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मंगलवार, 6 फ़रवरी 2024

चलो अंतर की ओर

 #चलो अंतर की ओर 

मनमीत प्यारे चलो अंतर की ओर ,

जग में चारों तरफ मोह-माया का शोर ,

छोड़कर आलस अब सतगुर के वचन पर कर ले गौर ,

सिमर ले नाम आ गई भोर ।

अंतर ध्यान से छट जाते भ्रमजाल के घनघोर 

मन का रूख होता प्रकाश की ओर 

खत्म हो जाता माया का जोर

गुर के हाथ आ जाती मन की डोर। 

डोलत मन हो जाता अडोल 

अंतर में सुनता प्रभु का ढोल ।

नाम प्रभु का बहुत अनमोल 

समझ ले इससे जीवन का मोल ।

स्वरचित एवं मौलिक 

   अमरजीत सिंह 

 सांबा, जम्मू-कश्मीर 



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