कर जाती । 

 जीवन के रंगों में रंग जाना , 

हर से मुश्किल से, 

लड़ जाना, 

जीवन को ऐसा रंगीन, 

बनाते ये रंग। 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर जम्मू





मेहनत

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान तेलंगाना इकाई

# दिनांक - 15/03/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - मेहनत

# विधा - स्वैच्छिक छंदमुक्त कविता

मेहनत ही जीवन का आधार, 

इसके बिना कुछ नहीं मिलता। 

मजदूर जितनी मेहनत करता, 

उतना फल नहीं  पाता, 

फिर भी नींद सुकून की सोता 

पैसे के लिए कभी नही रोता। 

अमीर की मेहनत निराली, 

पैसों से तिजोरी भर डाली, 

चैन की नींद ना आती, 

होती कैसी हैरानी। 

बेईमानों का बोलबाला

मेहनत करने वालों का

निकाल रहे दिवाला 

मेहनत की जब करेंगे पहचान

बढ़ेगी तभी इनकी शान । 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर जम्मू





रविवार, 14 मार्च 2021

बाल कविता

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान मध्यप्रदेश इकाई

# दिनांक - 14/03/2021

# दिन - रविवार

# विषय - स्कूल

# विधा -बाल कविता 

स्कूल जाना मुझको भाता है, 

हर एक ज्ञान वही से पाता हूँ । 

अध्यापक नया नया पाठ पढ़ाते है, 

हर विषय का ज्ञान कराता है । 

नित्य अपना सबक सुनता हूँ, 

तभी सभी अध्यापकों का प्यार पाता हूँ। 

खेलकूद का जब पीरियड आता है, 

मौज मस्ती आलम छाता। 

अधयापक का मिलता है हमको साथ, 

भूल जाते हैं अपना घरबार । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू


शनिवार, 13 मार्च 2021

धरती माता

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान हिमाचल प्रदेश इकाई

# दिनांक - 13/03/2021

# दिन - शनिवार

# विषय - धरती

# विधा - पद्म ( छंदमुक्त) 

धरती माता करती पुकार, 

प्राकृतिक रूप से, 

ना करो खिलवाड़, 

हो जाओगे बर्बाद । 

पेड़ पौधों का न 

करो संहार

बिना आक्सीजन के

कैसे जी पाओगे । 

 रसायन खाद का

किया बहुत इस्तेमाल

जमीन सारी कर दी बर्बाद । 

खाने पीने के 

जब पड़ेगे लाले

तब अपने आप 

को कैसे संभाल पाओगे। 

नदियों में इतनी 

गंदगी फैलाई

चारों ओर तभी 

तबाही आई  । 

प्राकृतिक वस्तुओं से

ना करो छेड़छाड़ 

नहीं तो हो जाएगा

तुम्हारा विनाश। 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू












शुक्रवार, 12 मार्च 2021

होली के रंग अपनों के संग

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# नव साहित्य परिवार

# दिनांक - १३/०३/२०२१

# दिन - शुक्रवार

# विषय - होली के रंग अपनों के संग

# विधा - कविता

होली के दिन रंग लगाए, 

दिलों से नफरतें मिटाए । 

फीकी जिंदगी में भर दें रंग, 

सब नाचे एक दूसरे के संग। 

सब मिलकर होली मनायेंगे, 

प्रेम के रंग में रंग जाएगें। 

बैर विरोध का अब न कोई नाम होगा, 

सब के दिल में प्रेम का वास होगा। 

होली के रंग में सब रंग जाएंगे, 

प्रेम प्रीत के गीत हमेशा गाएंगे । 

 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर, जम्मू



स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू

नयन निहारें तुम्हें

# नमन मंच 🙏🙏🙏
# नव साहित्य परिवार
# दिनांक - 13/03/2021
# दिन - शनिवार
# विषय - नयन निहारें तुम्हें
# विधा - स्वैच्छिक 

नयन निहारें तुम को प्रियतम, 
कब पाऊँगी दरस तुम्हारा । 
पल पल बिरहा मुझे सताए , 
कांटों की सेज सा चुभता जाए। 
क्या करू प्रियतम जो तुम रीझ जाओ, 
अपना सुंदर दरस एक क्षण ही दिखाओ। 
संसार के भोगों  का नहीं कुछ मोल , 
तेरा नाम है रत्न अनमोल। 
हर घड़ी तेरा नाम ध्याऊँ, 
बिना देखा कैसे जी पाऊँ। 
एक लक्ष्य एक की मन में आस, 
मन में लग रही तेरे दर्शन की प्यास। 
नयनों की प्यास  कब  प्रीतम बुझाओगे, 
कब अपना दरस दिखाओगे । 

स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह 
जम्मू कश्मीर ,जम्मू


भस्म

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान उत्तराखंड इकाई

# दिनांक - १२/०३/२०२१

# दिन - शुक्रवार

# विषय - भस्म

# विधा - छंदमुक्त ( पद्म) 

तन पर भस्म लगाता है

श्रृंगार अपना उस से बनाता 

नंदी की करता सवारी

गले में माला नाग की सजाई

स्वभाव का थोड़ा भोला

जल्दी सुनता भक्त की पुकार

हर किसी से करता है प्यार

कैलाश का है वासी

करता है सब जग की रखवाली

करता दुष्टों का संहार 

बनता है दीन दुखियों का सहारा

लीलाएं करते है न्यारी

लगती है सब को प्यारी । 

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर , जिला - जम्मू








शिक्षा

# नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक 09/06/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - शिक्षा का महत्व

# विधा - स्वैच्छिक


शिक्षा की मशाल,

 करती है अज्ञान का नाश, 

पढ़ लिख जब जाएंगे, 

अपना फर्ज निभायेंगे , 

देश का जन जन ज्ञान पायेगा, 

देश उन्नति करता जाएगा

शिक्षा के बिना ज्ञान नहीं, 

ज्ञान के बिना होता कोई काम नहीं, 

शिक्षा ही सहारा है, 

इसके बिना सब कोई हारा, 

शिक्षा हमें नया आयाम देगी, 

ज्ञान का सुनहरा पैगाम देगी, 

शिक्षा बिना इंसान पशु कहलाता, 

इसके बिना आगे बढ़ नहीं पाता, 

शिक्षा सब के लिए जरूरी, 

बिना इसके न होती ख्वाहिश पूरी । 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर , जिला जम्मू



अध्यात्म हमारे जीवन को आसान बनाता है

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार जम्मू कश्मीर

# दिनांक - 12/03/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय -अध्यात्म हमारे जीवन को आसान बनाता है

# विधा - छंदमुक्त कविता

इर्ष्या द्वेष की भावना मन से मिट जाती है, 

सब से प्रेम बन जाता है, 

निष्काम भाव से सेवा कमाता है, 

अध्यात्म हमारे जीवन को आसान बनाता है। 


मानवता ही मानवता रह जाती है, 

धर्म का सही अर्थ समझ आता है, 

सब में ईश्वर नज़र आता है , 

अध्यात्म हमारे जीवन को आसान बनाता है । 


 अहं भाव का अंतर से होता नाश है, 

तूं तेरी के राग संग बन जाता है जीवन का साथ, 

दीन दुखियों का बनता है सहारा, 

मोह माया के जाल से हमेशा करता किनारा

अध्यात्म हमारे जीवन को आसान बनाता है। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू






