#चलो अंतर की ओर
मनमीत प्यारे चलो अंतर की ओर ,
जग में चारों तरफ मोह-माया का शोर ,
छोड़कर आलस अब सतगुर के वचन पर कर ले गौर ,
सिमर ले नाम आ गई भोर ।
अंतर ध्यान से छट जाते भ्रमजाल के घनघोर
मन का रूख होता प्रकाश की ओर
खत्म हो जाता माया का जोर
गुर के हाथ आ जाती मन की डोर।
डोलत मन हो जाता अडोल
अंतर में सुनता प्रभु का ढोल ।
नाम प्रभु का बहुत अनमोल
समझ ले इससे जीवन का मोल ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा, जम्मू-कश्मीर