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सोमवार, 31 जनवरी 2022

ऐ मेरे प्यारे वतन

 शीर्षक  - ऐ मेरे प्यारे वतन

मिट्टी जिसकी सोने जैसी

हर दिल में भगवान है

ऐ मेरे प्यारे वतन तूं मेरा अभिमान है........ 

दया जहाँ सबसे श्रेष्ठ गुण है

दूसरों के अवगुण सदा भूल जाना की सीख सिखाई जाती है

ऐ मेरे प्यारे वतन तूं मेरा अभिमान है............ 

 नदियां मां की तरहां पूजी जाती है

अपने निर्मल जल से मैल तन मन की मिटाती है

ऐ मेरे प्यारे वतन तूं मेरा अभिमान है..........

जन जन मेरे देश का दयावान है 

कण कण में इसके बसता   भगवान  है 

ऐ मेरे प्यारे वतन तूं मेरा अभिमान है..........

किसान मिट्टी में इसकी में अन्न उगाता है

अन्नदाता सबका वो कहलाता हैं इतना मान सबसे पाता है

ऐ मेरे प्यारे वतन तूं मेरा अभिमान है..........

वीर सैनिक भारत मां की सेवा तन मन से करता है

देश की रक्षा की खातिर प्राण न्यौछावर करने से, पीछे कभी नहीं हटता है 

ऐ मेरे प्यारे वतन तूं मेरा अभिमान है..........

मेरी भारत भूमि का कोना कोना तीर्थ स्थान है 

इसकी पावन मिट्टी को नमस्तक होता सारा जहान है

ऐ मेरे प्यारे वतन तूं मेरा अभिमान है....................


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा , जम्मू कश्मीर











बुधवार, 26 जनवरी 2022

भारत देश है मेरा

 शीर्षक - भारत देश है मेरा

शांति का जो पुजारी हैं

जिसकी एकता सब पर भारी है 

धरती को माता कह पूजा जाता है

सबका भला ईश्वर से मांगा जाता है

ऐसा भारत देश है मेरा । 

नारी माता सीता स्वरूपा मानी जाती है

सबसे बहुत सम्मान पाती है

अपने बच्चों को अच्छे अच्छे संस्कार सिखाती है

घर की गृहस्वामिनी कहलाती है

ऐसा भारत देश है मेरा । 

नदियाँ, सरोवर मुक्ति धाम कहलाते हैं

तन, मन के सब पाप मिटाते है

धर्म ग्रंथों का गान ईश्वर के मार्ग पर ले जाता है

आत्मा पर पड़ी विषय विकारों की मैल हटाता है

ऐसा भारत देश है मेरा । 

गीता, कुरान, गुरु ग्रंथ, बाईबल की वाणी इस धरा पर गाई जाती है

सब धर्मों से प्रेम करने की शिक्षा यही दी जाती है

भेदभाव करने वालों पर  संत महापुरुष आवाज उठाते हैं

समानता की भावना सबको सिखाते हैं

ऐसा भारत देश है मेरा । 


स्वरचित एवंं मौलिक 

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर


    



  


