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शनिवार, 30 अप्रैल 2022

पिता

 शीर्षक - पिता 

पिता जनक पालनहार 

वो है ईश्वर का अनुपम उपहार

हाथ पकड़ कर चलना सिखाते 

हमारी राहों को सुगम बनाते 

अच्छे बुरे की परख बताते 

जीवन जीने का सही रास्ता दिखलाते 

बाहर से कठोर अंदर से नरम 

प्यार पिता का सब दुखों की मरहम।



स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर



सोमवार, 25 अप्रैल 2022

पवनपुत्र हनुमान जी

 शीर्षक - पवनपुत्र हनुमान

पवनपुत्र हनुमान की महिमा गाते सब लोग 

क्षण भर के स्मरण मात्र से मिल जाते सब दुनिया के भोग।

अंजना केसरी के बहुत दुलारे

तेरी शरण में बजरंग बली दुनिया के सुख सारे 

श्री राम को श्वास श्वास में बसाया 

परमभक्त होने का मान पाया 

दीन दुखियों का बनते सहारा 

तेरी महिमा गाता सारा संसारा।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर




मंगलवार, 19 अप्रैल 2022

सबका मालिक एक है

 शीर्षक - सबका मालिक एक है 

सभी धर्मों के ग्रंथ  यही सिखाते 

मन के सारे भ्रम मिटाते

अनेक में एक ही की ज्योति दिखाते 

सबका मालिक एक है मनुष्य को यही पाठ पढ़ाते।

संत गुरु भक्त जन एक को ही गाते 

सबके मन‌ में भक्ति भाव‌‌ जगाते 

सबको सच सुनाते बताते 

सबका मालिक एक है आठों पहर दुनिया को यही समझाते।

मन को मायाजाल से मुक्ति दिलाते 

मन मंदिर में परमेश्वर को ध्याते

दीन दुनिया की सब चिंताएं भूल जाते 

सबका मालिक एक है जब हृदय से मान जाते।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा,  जम्मू कश्मीर


सोमवार, 11 अप्रैल 2022

चले चल चलो अपने धाम

 शीर्षक- चले चल चलो अपने धाम

चले चल चलो अपने धाम ,

नश्वर दुनिया से हमारा क्या काम 

चले चल चलो अपने धाम..................... 

जो आंखों से दिखता है क्षण में मिट्टी में बदलता है 

नासमझ, मूर्ख तूं क्यों इसमें लिपटता है

चले चल चलो अपने धाम..................... 

चकाचौंध के चक्रव्यूह में फंसता जाता है

अपने अनमोल श्वास व्यर्थ गंवाता है 

चले चल चलो अपने धाम......... 

मैं मेरी का रटना का भारी पड़ेगा

अंत में कोई तेरे साथ न खडे़गा 

चल चले चलो अपने धाम.............. 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला सांबा जम्मू कश्मीर










रविवार, 10 अप्रैल 2022

पुकार

 दिल की पुकार सुन ले मेरे साइयां 

तन में बजने लगी अब मौत शहनाइयां

गलतियों का मैं पुतला काल के जाल में फंसा हूं

विकारों की मैल मे ग्रस्त तन मन मेरा 

कोई दिखता नहीं तेरा जैसा दयालु

जो मुझ पापी पर रहम करे 

तन मन के दुख सब हरे 

मौत का डर मुझे बहुत सताता है 

कर्मों का लेखा जोखा देने से दिल घबराता है

 दिल की पुकार सुन ले मेरे स्वामी 

तन मन की तृष्णा बुझा दो बन जाऊं सुखगामी।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला -  सांबा, जम्मू कश्मीर

शनिवार, 9 अप्रैल 2022

लेखनी

 शीर्षक - लेखनी 

लेखनी जब जब चलती है

 नया युग का आरंभ करती है 

लोगों में जागृति लाती है 

जीवन में आगे बढ़ने की हिम्मत बढ़ाती है 

झूठ की पोल खोलकर सच्चाई सामने लाती है 

लेखनी अपनी पहचान स्वयं बनाती है 

लेखनी स्वतंत्र विचरती है 

सच झूठ का निर्णय बिना पक्षपात के करती है 

लेखनी ही साहित्यकार की पहचान बनाती है 

समाज सुधारक की भूमिका खूब निभाती है।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर 







