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रविवार, 30 मई 2021

बारिश भावनाओं की

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#नव साहित्य परिवार

# दिनांक -29-31/05/2021

# दिन - शनिवार से सोमवार

# विषय - बारिश भावनाओं की

# विधा - स्वैच्छिक 

भावना भी बारिश जैसी होती, 

दुखी मन की चिंता सब हर लेती, 

दया महामानव दिखाते, 

सबके दुख हरते, 

भावना पशु को भी प्रेम सिखा जाती, 

हिंसा की भावना भुलाती, 

पशु भी प्रेम लुटाता, 

अपना फर्ज खूब निभाता, 

इंसान तूं भी भावनाओं की बारिश बरसा, 

सभी को अपने गले लगा, 

जात, पात, धर्म, नस्ल का भेद भुला, 

सबसे अपना प्रेम निभा । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर





शनिवार, 29 मई 2021

क्षितिज

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#साहित्य संगम संस्थान तेलंगाना इकाई

# दिनांक - 10/06/2021

# दिन- बृहस्पतिवार

# विषय- क्षितिज

# विधा - छंदमुक्त कविता

पक्षी ऊंची ऊंची उड़ान भरता, 

क्षितिज को छूने का प्रयास करता, 

क्षितिज पर पहुँचना उसका सपना लगता, 

हर बादल उसे अपना सा प्रतीत होता , 

क्षितिज की सुंदरता उसको बहुत भाती, 

लगता है उसको पास बुलाती, 

पहाड़ों से आकाश धरती से मिलता नजर आता, 

वो नजारा सबको बहुत भाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर






शुक्रवार, 28 मई 2021

साइकिल की सवारी

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# ग्वालियर साहिति्यक एवं सांस्कृतिक मंच

# दिनांक - 29/05/2021

# विषय- साइकिल की सवारी

# विधा - लघुकथा/कहानी/संस्मरण

आज से 20 सार पहले साइकिल सब बच्चों की मनपसंद वस्तु थी ।विनोद को  साइकिल चलाने के बहुत शौक था ,लेकिन साइकिल खरीदना उनके वश में नहीं था क्योंकि घर के आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। लेकिन अपनी इच्छाओं को नियंत्रित करना कोई आसान बात नहीं है खासकर बचपन में। 

विनोद के विद्यालय में एक खेल प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। जिसमें प्रथम स्थान हासिल करने वाले विद्यार्थी को पंद्रह सौ रूपये का ईनाम देने की घोषणा की गई । विनोद ने भी इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए सोचा । घर पर भी सभी सदस्यों ने उसे प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति दें दी। 

विनोद ने प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल करने के लिए अभ्यास करना आरंभ किया । वह एक दिन में चार घंटे रोज दौड़ने का अभ्यास करता था। प्रतियोगिता का दिन भी आ गया। सौ बच्चों ने दौड़ प्रतियोगिता में भाग लिया, जिनमें विनोद को दौड़ में प्रथम स्थान हासिल हुआ । ईनाम के पंद्रह सौ रूपये विनोद को मिल गए , की खुशी का कोई ठिकाना न था। वह अत्यंत प्रसन्न था। 

उसने ईनाम की राशि अपने पिता जी को सौंप दी। पिता जी ने शहर जाकर उसके लिए साइकिल खरीदकर लाया । विनोद को साइकिल चलाने का बहुत आनंद आया ,जो किसी हवाई जहाज़ की सवारी करने वाले व्यक्ति को भी प्राप्त न हो । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



मर्यादा

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार उतराखंड इकाई

# दिनांक - 28/05/2021

# विषय- मर्यादा

# विधा - गद्य - पद्य

संसार में जो मर्यादा निभाता, 

यश उसका सारा जग गाता, 

मर्यादा इंसान को महान बनाती, 

जग में उसकी कीर्ति हमेशा गाई जाती, 

श्रीराम ने कुल मर्यादा को निभाया, 

मर्यादा पुरुषोत्तम जग से नाम पाया, 

माता सीता ने पत्नी की मर्यादा को निभाया, 

चौदह वर्ष जीवन पति संग वन में बिताया, 

गुरु तेग बहादुर ने जगतगुरु की मर्यादा को निभाया, 

 धर्म की रक्षा के लिए शीश कटाया, 

मर्यादा ही समाज को व्यवस्थित बनाती, 

हर रिश्ते की मर्यादा बतलाती । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर





बुधवार, 26 मई 2021

मनमीत

 नमन मंच

#काव्य_प्रभा काव्य प्रभा (अखिल भारतीय साहित्यिक मंच) 

काव्य लेखन आयोजन क्रमांक - 01

विषय - मनमीत

दिनांक -29-05-2021

शीर्षक - मनमीत

सतगुरु तूं मेरा मनमीत, 

बिना बोले मेरी वेदना जानी, 

 तूं  पूर्ण अंतर्यामी , 

तेरी कृपा से यमदूतों का डर भगाया, 

जन्म मरण का चक्र मिटाया, 

सुन मनमीत तुझे अपनी दशा बताऊँ, 

सुख दुख का कैसे भ्रम मिटाऊं, 

पार करो मुझे भवसागर से , 

मन भावना से तुझ को पुकारूँ , 

मेरी प्रीत तुम से स्वामी, 

रात दिन गाऊँ तेरे प्यार के गीत रे, 

तुम संग मेरी अमिट प्रीत रे, 

सतगुरु तूं ही मेरा सच्चा मीत रे । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू  ,   जम्मू कश्मीर









गौतम बुद्ध

# विषय - विश्व प्रकाश पुंज तथागत गौतम बुद्ध

# विधा - स्वैच्छिक

गौतम बुद्ध ने अहिंसा का पाठ पढ़ाया, 

सबको मानव जीवन का उद्देश्य बताया,  

समय का  महत्व सबको समझाया, 

गुजरा वक़्त वापस नहीं आता सबको बताया, 

आध्यात्मिकता को जीवन का सार बताया, 

इसके बिना मानव जीवन को निर्थक बताया, 

भूतकाल,  भविष्यतकाल को छोड़कर , 

वर्तमान को सुधारने को सही बताया, 

सोच सकारात्मक रखने का उपदेश सुनाया, 

जैसा हम सोचते हैं वैसे हम बन जाते यह भेद सबको समझाया, 

संसार दुखों से भरा हुआ सबको महसूस करवाया, 

तृष्णा  इच्छाओं को मानव जीवन के दुखों का कारण बताया, 

भगवान गौतम बुद्ध ने स्वयं की खोज करने को, 

मानव जीवन का एक मात्र उद्देश्य बताया । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर





मंगलवार, 25 मई 2021

पशु प्रेम

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार कर्नाटक इकाई

# दिनांक - 21-27/05/2021

# विषय- पशु प्रेम

# विधा - स्वैच्छिक

पशु पर हिंसा ना करता, 

स्वाद चेष्टा के लिए उनकी हत्या न करता, 

उनके कल्याण की हमेशा बात करता, 

उनकी मुश्किलों को दिल से समझता, 

पशु प्रेम इंसान को महान बनाता, 

उसके हृदय को पवित्र कर जाता, 

पशु भी इंसान से प्रेम चाहता, 

अपनी भावना इशारों से दर्शाता, 

पशु प्रेमी गाड़ी धीरे से चलाता, 

पशु को चोट लगने पर उसकी मरहम पट्टी करवाता, 

धर्म के नाम पर ना पशु बलि चढ़ाता, 

उनके जीवन का हमेशा रक्षक बन जाता, 

पशु को भी ईश्वर का अंश मानकर, 

उनको कत्लखानों में जाने से बचाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर







उम्मीद

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# दिनांक - 26/05/2021

# दिन - सोमवार से बुधवार

# विषय- उम्मीद

# विधा - स्वैच्छिक 

शहनाज़ ने अपनी पूरी जिंदगी बच्चों के लालन पालन और उनको शिक्षा देने के लिए समर्पित कर दी  ।पति चारपाई पर बीमार पड़ा  है। शहनाज़ की दो बेटियां है रूबिया और सुलताना, पति की दवाई का खर्च, बेटियों की पढ़ाई का खर्च, यह सब शहनाज़ को अकेले ही करना पड़ता है वो दो तीन घरों में झाड़ू लगाने और बर्तन धोने का काम करने लगी । 

शहनाज़ को उम्मीद थी उसकी मेहनत कभी बेकार नहीं जाएगी। उसकी बेटियां पढ़ लिखकर उसका नाम रोशन करेंगी ,उसकी यही उम्मीद उसे मजबूत बनाती थी जिस कारण उसका आत्मविश्वास कभी डिगा नहीं । 

रूबिया और सुलताना ने मां की उम्मीद को कभी टूटने नहीं दिया। दोनों बहनों ने मन लगाकर पढाई की और उनकी मेहनत रंग लाई दोनों ने बारहवीं कक्षा में पूरे राज्य में बार्षिक परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल किया । दोनों बहनों को सरकारी खर्चे पर इंजीनियर की सीट मिल गयी । 

अब माँ की उम्मीद  आकाश की उड़ान भरने लगी। अब शहनाज़ ने लोगों के घर में काम करना बंद कर दिया। अब उसकी बेटियां छोटे बच्चों को टूय्शन पढ़ाकर घर खर्चा चला लेती थी। रूबिया और सुलताना को इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद निजी कंपनी में साफटवेयर इंजीनियर की नौकरी मिल गयी। 

शहनाज़ की उम्मीद ने ही उसकी बेटियों को सफलता के मुकाम पर पहुँचाया । इसलिए हमें भी मुश्किल से मुश्किल समय में उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिए। 


 स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर


सोमवार, 24 मई 2021

विश्वबंधुत्व की भावना

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार अमेरिका इकाई

# दिनांक - 30/05/2021

# दिन -  रविवार

# विषय- विश्वबंधुत्व की भावना

# विधा - गद्य- पद्म

हम सब है भाई भाई, 

प्रेम प्रीत की हमने रीति निभाई, 

धर्म नस्ल का हमें भेद न भाता, 

हर एक धर्म प्रेम सिखाता, 

एक दूसरे का हम है साया, 

कोई न लगता हमको पराया, 

एक दूसरे का दुख हमें रुलाता, 

हिम्मत बढ़ाना हम खूब आता, 

विश्वबंधुत्व की भावना सारे संसार को एक बनाती, 

सबके दिल में प्रेम जगाती । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर




भाई

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार उतर प्रदेश इकाई

# दिनांक - 24/05/2021

# दिन - सोमवार

# विषय- भाई

# विधा - स्वैच्छिक

मेरा भाई मेरा मान, 

तेरे लिए निछावर करूँ जिंद जान, 

दुख मेरा साथ निभाता, 

हर वक़्त मेरी हिम्मत बढ़ाता, 

मेरे भाई ही मेरा दोस्त बन जाता, 

बिना बोले ही मेरी हर बात समझ जाता, 

 अच्छे बुरे का मुझे देता ज्ञान, 

वो चाहता है मैं बन जाऊँ महान इंसान । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू , जम्मू कश्मीर



नीला अंबर

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार झारखंड इकाई

# दिनांक - 22-27/05/2021

# दिन - शनिवार से गुरुवार

# विषय- नीला अंबर

# विधा - काव्य

नीले अंबर में मै उड़ जाता, 

गीत खुशी के मैं हूँ गाता, 

दिल से दिल को मिलाता, 

सबको प्रेम का  संदेश पहुंचाता, 

नीला अंबर सबको भाता, 

सब से प्रेम करना सिखाता, 

नीला अंबर विशालता दिखाता, 

ऊंच नीच का भेद मिटाता, 

नीले अंबर सी विशालता दिखाओं, 

सबको अपने गले लगाओं । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर






रविवार, 23 मई 2021

मेरा हमसफ़र मेरा गरूर

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#काव्य प्रभा

(अखिल भारतीय साहित्यिक मँच)

चित्राभिव्यक्तिक्रमांक 02

शीर्षक ओ मेरे हमसफर

विधा कविता 

दिनाँक 8/6/2021

दिन मंगलवार


मैंने तुमको ईश्वर की कृपा से पाया, 

तूं बन गया  मेरा हमसाया, 

तेरा साथ मेरे सब दुख मिटाता , 

तेरे बिना मै एक कदम चल नहीं पाता, 

तेरे मीठे मीठे बोल देते हैं मुझ को सरूर, 

मेरे प्यारे हमसफ़र तूं ही है मेरा गरूर, 

सुख दुःख में तूने मेरा खूब साथ निभाया, 

समाज में मेरा बहुत मान सम्मान बढ़ाया , 

कई जन्मों का हमारा नाता, 

एक पल भी जादुई मुझे नहीं भाता , 

हमेशा बना रहे हमारा साथ, 

कभी न छोड़ना मेरा हाथ। 


 स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर


शनिवार, 22 मई 2021

बुलंद हौंसले

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार अमेरिका इकाई

# दिनांक -23/05/2021

# दिन - शुक्रवार से रविवार

# विषय- सुपथ गामी बनों, प्रेरणादायक रचनाएँ, सावधानी परक कविताएँ

#शीर्षक- बुलंद हौंसलें

# विधा - मुक्त (लघुकथा) 


विवेक जीवन कठिनाइयों से भरा हुआ था । बचपन में पिता का साया छिन गया ,लेकिन उसकी माँ रेखा ने हिम्मत नहीं हारी। अपने बच्चों को उच्च शिक्षा देने के लिए दिन रात मेहनत करने लगी । बेटी निर्मला का  विवाह भी कर दिया । बेटी ने विवाह के बाद भी अपनी पढाई को निंरतर जारी रखा उसे यह हौसला अपनी  माँ से मिला था । 

अब घर में दो ही सदस्य रह गए थे विवेक और उसकी माँ रेखा।  अब रेखा कुछ बीमार रहने लगी थी घर की सारी जिम्मेदारियां विवेक के कंधों पर आ गई  । माँ की दवाईयों का खर्चा, घर में राशन लाना, ऊपर से उसकी अपनी  पढाई का खर्चा उसे यह सब अकेले ही करना था । उसने दिन में माँ की सेवा करनी और रात किसी के घर में चौकीदार की नौकरी करने लगा । उसने बी.ए का एडमिशन एक मुक्त महाविद्यालय में ले लिया । उसने घर की जिम्मेदारी को खूब अच्छे तरीके से निभाया और अपनी पढ़ाई भी ध्यान से करने लगा। 

उसकी मेहनत रंग लाई उसकी माँ की तबियत में भी सुधार होने लगा। उसने बी.ए. की डिग्री भी अच्छे अंक से उतीर्ण कर ली। अब उसे एक अच्छे बैंक में नौकरी भी मिल गई । विवेक की बड़ी बहन निर्मला को भी सरकारी विद्यालय में अध्यापक के पद पर नौकरी मिल गई 

यह सब संभव हो पाया उनके बुंलद हौसलों से अगर उनकी माँ भी बाकी औरत की तरह पति की मृत्यु के बाद हिम्मत हार जाती तो उसके बच्चे भी बाकी बच्चों की तरह ही गरीबी में ही जीवन व्यतीत  करते विवेक ने भी मां की बीमारी का बहाना बनाकर अपने उद्देश्य को नहीं छोड़ा बल्कि अपने हौंसलों को बुलंद रखा और अपनी मंजिल को हासिल किया। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू , जम्मू कश्मीर






शुक्रवार, 21 मई 2021

पर्वत

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार उतराखंड इकाई

# दिनांक - 21/05/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय- पर्वत

# विधा - गद्य- पद्म

पर्वत शब्द सुनते ही हमारा ध्यान हरे हरे पेड़ पौधों  की तरफ चला जाता है । जो पर्वत की शोभा को बढ़ाते हैं । पर्वतीय क्षेत्र का वातावरण बहुत शुद्ध होता है । वहाँ रहने वाले लोगों में रोग बहुत कम होते हैं । 

