मां तेरे चरणों में , जन्नत का नजारा पाता हूं
तेरे मीठे-मीठे बोल सुनकर, दुख दर्द सारा भूल जाता हूं
तेरे जितना कोई और नहीं अपना कहीं ढूंढ पाता हूं
तेरे दिए गए संस्कारों के कारण,सब जगह सम्मान से देखा जाता हूं
रब भी तेरा प्यार को पाने को , बार बार अवतार लेकर आता हैं
वो भी ममतामयी मूरत को देख , प्रेम प्यार के कोमल रिश्ते में हंसते-हंसते जकड़ जाता है
दिन रात तेरा मेरा फ़िक्र करना, मुझे बहुत भाता है
मां तेरे आंचल की छांव में, सुख शांति स्वर्ग से बढ़कर पाता हूं
मां तेरी दुआ से जीवन के सब सुखों का, भरपूर आनंद उठाता हूं ,
मां तेरी ममतामयी छांव हमेशा बनी रहे,यही वरदान परमेश्वर से पाना चाहता हूं
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू-कश्मीर