आशा की किरण

  नमन मंच 🙏🙏🙏

#साहित्य बोध महाराष्ट्र इकाई

# दिनांक - 16/06/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - आशा की किरण

# विधा - छंदमुक्त कविता

जीवन की निराशा को हर लेने के लिए, 

मेहनत ने जगाई है आशा की किरण । 

जीवन को सफल बनाने के लिए, 

हमेशा कुछ कमाने के लिए, 

अंधकार में रोशनी देती है आशा की किरण। 

जब निराशा छाती है, 

खून के आंसू रूलाती है, 

बेबसी का पुतला बनाती है, 

अपनों का साथ, उनका हम पर विश्वास, 

बनता है जीवन में आशा की किरण । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू






साइकिल

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान तेलंगाना इकाई

# दिनांक - 12/03/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय - साइकिल

# विधा - कविता

चोरी चोरी  पापा का, 

साइकिल चलाता था

बडा़ मजा आता था

नित्य घूमने जाना

मुहं से गाना गुनगुना

साइकिल की सवारी का अलग है मजा

कोई नहीं होती थी चालान की सज़ा

दोस्तों के साथ साइकिल की रेस हूँ लगाता

जीतने पर मुफ़्त की कुल्फी हूँ खाता

मौज मस्ती का बढियां साधन है साइकिल

तेल के पैसे बचाता है साइकिल। 

 स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

 जम्मू कश्मीर, जम्मू





गुरुवार, 11 मार्च 2021

जीवन का सफ़र

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार जम्मू कश्मीर

# दिनांक - 12/03/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय - जीवन का सफ़र

# विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता)  

जीवन के सफर में कई उतार - चढ़ाव आते, 

जो हमें नया अनुभव करा जाते हैं । 

दिन रात आगे बढ़ते जाना है, 

संकट से कभी नहीं घबराना है। 

दुख सुख की छाया हमेशा भ्रमित करती है, 

अनेक रूकावटें जीवन में लाती है। 

जीवन का सफर कभी भी किसी का, 

ना आसानी से कटता है। 

हर किसी को निंरतर आगे बढ़ने के लिए,

संघर्ष करना पड़ता है। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जिला - जम्मू


लेखक के कर्तव्य

 #नमन मंच 🙏🙏🙏🙏🙏 

#हिंददेश परिवार जम्मू कश्मीर

# दिनांक - 11/03/2021

#विषय -लेखक के कर्तव्य

#विधा - आलेख

लेखक ने कभी भी झूठ नहीं लिखना चाहिए । हमेशा सत्य समाज के सामने लाना चाहिए। कभी भी किसी धर्म पर गलत टिप्पणी नहीं करनी चाहिए ।  लेखक को हमेशा धर्मनिरपेक्षता का राह अपनाना चाहिए और सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान करना चाहिए। 

लेखक को कभी भी किसी राजनीतिक पार्टी को आधार बनाकर

नहीं लिखना चाहिए । उसे समाज में फैली कुरीतियों का अपने साहित्य के माध्यम से विरोध करना चाहिए। समाज के निर्माण में अपना योगदान देना चाहिए। 

उसकी लेखनी ही समाज को जागृति कर सकती है और समाज को उन्नति की ओर ले जा सकती है। 

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू












तमन्ना

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार जम्मू कश्मीर

# दिनांक - 11/03/2021

# दिन -  बृहस्पतिवार

# विषय - तमन्ना

# विधा -  छंदमुक्त कविता

तमन्ना थी अक्षरों के शब्द बनाता, 

 ख्यालों की दुनिया में खो जाता। 

आकाश की भरता उड़ान , 

बढ़ जाता मेरा भी कुछ मान। 

कवि बनने की तमन्ना मन जागी, 

बन गया मैं शब्दों का साथी। 

सोचा था समाज की समाज कलम ✍ से करूँगा, 

शब्दों के द्वारा दुख उनके हरूंगा । 

मेरी तमन्ना ने भर ली थी उड़ान , 

अब मैं बन ही जाऊँगा कवि महान। 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू


भोले बाबा की बारात

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य बोध झारखंड इकाई

# दिनांक - 12/06/2021

# दिन - शनिवार

# विषय - 

# विधा - गीत

भोले बाबा की बारात ,लेकर चल पडी सबको साथ

नंदी की सवारी लगती बहुत प्यारी


गले में सांप की माला है सजाई, तन में भस्म लगाई

यह अजीब बारात कहाँ से है आई

भोले बाबा की बारात....... 

चारों ओर गूंज रहे हैं

बम बम भोले के जयकारे 

लगते सब को बहुत प्यारे

भोले बाबा की बारात...... 

राजा हिमालय ने खुशी है जताई

फूलों की बर्षा बारात पर कराई

भोले बाबा की बारात..... 

उमा शंकर के लग्न की

सब दे रहे बधाई

मेना रानी ने बहुत खुशी है मनाई

भोले बाबा की बारात. ........ 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जिला जम्मू

बुधवार, 10 मार्च 2021

महाशिवरात्रि

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान

# दिनांक - ११/०३/२०२१

# दिन - बृहस्पतिवार

# विषय - महाशिवरात्रि

# विधा - छंदमुक्त कविता

सती माता का पुनर्जन्म हुआ, 

पार्वती रखा गया शुभनाम  । 

शिव पाने के लिए हुई अधीर, 

झेली न जाए बिरहा की पीर। 

रूप द्वारा शिव को रिझाने का किया यत्न, 

सब असफल हुए सारे प्रयत्न। 

गौरीकुंड में जाकर शिव की अराधना, 

जल्दी ही पूर्ण हुई उनकी कामना। 

फाल्गुन मास  कृष्ण पक्ष की चुर्तदशी का दिन बहुत खास, 

माता पार्वती के हृदय में भर गया आनंद उल्लास। 

शिव शंकर की पहुँच गई बारात, 

लेकर सभी को साथ। 

माता पार्वती से जोड़ लिया नाता, 

यश दोनों का सभी ने गाया। 

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर ,जम्मू




कृष्ण सुदामा मित्रता

  नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्यिक महफ़िल परिवार

# दिनांक - ११/०७/२०२१

# दिन - रविवार

# विषय - मित्रता 

# विधा - परिचर्चा 

एक दिन गौरव और अरूण ने दूरदर्शन में श्री कृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग देखा। अब उनके मन में श्री कृष्ण और सुदामा की मित्रता के बारे में अधिक जानने की जिज्ञासा पैदा हुई । 