हमारे देश में बहुत सारे ऋषि, मुनि, संत, महापुरुष आध्यात्मिक साधना के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में जाते थे। वही रहकर तपस्या करते थे, क्योंकि वहाँ का वातावरण बहुत शांत और शुद्ध होता है। वहाँ ध्यान करना सरल होता है । आज भी बहुत सारे सतपुरूष आध्यात्मिक उन्नति के लिए पर्वत पर जाना सही समझते हैं। 

जब भी कोई बीमार होता है डॉक्टर उसे पर्वतीय क्षेत्रों की ओर जाने की सलाह देता है ,जिससे उन्हें शुद्ध वातावरण  और  मानसिक तनाव से मुक्ति मिल सकें क्योंकि वहाँ का वातावरण प्रदूषण मुक्त होता है । 

बच्चे को भी पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा बहुत भाती है । वे भी गर्मियों की छुट्टियों में पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा करना चाहते हैं, क्योंकि उनको बर्फ के साथ खेलना बहुत अच्छा लगता है। 

क्या बच्चे, क्या जवान, क्या बूढ़ा सबको पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा करना बहुत अच्छा लगता है । क्योंकि वहाँ का वातावरण शुद्ध, शांत, ठंडा और मनमोहक होता है । जो सब लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते है। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू , जम्मू कश्मीर


पावक

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार झारखंड इकाई

# दिनांक - 21/05/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय- पावक 

# विधा - काव्य

पावक पावन पवित्र होती, 

हवन में आहुतियां लेती, 

कच्चे आटा इसके सानिध्य में आकर, 

रोटी बनकर सब की भूख मिटाता, 

 शरीर में पावक तत्व पाचन शक्ति दरूस्त बनाता, 

काया के सारे रोग भगाता, 

पावक मनुष्य काया को ऊर्जा प्रदान करता, 

यही शरीर को बल और शक्ति देता, 

पावक बहुत पवित्र कहलाता, 

अग्नि देव के नाम से पूजा जाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर







हम अपने भाग्य के निर्माता स्वयं है

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#साहिति्यक महफ़िल परिवार

दिनांक - 01/07/2021

दिन - गुरुवार

#विषय- भाग्य /किस्मत/नसीब

विधा - स्वैच्छिक ( छंदमुक्त कविता) 


हम अपना भाग्य स्वयं बनाते, 

कर्मों का ही फल पाते, 

कर्म ही भाग्य बनाता , 

मनुष्य को यह समझ नहीं आता, 

मनुष्य जब सतसंग में जाता, 

कर्मों के खेल को समझ जाता, 

अपने कर्मों में परिवर्तन लाता, 

सत्कर्मो से महान बन जाता, 

संगति पर कर्मों का फल निर्भर करता, 

कर्मों का फल ही भाग्य बनाता, 

इंसान अपने भाग्य का स्वयं निर्माता, 

यही बात हर एक धर्म ग्रंथ समझाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू ,  जम्मू कश्मीर







गुरुवार, 20 मई 2021

स्वच्छ पर्यावरण

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक - 30/05/2021

# दिन - रविवार

विषय- पर्यावरण

# विधा - स्वैच्छिक


सब ओर हरियाली छायेगी, 

वातावरण को स्वच्छ बनायेगी, 

प्रदूषण का नामोनिशान मिट जाएगा, 

सारा संसार ही सुख से जीवन बिताएगा , 

जब इंसान अपनी गलती को समझ जाएगा, 

धरती को पेड़ पौधों से सजेगा, 

पेड़ पौधों के बिना जीवन संभव है, 

आनेवाली पीढ़ियों को भी समझेगा, 

अपनी भूल को स्वीकार करके, 

वातावरण को शुद्ध रखने के, 

हर उपाय को अपनायेंगा , 

प्रदूषण को फैलाने वाले, 

वातावरण को अशुद्ध करने वाले,

सब साधनों से हमेशा दूरी बनायेंगा, 

वातावरण को शुद्ध रखने में ,

अपनी अहम भूमिका सदा निभायेगा । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर


बुधवार, 19 मई 2021

शुभकामना संदेश


# नमन मंच 🙏🙏🙏


#हिंददेश परिवार गाजियाबाद , उत्तर प्रदेश


# दिनांक - 20/05/2021


# दिन - वीरवार


# विषय- शुभकामना संदेश


# विधा - मुक्त


ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ , 


हमेशा आगे बढ़ते रहे हम यही दुआ मांगता हूँ, 


संसार को सुंदर और खुशहाल बनाने में, 


हमेशा प्रयासरत रहे हम, 


विनम्रता का गुण हमारी ताकत बढ़ाता, 


सबके साथ मिलकर रहना सिखाता, 


प्रेम को ही जीवन का आधार बनायेंगे, 


सब ओर प्रेम की खुशबू फैलायेगें । 


स्वरचित एवं मौलिक 


अमरजीत सिंह 


जम्मू , जम्मू कश्मीर

सेवा धर्म

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#नव साहित्य परिवार

# दिनांक -19-21/05/2021

# दिन - बुधवार से शुक्रवार

# विषय - सेवा धर्म

# विधा - स्वैच्छिक

सेवा का कर्म ही श्रेष्ठ, 

इससे प्रसन्न होते सब देवी देवता, 

मानवता की सेवा ईश्वर की सेवा कहलाती, 

मनुष्य को पल में देवता बनाती, 

ऊंच नीच का भेद मिट जाता, 

जब मनुष्य दिल से सेवा कमाता, 

दीन दुखियों का बनता सहारा, 

उस मनुष्य का यश गाता सारा संसार, 

अपने कर्म महान बनाता, 

मानवता के काम जो आता, 

सेवा ही मनुष्य को मनुष्य होने का अहसास कराती, 

इंसानियत के गुणों से ओतप्रोत कर जाती , 

सेवा को ही परम धर्म बनाये, 

अपने जीवन को सफल बनाये। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर

पंचशील

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# ग्वालियर साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच

# दिनांक - 21/05/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय - पंचशील

# विधा - छंदमुक्त कविता

जीव हिंसा मुझे ना भाती, 

मानवता से दूर ले जाती, 

नर से निशाचर वो बन जाता, 

जो जीवो पर बल से हिंसा कमाता , 

पंचशील का पहला सिद्धांत हिंसा से बचाता, 

इंसान को इंसानियत की याद दिलाता । 



पराई वस्तु देखकर चित न डुलाता, 

मेहनत कमाकर दोनों वक़्त खाता, 

पराया हक मुझे न भाता, 

पंचशील का दूसरा सिद्धांत यही सीख सिखाता। 


पराई स्त्री मुझे माँ बहन नजर आती, 

मेरी निगाह उन पर जाती, 

औरत की इज़्ज़त करना मेरा धर्म सिखाता, 

पंचशील का तीसरा सिद्धांत औरत की इज़्ज़त बढ़ाता, 

मनुष्य के चरित्र को गौरवमयी बनाता। 


चगुली निंदा मानव को नीच बनाती, 

दूसरों के अवगुणों का भार सिर पर उठवातीं, 

इंसान चरित्र को दूसरों के सामने गिराती, 

पंचशील का चौथा सिद्धांत चुगली निंदा से बचाता, 

जुबान को पवित्र रखने की सीख सिखाता। 


नशीली वस्तुएँ  इंसान को बर्बादी पर ले जाती, 

अच्छे बुरे की समझ भुलाती, 

पंचशील का पांचवा सिद्धांत नशों से बचाता, 

जिंदगी में आनेवाली मुश्किलों को दूर हटाता। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर





आत्मविश्वास

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#साहित्यिक महफ़िल परिवार

# दिनांक - 20/06/2021

# दिन - रविवार

# विषय- आत्मविश्वास

# विधा - कविता

आत्मविश्वास ही राह दिखाता, 

मंजिल को हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करता, 

यहीं तो हौंसले बढ़ाता, 

हर मुश्किल को आसान बनाता, 

इसके बिना सपने साकार न कर पाते, 

सिर्फ कल्पना में हवा में महल बनाते, 

आत्मविश्वास  जीवन में  सफलता दिलाता, 

आगे बढ़ने के लिए उत्साह बढ़ाता, 

आत्मविश्वास रास्ते के विघ्न बाधाओं को हटाता, 

आगे बढ़ने का राह बनात, 

यही मानव की पहचान बनाता, 

मानव को उसके मुकाम तक पहुंचाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर





मंगलवार, 18 मई 2021

यज्ञ की महिमा

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार जम्मू कश्मीर इकाई

# दिनांक - 14-20/05/2021

# दिन - शुक्रवार से गुरुवार

# विषय- यज्ञ की महिमा

# विधा - गद्य- पद्म 

यज्ञ वातावरण को पवित्र कर देता, 

तामसिक गुणों का नाश करता, 

यज्ञ से देवताओं की प्रसन्नता मिलती, 

संसार की सब विपत्तियाँ दूर होती, 

आध्यात्मिक मनुष्य को बनाता, 

संसार में उसकी कृति फैलाता, 

यज्ञ की महिमा सब वेद शास्त्र गाते, 

यज्ञ का विधि विधान बताते । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू ,   जम्मू कश्मीर

योग

 # नमन मंच🙏🙏🙏 

# साहित्य बोध जम्मू कश्मीर इकाई

# दिनांक- 18/05/2021

# दिन- मंगलवार

#विषय- योग 

#विधा - आलेख

                          करें योग, रहे निरोग

योग ऋषि पंतजलि जी की महत्वपूर्ण देन है ।जो मनुष्य को तन और मन को सबल बनाते हैं।  मनुष्य  में नव ऊर्जा  का संचार होता है । नित योग अभ्यास करने से शरीर मजबूत होता है और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है । 

योग से एकग्रता बढ़ती है, जिससे ध्यान केंद्रित करने में सहायता मिलती है । हमारा ध्यान जल्दी से जुड़ जाता है। हमारे मन को अपार शांति मिलती है बड़े बड़े महापुरुषों ने योग के माध्यम से मन को एकग्र करके बहुत सारी दैवीय शक्तियां प्राप्त की है ,और संसार का भला किया है। 

योगासन  का नित्य  अभ्यास हमारी उम्र बढ़ाता है । हम अपने आप को हल्का हल्का सा महसूस करते हैं। हमारा शरीर स्फूर्ति और तंदरुस्ती से भरा रहता है । पेट की बिमारियों से बचाव रहता है। मन में शांति ही शांति रहती है ,मन विचलित नहीं होता हैं । विकारों की अग्नि शांत रहती है । हम सभी को योगाभ्यास नित्य करना चाहिए। यही हमारा रोगों से बचाव करेगा और हमारे शरीर को तंदरुस्ती प्रदान करेगा। 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



प्रेम ही जीवन है

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#गीत गौरव

# दिनांक - 18/07/2021

# दिन -  रविवार

# विषय- प्रेम

# विधा - गद्य- पद्म

प्रेम रस का स्वाद निराला, 

विष को भी अमृत में बदल डाला, 

प्रेम रस  जिन जन पाया, 

तिस संग हरि समाया, 

सब तृष्णा मन की नाशी, 

तृप्त मन होय हरि नगर का बासी, 

मन के विकार तिस जन को छू न पाएं, 

जिस अपना चित हरि संग लगाया, 

हरि का प्रेम मन चित निर्मल करता, 

सबसे प्रेम प्यार की बातें बोलता, 

हरि प्रेम से समदर्शी होई, 

ऊंच नीच दिखे न कोई, 

सब ओर हरि समाया, 

प्रेम प्रीत से हरि घट घट में पाया, 

तेरा प्रेम को ही जीवन का सहारा बनाऊँ, 

प्रेम रस की मग्नता में सारा जीवन बिताऊं  । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू   ,  जम्मू कश्मीर





हमसफ़र

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार महाराष्ट्र  इकाई

# दिनांक - 16-22/05/2021

# दिन - सोमवार से शनिवार

# विषय- हमसफ़र

# विधा - गद्य- पद्म

ओ मेरे हमसफ़र मुझे तुम संग ही जीवन जीना , 

जिंदगी के हर पल को प्यार से संजोना , 

हर मुश्किल में साथ निभाना, 

कभी मुझे अकेला छोड़ मत जाना, 

हम दोनों का नाता जन्मों का, 

प्रेम प्यार से रहना हमारे कर्मों में है, 

हम दोनों का मेल हुआ ईश्वर की कृपा से, 

मुझे कोई नहीं दिखता तुम से खूबसूरत दूसरा  । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर








जिंदगी

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार उतरप्रदेश इकाई

# दिनांक -07/07/2021

# दिन - बुधवार

# विषय- जिंदगी/ जीवन क्या है? 

# विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता) 

सीख सिखाती जिंदगी, 

नए नए अनुभव कराती, 

बचपन में खेल खिलाती, 

सबसे मिलकर रहने का पाठ पढ़ाती, 

कुछ पल विद्यालय में बिताती, 

ज्ञान बढाती, 

काम काज कराती, 

परिवार की जिम्मेदारियों को निभाती, 

समाज के प्रति कर्तव्य निभाती, 

 समानता को मानती, 

आध्यात्मिक गुणों का ज्ञान कराती, 

सबको ईश्वर की संतान बताती, 

जीवन के अंत अपनी अहमियत बताती, 

ऐसे ही व्यतीत होती जिंदगी । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू  ,  जम्मू कश्मीर



सोमवार, 17 मई 2021

राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज ( जीवन, संघर्ष एवं संदेश )

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

 दिनांक - 27/06/2021

दिन - रविवार

#विषय - राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज 

विधा - स्वैच्छिक

शाहूजी महाराज ने पिछड़े वर्ग को अधिकार दिलाया, 

जात पात के नाम पर हो रहा अत्याचार बंद कराया, 

छत्रपति शिवाजी के वंशज शाहूजी महाराज ने, 

पिछड़े वर्ग के लोगों को आरक्षण दिलवाया, 

बाईस छात्र वास खोलकर, 

सब में शिक्षा का दीप जलाया, 

शिक्षा के माध्यम से, 

ऊंच नीच का भेद मिटाया  । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर




साहित्य समूह या जन्मदिन समूह

 # नमन मंच🙏🙏🙏 

# साहित्य बोध असम इकाई

# दिनांक- 17/05/2021

# दिन- सोमवार

#विषय- साहित्य समूह या जन्मदिन समूह

#विधा - चर्चा साहित्य में विकृति पर

साहित्य समूह साहित्य का प्रचार प्रसार करते है और नव लेखकों को प्रोत्साहित करते हैं कि वह भी साहित्य के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें सकें । लेकिन आज साहित्य समूह का उद्देश्य बिल्कुल बदल चुका है साहित्य समूह सिर्फ अब जन्मदिन, शादी की सालगिरह की मुबारक देने के लिए रह गए हैं । रचनाकारों की अहमियत कम होती जा रही है ।जिन्होंने किसी संस्थान या समूह की स्थापना की है ,वे सिर्फ मनपसंद लोगों को ही आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं । उनको साहित्य के विकास से कोई लेना देना नहीं होता है। 

साहित्य समूह के राष्ट्रीय  पदाधिकारियों का कर्तव्य बनता है। कि  नव लेखक को प्रोत्साहित करें और साहित्य की अन्य विधाओं का ज्ञान प्रदान करें । साहित्य समूह को साहित्य समूह ही रहने दें ,उसे जन्मदिन समूह न बनाएं। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  ,  जम्मू कश्मीर


