शीर्षक- सावन आया सखी
सावन आया सखी
आ मिलकर झूला झूले
खुशी भरें इस मौसम में
चलो नाचे झूमे
सखी सावन बिरहा बढ़ाएं
तन मन मेरा
अपनी सुध बुद्ध भूल जाएं
हे सावन मेरे पिया को मेरा संदेश सुनाना
मेरे मन की व्यथा
मेरे बहते आंसुओ की कीमत बतला आना
सावन का आना तभी मुझे भाया
जब मेरा पिया घर वापस आया
पिया बिना मैं जैसे बिन प्राण देह
मेरे पिया मुझे तुमसे अपार है नेह
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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