शुक्रवार, 8 अप्रैल 2022

माता शबरी के राम

 शीर्षक - माता शबरी के राम 

माता शबरी के राम बहुत प्यारे हैं

सबके काज प्रभु राम ने आप संवारे है 

ऋषि मुनि जिनको श्वास श्वास ध्याते है 

वो ही मेरे राम स्वयं चलकर माता शबरी के पास आते हैं

प्रभु राम माता शबरी के भाग्य जगाते हैं 

उनकी सच्ची भक्ति का फल स्वयं देने आते हैं 

माता शबरी के झूठे बेर प्रभु राम बड़े चाव से खाते हैं

अपनी सच्ची भक्त करने वालों पर अपना प्रेम लुटाते हैं।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला सांबा, जम्मू कश्मीर




गुरुवार, 7 अप्रैल 2022

सूर्यवंशी भगवान श्री रामचन्द्र जी

 शीर्षक- सूर्यवंशी भगवान श्री रामचन्द्र

सूर्यवंशी भगवान श्री रामचन्द्र की स्तुति हम हृदय से गाते हैं 

अपने मन में उनकी भक्ति का फूल खिलाते हैं 

सूर्यवंशी भगवान श्री रामचन्द्र की स्तुति.............................

राजा दशरथ माता कौशल्या को राम प्राणों से प्यारे हैं 

कोटि कोटि पापी प्रभु राम ने क्षण में तारे हैं 

सूर्यवंशी भगवान श्री रामचन्द्र की स्तुति............................ 

गौतम नारी अहिल्या का प्रभु ने उद्धार किया 

बैकुंठ धाम में विशेष स्थान दिया 

सूर्यवंशी भगवान श्री रामचन्द्र की स्तुति............................

ताड़का राक्षसी ने सब ऋषि मुनियों को परेशान किया

भगवान राम ने उस दुष्टा का वध कर सबको को अभयदान  प्रदान किया

सूर्यवंशी भगवान श्री रामचन्द्र की स्तुति............................

माता शबरी के झूठे बेर बड़े चाव से खाते हैं

जात पात का भ्रम सबके हृदय से मिटाते हैं 

सूर्यवंशी भगवान श्री रामचन्द्र की स्तुति............................

ऐसे परमदयालु भगवान श्री रामचन्द्र को हम नित नित शीश झुकाते हैं 

उनकी यश गाते गाते हम भवसागर पार हो जाते हैं

सूर्यवंशी भगवान श्री रामचन्द्र की स्तुति............................

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जिला- सांबा,  जम्मू कश्मीर


जिंदगी भी पेड़ पौधों पर आई बहार सी लगती है

 शीर्षक -जिंदगी भी पेड़ पौधों पर आई बहार सी लगती है

जिंदगी भी पेड़ पौधों पर आई बहार सी लगती है

जो कुछ समय के लिए ही बनी रहती है

जैसे पेड़ पौधों पर नये नये पत्ते बहुत ही मनभावन लगते हैं 

वैसे ही बचपन , जवानी में कुछ भी करने को तैयार रहते है 

बचपन को खेलों और बड़ों के स्नेह में बिताते हैं

दुख सुख की भावना हमें छू नहीं पाती है

जवानी के दौर में बहुत जोशीलापन दिखाता है 

पहाड़ भी कंकर सा नजर आता है

बूढ़े होने पर शरीर जर्जर हो जाता है

खाली बर्तन भी उठाना मुश्किल बन आता है

पेड़ के पत्तों की तरह आत्मा भी शरीर को छोड़ जाती है

जिंदगी की बहार भी फिर दुबारा नहीं मिल पाती है 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा,  जम्मू कश्मीर