रविवार, 16 मई 2021

गुरु सेवा की मिसाल:श्री गुरु अंगद देव साहिब जी

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार उतराखंड इकाई

# दिनांक - 12-18/05/2021

# दिन - बुधवार से मंगलवार

# विषय- गुरु सेवा की मिसाल:श्री गुरु अंगद देव साहिब जी

# विधा - गद्य- पद्म

भाई जोध जी ने शब्द गाया , 

भाई लहना जी के मन को भाया, 

भाई जोध से पूछने की जिज्ञासा आई, 

किसी की अमृत वाणी जो आपने गाई, 

भाई जोध जी ने नयन कमल को खोला , 

गुरु नानक जी के बारे में बोला, 

गुरु नानक जी वाणी मैंने जो गाई, 

सतगुरु जी प्रचार रहे ,

संसार में नाम की बड़ाई, 

भाई लहना जी ने करतापुर जाने का मन बनाया, 

करतारपुर जाकर सतगुरु का दर्शन पाया, 

सात साल सतगुरु की बहुत सेवा कमाई

सतगुरु नानक से अटूट प्रीत बन आई, 

भाई लहना जी ने सतगुरु से बहुत प्रेम पाया, 

सतगुरु जी ने भाई लहना जी को अपना अंग बनाया, 

सतगुरु जी ने गुरु अगंद देव नाम देकर , 

अपनी गुरुगद्दी पर बिठाया, 

गुरु अगंद देव जी ने सब को ,

मानवता का पाठ पढ़ाया, 

आप ईश्वर गुरु अगंद देव का रूप धरकर, 

धरती पर उतर आया । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर




युवा/ नौजवान

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार उत्तर प्रदेश इकाई

# दिनांक - 14-21/05/2021

# दिन - शुक्रवार से शुक्रवार तक

# विषय- युवा/ नौजवान

# विधा - स्वैच्छिक 

युवा ही राष्ट्र की शक्ति कहलाते, 

देश का मान सम्मान बढ़ाते, 

देश की उन्नति की युवाओं पर निर्भर करती, 

देश की सुरक्षा भी युवाशक्ति के कंधों पर होती, 

युवा बुलंद हौसला रखते, 

ऊर्जा से हमेशा भरे रहते, 

देश युवा शक्ति पर मान करता, 

उसके कार्य की सदा सराहना करता, 

युवा सेना का जवान बनता, 

देश के लिए अपने प्राण निछावर करता, 

युवा ही देश का भविष्य बनाता, 

देश को कामयाबियों के शिखर पर ले जाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर




शनिवार, 15 मई 2021

खग

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार झारखंड इकाई

# दिनांक - 11-16/05/2021

# दिन - मंगलवार से रविवार

# विषय- खग

# विधा - स्वैच्छिक

खग आकाश की ओर उड़ते जाते , 

गीत मस्ती के गुनगुनाते, 

खगों की चहचहाट सब के मन को भाती, 

सब के चेहरे पर नई रौनक लाती, 

घरों में जाकर घौंसला बनाते, 

घरों की रौनक बढ़ाते, 

पेड़ों की टहनी पर जाकर बैठ जाते, 

बहुत सारे खग अपना घर पेड़ को बनाते, 

खगों को देखना बच्चों को बहुत भाता, 

इन्हें देखकर बच्चों का मन खुशी से भर जाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर








 ंं

कर्मफल

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#कलम बोलती है

दिनांक -16/07/2021

दिन - शुक्रवार

#विषय -कर्मफल

विधा - स्वैच्छिक -  छंदमुक्त कविता


जीवन रूपी धरती में, 

जैसा बीज बोयते, 

  वही कटाना पड़ता है, 

कर्मों से ही कर्मफल बनता, 

कर्म करने से पहले, 

हमेशा रखी ध्यान, 

बिना सोचे समझे, 

जो कर्म करते, 

उनको भुगतने पड़ते, 

गंभीर परिणाम, 

कर्म ही इंसान को महान बनाता, 

देवताओं की श्रेणी में लाता, 

कर्मफल ही इंसान को, 

दुखी सुखी बनाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू , जम्मू कश्मीर





शुक्रवार, 14 मई 2021

गुल्लक

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार बिहार इकाई

# दिनांक - 10-16/05/2021

# दिन - सोमवार से रविवार

# विषय - गुल्लक 🏦

# विधा - स्वैच्छिक

गुल्लक बचपन में बच्चों का बैक बनता, 

एक एक रूपये को अपने अंदर संभाल रखता, 

माता पिता से एक एक रूपया लेकर गुल्लक में डाला, 

बच्चों ने बचपन में ही पैसे की कीमत को पहचाना, 

थोड़ा थोड़ा पैसा जमा होता जाता, 

बच्चों के मन में नए नए सपने जगाता, 

सभी भाई बहनों में , 

ज्यादा पैसा गुल्लक में डालने की होड़ रहती, 

एक दूसरे के पैसे तार से बाहर निकाल लेते, 

गुल्लक तोड़ने का जब वक़्त आता, 

बच्चों का मन खुशी से भर जाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



जमीर ख्वाब कामयाबी

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#नव साहित्य परिवार

# दिनांक -14/05/2021

# दिन - शुक्रवार

# विषय - जमीर, ख्वाब कामयाबी

# विधा - स्वैच्छिक 

जमीर बेचकर  ख्वाब पूरा किया, 

लेकिन कामयाबी कांटों सी लगती, 

मन तो भुलाने के यत्न करता, 

जमीर की आवाज के सामने हार जाता, 

जमीर का सौदा कर , 

कामयाबी मैंने पाई, 

ख्वाबों में भी नींद चैन की गंवाई, 

जमीर बेचकर कभी , 

कामयाबी न पाना, 

दुख हार से ज्यादा कामयाबी देगी, 

अगर इंसान तेरी इंसानियत ही मर गई होगी, 

अंतर की आवाज को न कभी दबने देना, 

ईमानदारी की हार जीवन में अपार सुख देगी । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  ,जम्मू कश्मीर


गुरुवार, 13 मई 2021

मतलबी दुनिया

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#नव साहित्य परिवार

# दिनांक -13/05/2021

# दिन - गुरुवार

# विषय - मतलबी दुनिया

# विधा - स्वैच्छिक

मतलब ही स्वभाव बन गया सब रिश्तों में, 

कोई किसी से दिल से प्यार न करता, 

सब स्वार्थ ही पूरा करते नजर आते, 

कोई न मिलता गम बांटने के लिए, 

दुनिया में मतलब की ऐसी आंधी आई, 

अब दुश्मन से बन गए सगे भाई, 

कोई नहीं कर्तव्य निभाता, 

मतलब परस्ती की ऐसी ऋतु आई, 

मतलब परस्ती ने मानव चरित्र को गिराया, 

इंसान को इंसानियत से दूर भगाया । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार महाराष्ट्र इकाई

# दिनांक - 13/05/2021

# दिन - गुरुवार

# विषय - गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर

# विधा - स्वैच्छिक   

८ मई 1861 को भारत ने लाल महान पाया, 

जिसने देश का मान बढ़ाया , 

पिता देवेन्द्रनाथ टैगोर, माता शारदा देवी की तेहरवीं संतान, 

विदेश में भी बढ़ाया देश का सम्मान, 

प्रारंभिक शिक्षा घर में ही पाई, 

शिक्षा में विशेष रूचि न दिखाई,  

इंग्लैंड में छोड़ आए अधूरी पढ़ाई, 

लेखक कवि के रूप में नई पहचान बनाई, 

गीतांजलि का अंग्रेजी भाषा में किया अनुवाद , 

तभी तो पाया नोबेल पुरस्कार , 

पहली बार यह अवसर आया, 

जब गैर पश्चिमी ने नोबेल पुरस्कार पाया, 

दो लिखे गीतो ने बहुत प्रसिद्धि पाई, 

भारत, बंगलादेश ने अपना अपना राष्ट्रीय गीत बनाया , 

भारत माँ के महान सपूत ने, 

भारतीय संस्कृति की गौरवगाथा को जन जन तक पहुँचाया। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर




















बुधवार, 12 मई 2021

पवित्र हृदय बड़ा खजाना

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार

# दिनांक - 13/05/2021

# दिन - गुरुवार

# विषय - पवित्र हृदय बड़ा खजाना

# विधा - स्वैच्छिक

पवित्र हृदय ईश्वर का घर कहलाता, 

प्रभु का आशीर्वाद नित पाता, 

सत्य ही बहुत प्यारा लगता, 

झूठ से नाता छूट जाता , 

सकारात्मक विचारों में आती, 

नकारात्मक दूर भाग जाती, 

प्रेम ही प्रेम नज़र आता, 

सब को जाकर गले लगाता, 

सेवा ही धर्म बन जाता, 

सेवा से अच्छे कर्म कमाता, 

पवित्र हृदय होता अमूल्य रत्नों की खान, 

जिसमें बसते स्वयं भगवान । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर


 


आध्यात्मिकता की पहचान क्या है?