मंगलवार, 25 जनवरी 2022

गणतंत्र दिवस

नमन मंच🙏🙏🙏

 शीर्षक - गणतंत्र दिवस

26 जनवरी को हम गणतंत्र दिवस मनाते है

अपने वीर बलिदानियों की गाथा गाते हैं

हमारे वीर सैनिक अपने करतब दिखलाते है

भारतीय सेनाओं की शक्ति से विश्व को परिचित करवाते हैं

भारतीय संस्कृति की मनमोहक झांकियां सबको लुभावती है

अपनी संस्कृति की श्रेष्ठता सबको बताती है

राष्ट्रपति लाल किले पर झंडा फहराते है

राष्ट्र की उपलब्धियां सारे संसार को बताते है

राष्ट्रगान की धुन सबमें देश प्रेम बढ़ाती है

देश सेवा की भावना मन में जगाती है 

न्याय प्रणाली के प्रति जनता का विश्वास बढ़ाता है

भारत का जन जन संविधान की महिमा को गाता है। 





स्वरचित एवंं मौलिक

 अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर


सोमवार, 24 जनवरी 2022

भारतीय संविधान को नमन करता हूँ बारंबार

 शीर्षक - भारतीय संविधान को नमन करता हूँ बारंबार

समानता की बात है करता

भेदभाव किसी से नहीं रखता

सबको देता एक समान अधिकार

भारतीय संविधान को नमन करता हूँ बारंबार । 

 अन्याय को नहीं सहता

मुजरिम को सजा दिलवाता

सत्यमेव जयते का करता प्रचार

भारतीय संविधान को नमन करता हूँ बारंबार । 

धर्मनिरपेक्षता है इसकी पहचान

अपनी सांस्कृतिक भिन्नता को बताता महान

शांति, एकता की भावना है इसका सार

भारतीय संविधान को नमन करता हूँ बारंबार । 

सबको देता मतदान का अधिकार

मर्जी से चुने अपनी सरकार

हमारा है यह मूल अधिकार

भारतीय संविधान को नमन करता हूँ बारंबार   । 

शिक्षा, रोजगार का अवसर सबको बराबर देता

छुआछूत की कुरीति को जड़ से मिटाता

इसने ही दिये हम सब अधिकार

भारतीय संविधान को नमन करता हूँ बारंबार। 


स्वरचित एवंं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा ,  जम्मू कश्मीर




