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गुरुवार, 25 नवंबर 2021

जिंदगी का सफ़र

 

विषय - जिंदगी का सफर

विधा - गद्य

जिंदगी के सफर में बहुत सारे उतार चढ़ाव आते जाते रहते हैं जो मनुष्य को मजबूत बनाते हैं ।  जीवन में आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करता है यह जीवन का सफ़र। 

सरलाअपने जीवन में बहुत ही खुश थी घर में किसी चीज की कमी नहीं थी । संतान भी बहुत आज्ञाकारी थी पति का कारोबार विदेशों में फैल चुका था दान पुण्य भी बहुत कमाते थे। किसी   भी मांगने वाले को कभी भी खाली हाथ नहीं भेजते थे।

सरला स्वभाव की बहुत भोली थी एक दिन उसके देवर ने सरला से जमीन कारोबार के कागजात मांगे तुरंत दे दिए क्योंकि वह सभी को अपनी तरह ईमानदार और भोला भाला समझती थी उसे क्या पता था उसका देवर उसके भोले भाले स्वभाव का फायदा उठा रहा है

सरला के देवर ने सारी जमीन जायदाद अपने नाम करवा ली अब सरला के परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत दयनीय हो गई  लेकिन उन लोगों ने हिम्मत नहीं हारी सरला ने आचार बनाने का कार्य आरंभ किया घर में खुशी लौटने लगी आचार कारोबार सभी सदस्यों के सहयोग के कारण कारोबार बहुत बढ़ गया । 

अब सरला ने पहले से भी बड़ा घर खरीद लिया उनका आचार कारोबार विदेशों में भी फैल गया सरला के देवर को कारोबार में बहुत घाटा हो गया कारोबार के साथ सेहत भी गई गरीबी और बीमारी ने उसे उसकी गलती का अहसास करा दिया । वह अपनी भाभी सरला और उसके सारे परिवार से अपनी गलती के लिए माफी मांगने लगा । सरला ने उसे उसकी गलती के लिए क्षमा कर दिया। 

मनुष्य जीवन के सफर में बहुत कुछ सीखता और सिखाता है अपने इन्ही अनुभवों से जीवन में आनेवाली कठिनाइयों को दूर करता है। 


स्वरचित एवं मौलिक  सिंह

अमरजीत सिंह

सांबा जम्मू कश्मीर


बुधवार, 24 नवंबर 2021

वीरांगना झलकारी बाई

 


#विषय - वीरांगना झलकारी बाई

विधा - कविता

साहस वीरता जिसकी पहचान थी, 

वो वीरांगना झलकारी बाई महान थी, 

सदोवा जमुनाबाई की संतान थी, 

बुंदेलखंड की धरती उसका जन्मस्थान थी । 


 झलकारी बाई झांसी में ब्याही थी, 

सबने वहाँ बहुत खुशी मनाई थी, 

झलकारी बाई के पति रानी लक्ष्मीबाई की सेना में सिपाही थे, 

अपने प्राणों की आहुति देकर पूरन ने देश सेवा निभाई थी । 


 दुर्गादल शाखा में सेनापति की भूमिका खूब निभाई थी, 

अपनी सूझबूझ से रानी लक्ष्मीबाई की जान उसने बचाई थी, 

रानी लक्ष्मीबाई की प्यारी सखी तभी बन पाई थी, 

प्राणों की आहुति देकर देश की आज़ादी के लिए लडी लड़ाई थी । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर



    




       




दया धर्म का मूल है

 विषय - दया धर्म का मूल है

शीर्षक - दया धर्म का मूल माना जाता

दया धर्म का मूल माना जाता, 

हर धर्म दया करना सिखाता । 


दया धर्म को मजबूत बनाती, 

इंसान को इंसान होने का एहसास कराती । 


बिना दया के सब कर्म निष्फल माने जाते, 

मनुष्य को न कोई फल दे पाते । 


दया मनुष्य को देव बनाती, 

संसार में उसकी शोभा गाई जाती। 


दया धर्म, जाति भूल जाती, 

सब पर यह निष्काम भाव से लुटाई जाती। 


दुखी मनुष्य  दया भावना से नव शक्ति पाता, 

दया दर्शाने वाले को लाखों दुआ दे जाता । 


दया मनुष्य चरित्र को उज्जवल कर जाती, 

दयावान की कीर्ति युगों युगों सबको सुनाई जाती । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर



रविवार, 21 नवंबर 2021

गुरु नानक साहिब जी का मानवता के लिए योगदान

 विषय - गुरु नानक साहिब जी का मानवता के लिए योगदान

शीर्षक - 

गुरु नानक तारनहार आया, 

सबको जिसने गले लगाया, 

ऊंच नीच का जिसने भेद मिटाया, 

सबको सच का संदेश सुनाया। 


जात पात को जिसने बेफजूल बताया, 

कर्म से ही इंसान को श्रेष्ठ बनाया, 

सबको समानता का हक़ दिलाया, 

परमेश्वर सब के अंग संग बताया। 


कर्म कांड को पाखंड बताया , 

शब्द सुरति का मार्ग सबको सिखलाया

प्रेमा भक्ति से ईश्वर को रिझाया , 

सबको दया धर्म का कर्म सिखाया।


 गुरु नानक ने मानवता का धर्म अपनाया, 

हक हलाल की कमाई खाने के लिए समझाया, 

मिल बांटकर खाने को श्रेष्ठ बताया, 

सबको सच्चे ईश्वर की भक्ति में लगाया । 


भूले भटके लोगों को भक्ति का सच्चा रास्ता दिखाया, 

लगता है ईश्वर गुरु नानक साहिब के रूप में स्वयं उतर आया, 

सतगुरु जी ने अपने उपदेश को स्वयं कमाया, 

ब्रह्माण्ड के कण कण में सतगुरु स्वयं समाया।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर 








गुरुवार, 11 नवंबर 2021

मेरे अरमान

#विषय - मेरे अरमान

विधा -   स्वैच्छिक

मेरे अरमान मेरे जीवन को नई दिशा देते हैं, 

मेरी दुख तकलीफों को मिटा देते है । 

मेरे अरमान मुझे परिश्रम करवाते हैं, 

मुझे नींद में भी जगाते है । 

अरमानों को पूरा करना जीवन का लक्ष्य बना लिया है, 

हर गम को खुशी से मनाना मैंने सीख लिया है। 

मेरे अरमान मुझे आलस्य से बचाते है, 

सोते हुए भी मुझे सपनों में अपने अरमान सताते है । 

अरमानों मेरे जीवन को नया अर्थ दिया है, 

मैंने जीवन की कठिनाइयों को अपना मीत बना लिया है। 

अरमानों मेरे जीवन को खुशनुमा बना दिया है, 

हर परिस्थिति में खुश रहना मैंने अपना स्वभाव बना लिया है । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा ,  जम्मू कश्मीर


बुधवार, 10 नवंबर 2021

जिंदगी का सफ़र

नमन मंच 🙏🙏🙏

दिनांक - 17/12/2021

विषय - जिंदगी का सफर

विधा - स्वैच्छिकए

जिंदगी का सफर सदियों से चलता आया है, 

कोई न इसको रोक न पाया है । 


जिंदगी नित नए नए अनुभव कराती है, 

इंसान की सोच मे नवीन बदलाव लाती है । 


जिंदगी के सफर में दुख सुख आता है, 

इंसान को बहुत कुछ सीखाता है । 


जिंदगी कठिनाइयों से लड़ती है, 

आगे बढ़ने की कोशिश हमेशा करती है । 


कोशिशें जीवन को संघर्षमय बनाती है, 

जीवन जीने की नई राहें दिखाती है । 


नई राहों पर चलता इंसान कुछ तो सीखता है, 

जिंदगी में करोड़ों मुसीबतें आने पर भी नहीं टूटता है । 


जिंदगी का यह सफर यूँ ही कटता जाता है, 

सबको सोच के अनुसार आकार देता जाता है। 



स्वरचित एवं मौलिक अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर










रविवार, 7 नवंबर 2021

जगतगुरु श्री गुरु नानक देव साहिब जी

जगतगुरु श्री गुरु नानक देव साहिब जी

गुरु नानक परम पारस पुरुष, परमेश्वर मानुस देह धर आया, 
कलयुग में नाम का प्रकाश कर, धरती को सचखंड बनाने आया।  

