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गुरुवार, 26 जून 2025

मन बिरहा में तड़प रहा

मन बिरहा में तड़प रहा कब दोगे दीदार  ,

मेरे रोगी मन का अब सतगुर कर दो उपचार ।

विषय वासनाओं में पड़कर दुख होता बहुत अपार ,

अब इस किंचन का कर दो भव से बेड़ा पार ।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा,  जम्मू-कश्मीर 

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