रविवार, 23 जनवरी 2022

नेता जी सुभाषचंद्र बोस

 शीर्षक - नेता जी सुभाषचंद्र बोस

भारत माता की आज़ादी की लड़ी लड़ाई थी

अग्रेजो ं को भगाने की नीति जिसने बनाई थी

आजाद हिंद फौज को जो महानायक था

जिसकी वीरता पराक्रम की का जन जन कायल था

भारत की आज़ादी का बिगुल सुभाषचंद्र ने बजाया था

सोये पड़े भारतीय को आजादी पाने के लिए जगाया था

तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूगां नया नारा बनाया था

आज़ादी चाहने वाले मतवालों का आजाद हिंद फौज नया संगठन बजूद में आया था

नेता जी ने आज़ादी की खातिर अपने प्राणों की दी कुर्बानी थी

आजादी के दीवाने की रीति सबने आगे अपनानी थी । 


स्वरचित एवंं मौलिक

अमरजीत सिंह 

सांबा , जम्मू कश्मीर





शनिवार, 22 जनवरी 2022

नसीहत

 शीर्षक - नसीहत

हे इंसान कुदरत की नसीहत को मान, 

नहीं तो मिट्टी में मिल जाएगा तेरा झूठा गुमान । 

अपनी मनमानी करना बंद कर, 

कुदरत के कहर से नित डर । 

तेरी चतुराइयां तुझे विनाश के पथ पर ले जाएगी, 

तुझे कुदरत का विकराल रूप दिखाएगी। 

कुदरत का कण कण नसीहत देता नज़र आता, 

हे इंसान क्यों मदमस्त होकर अपना विनाश निकट बुलाता । 

हे इंसान कुदरत ने तुझे माँ की तरह पाला, 

खोल अपनी अक्ल का ताला। 

कुदरत की खूबसूरती को हमेशा बरकरार रख, 

तू कुदरत के कण कण से दिल से प्यार कर । 

कुदरत तुझे माँ की तरह समझाती है, 

तेरी गलती का एहसास तुझे नित्य कराती है । 

कुदरत की नसीहत को जीवन के क्षण क्षण में विचार, 

तभी तुझे समझ आएगा तूने नित्य किया कुदरत से खिलवाड़। 


 स्वरचित एवंं मौलिक

 अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर




गुरुवार, 20 जनवरी 2022

जनता त्रस्त नेताजी मस्त: वाह! वाह! नेताजी।

 शीर्षक - जनता त्रस्त नेताजी मस्त: वाह! वाह! नेताजी। 

जनता सारी रो रही है

वोट देकर अपना बजूद खो रही हैं

नेता जी सिर्फ नोट जोड़ रहे हैं

धर्म के नाम पर लोगों को तोड़ रहे हैं

जनता की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं

अपनी किस्मत चमका रहे हैं

जनता के मुद्दे भूल जाते हैं

अपना घर ही भरते जाते हैं

जनता वोट देकर पछताती है

रोना ही अपना नसीब बताती हैं

नेता जी जनता बेचारी क्या करे

किस पर विश्वास करें

हर नेता विश्वासघात करता है

सिर्फ अपना स्वार्थ सिद्ध करता है 

वाह वाह नेता जी कुछ तो शर्म करते 

बेशर्म  की तरह अपने वादों से नहीं मुकरते।  


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

सांबा , जम्मू कश्मीर




मंगलवार, 18 जनवरी 2022

बाबा मोतीराम मेहरा की महान शहादत

 शीर्षक - बाबा मोतीराम मेहरा की महान शहादत

बाबा मोतीराम मेहरा ने गुरु परिवार की सेवा मन से कमाई 

संसार का कण कण गाता बाबा मोतीराम मेहरा की बडयाई 

बाबा मोतीराम ने माता गुजरी और छोटे साहिबजादो को दूध पिलाया था

तन मन धन से महा सेवा को कमाया था

दूध पिलाने के लिए मुगलों ने बहुत मोल लिया

बाबा मोतीराम मेहरा ने अपनी सारी संपत्ति को अधर्मी को सौंप दिया

बजीर खान को जब बाबा मोतीराम मेहरा द्वारा दूध पिलाने की सेवा का पता चला

बजीर खान अधर्मी ने बाबा मोतीराम मेहरा के पूरे परिवार को कोल्हू में पेरने का हुक्म दिया

बाबा मोतीराम मेहरा के पूरे परिवार ने बलिदान दिया

अपनी शहादत देकर इतिहास में अपना नाम अमर किया। 


स्वरचित एवंं मौलिक 

अमरजीत सिंह

सांबा ,  जम्मू कश्मीर



रविवार, 16 जनवरी 2022

दीवान टोडरमल जी की बेमिसाल सेवा

 शीर्षक - दीवान टोडरमल जी की बेमिसाल सेवा

दीवान टोडरमल की सेवा भावना को नमन बारंबार

ऐसा सेवक देखना से उतर जाए समस्त पापों का भार । 

बजीर खान ने जुल्म कमाया था

नन्हें नन्हें बच्चों को जिंदा दीवार में चुनवाया था । 

माता गुजरी छोटे दो साहिबजादों के मृत शरीर को जंगल में फिकवाया था

कोई इनका दाह संस्कार न करे ऐसा फुरमान सुनाया था। 

दीवान टोडरमल ने हिम्मत दिखाई थी

दाह संस्कार की सेवा कमाई थी । 

पचहत्तर हजार सोने की मोहरें बिछाकर दाह संस्कार की भूमि पाई थी

माता गुजरी और छोटे साहिबजादों का दाह संस्कार की बेमिसाल सेवा कमाई थी । 

बजीर खान ने जब दाह संस्कार दीवान टोडरमल द्वारा करने की खबर पाई थी

दीवान टोडरमल समेत समस्त परिवार को जिंदा जलाने की सजा सुनाई थी। 

दीवान टोडरमल  के समस्त परिवार ने सेवा का मूल्य चुकाया था, 

इस महान सेवा के लिए जिंदा जल जाने को अपना महान कर्म बताया था।  

संसार दीवान टोडरमल के समस्त परिवार की कुर्बानियों को याद करके शीश झुकाता है। 

उनकी कुर्बानियों को याद करके सबकी आंखों में पानी भर आता है। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर


