शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है
प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है
सभी ग्रंथों का सार
सभी एक है परिवार
बना ले इसको जीवन का आधार
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला : सांबा, जम्मू-कश्मीर
कविता है कवि के मन की आवाज
शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है
प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है
सभी ग्रंथों का सार
सभी एक है परिवार
बना ले इसको जीवन का आधार
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला : सांबा, जम्मू-कश्मीर
गीता का ज्ञान जो भी पाता
ईश्वर में अभेद हो जाता।
श्वास श्वास जपता नाम
पहुंच जाता अपने निज धाम ।
जन्म मृत्यु का नष्ट हो जाता जाल
अंतर में दिख जाते सतगुर गोपाल ।
कर्म धर्म का मिलता सही ज्ञान
नष्ट हो जाता झूठा अभिमान।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा, जम्मू-कश्मीर
गोविंद मिलन कारण तुम जग आए ,
माया संग क्यों उलझाए जाए।
झूठ देख क्यों लपटाया ,
समझ ना पाए देश है पराया।
मोह माया में मन उलझाया ,
झूठी है संसार की सुख छाया।
हर रिश्ते में है मतलब परस्ती,
धन पर टिकी है इंसान की हस्ती ।
धर्म कर्म का है दिखलावा,
समझ ना पाया कलयुग का छलावा।
सिमरन भजन मुक्ति का द्वार ,
बाहरी पाखंड में उलझा गंवार।
मानस देह में ही मिटेगा आना जाना,
भजन सिमरन गोविंदा का अब क्यों भूलना।
गोविंद मिलन कारण जग आया ,
पड़ जा साधु-संत शरणाया ।
श्वास-श्वास गा गोविंद राया,
तब मिलेगी प्रभु प्रेम की छाया। ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा , जम्मू-कश्मीर
मन की दुविधा में, खोया अपना चैन,
मन की किताब पढने में, बीतते है दिन रैण ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा, जम्मू-कश्मीर
सच्चा कलमकार करता झूठ पर हमेशा वार ,
कलम से ही शुरु होता है उसका संसार ,
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा, जम्मू-कश्मीर
मन का उठना गिरना करता बेचैन
आत्मा को कैसे मिले चैन
विषय विकारों से भरे रहते नैन
खात पीत ही बीत रहे दिन रैन
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा ,जम्मू-कश्मीर
भजन सिमरन की बेला, मन करता भागाभागी
कब होगा सतगुर संग मेला , घड़ी कब आएगी सुभागी।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा, जम्मू-कश्मीर
शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार सभी एक है परिवार बना ले इसको जीवन का आ...