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मंगलवार, 18 मई 2021

प्रेम ही जीवन है

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#गीत गौरव

# दिनांक - 18/07/2021

# दिन -  रविवार

# विषय- प्रेम

# विधा - गद्य- पद्म

प्रेम रस का स्वाद निराला, 

विष को भी अमृत में बदल डाला, 

प्रेम रस  जिन जन पाया, 

तिस संग हरि समाया, 

सब तृष्णा मन की नाशी, 

तृप्त मन होय हरि नगर का बासी, 

मन के विकार तिस जन को छू न पाएं, 

जिस अपना चित हरि संग लगाया, 

हरि का प्रेम मन चित निर्मल करता, 

सबसे प्रेम प्यार की बातें बोलता, 

हरि प्रेम से समदर्शी होई, 

ऊंच नीच दिखे न कोई, 

सब ओर हरि समाया, 

प्रेम प्रीत से हरि घट घट में पाया, 

तेरा प्रेम को ही जीवन का सहारा बनाऊँ, 

प्रेम रस की मग्नता में सारा जीवन बिताऊं  । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू   ,  जम्मू कश्मीर





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