फ़ॉलोअर

मंगलवार, 28 जनवरी 2025

वीरांगना

#वीरांगना 

वीरांगना शब्द जब जहन में आता,

 रानी लक्ष्मीबाई की याद ताजा कर जाता ।

झांसी का किला दिलों में वीरता जगाता 

देश पर मर मिटने का पाठ पढ़ाता ।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा, जम्मू-कश्मीर

बुधवार, 22 जनवरी 2025

दया दान


#दान 

दया दान सब करते सतगुर संत सुजान 

पल में मिट जाता मन का सब अभिमान 

मान सम्मान भाव निकल जाता सतगुर संग मिलान 

दया दान पा जाता मल सब जाती धुलान।

स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा, जम्मू-कश्मीर 

मंगलवार, 14 जनवरी 2025

मकर सक्रांति

 मकर सक्रांति का इतिहास

आनंदपुर किले को मुगल , पहाड़ी राजाओं ने घेरा 

भारी विपत्ति में भी न गिरा सकी,  बुलंद हौसला सतगुर तेरा।

घेराव के कारण खान पान में कमी बेशक आई 

चालीस सिखों ने दशमेश पिता को पीठ क्यों दिखाई ।

गुरू साहिब ने ललकार के कहा 

छोड़कर जाना चाहते हो बेशक जाओ।

बेदावा लिखकर जाना होगा

हमारा नही है गुरू से कोई नाता  ।

चालीस सिख ने बेदावा लिखकर भागना समझ सही 

घरवालों ने लानते मारी बहुत करारी , आंसुओ की धारा अब उनके दिल से बही ।

चालीस सिखों ने पुन: अब वापिस की कर ली तैयारी 

चालीस ने मुगलों से ली टक्कर भारी ।

अपनी जान सब ने धर्म की खातिर बारी 

नमस्कार करती है आज उनको दुनिया सारी।

महासिंह के शरीर में थे प्राण बाकी 

सतगुर से अपनी भूलों की क्षमा मांगी।

सतगुर ने बदावा फाड़कर पुन: उनको  जोड़ लिया

सतगुर ने सब के  संसारिक बंधनो को क्षण मे तोड़ दिया।

स्वरचित  एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा,  जम्मू-कश्मीर 




मंगलवार, 7 जनवरी 2025

सच्ची सरकार

 क्या सिफत करूँ सच्ची सरकार की 

शीश पर जिसके कलगी सुशोभित 

कायनात सारी जिसे बारंबार नमस्कारती 

जिसके हाथ चाबी है सच्चे दरबार की ।

पिता दशमेश तेरे ऊपर अपना रोम रोम बार दूं 

आकर दर्शन दे जा एक बार तूं 

मेरा जीवन मरण अब तूं ही  संवार दे 

दर पर आए को अब अपना प्यार दे।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा , जम्मू-कश्मीर 


प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...