जिज्ञासा बश अपने अधयापक के घर पहुँच गए, अध्यापक ने आने का कारण पूछा, दोनों ने स्पष्ट शब्दों में बता दिया।  अध्यापक ने कहा मुझे खुशी हुई कि तुम दोनों को श्री कृष्ण और सुदामा जी की मित्रता के बारे में जिज्ञासा है। 

अध्यापक ने बताना शुरू किया श्री कृष्ण और सुदामा जी  बचपन से ही घनिष्ठ मित्र थे, आपस में दोनों का बहुत प्यार था। दोनों ने गुरु संदीपनी से शिक्षा ग्रहण की । शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात श्री मथुरा आ गए और सुदामा जी अपने गाँव वृदांवन लौट आए ।  

कुछ बर्षो बाद श्री कृष्ण द्वारिका नगरी के राजा बन गए और सुदामा गरीबी में जीवन बिताने लगा। सुदामा की पत्नी वसुंधरा ने सुदामा को श्री कृष्ण के पास जाने के लिए मजबूर किया क्योंकि वह भी गरीबी से तंग आ चुकी थी। 

सुदामा नंगे पांव श्री कृष्ण से मिलने के लिए पड़ता है, श्री कृष्ण को जैसे ही सुदामा के आने का समाचार मिलता है, वह भी नंगे पाँव सुदामा को मिलने के लिए दौड़ पड़ते हैं और उसे अपने गले से लगा लेते हैं। दोनों के नयनों से प्रेमाश्रु की धारा बहने लगती है। श्री कृष्ण ने सुदामा की  बहुत सेवा करते हैं और सुदामा को बताये बिना सब कुछ प्रदान कर देते हैं । जब सुदामा घर पहुंचाता है तो अपनी झोपड़ी की जगह द्वारिका नगरी जैसा महल देखता है तो अपने मित्र श्री कृष्ण का मन ही मन कोटि कोटि धन्यवाद करता है। मेरा मित्र कितना महान है जिसने एहसान जताये बिना मेरे लिए सब कुछ कर दिया। 

अध्यापक से पूछने लगे, श्री मान, श्री कृष्ण ने सुदामा को क्यों नहीं बताया कि वह  उनकी मदद कर रहे हैं । अध्यापक, बेटा सच्चा मित्र कभी एहसान नही जताता है हमेशा स्नेह बश मित्र की सहायता करता है। 

  अरूण और गौरव को सच्ची मित्रता का अर्थ समझ आ गया । 

स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर ,जम्मू




हास्य कविता

  नमन मंच 🙏🙏🙏

#  साहित्य बोध मंच

# दिनांक - 10/03/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - हास्य

# विधा - कविता 

गंजे को बोलो , 

कंघी खरीद लें, 

बालों की जटा न बन जाए । 

कुंवारा को बोलो , 

शादी मत करना

पत्नी की डांट सुननी पड़ेगी। 

कंजूस की कंजूसी देखों, 

मक्खी भी चूसकर खा गया। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर, जम्मू



सपना

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहिति्यक महफ़िल

# दिनांक - 31/05/2021

# विषय - सपने/ ख्वाब

# विधा - कविता

मैं हर दम सपनों के हार परोता हूँ, 

नींद में भी कभी नहीं सोता हूँ । 

सपना मुझे सोने नहीं देता, 

आराम में आराम लेने नहीं देता। 

वो सपना ही क्या जो सोने दे? 

नींद आराम की लेने दें। 

सपना मुझे जगाता है 

मंजिल तक पहुँचने के ,नए राह दिखाता है। 

मंजिल तक पहुँचने की चाह , 

मुझे अथाह परिश्रम कराती है। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू





गलत कार्यों को रोको

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान असम

# दिनांक - 12/03/2021

# दिन - बुधवार

# विषय -गलत कार्यों को रोको

# विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता) 

अपशब्दों का न करो इस्तेमाल, 

सबसे करो प्यार से बात, 

कूड़ेदान का करो इस्तेमाल, 

रोग न आएंगे तुम्हारे द्वार, 

सब के धर्म का करो सम्मान, 

तुम को मिलेगा सब का सम्मान, 

स्त्रियों का करो आदर सम्मान

सब स्त्रियाँ है बेटी ,माता ,बहन, के समान । 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर, जम्मू





महाशिवरात्रि

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान उतराखंड इकाई

# दिनांक - 10/03/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - महाशिवरात्रि

# विधा -  स्वैच्छिक ( छंदमुक्त कविता) 

 

नंदी की सवारी कर, भस्म लगाकर

महादेव की चल पडी़  बारात, 

लेकर भूत, प्रेतों, देवी देवताओं को साथ, 

गीत संगीत की आवाज से गूंजा आकाश पाताल लोक 

राजा हिमाचल ने फूल बरसाए, 

मैना रानी ने दीप जलाएं, 

गोरा को ब्याहने देवों के देव महादेव आए, 

माता पार्वती की तुलना न कोई

महादेव के समान न कोई

माता पार्वती भगवान महादेव का सुंदर रूप, 

सारी दुनिया भूल गयी अपना बजूद । 

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर, जम्मू





मंगलवार, 9 मार्च 2021

इंतजार

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान पंजाब इकाई

# दिनांक - 10/03/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - इंतज़ार

# विधा - स्वैच्छिक ( छंदमुक्त कविता) 

प्रियतम इंतज़ार में तेरे, 

नयन तरस रहे है, 

हर आंसू को पी रहे हैं, 

कब मेरी प्यास बुझाओगे, 

कब अपना दर्शन दिखाओगे । 

इंतज़ार में तेरे, 

भूख प्यास का कोई न ध्यान रहा, 

अब दुनिया से मेरा कोई न काम रहा, 

तेरे इश्क में रोई हूँ, 

तेरे ख्यालों में हमेशा खोई हूँ। 

अब तो कुछ  प्रीतम दया करो 

बिरहा के क्षणों को ,

अपने कोमल प्रेम का एहसास ही दो करा । 

 इंतज़ार में तेरे आंखों की रोशनी, 

अंधेरे में बदल गयी, 

हर आंसू को तेरा प्रेम रस मानकर पी गयी । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

 जम्मू कश्मीर, जम्मू





 


नर हो, ना निराश करो मन को

शीर्षक-नर हो, ना निराश करो मन को

# विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता) 

नर हो, ना निराश करो मन को, 

हमेशा तुम आगे बढ़ते रहो ,

वीर की तरह । 

निराशा कभी रोक सकती नहीं, 

जिसने कदम बढ़ा लिया ,

मुश्किल राहों की ओर अपना रास्ता बना लिया। 

युद्ध लड़ा जाता है हौसलों से, 

हथियार सिर्फ साधन  है । 

नदी आगे बढ़ने के लिए, 

मार्ग स्वयं बनाती, 

तभी तो अपने लक्ष्य को पाती। 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

