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मंगलवार, 29 जून 2021

आओ बिखेरे प्यार की खूशबू

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार

दिनांक - 28 जून -04 जुलाई 2021

 दिन -सोमवार

#विषय - आओ बिखेरे प्यार की खूशबू

विधा - गद्य - पद्म


आओ बिखेरे प्यार की खूशबू, 

महकाते है सारा संसार , 

सिर्फ प्रेम ही प्रेम रहे दिलों में, 

मिट जाए नफरतों की दीवार, 

प्रेम छोटे बड़े का भेद मिटा देगा, 

समानता की सीख सिखाएंगा , 

मानवता ही धर्म कहलायेगी, 

मै मेरी की भावना दिलों से हटायेगी, 

प्रेम की खूशबू जब सब ओर फैलाती जाएगी, 

एक दूसरे के प्रति स्नेह को बढ़ाएंगी, 

प्रेम रिश्तों में मजबूती लाता, 

सबमें विश्वास को बढ़ाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

जम्मू , जम्मू कश्मीर


आओ मिलकर साथ चले हम

#विषय - आओ मिलकर साथ चले हम

विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता


सबको साथ मिलकर चलना है, 

हर मुश्किल से हमें लड़ना है, 

जब हम साथ साथ होगे, 

हर मुश्किल हमसे दूर भागेगी, 

एकता ही देश को मजबूत बनाती, 

दुश्मन के छक्के छुड़ाते, 

विभिन्नता हमारी अलग पहचान बनाती, 

हमारी संस्कृति हमें मिलकर रहना सिखाती, 

हर त्योहार को हम मिलकर मनाते, 

एक दूसरे को गले लगाते, 

हर धर्म मिलकर रहना सिखाता, 

सबको  एक ईश्वर की संतान बताता, 

हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा कहलाती, 

सब भाषाओं को अपनी सखियाँ बताती, 

सब भाषाएँ भारत देश का गौरव बढ़ाती, 

सबको मिलकर रहने का संदेश पहुंचाती । 


स्वरचित एवं मौलिक

  अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर








प्रेम एक भावना

   नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार कर्नाटक इकाई

दिनांक - 29 जून , 2021

 दिन - मंगलवार

#विषय - प्रेम एक भावना

विधा - गद्य - पद्म

प्रेम करो एक दूसरे की मन की भावना पढ़ो, 

प्रेम से  जीवन में खुशियाँ भरो, 

प्रेम का संदेश देता है ईश्वर, 

सब आपसे में प्रेम से रहो, 

सब है अपने कोई नहीं बेगाना, 

ऐसी मन में पवित्र सोच रखो, 

प्रकृति का कण कण प्रेम सिखाता, 

सबको एक ईश्वर की संतान बताता, 

ईश्वर ने सबको एक समान बनाया, 

सबको प्रेम करना सिखाया, 

पेड़ पौधे भी प्रेम सिखाते, 

हमारे जीवन को सुखमय बनाते, 

बादल भी हमें प्रेम सिखाते, 

वर्षा रूपी जल सब पर बरसाते, 

प्रेम से ही जग जीत जाता, 

हर एक धर्मग्रंथ यही शिक्षा सिखाता। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