कोशिश करने वाले कभी हारते नहीं

 शीर्षक - कोशिश करने वाले कभी हारते नहीं

कोशिश करने वाले कभी हारते नहीं है, 

मुश्किलों से कभी भागते नहीं है, 

कोशिश ही उम्मीद जगाती है

मंजिल तक पहुँचने की राह दिखाती है

हार ने से अच्छा कोई प्रयत्न कर ले

जीत को हासिल करने का कोई यत्न कर ले

कोशिश ही जिंदगी को सफल बनाती है

रूके हुए जीवन पहिये को आगे बढ़ाती है

कोशिश ही जीवन में आशा की किरण दिखाती है

मंजिल में आने वाले मुसीबतों को स्वयं हटाती है

कोशिश ही मनुष्य के आत्मविश्वास को गिरने से बचाती है

मनुष्य को मंजिल तक पहुँचने का राह बताती है। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा ,जम्मू कश्मीर

आज की राजनीति

 शीर्षक - निज स्वार्थ में नेता लोग

 

धर्म  हो रहा आलोप, 

निज स्वार्थ में नेता लोग, 

विकास के लिए मांगा वोट, 

अपने घर में भर लिए नोट, 

धर्म के नाम पर लड़ा रहे हैं, 

अपना वोट बना रहे हैं, 

हिंदू, मुस्लिम,सिख, ईसाई को आपस में तोड़ रहे हैं,

अपने लिए धन जोड़ रहे हैं, 

जनता सारी रो रही है, 

भूखें ही सो रही है, 

करोड़ों रुपए का करती है सरकार ऐलान,

खा जाते ये सारे शैतान, 

देश को कैसे इनसे बचाएं, 

देश में नया स्वराज लाएं, 

वोट के लिए होती लड़ाई  , 

आपस में लड़ते भाई भाई, 

देश भक्ति का नेता करते दिखावा,

इनके आगे जनमानस हारा, 

एक एक करके सब खा लिया, 

अर्थव्यवस्था को हिला दिया, 

ईमानदारी का यहां कोई मोल‌ नहीं, 

झूठ की खोलता कोई पोल नहीं, 

लोकतंत्र का इन नेताओं ने मजाक बनाया, 

बेईमानी का पैसा विदेशों में जमा करवाया, 

देश को ये लूट रहे हैं, 

जनमानस का खून पी रहे हैं, 

यह इन्सान नहीं नरभक्षी है, 

ये जूठन खाने वाले पक्षी है, 

इनका दीन नहीं ईमान‌ नहीं, 

मैं कहता हूं नेता सारे इन्सान नहीं, 

देश गरीब हो रहा है, 

अपना अस्तित्व खो रहा है, 

गली गली में अब शोर है, 

नेता सारे चोर है, 

जब जन नेता देश में आएगा, 

इन‌ चोरों से पीछे छुड़ायेगा।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा,जम्मू कश्मीर





सोमवार, 10 जनवरी 2022

मैं हिंदी भारत माता के माथे की बिंदी हूँ

 शीर्षक - मैं हिंदी भारत माता के माथे की बिंदी हूँ

मैं भारत का गौरव हूँ

मैं इसकी शान हूँ

हमेशा करती इसकी महिमा का गुणगान हूँ

मैं हिंदी भारत माता के माथे की बिंदी हूँ । 


मैं भारत के इतिहास अपने साथ लेकर चलती हूँ

वर्तमान में नव में इतिहास बनाती हूँ

भविष्य को भी भारतीय संस्कृति का गुणगान सुनाती हूँ

मैं हिंदी भारत माता के माथे की बिंदी हूँ । 


मेरी पहचान को मिटाने वाले अनेकों आएं हैं 

मुहं की खाकर हमेशा पछताएँ है

मेरा अस्तित्व हमेशा से अमर है अब सबको समझ आया है

मैं हिंदी भारत माता के माथे की बिंदी हूँ। 


संस्कृत भाषा को मैंने  मां माना है

सब भाषा को गले लगाया है

किसी से भी मैंने सौतेला व्यवहार नहीं अपनाया है

मैं हिंदी भारत माता के माथे की बिंदी हूँ । 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