 जम्मू कश्मीर ,जम्मू




तन्हाई

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान तमिलनाडु इकाई

# दिनांक - 09/03/2021

# दिन - मंगलवार

# विषय - तन्हाई

# विधा - कविता 

तन्हाई मुझे लगती है विच्छु के डंक की तरह, 

दर्द देती जलन देती बेइंतहा  । 

इसका कोई ईलाज नहीं, 

न कोई दवा, 

जो इस रोग खत्म को कर दें । 

ये रूलाती है तड़पाती है, 

जीवन को निढाल बनाती । 

हर पल आंसू सजाये बैठी है, 

 सिर्फ उन्हें बहाने का मौका ढूंढती है । 

तन्हाई ही कदर करना सिखाती है, 

अपने हर रिश्ते की, 

जिसे हमने नाकाम कर दिया। 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू


महक

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान गुजरात इकाई

# दिनांक - 07/04/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - महक

# विधा - कविता

 फूलों की महक से, 

दिल हुआ गुलज़ार,  

समय कैसे बीत गया ,

उसका रहा न ख्याल। 

ऐसी सुंदर महक थी, 

भुला दिये दुख हज़ार, 

हृदय के स्वपन लगता है, 

आज हुए साकार। 

दिल महक लेता है ,

अच्छे बुरे ख्यालों की, 

चरित्र उसी का प्रतिबिंब होता, 

भावनाओं की महक करती है काम, 

शब्दों को काव्य बनाने का 

महक गुणों की करती काम

अच्छा चरित्र बनाने का

संसार के काम आने का । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

 जम्मू कश्मीर, जम्मू





पवित्र हृदय उतम तीर्थ

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार डिब्रूगढ़ इकाई

# दिनांक - 10/06/2021

# दिन - बृहस्पतिवार

# विषय - पवित्र हृदय उतम तीर्थ

# विधा - स्वैच्छिक( आलेख) 

मनुष्य की पहचान विचार पर निर्भर करती है, उसके विचार सकारात्मक है या नकारात्मक । विचार का अच्छा या बुरा होना, हमारी संगति पर निर्भर पर करता है। हम अच्छे लोग की संगति में है या बुरे लोगों की संगति में। जिस तरह की संगति होगी उसी तरह का सीधा प्रभाव हमारे हृदय पर पड़ता है । 

हृदय को पवित्र करने का साधन है अच्छे लोगों की संगति, धार्मिक ग्रन्थों का अध्ययन , अच्छे विचारों को ग्रहण करना और बुरे विचारों का त्याग करना। सिमरन साधना से मन ध्यान में टिकता है और मन के इसी टिकाऊपन को सहज समाधि भी कहा जाता है । 

जब मन विकारों से रहित हो जाता है तब तीर्थ के समान पवित्र और पावन हो जाता है।  इसके अंदर से मैं मेरी की भावना का नाश हो जाता है और तूं तेरी की भावना समाहित हो जाती है। ऐसी अवस्था में  मनुष्य का हृदय तीर्थ के समान सब का कल्याण करने का कार्य  करता है और लोककल्याण को ही जीवन का लक्ष्य मानता है । ऐसे हृदय से निकले शब्द काव्य का रूप धारण कर लेते हैं ,और लोककल्याण का कार्य करते हैं। 


 स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू










सोमवार, 8 मार्च 2021

नारी है नारायणी

 नमन मंच 🙏 🙏🙏

#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 18/06/2021

दिन -शुक्रवार

विषय - महिला उत्थान के लिए

विधा - छंदमुक्त कविता 

नारी है नारायणी , 

हिम्मत जिसने कभी नहीं हारी । 

हर कष्ट को सह गयी

हर आंसू को पानी समझकर पी गयी । 

 अब भी वह झासी की रानी है, 

दास्ताँ नहीं पुरानी है । 

अपने हक के लिए लड़ जाएगी, 

जब खुद की आन पर बने , 

प्राण अपने न्यौछावर कर जाएगी। 

कमजोर न इसको कभी न समझना

तलवार उठाकर हर परिस्थिति से लड़ जाएगी। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू




नारी तेरे रूप अनेक

शीर्षक-  नारी तेरे रूप अनेक

# विधा - छंदमुक्त कविता 

नारी तेरे रूप अनेक, 

अगणित तेरी कुर्बानियां। 

बेटी के रूप में मान है बढ़ाती, 

मायके के सम्मान के लिए, 

अनेकों दुख सह जाती। 

बहन है तूं भाई की, 

राखी तक सीमित नहीं रह जाती, 

भाई की रक्षा के लिए हर जोखिम है उठाती। 

पति का हर मुश्किल में साथ निभाती है , 

अर्धांगिनी कहलाने का सम्मान तब ही पाती है। 

जगत जननी तूं पालिका, 

हर परिस्थिति में बच्चों के लिए लड़ जाती । 

 तेरी स्तुति करने लगे, 

बन जाएंगे ग्रंथ अपार, 

मेरी जिहवा एक है, 

तेरे परोपकार कई हज़ार। 

 

स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू



रविवार, 7 मार्च 2021

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

# विषय - माँ तेरे बहुत परोपकार 

# विधा - छंदमुक्त कविता

माँ तेरे बहुत परोपकार, 

गिनती करने लगूँ, 

लग जाएंगे जन्म हज़ार  । 

अमृत रूपी दुध तुम्हारा, 

बनता प्रथम आहार, 

तेरे से ही सीखते अच्छे संस्कार। 

जीवन में पग- पग में देती सहारा, 

तेरा बिना मुझे कुछ लगता नहीं प्यारा । 

तेरी ममतामयी छाया का प्रताप, 

दुख जाते हैं क्षण में भाग । 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह जम्मू कश्मीर ,जम्मू

हौंसले बुलंद हो

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# नव साहित्य परिवार

# दिनांक - ०७/०३/२०२१

# दिन - रविवार

# विषय - हौसले बुलंद हो

# विधा - छंदमुक्त कविता

हौंसले बुलंद हो

कंधों में जान हो

रोक कोई सकता नहीं

चलते तूफान को । 

आत्मविश्वास हो

श्रम ही कर्म हो

विघ्न कोई रोक सकता नहीं

नदी के बहाव को  । 

 परिश्रम का साथ हो

साहस अपार हो

रोड़ा कोई रोक सकता नहीं

चलते हुए राही को

हार जीत का न प्रश्न हो

कर्म करना ही धर्म हो

हर कोई मान लेता 

परिश्रम के प्रभाव को। 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू



शनिवार, 6 मार्च 2021

धन्यवाद🙏💕

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान जम्मू कश्मीर इकाई

# दिनांक - ०७/०३/२०२१

# दिन - रविवार

# विषय - धन्यवाद🙏💕

# विधा - छंदमुक्त कविता

जम्मू कश्मीर में आई खुशियों की बहार

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साहित्य संगम संस्थान ने दिया इकाई का उपहार

