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मंगलवार, 9 मार्च 2021

महक

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान गुजरात इकाई

# दिनांक - 07/04/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - महक

# विधा - कविता

 फूलों की महक से, 

दिल हुआ गुलज़ार,  

समय कैसे बीत गया ,

उसका रहा न ख्याल। 

ऐसी सुंदर महक थी, 

भुला दिये दुख हज़ार, 

हृदय के स्वपन लगता है, 

आज हुए साकार। 

दिल महक लेता है ,

अच्छे बुरे ख्यालों की, 

चरित्र उसी का प्रतिबिंब होता, 

भावनाओं की महक करती है काम, 

शब्दों को काव्य बनाने का 

महक गुणों की करती काम

अच्छा चरित्र बनाने का

संसार के काम आने का । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

 जम्मू कश्मीर, जम्मू





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