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# विश्व कविता पाठ

# दिनांक - 22/05/2021

# दिन - शनिवार

# विषय- आध्यात्मिकता की  पहचान क्या है? 

# विधा - स्वैच्छिक

जीवन सत्य से भर जाता, 

सब में ईश्वर नजर आता, 

ऊंच नीच का भेद मिट जाता, 

सब ओर जाकर प्रेम फैलाता, 

मानव सेवा को धर्म बनाता, 

अपने कर्मों से संसार को सुखी करता, 

संसार की भलाई के लिए हर काम करता , 

अपना जीवन मानव सेवा के लिए समर्पित करता, 

आध्यात्म शुभ गुणों का नाम , 

जिसे कमाता सच्चा इंसान । 


 स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू ,जम्मू कश्मीर





मंगलवार, 11 मई 2021

मुस्कान सबसे बड़ी दवा

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश पाक्षिक पत्रिका

# दिनांक - 12/05/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - मुस्कान सबसे बड़ी दवा

# विधा - स्वैच्छिक 

 मुस्कान चहेरे की सुंदरता बढ़ाती, 

सबसे प्यार का रिश्ता बनाती, 

दुख गमों को दिलों से भुलाती, 

जीवन को नई ऊर्जा दे जाती, 

मुस्कान सब रोग की दवाई कहलाती, 

जीवन में नव स्फूर्ति जगाती, 

मुस्कान मायूसी मिटाती, 

चेहरे पर अद्भुत रौनक लाती । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर








जिंदगी की आस

# नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार उतराखंड इकाई

# दिनांक - 15/06/2021

# दिन - मंगलवार
# विषय - जिंदगी की आस
# विधा - स्वैच्छिक

कोरोना काल में, 

हाहाकार मचा सब ओर, 

मातम पसरा नगरों, शहरों में, 

तभी भी मनुष्य नहीं घबराता , 

जीने की आस लिए, 

सब सुरक्षा के उपाय अपनाता । 

मास्क से मुहं ढक , 

सैनिटाइजर को बार बार, 

हाथ पर लगाता, 

हैडवॉश से हाथ साफ कर, 

जीने की आस लिए, 

निज जीवन की सुरक्षा के लिए, 

हर उपाय अपनाता। 

दो गज की दूरी , 

हमेशा दूसरों से बनाता, 

जरूरी काम होने पर ही, 

घर से बाहर जाता, 

जीने की आस लिए, 

सब सुरक्षा के उपाय, 

निज जीवन और समाज के लिए अपनाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर












खामोशी

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#नव साहित्य परिवार

# दिनांक -12/05/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - खामोशी

# विधा - स्वैच्छिक

जीवन में खामोशी कैसी आई, 

सब ओर मातम का संदेश लाई, 

सब खामोश और चुपचाप बैठे, 

सोचें सोच कर परेशान से, 

जीवन में आई नई हलचल से, 

जीना ही भूल गए, 

अपनों खोने का गम, 

जो होता न कम, 

खामोशी ही खामोशी पसर रही, 

खुशियों ने लगता हैं दूरी ही बना ली, 

खामोशी में ही आंसू बहाते हृदय को पीड़ा देते, 

खुद ही खामोशी में खो जाते, 

कोरोना ने खामोशी को सब ओर फैलाया, 

जीवन को ही खामोश करता आगे बढ़ता चला जा रहा। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर


जीवन में ध्यान क्यों जरूरी है?

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार उतराखंड इकाई

# दिनांक - 11/05/2021

# दिन - मंगलवार

# विषय - जीवन में ध्यान क्यों जरूरी है? 

# विधा - स्वैच्छिक

ध्यान आत्मा का निज बोध कराता

मन के सारे भ्रम मिटाता

मन के विकारों को शांत करता

मन में अच्छे विचार भरता

निज अवगुण का ज्ञान कराता

सब समस्याओं का हल शीघ्र से हो जाता

ध्यान से एकाग्रता बढ़ती

प्रभु सिमरन में सुरति जुड़ती

ध्यान से दशम द्वार खुलता

आत्मा का ईश्वर से साक्षात्कार कराता

ध्यान ही जीवन को सफल बनाता

सब में ईश्वर की ज्योति दिखाता


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर



सोमवार, 10 मई 2021

दीपक

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार झारखंड  इकाई

# दिनांक - 11/05/2021

# दिन - मंगलवार

# विषय - दीपक

# विधा - स्वैच्छिक

 ज्ञान दीपक से, 

अंतर का अज्ञान मिटाया, 

सब में एक प्रभु नजर आया, 

अंतर में शांति मिल गई, 

ज्ञान दीपक ने अपना कमाल दिखाया, 

प्रभु से ऐसी प्रीत बनी, 

ज्ञान दीपक ने सुख दुख का भ्रम मिटाया, 

हर कोई मुझे अपना सा लगता, 

कोई न लगता पराया, 

सतगुरु ने अंदर ही प्रभु दिखाया, 

सतगुरु ज्ञान का सागर, 

जिसने अंदर से अज्ञान मिटाया, 

सर्व निवासी परमात्मा का, 

अंतर में ही दर्शन कराया, 

ज्ञान दीपक की ज्योति निराली, 

जिसने एक क्षण में मन का भ्रम मिटाया, 

मनुष्य का स्वयं से परिचय कराया । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर




कवि और कविता

# नमन मंच 🙏🙏🙏
#हिंददेश परिवार कर्नाटक इकाई
# दिनांक -10/05/2021
# दिन - सोमवार
# विषय - कवि और कविता
# विधा - स्वैच्छिक

कवि के बोल कविता बन जाते, 
संसार को नया पैगाम दे जाते, 
कवि  कल्पना की उड़ान भरता, 
पेड़ पौधों पहाड़ से बातें करता, 
कवि की सोच कविता बन जाती, 
संसार में नया बदलाव लाती , 
कविता से कवि का प्यारा नाता, 
कविता के माध्यम से कवि अपनी भावनाएँ संसार को बताता

स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर




पृथ्वी की वेदना

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक - 10/05/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - पृथ्वी की वेदना

# विधा - स्वैच्छिक

पृथ्वी माता की वेदना बढ़ती जाती, 

इंसान को दुखी देखकर बहुत घबराती, 

माँ संतान की भूलों को नजरअंदाज करती, 

भविष्य में आने वाली मुश्किलों से अवगत कराती, 

माँ का आंचल सब दुखों से बचाता, 

माँ के सानिध्य में जीवन सुखों से भर जाता, 

पेड़ पौधे से सजी धरती माता सुंदर लगती, 

पेड़ पौधों की अहमियत अपनी संतान को समझाती, 

इंसान ने धरती माँ की सीख भुलाई, 

अपनी मनमानी करके धरती माँ की वेदना बढ़ाई, 

धरती माता की वेदना कम करने का उपाय अपनाये, 

सभी अपने आस पास को पुनः पेड़ पौधों से सजाये। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर


शुक्रवार, 7 मई 2021

प्रतिभा

 # नमन मंच🙏🙏🙏 

# साहित्य बोध जम्मू कश्मीर इकाई

# दिनांक- 07/05/2021

# दिन- शुक्रवार

#विषय- प्रतिभा

#विधा - स्वैच्छिक

ज्ञानवर्धन से प्रतिभा निखार जाती, 

संसार में पूरा सम्मान पाती, 

हर किसी को ज्ञानवान भाता, 

हर ओर ज्ञान का प्रकाश फैलाता, 

 ज्ञान प्रतिभा में निखार लाता, 

सब ओर से अज्ञान मिटाता, 

ज्ञानवान आपनी प्रतिभा से संसार को सुख देता, 

जीवन को सुखी बनाने के नए राह दिखलाता, 

प्रगति के राह में आने वाली मुश्किलों से अवगत कराता, 

ज्ञान,अनुभव उसकी प्रतिभा का चिह्न बन जाता, 

ज्ञानवान मनुष्य की प्रतिभा संसार में मान पाती, 

संसार पर अपनी अमिट छाप छोड़ जाती। 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू,   जम्मू कश्मीर



मुस्कुराती जिंदगी

 # नमन मंच🙏🙏🙏 

# नव साहित्य परिवार

# दिनांक- 16/05/2021

# दिन- रविवार

#विषय- स्वैच्छिक (मुस्कुराती जिंदगी) 

#विधा -स्वैच्छिक ( छंदमुक्त कविता) 

संघर्ष से न घबराती, 

हमेशा आगे बढती जाती, 

सबसे प्रेम बांटती, 

खुशी के गीत गाती, 

सबको हंसाती, 

सुख दुःख को सहती, 

गिले शिकवे करती, 

सबसे प्रेम की आस करती, 

मन की भावना बयां करती, 

पता भी चलता , 

कैसे हंसते मुस्कुराते बीत गई यह जिंदगी। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर


गुरुवार, 6 मई 2021

जुल्म

 # नमन मंच🙏🙏🙏 

# साहित्य बोध असम इकाई

# दिनांक- 07/05/2021

# दिन- शुक्रवार

#विषय- जुल्म

#विधा - स्वैच्छिक

जुल्म न कमाओ लोगों, 

एक दिन मालिक को हिसाब देना है , 

सब तुम्हारे अपने  पराया कोई नहीं है, 

हर एक से प्यार बांटो , 

मिलता सुख बहुत है, 

जुल्म तो जुल्मी कमाते हैं, 

तुम तो संतान एक ईश्वर की हो, 

जुल्म का अंत बड़ा बुरा होता है, 

जुल्मी को हजारों बरस कोसा और धिक्कार जाता, 

ऐसा कर्म न कमाओ , 

इंसान से शैतान कहलाओ, 

अपने अस्तित्व को पहचानो , 

तुम तो देवता बनने आये हो, 

जुल्म ने किसी को न आज तक महान बनाया, 

जुल्म करने वाले ने अपने जीवन को हमेशा नर्क बनाया , 

जुल्म का रास्ता छोड़कर तुम इंसान बन जाओ, 

न्याय का साथ देकर सच्चे इंसान बन जाओ


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



सितारों से आगे

# नमन मंच 🙏🙏🙏
#हिंददेश परिवार बिहार इकाई
# दिनांक - 06/05/2021
# दिन - गुरुवार
# विषय - सितारों से आगे
# विधा - कविता

सितारों से आगे मैंने सोच रखा, 
हर एक रिश्ते को प्यार से पिरो रखा है, 
 सितारों से ज्यादा में चमक जाऊँगा, 
दुनिया में अपनी नई पहचान बनाऊंगा, 
सितारों सी चमकती मेरी सोच है, 
हरेक को कायल करते मेरे बोल , 
सितारों सा आकर्षण मेरे गुणों में है, 
तभी मुझे देखने के लिए सब बेकरार रहते , 
सितारों सी सुंदरता मेरे अंतर में है, 
तभी तो प्यारा लगता पूरा संसार । 

स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर






झरना

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार दिल्ली इकाई

# दिनांक - 06/05/2021

# दिन - गुरुवार

# विषय - झरना

# विधा - गद्य - पद्य 

झरना जल रूपी प्रेम बरसाता, 

सब पर बिना भेद के प्रेम लुटाता, 

विघ्न बाधाओं को दूर करता, 

आगे बढ़ने की सबको प्रेरणा देता, 

झरना हमेशा आगे बढ़ता जाता, 

मुश्किलों से नहीं घबराता, 

झरना सब की प्यास बुझाता, 

भेदभाव किसी से नहीं करता, 

झरना से जल बहता जाता, 

सब ओर खुशहाली लाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू,  जम्मू कश्मीर








बुधवार, 5 मई 2021

सकारात्मक सोच आसान करें मुश्किल

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार डिब्रूगढ़ इकाई

# दिनांक - 10/05/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - सकारात्मक सोच आसान करें मुश्किल

# विधा - गद्य - पद्य

जीवन में सकारात्मक भरी सोच अपनाये, 

अपने बिगड़े सब काम बनाये, 

सकारात्मक हर काम को आसान बनाती, 

हर काम में अपनी अहम भूमिका निभाती, 

नकारात्मक से हमेशा करें किनारा, 

सारा संसार लगेगा बहुत प्यारा, 

सकारात्मक से ऊर्जा बढ़ जाती, 

हर काम में सफलता दिलाती, 

सबसे हमारा प्यार बढता, 

सबका हमें साथ मिलता, 

सकारात्मक से सब कार्य आसान बनाओ, 

सकारात्मक भरी सोच से जीवन  खुशी से जीओ । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर




संत कबीरदास का समाजवाद

  नमन मंच 🙏🙏🙏

रूहानी उपदेश साहित्यिक संस्थान जम्मू कश्मीर

# विषय - संत शिरोमणि सद्गुरु कबीर साहेब जी

# विधा - स्वैच्छिक

कबीरदास जी को भकि्तकाल का प्रवर्तक कहा जाता हैं। उनके दोहें  गागर में सागर भरें हुए है । उनके समय समाज वर्णो, धर्मो में विभाजित था जात -पात, छुआछूत का बोलबाला था। धर्म के नाम पर लोगों को लूटा जा रहा था जात पात के नाम पर लोगों को ज्ञान से दूर रखा जा रहा था। ईश्वर का डर दिखाकर लोगों को लूटा जा रहा था। 

कबीर जी ने समाज फैली कुरीतियों के लिए अपनी वाणी के माध्यम से आवाज उठाई ,और धार्मिक आडंबरों का पर्दाफाश किया, लोगों को एक ईश्वर के साथ जोड़ा । कबीरदास के जीवन काल में ही मुस्लिम प्रशासकों का आगमन हो गया था । लोग धर्म के नाम पर लड़ झगड़ रह थे । 

हिन्दू धर्म वाले कहते थे हमारा राम बड़ा है, और मुसलमान कहते थे हमारा खुदा बड़ा है। दोनों धर्मों के लोग एक दूसरे दुश्मन बन गए थे। कबीर जी ने अपनी वाणी के माध्यम से दोनों को समझाया कि राम और अल्लाह एक है एक ही ईश्वर के दो नाम है । 

उन्होंने अपने जीवन काल में सब धर्मों को एक करने का यत्न किया। सबसे प्रेम करने का पाठ सिखाया और सबको एक ईश्वर की संतान बताया है। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर














ईश्वर से प्रार्थना

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार पटना इकाई

# दिनांक - 03/06/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - ईश्वर से प्रार्थना

# विधा - गद्य - पद्य

सुन विनती सतगुरुदेव परमेश्वर जी, 

मेरे हृदय की वेदना हरो जी, 

मुझे नाम का दान दे दो जी, 

अपने चरणों में स्थान दे दो जी, 

ज्ञान का प्रकाश करो जी, 

अज्ञान का नाश करो जी, 

मै मेरी की भावना को हृदय से हटाओ, 

तूं तेरी का रंग लगाओ, 

मानव सेवा को धर्म बनाऊं, 

अपने जीवन का लक्ष्य पूरा कर जाऊँ । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू,  जम्मू कश्मीर