माता तृप्ता पिता कलियाण दास का प्यारा पुत्र, जग को जगाने आया, अंतर ज्ञान की विधि बताकर, सबके अज्ञान को मिटाने आया। 

बहन नानकी ने पहचाना ,गुरु नानक को अपना परमेश्वर माना, 
नाम जपकर बहुत सुख पाया, आठ पहर अपनी सुरति से परमेश्वर का दर्शन पाया। 

सज्जन ठग को संत बनाया, पापों से मुक्त कराया, 
गुरु जी ने अपनी वाणी का शब्द सुनाया, सज्जन को धर्म का मार्ग दिखलाया। 

गुरु नानक जात पात भ्रम मिटाया, सबको एक ईश्वर की संतान बतलाया, गुरु नानक गृहस्थ उदास मार्ग अपनाया, ईश्वर भक्ति को सहज बनाया । 


गुरु नानक की महिमा अपरंपार, कोई न पा सका उनका पार, 
गुरु नानक तारे बेअंत अपार, वो है परमेश्वर का पूर्ण अवतार। 


स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह 
जिला-  सांबा , जम्मू कश्मीर




  

शनिवार, 6 नवंबर 2021

मन का अंधकार कैसे मिटाये

 नमन मंच 🙏🙏🙏

क़लम की ताक़त साहित्यिक संस्थान ,भारत

दिनांक - 06/10/2021

दिन - शनिवार

विषय - मन का अंधकार कैसे मिटाये

विधा - स्वैच्छिक


मन का अंधेरा ज्ञान से जाता, अंतर में ही तीर्थ पाता, 

सबको यही भ्रम भुलाता, बाहरी दृष्टि से ईश्वर को देख नहीं पाता । 


हे प्रभु मुझे मार्ग दिखलाओ, मेरे मन अंतर की वेदना मिटाओ

मुझसे मेरे निज रूप का, साक्षात्कार तुम स्वयं कराओ । 


मै मेरी का परदा पड़ा मन में , झमेला बना जीवन में, 

अपनी महर का अहसास करा ह्रदय में, दया की बर्षा बरसा निर्जल मन में । 

 

गुरु का मेल कर दे, मन के भ्रम भुला दे, 

तेरे अंग संग होने का, प्रियतम मुझे यकीन दिला दे । 


अज्ञानता मन का अंधियारा, गुरु बिना दिखता नहीं कण कण में बसने वाला, 

गुरुपरमेश्वर ने माया का परदा हटाया, सर्वव्यापी वाहिगुरू का अंतर में दर्शन कराया। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जिला  - सांबा ,  जम्मू कश्मीर

गोवर्धनधारी

 नमन मंच 🙏🙏🙏 

#गूंज कलम की साहित्य संस्थान जम्मू कश्मीर इकाई

दिनांक - 06/10/2021

दिन - शनिवार

#विषय - गोवर्धनधारी

विधा - स्वैच्छिक ( गद्य - पद्य) 

इंद्र देव का अहंकार मिटाया, 

सबको भक्ति का नया रास्ता दिखाया । 


 गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाया, 

गोवर्धनधारी नया नाम भक्त जनों से पाया। 


गोकुल वासियों को इंद्र देव के प्रकोप से बचाया, 

गोकुल वासियों से  गोवर्धन पर्वत का पूजन करवाया। 


इंद्र देव के अहंकार को तोड़ने की खातिर नई लीला को रचाया,

इंद्र देव ने अपना शीश यशोदानंदन के सामने झुकाया।  


हरि की लीला को देखकर सब ने गोवर्धनधारी को शीश निभाया, 

देवों ने आकाश से फूलों को बरसाया । 


भगवान श्री कृष्ण सबके मन को भाया, 

देवकीनंदन ने गोकुल को अपनी लीलाओं से बैकुंठ धाम बनाया। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर




प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...