स्वच्छता

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार गाजियाबाद इकाई

दिनांक - 28 जून 2021 से 04 जुलाई, 2021

 दिन - सोमवार

#विषय - स्वच्छता

विधा - गद्य - पद्म


स्वच्छता तो तन मन दोनों की जरूरी, 

बिना इसके न होगी स्वच्छता की बातें पूरी, 

कूड़े का ढेर जगह जगह न लगाएं, 

कूड़ेदान का प्रयोग करना सबको सिखाएं, 

पालीथिन लिफाफे वातावरण को दूषित करने का करते काम, 

इनके प्रयोग पर स्वयं लगाएं विराम, 

जब इनका प्रयोग बंद हो जाएगा, 

तभी इनका बनना बंद हो पाएगा, 

ज्यादा जरूरी होने पर ही अपनी गाड़ी चलें, 

पर्यावरण को वायु प्रदूषण से बचाएं, 

बच्चे को बचपन से ही स्वच्छता की सीख सिखाएं, 

पर्यावरण के स्वच्छ होने के फायदे  बताएं, 

धरती माँ को पेड़ पौधों से सजाएं, 

उसकी खूबसूरती को चांद चांद लगाएं, 

मन में प्रेम भावना जगाये, 

सब ओर प्रेम की खूशबू फैलाये, 

मानवता की सेवा हृदय से कमाए, 

अपना अनमोल जीवन सफल बनाएं, 

सबकी मदद के लिए हमेशा बढाएं हाथ, 

ईश्वर की कृपा हमेशा रहेगी तुम्हारे साथ, 

मन से इर्ष्या, द्वेष, नफरत का  अवगुण दूर भगाएं, 

मन को स्वच्छता की सीख सिखाएं, 

स्वच्छता और अस्वच्छता दोनों हमारे हाथ, 

आओ मिलकर कदम बढाएं स्वच्छता की ओर एक साथ । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर





सोमवार, 28 जून 2021

छोटी छोटी आंखों में बड़े बड़े सपने

शीर्षक  - छोटी छोटी आंखों में बड़े बड़े सपने

छोटी छोटी आंखों में बड़े बड़े सपने सजोते है, 

आसमां को छूने का विश्वास मन में रखते हैं, 

चिंता फिक्र से होता नहीं वास्ता , 

हंसी ठठोली में रात दिन बीतता, 

खेलने कूदने में मन सदा रमा रहता, 

हर कोई प्यार से दुलारता , 

संगी साथियों के संग पाठशाला में जाना भाता, 

हर किसी से प्यार खूब मिलता है, 

पाठशाला में  जाकर खूब करते मजा , 

कभी कभी टीचर से डांट भी पड़ती, 

एक दूसरे से प्यार बहुत करते, 

कभी कभी एक दूसरे से थोड़ी नोक झोंक भी करते, 

हौंसले बुलंद होते हैं बचपन में, 

पक्षी की तरह उड़ान भरने की चाहत होती है मन में, 

बचपन की नादानी बहुत सीख दे जाती, 

जिंदगी के नए नए अनुभव कराती। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर







 


शौर्य

  नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार पंजाब इकाई

दिनांक - 28 जून 2021

 दिन -सोमवार

#विषय - शौर्य

विधा - गद्य - पद्म

शौर्यगाथा उसकी गाई जाती है, 

जो कभी नहीं झुकता, 

अपना मार्ग स्वयं बनाता, 

वो किसी पर निर्भर नहीं होता, 

वो कभी रूकता नहीं  , 

न विघ्न बाधाओं से घबराता है, 

अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए, 

हर दुख कठिनाई को सरलता से पार कर जाता, 

कुछ असंभव उसको लगता नहीं , 

जो परिश्रम को अपना कर्म बनातास

शौर्य सिर्फ वो नही युद्ध जो लड़ता, 

विषम परिस्थितियों भी जो लक्ष्य से नहीं हटता, 

जीवन में हर चुनौती को, 

वो परीक्षा के रूप में लेता, 

संसार की भलाई के लिए, 

अपना हर कर्म समर्पित करता, 

सत्य मार्ग को जीवन में सदा अपनाता, 

 शौर्यवान होने का परिचय अपनी करनी से देता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू  , जम्मू कश्मीर


शनिवार, 26 जून 2021

साहस

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार उतराखंड इकाई

दिनांक - 20-26/06/2021

दिन - रविवार से रविवार 

#विषय - साहस

विधा - गद्य - पद्य ( छंदमुक्त कविता) 


साहस ही इतिहास बनाता, 

मनुष्य को आगे बढ़ने का राह दिखाता, 

साहस ही मुश्किलों को सुलझाता, 

मानव को आगे बढ़ाता , 

साहस ही मनुष्य को सफल बनाता , 

साहसी मनुष्य खतरों से नहीं घबराता , 

साहस ही विजेता बनाता है, 

हर कार्य सरल बन जाता है, 

साहस ने ही भारत  देश को स्वतंत्र बनाया था, 

अंग्रेजों को देश से भगाया था, 

साहस ही देश को मजबूत बनाता है, 

देश के विकास में अपनी भूमिका निभाता है । 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर








आधुनिक जीवन में विज्ञान

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 28/06/2021

दिन- सोमवार

#विषय - चित्र आधारित

विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता

 