देशकाल

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार जम्मू कश्मीर

# दिनांक - 05/05/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - देशकाल

# विधा - गद्य - पद्य

कोरोना ने हाहाकार मचाया, 

लाशों का हर ओर ढेर लगाया, 

मानव मजबूर हो गया, 

अपनो को खोने के गम में खुद को भूल गया, 

मानव सेवा का धर्म कमाया , 

कोरोना को भागने को अपना कर्म बनाया, 

सबसे रखी ली दूरी, 

कोरोना से बचने के लिए मास्क लगाना जरूरी । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू,  जम्मू कश्मीर




जंगल

 #नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार दिल्ली इकाई

# दिनांक - 05/05/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - जंगल

# विधा - स्वैच्छिक

जंगल धरा की शोभा बढ़ाते , 

पेड़ पौधे जीवन में बहुत काम आते, 

पशु पक्षियों यही गृह कहलाता, 

सबके जीवन को सुखी बनाता, 

पशु पक्षियों के लिए यही सुरक्षित स्थान, 

यहाँ मिलता उन सबको विश्राम, 

वनों से हम दुर्लभ जड़ी बूटियां पाते, 

जिससे सारे रोग भाग जाते, 

वनों के कारण ही वर्षा होती, 

नन्ही नन्ही  बूंदें  ही धरा  को हरा भरा करती, 

जंगलों को कटने से बचाएं, 

जीवन को सुखी बनाएं। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर












मंगलवार, 4 मई 2021

वर्तमान पत्रकारिता

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक - 04/05/2021

# दिन - मंगलवार

# विषय - वर्तमान पत्रकारिता

# विधा - स्वैच्छिक 

वर्तमान में पत्रकारिता ने नया धर्म अपनाया, 

सच को झूठ, झूठ को सच बतलाने को कर्म बनाया, 

जनता सारी रो रही, 

प्रशासन के हाथों मजबूर हो रही , 

कोई नहीं  सुनता उनकी पुकार, 

सब बन गया है सरकार के वफादार, 

पत्रकार अपना फर्ज निभाएं, 

जनता को न्याय दिलवाएं, 

पत्रकारिता हो रही  है बहुत बदनाम, 

भूल गए अपने सब काम, 

सभी अपने फर्ज को हमेशा रखे याद, 

याद करेंगी दुनिया मरने के बाद  । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर











कवि का सच्चा धर्म क्या है

 सादर नमन मंच 

काव्य प्रभा अखिल भारतीय 

साहित्यिक मंच खनियांधाना

जिला शिवपुरी म,प्र,

दिनांक- 04/05/2021

विषय,, कवि का कर्तव्य सच्चा धर्म क्या हैं

विधा - 

कवि रे सच्चा धर्म निभाओ, 

झूठ को हमेशा सामने लाओ, 

जनता की समस्याओं पर लिखो कविता, 

अपनी लाभ हानि को भूल जाओ, 

राजनीतिक पार्टियों से हमेशा दूरी बनाओ, 

समाज से सदा रिश्ता निभाओ, 

समाज के दुख को अपना दुख बनाओ, 

अत्याचार, भ्रष्टाचार के खिलाफ हमेशा कलम चलाओ, 

दीन दुखियों का तुम बनों सहारा, 

कोई न रहे बेसहारा, 

कवि रे ऐसा धर्म कमाओ, 

कलम को अपनी सफल बनाओ । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू ,  जम्मू कश्मीर








सोमवार, 3 मई 2021

मदद

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार दिल्ली इकाई

# दिनांक - 04/05/2021

# दिन - मंगलवार

# विषय - मदद 

# विधा - गद्य - पद्य

 ## नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार दिल्ली इकाई

# दिनांक - 04/05/2021

# दिन - मंगलवार

# विषय - मदद 

# विधा - गद्य - पद्य

दूसरों की मदद के लिए हाथ बढ़ाएं, 

अपनी नई पहचान बनाएं, 

मदद करने से कभी न जी चुराए, 

हमेशा सबके मददगार बन जाए, 

मानव सेवा से जीवन को सफल बनाए, 

मानव होने का फर्ज निभाएं, 

संकट में फंसे प्राणियों का सहारा बन जाए, 

मदद के लिए हमेशा आगे आए , 

मदद करने से अपार आनंद बढ़ता, 

प्रभु की का कृपा का प्रसाद मिलता। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर






सुबह

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार दिल्ली इकाई

# दिनांक - 03/05/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - सुबह

# विधा - गद्य - पद्य

सुबह मन में कुछ करने की उम्मीद जगाती, 

तन मन के सारे रोग मिटाती, 

अच्छे बुरे का ख्याल दिल से हट जाता, 

कुछ नया करने का मन मनसूबे बनाता, 

अज्ञान का अंधेरा जीवन से हट जाता, 

सूर्य का प्रकाश जीवन जीने की नई कला सिखाता, 

जीवन की दिशा बदल जाती, 

खुले खुले नयनों से ही नव जीवन के सपने दिखाती, 

जिंदगी की सुबह का सौभाग्यशाली प्राणी आनंद मनाता, 

मानवता की सेवा को जीवन में कमाता, 

जिंदगी की सुबह सबसे प्रेम करने का संदेश देती , 

वैर भाव  से दूर रहने का उपदेश करती । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू, जम्मू कश्मीर



रविवार, 2 मई 2021

आशा का दीपक

 शीर्षक - आशा 
आशा का दीपक ,
जिंदगी को गति देता, 
हर नासमझ को जिंदगी में, 
आगे बढ़ाने की हिम्मत देता, 
आशा ही परिश्रम कराती, 
सफलता की सीढ़ी चढ़ाती, 
आशा ही अक्षरों के शब्द बनाती, 
शब्दों से महान ग्रंथों का निर्माण करवाती, 
आशा ही जीवन जीने की हिम्मत बांधती, 
निराशा जैसे शब्द को जीवन से हटाती, 
आशा ने ही इंसान को आसमान में उड़ाया , 
सुख सुविधा से जीने का सामान बनाया, 
आशा ही सृष्टि के हर प्राणी को खुशनुमा बनाती, 
निराश भरे जीवन में उम्मीद की किरण बन जाती । 




स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर







रोजगार

 # नमन मंच🙏🙏🙏 

# साहित्य बोध 

# दिनांक- 03/05/2021

# दिन- रविवार

#विषय- रोजगार

#विधा - स्वैच्छिक

रोजगार ही सपने साकार बनाता, 

समाज में सम्मान दिलाता, 

रोजगार से ही धन मिलता, 

धन से ही सब सुख सुविधा का सामान मिलता, 

हर कोई रोजगार चाहता, 

बेरोजगारी का धब्बा हटाना चाहता, 

बेरोजगारी बहुत रुलाती , 

सारे सपने मिट्टी में मिलती, 

सब मिलकर स्वरोजगार के साधन बनाएंगे, 

अपना जीवन खुशी खुशी बिताएंगे । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर

व्यापार

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार दिल्ली इकाई

# दिनांक - 02/05/2021

# दिन - रविवार

# विषय - व्यापार

# विधा - गद्य - पद्य

अपने कर्मों को व्यापार न बनाएं , 

हर कर्म निष्काम कमाएं, 

इंसानियत की सेवा हृदय से कमाएं, 

सभी की दुआएँ झोली में डलवाएं , 

व्यापार तो स्वार्थी बनाता है, 

हर कर्म अपने लाभ के लिए कमाता, 

दीन दुखियों के हमेशा काम आएं, 

अपने सत् व्यापार से जीवन सफल बनाएं। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर




प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...