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मंगलवार, 28 जून 2022

श्याम तेरी बंसी

 शीर्षक - श्याम तेरी बंसी 

श्याम तेरी बंसी की तान 

डाल देती है मुर्दे में जान 

रूहानियत से भर जाता रोम रोम

मन भी हो जाता है मौन।।

श्याम तेरी बंसी अज्ञान मिटाती 

सोयी हुई आत्मा को जगाती 

जन्मों जन्मों की हृदय से मैल हट जाती

गंगा जैसा निर्मल मन को बनाती।।

श्याम तेरी बंसी की अद्भुत है तान 

सुनकर पापी भी बन जाता महान

श्याम तेरी बंसी की तान में सबके बसते हैं प्राण 

तूने ही किया सबको प्रेम का दान ।।

व्याकुल रहते मेरे कान सुनने को श्याम तेरी बंसी की तान 

कैसे करते हो तुम इतना मधुर गान

मेरे श्याम तेरी बंसी की तान लगाती है ईश्वर में ध्यान

इंसान पहुंच जाता ईश्वर के धाम ऐसी मीठी है तेरी बंसी की तान ।।

श्याम तेरी बंसी की तान भूल देती दुख दर्दों का नाम 

यही लगती है मुक्ति का धाम

संसार का कण कण तेरी बंसी की महिमा को गाता

बंसी की तान सुनकर तेरा मेरा करना भूल जाता।।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

सांबा,जम्मू कश्मीर 



 











रविवार, 26 जून 2022

कहीं किसी मोड़ पर

 शीर्षक - कहीं किसी मोड़ पर 

कहीं किसी मोड़ पर मेरी जिंदगी से हो गई बात 

आधे अधूरे सपने वादे पूरे करने की याद आ गई बात।।

हर कसम हर रिश्ते को शिद्दत से निभाते रहने इकरार हो गया

मुझे लगता है जिंदगी से मेरा आज सही में मेल हो गया।।

कहीं किसी मोड़ पर जिंदगी ने अहसास करा दिया

अपने पराये का भाव हृदय से जड़ से मिटा दिया।।

जिंदगी का हर मोड़ नई सीख सिखाता नजर आता है 

मनुष्य को जीवन के अलग अलग अनुभव कराता है।।

हर सपने को पूरा करने का अवसर देती जिंदगी

कोशिश, मेहनत से जिंदगी भी लगती है बंदगी ।।

कहीं किसी मोड़ पर मुझे जिंदगी का सही अर्थ समझ आया

जिसने मुझे जिंदगी को खुशहाल बनाने का मंत्र है समझाया।।

जिंदगी वहीं सफल जिसने परोपकार है कमाया

जिसने दुखी , असहाय को अपने गले है लगाया।।

जिंदगी का हर मोड़ पल में बीत जाता

नासमझ सिर्फ हाथ मलता रह जाता

चलो जिंदगी को खुशनुमा, खुशनसीब बनाते हैं

श्वास श्वास से हरि के गुण गाते है ।।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर 





करे योग रहे निरोग

 शीर्षक - करे योग रहे निरोग 

योग  करें नित्य दिन मेरे भाई 

इसमें है सिर्फ तुम्हारी भलाई

तन मन के मिट जाते सब रोग

समझते सिर्फ यह समझदार लोग।।

 योगा का अभ्यास की नित्य आदत बनाएं

तन मन में नव स्फूर्ति लाएं

दवाइयों का बेफजूल खर्च बचाएं

उस धन से दान‌ पुण्य कमाएं।।

    सब ओर योगा  का जादू छाया

विश्व के लोगों ने योगाभ्यास करने को अपनी दिनचर्या बनाया

योगाभ्यास करने से सब में तंदरुस्ता आई 

रोगों से बचाव की असली है यह दवाई।।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा , जम्मू कश्मीर 








मोहपाश

 शीर्षक - मोहपाश 

धीरज बहुत ही मेहनती लड़का था उसने बहुत परिश्रम करके सरकारी नौकरी प्राप्त की। परिवार में सिर्फ वो  तीन ही सदस्य थे। धीरज स्वभाव से बहुत ही भोलाभाला था । घर और नौकरी के सिवाय उसे कुछ भी सुझता नहीं था।

धीरज की दोस्ती अपने साथ काम करने वाले वाली अनिता से हो गई। अनिता चकाचौंध भरे जीवन जीने में विश्वास करती थी। धीरज अब अनिता से प्यार करने लगा । एक दिन धीरज ने अपने दिल की बात अनिता से कह दी। अनिता ने कहा मैं तुमसे शादी करने के लिए तैयार हूं लेकिन तुम्हें मेरे अनुसार ही जीवन जीना होगा, धीरज ने बिना सोचे समझे हां कर दी। 

अब दोनों एक साथ घूमने फिरने जाने लगें। एक दूसरे से रात भर मोबाइल पर बातें करते रहते। एक दूसरे को मिलने के बेकरार रहते। जैसे दोनों एक दूसरे को कई जन्मों से जानते हो। धीरज अनिता के मोहपाश में बंधता जा रहा था।

