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शनिवार, 25 अक्टूबर 2025

मनुष्य जीवन का ध्येय क्या है?

 गोविंद मिलन कारण तुम जग आए ,

माया संग क्यों उलझाए जाए।

झूठ देख क्यों लपटाया ,

समझ ना पाए देश है पराया।

मोह माया में मन उलझाया ,

झूठी है संसार की सुख छाया।

हर रिश्ते में है मतलब परस्ती,

  धन पर टिकी है इंसान की हस्ती ।

धर्म कर्म का है दिखलावा,

 समझ ना पाया कलयुग का छलावा।

सिमरन भजन मुक्ति का द्वार , 

बाहरी पाखंड में उलझा गंवार।

मानस देह में ही मिटेगा आना जाना, 

भजन  सिमरन गोविंदा का अब क्यों भूलना।

गोविंद मिलन कारण जग आया , 

पड़ जा साधु-संत शरणाया ।

श्वास-श्वास गा गोविंद राया,

तब मिलेगी प्रभु प्रेम की छाया। ।


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा , जम्मू-कश्मीर 

मन की दुविधा में

 मन की दुविधा में, खोया अपना चैन, 

 मन की किताब पढने में, बीतते है दिन रैण ।

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा,  जम्मू-कश्मीर 

बुधवार, 1 अक्टूबर 2025

सच्चा कलमकार

 सच्चा कलमकार करता झूठ पर हमेशा वार ,

कलम से  ही शुरु होता है उसका संसार ,


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा, जम्मू-कश्मीर 


प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...