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रविवार, 31 जुलाई 2022

यथार्थ लिखने वाला

 शीर्षक - यथार्थ लिखने वाला 

यथार्थ लिखने वाला प्रेमचंद बहुत महान 

उनकी ख्याति को जानता सारा जहान

अजायबराय आनंदी की होनहार संतान

साहित्य के क्षेत्र में जिनका प्रमुख स्थान। 

प्रेमचंद की कहानियां मन को छू जाती

समाज की समस्याओं से पाठक को अवगत करवाती

उनकी लेखनी का जादू सब पर छाया जाता

साहित्य पढ़ने की रूचि को बढ़ाता ।

अनमेल विवाह, दहेज प्रथा, वेश्यावृत्ति की समस्या को प्रेमचंद ने बुरा बताया

प्रेमाश्रम , सेवासदन उपन्यास सब समस्याओं को उठाया

प्रेमचंद ने यथार्थ लिखने को ही साहित्य का विषय बनाया 

समाज में फैली बुराइयों से पर्दा उठाया।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर 







शनिवार, 30 जुलाई 2022

मन परिंदा


#परिंदा 

मन परिंदा दौड़ता ही दौड़ता जाता

एक पल‌ भी टिक नहीं पाता

हंस को छोड़ कौवे संग प्रीत लगाता 

अमूल्य मानस जन्म को व्यर्थ गंवाता


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

सांबा जम्मू कश्मीर 

शुक्रवार, 29 जुलाई 2022

रंजिश

 #रंजिश

मेरा रंजिशों से न दूर दूर का नाता है

रंजिश दिल में रखने वाला अपना सुख चैन स्वयं गंवाता है 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

गुरुवार, 28 जुलाई 2022

तक़रीब ( मौका, अवसर)

तक़रीब 

मनुष्य का जामा भी एक तक़रीब सा लगता 

खुदा की इबादत करने का अवसर इसी में मिलता 

चौरासी लाख योनियां इसी को पाना चाहती है

दिन रात प्रभु के शुभ गीत गाती है‌ 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 



मंगलवार, 26 जुलाई 2022

मुहाफ़िज़

 


#मुहाफ़िज़ (रक्षक)

ऐ मेरे मुहाफ़िज़ मेरी सब खताओं को भूला दो
मेरे मंदिर में अपने नाम की ज्योति तुम जगा दो

स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर

सोमवार, 25 जुलाई 2022

मन के विकारों को मिटाना है अंतर मन में ही हरि को पाना है

 शीर्षक - मन के विकारों को मिटाना है

मन के विकारों को मिटाना है 

अंतर मन में ही हरि को पाना है  

मन वचन कर्म से गुरु मार्ग पर चलते जाना है 

गुरु के हुक्म में रहना मन को सिखाना है। 

कर्मों को निष्काम भाव से करते जाना है 

फल को पाने की इच्छा को भुलाना है

सबको प्रेम से अपना बनाना है 

द्वैत भाव को मन से दूर भगाना है। 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर 







 



क़रीब

     क़रीब 

मेरे मुर्शिद जिसके तूं क़रीब 

वो कहां कहलाता गरीब

दुख दर्द न आता समीप 

सुख समृद्धि का तू ही महीप 


स्वरचित एवं मौलिक

  अमरजीत सिंह

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर

बुधवार, 13 जुलाई 2022

कलम ही हमारी शक्ति और पहचान है

शीर्षक -कलम ही हमारी शक्ति और पहचान है 
कलम ही बदलाव का कारण बनती 
कलम से बढ़ी नहीं कोई शक्ति
कलम ही सम्मान दिलाती 
सबसे अलग हमारी पहचान बनाती।
  जब जब क़लम चलती है 
  दूध का दूध पानी का पानी करती है
  सच्चाई करती है हमेशा बयान
  यही है इसकी पहचान। 
      ‌‌‌‌‌कलम में कवि की जान 
     कवि करता कार्य महान 
     कलम की शक्ति जानता सारा जहान
    कलम ईश्वर का बहुमूल्य वरदान। 
 
स्वरचित एवं मौलिक 
अमरजीत सिंह 
जिला - सांबा,  जम्मू कश्मीर 





रविवार, 10 जुलाई 2022

जनसंख्या की समस्या

 शीर्षक - जनसंख्या की समस्या 

जनसंख्या की समस्या बहुत भारी 

भूखे मरने की हो रही है तैयारी 

त्रस्त है इससे दुनिया सारी

बनती जा रही है यह घातक बिमारी।

अधिक जनसंख्या से बढ़ती है बेरोजगारी 

बिल्कुल नहीं यह हितकारी

सब ओर हाहाकार मचाई 

बिना पैसों के बच्चे कैसे करेंगे पढ़ाई ।

अधिक जनसंख्या से सुख साधनों में कमी आई

महंगाई ने सबकी नींद है उड़ाई

वस्तुओं की कमी निरंतर बढ़ती जाती

वस्तुओं की कीमत में नित उछाल है लाती। 

जमीन दिनों दिन घटती जाती 

सबको घर बनाने की जमीन कहां मिल पाती

जनसंख्या वृद्धि से सब समस्याएं बन जाती 

महंगाई, वस्तुओं की कमी सबको बहुत रुलाती।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर 