आधुनिक जीवन में विज्ञान ने नया इतिहास रचाया , 

धरती पर रह रहे मानव को पूरा ब्रहमाण्ड घुमाया, 

रोटी भी अब मशीन से बन जाती, 

गृहिणी का बहुत समय बचाती, 

गरमी के मौसम में एयर कंडीशनर सर्दी का अहसास कराता, 

सारी गरमी को क्षण में दूर भगाता, 

हवाई जहाज़ में बैठकर पूरा विश्व घूम आता, 

हमारे समय को व्यर्थ होने से बचाता, 

रेलगाड़ी का सफर हमें हमारी मंजिल पर पहुँचाता, 

दूर का सफर भी सस्ते में हो जाता, 

गैस वाले चूल्हे ने गृहिणी को धुंए से बचाया, 

खाना बनाने का तरीका आसान बनाया, 

इंटरनेट ने पूरे विश्व को एक परिवार बनाया, 

इंटरनेट सबको बहुत निकट ले आया, 

आनलाईन शिक्षा ने नया इतिहास रचाया, 

सबके ज्ञान को बहुत बढ़ाया, 

आनलाईन काम ने बेरोजगारी को घटाया, 

सबको तरक्की करने का मौका दिलाया, 

आधुनिक जीवन मे विज्ञान ने सुख सुविधाओं को बढाया, 

धरती पर ही स्वर्ग का अहसास कराया। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर





कसम

 नमन मंच काव्य प्रभा (अखिल भारतीय साहित्यिक मंच)

साप्ताहिक काव्य लेखन क्रमांक 02

#विषय कसम

#विधा कविता

#दिनाँक 26/6/2021

#दिन - शनिवार

हमनें इंसानियत का धर्म निभाने की कसम खाई है, 

कोई लगता नहीं बेगाना, 

हर इंसान मेरा बहन भाई है, 

हम अपनी कसम को दिल से निभाएंगे, 

सबके दिलों से नफरतें मिटायेंगे, 

हर किसी प्रेम की भाषा सिखायेंगे, 

प्रेम का रंग सबको लगायेंगे, 

मानवता की सेवा को दिल से कमाएगे, 

सबको दिल की भावनाएं समझाएगें, 

अपनी कसम को जीवन का लक्ष्य बनाएंगे, 

हर पल अपना कर्तव्य निभाएंगे । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर





शुक्रवार, 25 जून 2021

मन जीते, जग जीत

  नमन मंच 🙏🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार मध्यप्रदेश इकाई

दिनांक - 26/06/2021

दिन- शनिवार

#विषय - मन जीते, जग जीत

विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता) 


मन जीतने वाला ही जग में विजेता कहलायेगा, 

मन के मुताबिक चलने वाला अपना  जन्म व्यर्थ गंवायेगा, 

मन का रूख बदलना है , 

हमें ईश्वर के बताए रास्ते पर चलना है, 

मन की चतुराई पहचानने का यत्न करें, 

मन की दिशा ईश्वर परायण करें, 

मन की गति जानने वाला बुद्धिमान बन जाता, 

उस अपने किए कर्म का अच्छा बुरा सामने नजर आता, 

मन रूपी अश्व को अपने काबू में रख, 

उसकी लगाम को कभी ढीला मत छोड़ना, 

हर विचार को हृदय रूपी तराजू में तोलना, 

कभी न तूं डोलना , 

हर बात को सोच समझकर बोलना, 

अपने पराये की भावना कभी न लाना, 

हर किसी से निष्पक्ष निष्काम प्रेम बांटना, 

जब तूं सबके मन को भायेगा , 

फिर तूं जग विजेता बन जाएगा । 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर 








ईश्वर दया का सागर है

 नमन मंच 🙏🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार हरियाणा इकाई

दिनांक - 25/06/2021

दिन- शुक्रवार

#विषय - ईश्वर दया का सागर है

विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता) 


प्रभु मेरे  दया करो , 

मेरे अवगुण चित न धरो, 

मेरा तूं ही सहारा है , 

करूणानिधि मेरा मन डोलता है, 

तुम इसे अडोलता तो दो, 

सि्थरता का स्तंभ बन जाओ, 

इस जहाँ में कोई नही अपना, 

सिर्फ मोह माया का जाल है, 

समझ आती है जब आता काल है, 

मै मेरी ने मन को मैल कर दिया, 

मन मस्तिष्क में विकारों की मैल को भर दिया, 

तुम ज्ञान के साबुन से मेरी मैल हरो , 

मेरे हृदय में सिर्फ प्रेम भावना ही सबके लिए भरो, 

मतलब परस्ती और दोगलेपन से बचाओं, 

मन चित में केवल सेवा का भाव जगाओ, 

मेरे मानव जन्म को दयासागर तुम ही सफल बनाओ । 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर


बुधवार, 23 जून 2021

संत कबीर साहेब

   नमन मंच 🙏🙏🙏

ग्वालियर साहिति्यक एवं सांस्कृतिक मंच

दिनांक - 25/06/2021

दिन- शुक्रवार

#विषय - संत कबीर साहेब

विधा - कविता/ छंदमुक्त

रसना जपती आठ पहर , 

धन्य कबीर धन्य कबीर, 

तुम जैसा कोई नहीं, 

तुम हरो मेरे तन मन की पीड़, 

जात पात का भेद मिटाया, 

सबको ईश्वर की संतान बताया, 

धार्मिक आडंबरों  को पाखंड बताया, 

प्रेम भक्ति का नया राह दिखाया, 

ईश्वर का दर्शन हृदय में करवाया, 

सबको सत्य मार्ग पर चलना सिखाया, 

गुरु को ईश्वर से श्रेष्ठ बताया, 

रामानंद जी से गुरूमंत्र पाया, 

सिकंदर लोधी ने बहुत जोर लगाया, 

राम नाम छुड़ा न पाया, 

सिकंदर लोधी ने मान ली हार, 

रसना जपती उसकी अब धन्य कबीर का जाप, 

माता लोई से विवाह रचाया, 

कमाल कमाली को  पुत्र पुत्री के रूप में पाया, 

कबीर साहेब ने निर्गुण ईश्वर की पूजा, 

उस बिन जाना भाव दूजा, 

कबीर साहेब की वाणी का सार, 

सबसे करो दिल से प्यार, 

कबीर साहेब से  सब को बहुत प्यार, 

वो है ईश्वर के पूर्ण अवतार । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू , जम्मू कश्मीर








मंगलवार, 22 जून 2021

जन जागृति

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 23-24/06/2021

दिन- बुधवार से गुरुवार

#विषय - जन जागृति

विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता


बाबा साहेब आंबेडकर ने शोषित, पिछड़े जन में जागृति लाई, 

जीवन सम्मान से जीने की नई राह दिखाई, 

जो अपने हक, अधिकार भूल चुके थे, 

जिन्होंने सदियों से चली आ रही ,

दकियानूसी सोच को अपना लिया था, 

जुल्म सितम सहना अपना स्वभाव बना लिया था, 

बाबा साहेब ने उनके अस्तित्व के लिए लड़ी लड़ाई, 

शोषित, पिछड़े वर्गों को समानता पाने की नई राह दिखाई, 

बाबा साहेब आंबेडकर ने ऐसा संविधान बनाया, 

सबको सम्मान से जीवन जीने का हक दिलाया । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर

योग करें जीवन में

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश

दिनांक - 23/06/2021

दिन- बुधवार

#विषय - योग और ध्यान

विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता) 


