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शनिवार, 28 जून 2025

मन अब रहता सदा उदास

 मन अब रहता सदा उदास ,

खो गया कही दुनियाभर का झूठा उल्लास ।

जब हुआ अपने अवगुणों का अहसास, 

जाग गया मन में सतगुर पर विश्वास ।




स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

 जम्मू-कश्मीर 

गुरुवार, 26 जून 2025

मन बिरहा में तड़प रहा

मन बिरहा में तड़प रहा कब दोगे दीदार  ,

मेरे रोगी मन का अब सतगुर कर दो उपचार ।

विषय वासनाओं में पड़कर दुख होता बहुत अपार ,

अब इस किंचन का कर दो भव से बेड़ा पार ।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा,  जम्मू-कश्मीर 

बुधवार, 25 जून 2025

संत मीराबाई की गुरुभक्ति

 शीर्षक  - संत मीराबाई की गुरुभक्ति 

चित्तौड़ की रानी मीराबाई की गुरुभक्ति निराली थी 

गुरुभक्ति में लीन होकर लोकलाज छोड़ डाली थी 

गुरुभक्ति में लीन मीराबाई को सबने सताया था 

विष का प्याला भी उसका कुछ बिगाड़ न पाया था 

रोम रोम में उसके गुरुमंत्र समाया था 

गुरुभक्ति को ही जीवन का आधार बनाया था 

गुरू रविदास का  ध्यान  दिल से लगाती थी 

भजन सिमरन में सारा वक्त बिताती थी 

जात पात की बेडियाँ उसको रोक न पाई थी 

गुरुदेव ही उसके लिए बाप माई थी 

गुरुदेव संगति में उसने आत्मज्ञान को पाया था 

अपनी दृढ़ भक्ति से गुरुदेव को रिझाया था 

संत मीराबाई की गुरुभक्ति का यशगान सारा संसार गाता है 

मीराबाई के पदों को पढ़कर ध्यान गुरुभक्ति में लग जाता है। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा, जम्मू-कश्मीर 

शनिवार, 7 जून 2025

मौजूद हो तुम हर जगह

 मौजूद हो तुम हर जगह, ऐसा बास तुम्हारा, 

मैं मेरी फंसा इंसान , मोह माया का ऐसा घेरा।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर 




गुरुवार, 5 जून 2025

अर्ज सुनो दीनानाथ

 अर्ज सुनो दीनानाथ जन्म मरण तुम्हारे हाथ,

 मेरी रक्षा देकर करो हाथ, तुम्हारे बिन मेरा कोई नाथ ।



स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर 




बुधवार, 4 जून 2025

देह

 शीर्षक  - देह 

देह प्रेम न कीजिए, एक दिन होगी राख 

जिनसे मोह किया , वो भी न होगे साथ। 

जान जहान से तय है ,मान ले मन चोर 

पल पल जिस बिसरात है ,उसके कर दे जीवन रूपी डोर ।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा ,जम्मू-कश्मीर 

रविवार, 1 जून 2025

जिंदगी को जीता नहीं काटता हूँ

 शीर्षक  -  जिंदगी को जीता नहीं काटता हूँ

जिंदगी को जीता नहीं काटता हूँ

नयन बंद किए भी जागता हूँ 

हर रिश्ते से अपने को बाँधता हूँ 

तब भी सारे गम अकेला ही सहारता हूँ 



स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर 




प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...