शनिवार, 9 जुलाई 2022

सावन आया सखी

शीर्षक- सावन आया सखी 

सावन आया सखी 

आ मिलकर झूला झूले

खुशी भरें इस मौसम में

चलो नाचे झूमे 

सखी सावन बिरहा बढ़ाएं

तन मन मेरा

अपनी सुध बुद्ध भूल जाएं 

हे सावन मेरे पिया को मेरा संदेश सुनाना

मेरे मन की व्यथा 

मेरे बहते आंसुओ की कीमत बतला आना

सावन का आना तभी मुझे भाया

जब मेरा पिया घर वापस आया 

पिया बिना मैं जैसे बिन प्राण देह 

मेरे पिया मुझे तुमसे अपार है नेह 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर 













बुधवार, 6 जुलाई 2022

अनकही बातें

 शीर्षक - अनकही बातें  

तेरे जाने के बाद कुछ बातें रह गई अनकही

मेरे मन अब रहता है तेरे ख्यालों में कहीं

तेरे जाना मुझे रुला गया

मुझे उम्रभर गमों में डूबा गया

मेरे तेरे मन की बातें कही जाकर खो गई 

मेरे जीवन साथी तूं मुझे बीच मझधार में छोड़ क्यों गई 

तेरी बातें याद आते ही मेरी आंखें भर आती हैं

तेरी अनकही बातें मेरे हृदय को पीड़ा दे जाती है

मुझे तेरे जाने का एहसास पहले से हो जाता

तेरी अनकही बातें को मैं ही जान जाता।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर 

रविवार, 3 जुलाई 2022

चिंता की कोई बात नहीं

 शीर्षक - चिंता की कोई बात नहीं 

जब तक तेरा साथ है 

मेरे सिर पर हाथ  है 

तूं ही मेरे लिए खास है

तेरे हुक्म में ही चलते मेरे श्वास है।

जीवन के पथ पर तूं ही हमें चलाता है

अपनी गलतियों से सीखने की सीख सिखाता है

सबको आगे बढ़ते रहने की हिम्मत तूं ही बढ़ाता है

परिश्रम का जीवन में महत्व अपने आप समझ आता है।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर 




प्रतिक्षा

 शीर्षक - प्रतिक्षा 

प्रतिक्षा करना आसान नहीं होता 

शीघ्रता से भी कोई काम नहीं होता 

मेहनत करने पर  भी प्रतिक्षा करनी पड़ती

सफलता भी जल्दी से नहीं मिलती

डॉक्टर भी दवाई देने के बाद प्रतिक्षा करने के लिए कहता

वो कोई जादूगर नहीं जो क्षण में रोगी के रोग हरता

शिक्षक भी शिष्य को धीरे धीरे सिखाता

एक दिन में कोई भी महाविद्वान नहीं बन पाता

हर कोई जल्दी जल्दी सब पाना चाहता

जल्दी जल्दी के चक्कर में अपनी मुश्किलें और बढ़ाता 

प्रतिक्षा हमें धैर्यवान बनाती 

हमें संयम रखने की सीख सिखाती  ।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा,जम्मू कश्मीर 






शनिवार, 2 जुलाई 2022

जिंदगी एक समझौता

 शीर्षक - जिंदगी एक समझौता 

जिंदगी एक समझौता बनकर रह गई

जज्बातों को दबाते रहने की कहानी कह गई 

हर रिश्ता जिंदगी में समझौतों पर टिका है

हर भाव अंदर ही अंदर छिपा है ।।

दिखावा करते करते प्यार की भावना कहीं खो गई 

लगता हमारी आत्मा भी कहीं जाकर सो गई 

हर रिश्ता अब बेगाना सा लगता है 

अब हंसना भी रोना जैसा लगता है ।।

जिंदगी के समझौते जीने का राह बनाते हैं

कभी पराये भी अपने होने का एहसास कराते हैं

जिंदगी का सफर ऐसे ही हमेशा से चलता आया है

सबने जीवन जीने के लिए समझौतों का राह अपनाया है।।

सुख दुख भी जिंदगी का हिस्सा बन‌ जाते हैं

इंसान को हंसाते रुलाते हैं

अपनों का संसार में आना जाना जिंदगी में बदलाव लाता है

इंसान को खुशी ग़म का एहसास कराता है।।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा जम्मू कश्मीर 





प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...