मंदिरों के शहर से गूंजेगी शब्दों की आवाज़

सब के चित में भरेगी आनंद उल्लास

🌷🌹🌻🌼🌸🌺🌷🌹🌻💐🌼🌻

झेलम और चंद्रभागा की निर्मलधारा

कवियों के मन से बहेगी ज्ञान की धारा

काव्य रूपी केसर से महकेगा संसार

जम्मू कश्मीर इकाई रचेगी काव्य अपार । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर ,जम्मू





नर नारी एक समान

# विषय - नर नारी एक समान

# विधा - छंदमुक्त कविता

 नर नारी एक समान

दोनों है सृष्टि के प्राण

दोनों है सृष्टि के आधार

दोनों से मिलकर बनता है परिवार

एक दूसरे का बनते सहारा

रिश्ता इनका बहुत प्यारा

पुरूष प्रकृति का  सुंदर मेल 

मिलकर खेलते जीवन का खेल 

नर नारी एक समान

एक दूसरे में बसते प्राण

घर जो पुरूष बनाता है

वो घर नारी द्वारा संवारा जाता है

दोनों मिलकर करते है काम

जीवन जीना हो जाता है आसान 

पुरूष मेहनत करके पैसा कमाता

वो धन नारी द्वारा सोच समझकर खर्चा जाता है

दोनों के योगदान में नहीं कोई अंतर

दोनों  जीवन के कार्य करते निरंतर। 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू




सच का राह

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान 

# दिनांक - 07/03/2021

# दिन - रविवार

# विषय -स्वैच्छिक (सच का राह) 

# विधा - स्वैच्छिक ( छंदमुक्त कविता) 

सच का राह है मुश्किल

हर कोई चल नहीं पाता

दिल की बात रहती दिल में

किसी से कह नहीं पाता

सब को अपना मैंने मीत बना लिया

जीवन की हर मुश्किल को सीख बना लिया 

कांटों भरे राहों पर चलकर

हर कष्ट को अपना गीत बना लिया। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू



ओस की बूंद

 नमन मंच 🙏🙏🙏🙏🙏

कलम बोलती हैं ✍ समूह

विषय: ओस की बूंदे

दिनांक: 06/03/2021

दिवस : शनिवार

विधा:  छंदमुक्त कविता 

नव जीवन का देती संदेश 

दिखती सुंदर श्रेष्ठ

मोती सी चमकती है 

सब पेड़ों पौधों में जीवन की आस है भरती

छोटी सी ओस की बूंद 

पेड़ पौधों की बनती है आस 

प्यास बुझाने का करती है प्रयास

हीरे सी दमकती

मोतिया सी  चमकती ओस। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर, जम्मू






भरोसा/विश्वास

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्यिक महफ़िल

# दिनांक - 24/10/2021

# दिन - बृहस्पतिवार

# विषय - विश्वास/ भरोसा/ ऐतबार

# विधा - पद्म 

मेरा विश्वास कभी न खोये, 

चाहे मुसिबतें करोड़ों होये, 

हर सकंट में थामना मेरा हाथ, 

कभी न छोड़ना मेरा साथ, 

कोई परिहास न मेरा करें, 

तेरा नाम मैं हृदय परोई

मेरी आस तूं, 

मेरा विश्वास तूं, 

मेरे दिन और रात तूं, 

मेरी जीवन कथा की सार तूं , 

ज्ञान का आलोक तूं, 

ज्ञान आलोक में छिपा महा प्रकाश तूं, 

मेरी इच्छाओं का पूर्ण करने का विश्वास तूं, 

मेरी भक्ति तूं मेरी साधना तूं, 

मेरे हर कर्म का अहसास तूं । 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू 




बेटा

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान उतराखंड इकाई

# दिनांक - ०६/०३/२०२१

# दिन - शनिवार

# विषय - बेटा

# विधा - पद्म

घर में जलाये चिराग

सब के मन में भरा खुशी उल्लास 

  नए सदस्य का घर में आगमन 

पूरे करेगा  हमारे ख्वाब 

भरेगा जीवन में आनंद उल्लास

बेटा मेरा बहुत प्यारा 

लगता सबको बहुत न्यारा

मीठी मीठी सी सबसे करता बातें

बोल उसके सब के मन को भाते

बुढ़ापे की बनायेगा वो लाठी 

बैठता हूं उसको घोड़े की काठी

पढ़ लिखकर नाम कमायेगा

परिवार के मान को बहुत बढ़ायेगा। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू





शुक्रवार, 5 मार्च 2021

जैसा खायें अन्ना, बने वैसा मन

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार राजस्थान

# दिनांक - 05/03/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय - जैसा खायें अन्न, वैसा बने मन

# विधा - छंदमुक्त कविता

जैसे खाना खायोगे वैसा ही फल पाओगे

शुद्ध शाकाहारी भोजन खाओ 

तन के सारे रोग भगाओ 

मांसाहार का कभी न करो खाना पाना

हृदय शुद्ध रहेगा आठों याम

मेहनत की रूखी सूखी खाओ 

इसमें ही ईश्वर का शुक्र मनाओ

बेईमानी के पैसे का कभी न खाओ अनाज

भुगतने पड़ेगे रोग पचास

शाकाहारी भोजन की सबसे बड़ी बात

सुरति जुड़ी रहे हरि के साथ

भोजन की एक  कथा सुनाऊँ

एक संयासी की व्यथा बताऊँ

बेईमान के घर कर लिया भोजन

धर्म कर्म उससे भाग गया सौ योजन

उठा लाया चम्मच सोने का

रास्ते अपने को धिक्कारता आया

समझ गया भोजन की कहानी

पापी के घर खाना खाया

तभी तो खोटा कर्म कमाया

जैसा भोजन खाओगे वैसा ही कर्म कमाओगे। 


स्वरचित एवं मौलिक  

अमरजीत सिंह

 जम्मू कश्मीर ,जम्मू






बीज मैं शब्दों के बोता हूँ

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

साहित्य संगम संस्थान तमिलनाडु इकाई

# दिन - शुक्रवार

# विषय - बीज मैं शब्दों के बोता हूँ

# विधा -  कविता

बीज मै शब्दों के बोता हूँ

काव्य रूपी वृक्ष तभी उग पाता है

छाया उसकी देती सुख अपार

मिट जाते संसारिक ताप

फल मीठा मिठास है गोलता

कड़वे हुए विचारों पर

चित चेतना को जागृत करता

अपने अर्थ विचारों से

अंधविश्वासों का करता अंत

अपने नवीन विचारों से

शब्दों के बीज की शक्ति ऐसी

जो चीर दें फैले हुए अंधकारो को । 

स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू







बेरूखी

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान तेलंगाना इकाई

# दिनांक - ०५/०३/२०२१

# दिन - शुक्रवार

# विषय - बेरूखी

# विधा -  कविता

तेरी बेरूखी किस लिए पिया

मैने जान जिगर  तुझे दिया

मेरे सपनो का सार तूं ही

मेरे दिल की धड़कन तूं ही

मेरा हर अरमान तेरे लिए

तूं मेरी जिंद जान पिया 

खफ़ा क्या मुझ से हुई है

जो तो रूठा पिया

तेरी बेरूखी मेरे लिया सजा है

तेरे बिन जीने का क्या मजा है 

मुझे मेरी गलती तो बता पिया

बिना गलती के बेरूखी का विष न पिला पिया

बिना गलती के सज़ा मैंने पाई है

आंख रोई है आंसू बहाया

मुझे मै ही ऐसी कमी है पिया

तेरे दिल से बेरूखी उतर न पाई है। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू


जागरूकता

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# ग्वालियर साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच

# दिनांक - १३/०३/२०२१

# दिन - शनिवार

# विषय - जागरूकता

# विधा - लघुकथा

पुरानी रूढ़िवादी विचारधारा को बदलना आसान नहीं है । यह रूढ़िवादी विचारधारा मनुष्य के हृदय में धस बस गई। लड़की लड़का में भेदभाव आज भी किया जाता है। 

रीना की बहू पेट से उसे अब रीना को यह चिंता सता रही है, बहू के पेट में पल रहा बच्चा लड़का है या लड़की। रीना बहू को डाक्टर के पास ले जाकर बच्चे की जांच करवाने के  लिए मजबूर करती है लेकिन बहू किसी कीमत पर जांच नहीं करवाना चाहती।  

अहिस्ता अहिस्ता यह बात पूरे घर में फैल गई है ।  सभी रीना को समझना शुरू किया, रीना की बड़ी बेटी सुनीता ने मां को समझाया कि माँ लड़की लड़के में कोई अंतर नहीं है लडकियाँ  आज लड़कों के साथ कंध से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं।

माँ आप जानती नहीं हो बच्चे की गर्भ में लिंग जांच करवाना कानून जुर्म है इसके लिए सजा का भी प्रावधान है तब भी आप ऐसा करने जा रही हो । 

अब रीना सोच में पड़ गई और अपनी बहू से अपनी गलती की माफ़ी मांगने लगी । सुनीता ने अपनी सूझबूझ से मां की सोयी हुई सोच को जागृति किया और उसे सही रास्ता दिखाया। 

स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू




जाने कहाँ गए वो दिन


#विषय - जाने कहाँ गए वो दिन

#विधा - छंदमुक्त कविता

बचपन में खाना पीना

बात बात पर रूठ जाना 

भाई बहन से छीन छीन के खाना

माता पिता का हमें मनाना

जाने कहाँ गए वो दिन। 

 पाठशाला में करनी मस्ती 

बात बात पर आती हंसी

दो रुपये का कुलचा खाना

एक दूसरे को बहुत चिढ़ाना

जाने कहाँ गए वो दिन। 

  महाविद्यालय विश्वविद्यालय में पढ़ने जाना

 रंग बिरंगे सपने सजाना

पूरा करने के लिए हर जोखिम उठाना 

बेपरवाह बिचरते जाना

जाने कहाँ गए वो दिन। 

नौकरी पेशे पर जाना

घर के लिए हर फर्ज निभाना

परिवार की जरूरतों का रखना ध्यान

बनी रहे उनकी मुस्कान

जाने कहाँ गए वो दिन। 

बुढ़ापे में कमजोर हुआ शरीर

कोई पूछता नहीं अब मेरा हाल

जिनके लिए कमाएं हज़ार लाख

वो नहीं अब मेरे साथ  

जाने कहाँ गए वो दिन। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू



सत्य

 नमन मंच 🙏🙏🙏

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साहित्य सृजन संस्थान।

सृजन के सारथी-41

दिनांक- 03/03/2021 

विषय -सत्य 

विधा- कविता 

सत्य का कोई मोल नहीं

उसका कोई तोड़ नहीं

सत्य ही ईमान है

सत्य ही भगवान है

सत्य कभी झुकता नहीं

सत्य कभी छिपता नहीं 

सत्य ही जीवन का सार है

सत्य ही करता परोपकार

सत्य का पालन करता

वही सच्चा इंसान है। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू




     

गुरुवार, 4 मार्च 2021

गुरु अर्जुन देव अमर बलिदानी

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान तेलंगाना इकाई


# साहित्य संगम संस्थान तेलंगाना इकाई     


# दिनांक - १०/०३/२०२१


# दिन - बुधवार


# विषय - अराधना


शीर्षक - गुरु अर्जुन देव 


# विधा - छंदमुक्त कविता


गुरु अर्जुन देव अमर बलिदानी


नित नित शीश झुकेगी दुनिया याद कर उनकी कुर्बानी


गुरु रामदास के हीरे


माता भानी के प्यारे


  लगते सबको बहुत प्यारे


जात पात को दिया धिक्कार


संसार पर किया परोपकार


दीन दुखियों का बने सहारा


यश गाता जग सारा


रख दी हरिमन्दिर की नींव


वहाँ गाए जाते हैं प्रभु के गीत


संगत पंगत का दिया नारा


अज्ञानता का भ्रम मिटाया 


जालिम हकुमत ने जुल्म बहुत कमाया था , 


सच्चे सतगुरू को गर्म लौह पर बिठाया था


गर्म गर्म रेता उनके सिर पर गिराया था, 


वाहिगुरू वाहिगुरू वाहिगुरू जपते शहीदी पा गयेे

सच्चे धर्म का पौधा लगा गये । 


स्वरचित एवं मौलिक 


अमरजीत सिंह


जम्मू कश्मीर ,जम्मू



 


बेरोजगारी

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# गूंज क़लम की साहित्यिक मंच कटिहार इकाई

# दिनांक - 08/11/2021

# दिन - सोमवार

# विषय -बेरोजगारी

# विधा - कविता


बेरोजगारी है समस्या भारी, 

रोती है दुनिया सारी । 


घरों में नित होती लड़ाई, 

कैसे बढ़ेगी घर की कमाई। 


दिल में रहती है हर दम चिंता, 

कहीं न कोई इसका हल है दिखता। 


बहुत कर ली पढ़ाई, 

अब तक नौकरी नहीं मिल पाई। 


जब से घर में नई दुल्हन आई, 

 कभी न उसे शहर की सैर कराई । 


बच्चे अब कैसे करेंगे अब पढ़ाई, 

बेरोजगारी ने मां बाप की चिंता बढ़ाई । 


कैसे भरेंगे हमारे  बच्चों के सपने उड़ान , 

इतनी महंगाई में बच्चे पढ़ाने नहीं आसान। 


बेरोजगारी ने सारी समस्या बनाई, 

कोई तो इसका हल बताओ मेरे भाई। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जिला  - सांबा , जम्मू कश्मीर












बदल गया इंसान

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान तमिलनाडु इकाई

# दिनांक - ०४/०३/२०२१

# दिन - बृहस्पतिवार

# विषय - बदल गया इंसान

# विधा - पद्म ( छंदमुक्त कविता) 

मैं मेरी की बढ़ गई भावना

पूरी करना चाहता है हर कामना

हर पल रखता अपना ही ध्यान

इतना बदल गया है इंसान । 

  

निंदा चुगली का उठाता भार

अपने अवगुणों को न करता याद

इन बातों से बढ़ता तनाव

इतना बदल गया है इंसान । 


दुख की छाया से घबराता

दोष दूसरो पर लगाता

हर परिवर्तन से रहता परेशान

इतना बदल गया है इंसान। 

धर्म के नाम पर करता है दंगा फसाद

धर्म के मूल्यों की जाने न कोई बात

फैलाता है अज्ञान का अंधकार

इतना बदल गया है इंसान। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर, जम्मू
















जगत की प्रीत है झूठी

# विषय - जगत की प्रीत है झूठी

# विधा - गीत 

जगत की प्रीत है झूठी

दुख इसका क्या मनाना है..... 

