क्या सिफत करूँ सच्ची सरकार की
शीश पर जिसके कलगी सुशोभित
कायनात सारी जिसे बारंबार नमस्कारती
जिसके हाथ चाबी है सच्चे दरबार की ।
पिता दशमेश तेरे ऊपर अपना रोम रोम बार दूं
आकर दर्शन दे जा एक बार तूं
मेरा जीवन मरण अब तूं ही संवार दे
दर पर आए को अब अपना प्यार दे।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा , जम्मू-कश्मीर
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