 सांबा , जम्मू कश्मीर

व 





रविवार, 9 जनवरी 2022

माता गुजरी का लाल

 शीर्षक - माता गुजरी का लाल

माता गुजरी का लाल बहुत प्यारा है

दीन दुखियों का बनता सहारा है

पीरों का पीर है फकीरों में फकीर हैं

ऐसा जलवा माँ गुजरी तेरे लाल का हर कोई उसका दीवाना है

हिंद की रक्षा के लिए पिता गुरु तेगबहादुर को वार  देना

ऐसा निस्वार्थ  दानी माँ गुजरी मैंने नहीं देखा

सबसे प्रेम करने वाला ,

पुत्रों से ज्यादा स्नेह अपने शिष्यो ं पर लुटाता है, 

ऐसा प्रेम पुरुष माँ गुजरी मैंने नहीं देखा है

अपने धर्म संस्कृति को बचाने के लिए 

अपने प्रिय पुत्रों की कुर्बानी देना वाला ऐसा त्यागी नहीं देखा है 

कवि में महाकवि, योद्धा में महायोद्धा, संत में महासंत

ऐसा निराला व्यक्तित्व सिर्फ माँ गुजरी तेरे लाल का देखा है। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर

शुक्रवार, 7 जनवरी 2022

बादशाह दरवेश गुरु गोबिंद सिंह

 शीर्षक - बादशाह दरवेश गुरु गोबिंद सिंह

बादशाहों  के बादशाह

 सबके दिलों पर राज करते गुरु गोबिंद सिंह, 

पापों को तन मन से मिटा दें, 

ऐसे पावन पवित्र गुरु गोबिंद सिंह, 

कमज़ोर की ताक़त बनते , 

ऐसे शूरवीर योद्धा गुरु गोबिंद सिंह, 

दबे डरे सहमें इंसान को शेर बना दें, 

ऐसा महान गुरु गोबिंद , 

जात पात का सब भ्रम मिटा दें, 

सबको एक समान बना दे ऐसे समदर्शी गुरु गोबिंद सिंह, 

दानियों में  महादानी , 

ऐसे सरबंसदानी गुरु गोबिंद सिंह, 

अमृत की दात सबको देते, 

ऐसे अमृतदाता गुरु गोबिंद सिंह, 

सबको प्रेम भाव से रहने की सीख देते, 

ऐसे प्रेमपुरष गुरु गोबिंद सिंह, 

संतों में संत, 

ऐसे संत सिपाही गुरु गोबिंद सिंह, 

अपने सिखों से अपने पुत्रों से ज्यादा स्नेह करते, 

ऐसे महान गुरुपिता गुरु गोबिंद सिंह । 



स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर



रविवार, 2 जनवरी 2022

नववर्ष

 शीर्षक - नववर्ष

खुशियों से भरा नववर्ष आया, हर कली को जगाने आया, 

आलस को दूर भगाकर ,लक्ष्य की ओर बढ़ाने आया । 


   नफरतों को दिलों से मिटाकर, प्रेम प्यार से रहने की सीख         सिखाने आया, 

   एकता की ताकत का महत्व, सबको समझाने आया। 


      नाउम्मीद की भावना हटाकर, उम्मीदों को दिलों में फिर से जगाने आया। 

      सबको आगे बढ़कर, मुश्किलों से लड़ने की सीख सिखाने   आया। 

 पिछले गमों को दिल से मिटाने का , नई खुशियाँ का स्वागत करने का शुभ अवसर आया ।  

ऐसा उत्साह सब दिलों में भरने का, यह संदेशा नववर्ष अपने साथ लाया। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा , जम्मू कश्मीर










प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...