सब मतलब के है रिश्ते

कौन अपना बेगाना है

जगत की प्रीत............. 

दिल को पल में तोड़ जाते है

जो अपने कहलाते है

जगत की प्रीत........... 

दुख किसको सुनाऊँ अपना

दूर सब भाग जाते हैं

जगत की प्रीत.......... 

आंखों के आंसुओं का मोल

जहाँ कौन लगाता है

जगत की प्रीत........ 

मरा हुआ ये 

सबको क्यों रूलाता है

जगत की प्रीत......... 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर , जिला जम्मू





जीना इसी का नाम है

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार असम

# दिनांक - ०४/०३/२०२१

# दिन - बृहस्पतिवार

# विषय -जीना इसी का नाम है

# विधा - स्वैच्छिक ( छंदमुक्त कविता) 

दुख सुख में हंसते रहना

हर गम में गमगीन न होता

हार जीत की न करता परवाह

मेहनत करता अथाह 

विघ्न बाधाओं से न घबराता

अपने मार्ग स्वयं बनाता

जीवन की हर मुश्किल में 

खड़ा हो जाता बनकर चट्टान 

जीवन की हर परीक्षा में होना पास

जीना इसी का नाम है । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू









बुधवार, 3 मार्च 2021

जहाँ नफरत वहाँ प्यार के पुल बनाये

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान पंजाब इकाई

# दिनांक - 14/03/2021

# दिन - रविवार

# विषय -जहाँ नफरत वहाँ प्यार के पुल बनाये

# विधा - छंदमुक्त कविता 

संसार में फैली विष भावनाओं को हटाकर

वहाँ प्यार के पुल बनाकर

जहाँ नफ़रत की होगी आग

जल रूपी प्रेम से जाएगी भाग

अहिंसा के सब होगे पूजारी

हिंसा की हमनें बात नकारी

दिल दिल में होगा प्रेम प्यार

ईष्या द्वेष की भावना भी जाएगी हार

जातपात का  भ्रम मिटाना

सबको एक मंच पर लाना है । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर ,जम्मू





पल की खबर नहीं

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान उत्तर प्रदेश इकाई

# दिनांक - 03/03/2021

# दिन - बुधवार

# विषय -पल की खबर नहीं

# विधा - स्वैच्छिक (गद्य- आलेख) 

मनुष्य के जीवन में पल भर में क्या बदलाव आ जाए, इसका कोई अनुमान नहीं लगा सकता है। मनुष्य को अच्छे कार्य में सलग्न रहना चाहिए । मनुष्य को जीवन के हर पल को अंतिम पल जान कर किसी के भी साथ बुरा व्यवहार नहीं करना चाहिए। 

जब मनुष्य को जीवन के मूल्य का ज्ञान होगा तो वे जीवन का कोई भी क्षण व्यर्थ नहीं गंवाता है । हमेशा समाज कल्याण ही उसके जीवन लक्ष्य बन जाता है दुखी, लाचार और बेबस मनुष्य का सहारा बनता है और उसकी सहायता जी जान से करता है। 

जब राजा परीक्षित भगवान शुकदेव के पास गए तो भगवान शुकदेव से कहने लगे, "भगवान मैं मृत्यु के दवार पर खड़ा हूँ मुझे कोई उपदेश प्रदान करें जिससे मेरी मुक्ति हो सकें। " भगवान शुकदेव जी कहने लगे, " हर एक मनुष्य मृत्यु के द्वार पर खड़ा है लेकिन ज्ञान न होने के कारण भ्रम में पडा़ रहता है। "

मनुष्य को क्षण क्षण का सदुपयोग करना चाहिए एक भी क्षण व्यर्थ नहीं होने देना चाहिए। हर एक पल को जीवन का अंतिम पल जान कर किसी के भी साथ दुर्व्यवहार नहीं करना चाहिए, संसार को सुखी और खुशहाल बनाने के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए। 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू



परीक्षा

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान दिल्ली इकाई

# दिनांक - 03/03/2021

# दिन - बुधवार

# विषय -परीक्षा

# विधा - स्वैच्छिक ( छंदमुक्त कविता) 

परीक्षा ही जीवन का दूसरा है नाम 

इसके बिना जीवन का क्या काम

जीवन का पल पल परीक्षा लेता है

कोई विरला ही इसको सफल कर लेता है

दुखों की जब आती है जीवन में छाया

जाना पाता है कौन अपना पराया

धन की जब होती हानि

धीरज से काम लेते समझदार प्राणी । 

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू




आस्था

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य बोध उतर प्रदेश इकाई

# दिनांक - 20/05/2021

# दिन - गुरुवार

# विषय - आस्था

# विधा - लघुकथा


आस्था का संबंध दिल से है । राधिका नित्य मंदिर माथा टेकने जाती है और वहाँ जाकर पूजा करती और भगवान को लडडू का भोग लगाती है । उसके घर के बाकी सदस्य नास्तिक विचारों के है । राधिका मंदिर जा रही थी माँ ने रोक लिया और राधिका से कहने लगी, "क्या दिया तुम्हारे भगवान ने हमें बाप तुम्हारा चारपाई पर पड़ा है और भाई पढ़ लिखकर भी बेरोजगार है, अगर तुम्हारे भगवान में शक्ति है तो स्वस्थ करे तुम्हारे बाप को और भाई को नौकरी प्रदान करें । "

राधिका थोड़ी देर माँ की तरफ देखती रही और माँ से कहने लगी, " माँ भगवान के घर देर है अंधेर नहीं हैं, पापा भी ठीक हो जाएंगे और भाई को नौकरी भी मिल जाएगी आप ईश्वर पर विश्वास रखें।  " बेटी की आस्था देखकर माँ का हृदय भी पिघल गया और राधिका को मंदिर जाने की आज्ञा दे दी । 

आस्था के चरम सीमा पर पहुँच चुकी राधिका की आस्था रंग लाई, उसके भाई को किसी निजी कंपनी में पंद्रह वेतनमान वाली नौकरी मिल गई। अब घर की आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगा, अब राधिका के पापा ने भी चलना फिरना शुरू कर दिया। 

