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बुधवार, 6 जुलाई 2022

अनकही बातें

 शीर्षक - अनकही बातें  

तेरे जाने के बाद कुछ बातें रह गई अनकही

मेरे मन अब रहता है तेरे ख्यालों में कहीं

तेरे जाना मुझे रुला गया

मुझे उम्रभर गमों में डूबा गया

मेरे तेरे मन की बातें कही जाकर खो गई 

मेरे जीवन साथी तूं मुझे बीच मझधार में छोड़ क्यों गई 

तेरी बातें याद आते ही मेरी आंखें भर आती हैं

तेरी अनकही बातें मेरे हृदय को पीड़ा दे जाती है

मुझे तेरे जाने का एहसास पहले से हो जाता

तेरी अनकही बातें को मैं ही जान जाता।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर 

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