बुधवार, 6 अप्रैल 2022

भाई सजन जी

शीर्षक - भाई सजन जी

 आज कौन सजन ठग के भाग्य जागने आया है 

दिखावटी धर्मी को सही धर्म की शिक्षा देने आया है

सजन ने सोचा आज उनको लूट कर बहुत अमीर बन जाऊंगा 

मारकर दोनों को दूर फैंक आऊंगा 

धन दौलत से सारा जीवन मौज मस्ती में बिताऊंगा

 सतगुरु के सोने का इंतजार करने लगा 

सतगुरु ने मरदाना जी को रबाब बजाने का हुक्म किया 

अपनी पावन रसना से रूहानी वाणी का शब्द गायन किया

रूहानी उपदेश को सुनकर सजन द्रवित हुआ 

अपने द्वारा किए गए सभी पापों का उसे स्मरण हो आया 

मन में बहुत पछताया सतगुरु नानक के चरणों में शीश झुकाया 

सतगुरु जी ने नाम का दान दिया सजन को कर्मों को सुधारने का ज्ञान दिया 

भाई सजन ने सतगुरु के बताए मार्ग पर चलकर सम्मान बहुत पाया 

सतगुरु नानक के उपदेश अनुसार सारा जीवन बिताया।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला सांबा ,  जम्मू कश्मीर





सोमवार, 4 अप्रैल 2022

मां शेरावाली

शीर्षक - मां शेरावाली

मां शेरावाली तूं ही मेहर कर दें

 सबकी खाली झोली खुशियों से भर दें 

मां शेरावाली तूं ही मेहर कर दें.................

तूं ही दयानिधान क्षण में होती मेहरबान 

तेरे दर आने वाला पाता सब सिद्धियों का ज्ञान 

मां शेरावाली तूं ही मेहर कर दें................. 

पापियों की संहारक बनती भक्त जनों की  रक्षा करती 

तेरा भक्त तेरे से अभयदान पाता आठों पहर तेरी महिमा गाता 

मां शेरावाली तूं ही मेहर कर दें................. 

करती शेर सवारी लगती तेरे भक्तों को लगती बहुत  प्यारी 

तेरा रूप सबसे न्यारा लगता चांद से प्यारा लगता

मां शेरावाली तूं ही मेहर कर दें.................

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा,  जम्मू कश्मीर







शनिवार, 2 अप्रैल 2022

नववर्ष

 शीर्षक - नववर्ष

फूलों से घर को सजाते हैं

आओ मिलकर नववर्ष मनाते है

रूठे  मित्रों को गले से लगाते है

सारे गिले शिकवों को हृदय से मिटाते हैं

सबको नववर्ष की हार्दिक बधाई देते हैं

एक दूसरे को खुश रखने की शपथ लेते है

नववर्ष में नया आरंभ करते है

सबकी भावनाओं को समझने का यत्न करते है।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जिला -  सांबा , जम्मू कश्मीर


शुक्रवार, 1 अप्रैल 2022

कहते मुझे सभी तूं दुनिया से अनजान हैं

 शीर्षक - कहते हैं मुझे सभी तूं दुनिया से अनजान हैं

 कहते हैं मुझे सभी तूं दुनिया से अनजान 

अब तो मैंने भी जान लिया

 दुनिया का ज्ञान मुझे भी थोड़ा था

पर मेरे यार मैंने किसी का दिल नहीं तोड़ा था

अपनी हिम्मत मैं कभी टूटने नहीं दूंगा 

हर परिस्थिति से डटकर मुकाबला करूंगा 

मेरा यार परमात्मा मेरे साथ हैं

वो ही मेरे काज को हमेशा करता रास  है ।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला -  सांबा, जम्मू कश्मीर

प्रभु तूं ही सच्चा मित्र हमारा

 शीर्षक - प्रभु तूं ही सच्चा मित्र हमारा 

प्रभु तूं ही सच्चा मित्र हमारा

बाकी सब मोह माया का पसारा 

मेरे गुण अवगुण न विचारता 

अपनी टेक देकर मेरा काज संवारता 

संसार के सखा मीत बीच मंझार में छोड़ जाते 

रिश्ता कभी पूरा नहीं निभाते

मेरे मन की अच्छी बुरी हर  बात जानता 

तब भी परवरदिगार तूं मुझे अपना मानता 

मेरा तेरा रिश्ता  सतगुरु  कई जन्मों पुराना 

तूं मुझे मेरे मलिक कभी मत भूल जाना।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जिला -  सांबा ,  जम्मू कश्मीर





प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...