राधिका के घर के सभी सदस्यों ने अब मंदिर जाना शुरू कर दिया। यह सब राधिका की अथाह आस्था का चमत्कार था जिसने उसे कभी टूटने और मायूस नहीं होने दिया।  इतनी मुश्किलों के होने के बावजूद उसने मंदिर जाना नहीं छोड़ा और अपने विश्वास को ईश्वर पर बनाएं रखा। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर ,जम्मू






जीना है तो हंस के जियो

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदेश परिवार बिहार इकाई

# दिनांक - ०३/०३/२०२१

# वार - बुधवार

# विषय - जिंदगी

# विधा - छंदमुक्त कविता

जीना है तो हंस के जियो

जिंदगी के हर पल को खुशी से जियो

दुख सुख की करो न परवाह

हर पल बिताओ  होकर बेपरवाह

दुख का करो किसी से जिक्र 

जिंदगी गुजारों होकर बेफिक्र

किसी के आने का न करो इंतजार

वक्त की लायेगा खुशियों की बहार

जिंदगी है खुशियों की सौगात

हर पल जियो जिंदादिली के साथ 

संसार  सारा है मुसाफिरखाना

हर कोई अपना है बेगाना । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर जम्मू




कलम

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार उतर प्रदेश इकाई

दिनांक - 18/06/2021

दिन - शुक्रवार

विषय -कलम

विधा -  गद्य- पद्य


कलम मै तुमसे पूछ रहा हूँ

तुम्हारे धर्म को खोज रहा हूँ

तुम तो नहीं बन गई किसी की दास

क्यों लिखे जा रहे झूठे किस्से पचास

      

धर्म अधर्म का अंतर मिटता जाता

सच को झूठ, झूठ को सच बताया जाता

झूठ की भर ली स्याही

तभी तो चारों ओर तबाही आई


 सही बोल को लिखने वाली

सही तोल को तोलने वाली

क्यों हो गई बेइमान 

कैसे पूरे होगें जनता के अरमान 


   कलम तुमको सही दिशा में आना होगा

    अपना धर्म निभाना होगा  

     जनता की भावनाओं का करोगी सम्मान

     जग में मिलेगा तुमको बहुत मान


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू

    



मंगलवार, 2 मार्च 2021

नारी का अस्तित्व

# विषय - नारी का अस्तित्व

# विधा -  स्वैच्छिक( छंदमुक्त कविता) 

नारी संसार का आधार है

हर कुर्बानी के लिए हमेशा रहती तैयार है 

गिला शिक़वा कोई नहीं करती 

हर काम दिल से करती 

मुसीबत में परिवार को देती सहारा

हर कष्ट उसके आगे हारा

बच्चों को देती है अच्छे संस्कार

खुशहाल रहे सारा ससुराल

अपनी की इच्छाओं करती नहीं परवाह

हर सदस्य को देती है अच्छी सलाह

नारी बिना अधूरा है संसार

आगे नहीं बढे़गा किसी का परिवार। 

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू







पुस्तक है ज्ञान का आधार

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#  नव साहित्य परिवार

# दिनांक - 23/04/2021

# दिन - शुक्रवार

#विषय- पुस्तक दिवस

#  शीर्षक- पुस्तक है ज्ञान का आधार

# विधा - स्वैच्छिक 

ज्ञानार्जन का साधन बनती है किताबें

महाविद्वान बनाने का काम करती है किताबें


हर ज्ञान को पाने का आधार है किताबें

पूजा अनुष्ठान की विधियाँ बताती है किताबें


वेदों का दैवीय ज्ञान देती है किताबें

वैज्ञानिक बनने के लिए पढ़नी पढती है किताबें 


कवि को काव्य के नियम सिखाती है किताबें

संस्कृति और संस्कार नई पीढ़ी तक ले जाती किताबें


अध्यापक को शिक्षण के विधि सिखाती है किताबें 

अध्यापक और शिष्य के रिश्ते का आधार बनती हैं किताबें


समाज की समस्याएं बताती है किताबें

समाज के कल्याण के लिए लिखी जाती है किताबें


हर ज्ञान को पाने का आधार बनती है किताबें

हर व्यक्ति को महान बनाती है किताबें। 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर, जम्मू




सोमवार, 1 मार्च 2021

नव चेतना

  # नमन मंच 🙏🙏🙏

# नव साहित्य परिवार

# दिनांक - 02/03/2021

# दिन मंगलवार

# विषय - नव चेतना

# विधा - कविता


नए विचारों की आई है आंधी

मन की गांठ खुली जो थी बांधी

विकास बाहें फैलाएं खड़ा

मानव विकास के रथ पर चढ़ा

मुश्किलों बाधाओं से लड़ गया

लक्ष्य अपना प्राप्त कर गया

शिक्षा मन में  चेतना भर गई 

अवचेतना अब न जाने कहाँ मर गई

संघर्षो से जूझने को रहता हमेशा तैयार

मुसीबतों मुश्किलों से करने लगा प्यार

जागृति विज्ञान से ऐसी आई

खुशहाली सब जगह नजर आई । 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर, जम्मू










 


बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार उतर प्रदेश इकाई

# दिनांक - 03/06/2021

# दिन - गुरुवार

# विषय - बेटी 

# विधा - स्वैच्छिक ( छंदमुक्त कविता) 

बेटी है घर की शान 

मत छीनो इनके प्राण

बुढ़ापे में मां बाप का बनती है सहारा

अधूरा इनके बिना संसार सारा 

शिक्षा का इनको दो अधिकार

दुनिया पर करेगी बहुत परोपकार

नौकरी कर घर को मजबूत बनायेगी

परिवार का हमेशा मान बढायेगी

जन्म लेने का दो अधिकार

जाग जाएंगे सोये हुए भाग्य

बेटी बेटा को समान दो अधिकार 

छोड़ दो दुनिया के झूठे मिथ्याचार  । 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर जम्मू







सरकारी स्कूल

 # नमन मंच🙏🙏🙏🙏🙏🙏

# ग्वालियर साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच

# दिनांक - ०१/०३/२०२१

# दिन - सोमवार

# विषय -चित्र आधारित

# विधा - स्वतंत्र

सरकारी स्कूल की बात निराली

चारो  ओर दिखती हरियाली

चार दीवारी का न कोई बंधन

बच्चे स्कूल में न करते रूदन

श्यामपटृ की ओर रहता ध्यान

मिलता सबको अच्छा ज्ञान

अध्यापिका करती है बच्चों को बहुत प्यार

बच्चे हमेशा रहते स्कूल जाने को तैयार

अध्यापक करते हैं अपना काम

बच्चे कमाते है खूब नाम

बच्चों में पढ़ने की बहुत लग्न

अध्यापक हमेशा रहते हैं ज्ञान देने में मग्न। 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर ,जम्मू



प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...