कुछ महीनों के बाद दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद अनिता ने अपने असली रंग दिखाने शुरू किए। उसके मन में धीरज के माता पिता के लिए थोड़ा सा सम्मान भी नहीं था। अब धीरज थोड़ा परेशान रहने लगा। उसने अनिता को बहुत समझाने का प्रयास किया लेकिन अनिता के कान पर जूं तक नहीं रेंगती थी।अब दोनों में लड़ाई झगडे बढ़ने लगें एक दूसरे को उलहाना देना दोनों की आदत बन गई‌। 

‌अब धीरज को अपनी ग़लती का अहसास होने लगा कि मैंने अनिता के मोहपाश में फंसकर बिना सोचे समझे इससे शादी क्यों कर ली ? उसे अपनी गलती पर अफसोस होने लगा लेकिन वो समय बीत चुका था।

रविवार, 19 जून 2022

कबीर साहेब का रूहानी उपदेश

 शीर्षक- कबीर साहेब का रूहानी उपदेश 

कबीर साहेब का रूहानी उपदेश हम सबको सुनाते हैं

मानवता के प्रचारक सद्गुरु कबीर साहेब की वाणी मूल उद्देश्य बताते हैं

कबीर साहेब ने जात पात के नाम पर होने वाले भेदभाव को नकारा है 

मानव को हमेशा उसके अच्छे कर्मों ने निखारा है

राम रहीम के नाम पर लड़ने वाले लोगों को कबीर साहेब ने अंधा पुकारा है 

कण कण में बसने वाला प्रभु हम सब का पालनहारा है 

कबीर प्रभु को वन वन में ढूंढने वाले पाखंड करते हैं 

काया के भीतर ही सर्वैश्वर बसते हैं 

कबीर धर्म के नाम पर बांटने वाले नास्तिक होते है 

आस्था के नाम पर लड़ाई झगड़ा करते हैं 

कबीर मीठी वाणी प्रभु को भाती है

तन‌ मन में शीतलता भर जाती है 

कबीर ने अपनी भक्ति से ईश्वर को रिझा लिया 

सारी सृष्टि को भक्ति भावना से निर्मल बना दिया

ऐसे परम पूज्य संत कबीर साहेब की पावन वाणी सबको जीवन का उद्देश्य बताती है

भक्ति मार्ग पर चलने वालों को ईश्वर का सुमिरन करना सिखाती है।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा,जम्मू कश्मीर



मैंने सारे सहारे छोड़ दिए एक तेरा सहारा पकड़ लिया

 शीर्षक -मैंने सारे सहारे छोड़ दिए एक तेरा सहारा पकड़ लिया 

मैंने तेरा होना अब स्वीकार किया 

नाम धन से सतगुर तूने मुझे मालामाल किया

मैंने सारे सहारे छोड़ दिए एक तेरा सहारा पकड़ लिया.............. 

संसार की मोह माया को मैंने त्याग दिया 

जीवन में अब सिर्फ तेरा सहारा लिया 

मैंने सारे सहारे छोड़ दिए एक तेरा सहारा पकड़ लिया..............  

दुनिया के रिश्ते नातों को मैंने दिल से भूला दिया

तेरे साथ कभी न‌ टूटने वाला रिश्ता बना लिया

मैंने सारे सहारे छोड़ दिए एक तेरा सहारा पकड़ लिया..............  

मेरे हर अपने  श्वास से  तेरी महिमा को गा लिया

मेरे प्यारे सतगुरु तूने मुझे जीत जी मरना सिखा दिया 

मैंने सारे सहारे छोड़ दिए एक तेरा सहारा पकड़ लिया..............  

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर




शुक्रवार, 10 जून 2022

धरती का बढ़ता तापमान

 शीर्षक - धरती का बढ़ता तापमान 

धरती का बढ़ता तापमान 

अब क्यों होते है हम हैरान

पेड़ पौधों को काटकर धरती मां को  कर दिया बेजान 

बनते हैं सब जन‌ अब अनजान 

पेड़ पौधों के योगदान को हमने भूला दिया 

विकास के नाम पर जंगलों को तबाह किया 

अपनी भूलों को हमेशा करते हैं नजरंदाज 

गलतियां करने से कभी नहीं आते हैं बाज 

फिर कहते फिरते धरती का तापमान क्यों बढ़ता  जाता  

अगर अपनी गलतियों से इंसान सीख नहीं पाता 

इंसा को अपनी गलतियों को पहचानना अब बहुत जरूरी 

पेड़ पौधों के रोपण के बिना समस्या सुलझ पाना बात लगती अधूरी 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर




मंगलवार, 7 जून 2022

अधूरे सपने

 शीर्षक - अधूरे सपने 

अधूरे सपने को पूरा करने की मन में ठान लो 

सपने को पूरा करने के बाद ही आराम करो 

सपने अधूरे वहीं रह जाते हैं 

जिनमें कोशिशें कम होती है

मुश्किलें भी रास्ता रोक नहीं पाती 

 जिनमें मेहनत लग्न होती है

सपने देखने का अधिकार सबको समान है

मेहनतकश को ही मिलता सफलता का मुकाम है

सपने सोते हुए देखना सबसे बड़ा गुनाह है 

सोते हुए ही हो जाते हैं दुनिया से फनाह है

जागती आंखों से देखे सपने ही पूरे होते हैं

मेहनत और लगन से अधूरे सपने के महल खड़े होते हैं ‌‌‌‌‌

अधूरा रह जाने कोई ख्वाब चलो अपने आप को जगाते हैं

मेहनत लगन को अधूरे सपनों को पूरा करने का हथियार बनाते हैं ।







स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर



सोमवार, 6 जून 2022

शहीदों के सिरताज

 शीर्षक - शहीदों के सिरताज 

गुरु अर्जुन देव को नित नित शीश झुकाता हूं

महिमा उनकी दिल से गाता हूं 

माता भानी के लाल की शहीदी  गाथा सुनाता हूं

गुरु नानक की पांचवी इलाही ज्योति को अपना मस्तक बार बार भेंट चढ़ता हूं 

उबलते पानी में भी बैठकर ईश्वर का  शुक्रराना करने वाले दाता को बलिहारी जाता हूं

तपती रेत तन पर पड़ने पर भी शीतलता से भी शीतल दिखने‌  वाले सतगुरु जी को श्रद्धा सुमन चढ़ाता हूं

गर्म तपती तवी पर बैठकर ईश्वर स्तुति करने वाले सतगुरु जी का निर्भय रूप दिखाता हूं

मानवता के रक्षक सतगुरु अर्जुन देव जी के महान परोपकार के आगे अपना शीश झुकाता हूं।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जिला:  सांबा, जम्मू कश्मीर


रविवार, 5 जून 2022

पर्यावरण दिवस

शीर्षक - पर्यावरण दिवस

आओ मिलकर पेड़ लगाते है

पर्यावरण को स्वच्छ और शुद्ध बनाते हैं

पेड़ पौधों ही पर्यावरण की जान है

बढ़ाते धरती माता की शान है

पेड़ पौधों से ही धरती माता की सुंदरता लगती है

इनके न होने के कारण ही ग्लोबल वार्मिंग की समस्या बढ़ती है

पेड़ पौधे ही हमें आक्सीजन दान करते हैं

जिसके कारण हमारे श्वास चलते हैं 

पेड़ पौधे हमें गर्मी से बचाते हैं 

धूप गर्मी को सह जाते हैं

पेड़ पौधों के बिना धरती बेजान नजर आएंगी 

हमारी भूलें हमें विनाश की ओर ले जाएगी 

आईये मिलकर पेड़ पौधों का महत्व सबको समझाते हैं

देश के जन जन से एक एक पेड़ लगवाते हैं 

पर्यावरण दिवस मनाना इसी से सार्थक हो जाएगा 

जब देश का हर जन पेड़ पौधों को कटने से बचाएगा।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जिला: सांबा,जम्मू कश्मीर






बुधवार, 1 जून 2022

सबसे बड़ा रुपैया

 शीर्षक - सबसे बड़ा रुपैया 

हर रिश्ते की बुनियाद पैसा बन‌ गया 

प्रेम प्यार का नाता कहीं छिप गया 

एक दूसरे का दर्द अब रुलाता नहीं 

आंखों का पानी भी बर्फ सा जम गया 

इंसानियत का रिश्ता सब भूल गए

पैसे के रंग ही सब पर चढ़ गए 

पैसा कमाने के हर हथकंडे अपनाते है 

ज़मीर को भी बेचकर खा जाते हैं 

नशों के सौदागर कारोबार धड़ल्ले से चलाते हैं

बड़े बड़े कुर्सी वालों को रिश्वत देकर अपना कारोबार आगे बढ़ाते है 

नौजवानों को नशे का आदी बनाते हैं 

अपने घरों में पैसा भरते जाते हैं 

पैसा कमाने के लिए बड़े बड़े अधिकारी कुर्सी का फायदा उठाते हैं

गरीबों के हक की रोटी भी खुद खा जाते हैं

एक लाख नहीं करोड़ों अरबों रुपए नेता लोग बिना डकार के हजमाते है 

सबसे बड़ा रुपैया अपने दिल से ऐसे भ्रष्ट नेता मनाते हैं।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर



चलो आज हम आशावादी बनते हैं

 शीर्षक - चलो आज हम आशावादी बनते हैं

जीवन के कठिन मार्ग पर चल कर 

जिंदगी की मुश्किलों का कुछ हल करते हैं

निराशा भरे मन को उत्साहित कर 

हर मुश्किल को आसान करते हैं

चलो आज हम आशावादी बनते हैं ।

  आत्मविश्वास को हृदय में भरकर

   नकारात्मक को दूर भगाते हैं 

   सकारात्मक सोच अपनाकर 

अपने जीवन को सुखी बनाते हैं

चलो आज हम आशावादी बनते हैं। 

अपनी क्षमता भरोसा कर 

अपने इरादों को बुलंद बनाते हैं 

अपने अस्तित्व को पहचानकर 

धरती पर ही स्वर्ग सबको स्वर्ग दिखलाते हैं

चलो आज हम आशावादी बनते हैं।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर






प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...