योगासन का नित्य करें अभ्यास  , 

रोग न आएगें तुम्हारे पास, 

योगासन शरीर को स्वस्थ बनाता, 

तन मन के सब रोग भगाता, 

स्वसि्तकासन पैरों का दर्द दूर करता, 

पैरों के सब रोग हरता, 

गोरक्षासन मांसपेशियों को मजबूत बनाता, 

ब्रम्हचर्य कायम रखने में सहायक बन जाता, 

अर्द्धमत्स्येन्द्रासन मधुमेह, कमरदर्द में बहुत लाभ पहुंचाता, 

दोनों को जड़ से मिटाता, 

योगमुद्रासन चेहरे की सुंदरता बढ़ाता, 

मन की एकाग्रता बढ़ती जाती, 

शंखासन उदर के सब रोग मिटाता, 

खट्टी खट्टी डकारों का आना बंद करता, 

बबासीर को निश्चित रूप से ठीक करता, 

गैस, कब्ज को भी दूर भगाता, 

योग को नित्य की आदत बनाएं, 

तन मन को रोगों से बचाएं । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर







श्रमण संस्कृति

  नमन मंच 🙏🙏🙏

#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 21-22/06/2021

दिन-  सोमवार- मंगलवार

#विषय - श्रमण संस्कृति

विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता

महात्मा बुद्ध ने विलक्षण मार्ग बनाया, 

जीवन जीने का नया राह दिखाया, 

सत्य अहिंसा के पालन को, 

सुखी जीवन जीने का मंत्र बताया, 

श्रमण संस्कृति बुराई से बचाती, 

इंसनियत का पाठ पढ़ाती, 

सबसे प्रेम करना सिखाती , 

दिलों से नफ़रत मिटाती, 

मनुष्य का अच्छा या बुरा होना, 

कर्मों पर निर्भर करता, 

भारतीय संस्कृति का मान बढ़ाया, 

सबको धर्म पर चलने का राह दिखाया। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर











रविवार, 20 जून 2021

सादा जीवन उच्च विचार

  नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार महाराष्ट्र इकाई

दिनांक - 20-26/06/2021

दिन - रविवार से रविवार 

#विषय - सादा जीवन उच्च विचार

 विधा - गद्य - पद्य ( छंदमुक्त कविता) 


सादा जीवन मनुष्य को महान बनाता, 

विचारों में उच्चतम बदलाव लाता, 

मनुष्य बेफिजूल के खर्चों से बच जाता, 

बचा हुआ धन मानव सेवा में लगाता, 

सादा जीवन मन में दया का भाव जगाता, 

मनुष्य दया भाव के कारण दयालु बन जाता , 

बेइमानी करना उसे नहीं भाता , 

ईमानदारी से हमेशा पैसा कमाता , 

ऊंच -नीच, अमीर -गरीब का भेद हृदय से मिट जाता , 

हर किसी से प्रेम वो पाता , 

सादा जीवन उच्च विचार  मनुष्य को देव बनाता, 

मनुष्य के विचारों को गंगा जैसा शुद्ध  कर जाता, 

शुद्ध उच्च विचारों वाला मनुष्य ही संसार को सुंदर बनाता, 

मानवता के प्रति अपने सारे कर्तव्य निभाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर











देवात्मा हिमालय

  नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार जम्मू कश्मीर इकाई

दिनांक - 20/06/2021

दिन-  शनिवार

#विषय - देवात्मा  हिमालय

विधा - गद्य - पद्य

हिमालय की गोद में  साधना साधी जाता, 

मानव को परमात्मा का साक्षात्कार कराती, 

हिमालय ही ऋषि मुनियों का तप स्थान , 

बनाता है सबको महान इंसान, 

हिमालय भारत भूमि का सुरक्षा कवच कहलाता, 

इससे टकराकर दुश्मन भाग जाता, 

भारत की ओर आने वाले तूफान , 

इससे टकराकर शांत हो जाते, 

हिमालय भारतभूमि का पहरेदार कहलाता, 

दुश्मन इससे डरकर दूर भाग जाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर

बिखरता परिवार एवं सिमटता प्यार

   नमन मंच 🙏🙏🙏🙏🙏🙏

#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 20/06/2021

दिन- रविवार

#विषय - बिखरता परिवार एवं सिमटता प्यार

विधा - स्वैच्छिक ( छंदमुक्त कविता) 

प्यार दिलों से घटता जाता, 

एक दूसरे से मिलकर रहना अब नहीं भाता, 

बड़ो से सलाह मशवरा कोई नहीं लेता , 

सिमटती जा रही है रिश्तों की रेखा, 

सत्कार प्यार दुलार अपनापन खोता जाता, 

जीवन में  आने वाले कठिनाइयों से घबराता, 

अकेले रहने की रीति किसने चलाई, 

परिवार में दरारें बढ़ती जाती, 

अहं भाव हावी होता जाता, 

दिलों में दूरी बढ़ाता, 

मैं मेरी से सब कुछ बिखरता जाता, 

एक दूसरे से दूर ले जाता, 

भावना से भावना को मिलाना, 

परिवार में विश्वास बढ़ाता , 

दिलों से दूरियाँ घटाता है, 

प्रेम भावना बढ़ाता है । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



शनिवार, 19 जून 2021

मन मंदिर को सुंदर बनाना है

  #हिन्द देश परिवार पंजाब इकाई

#नमन मंच🙏

#साप्ताहिक लेखन कार्यक्रम

#विषय मन मंदिर को सुंदर बनाना है

#विषय- छंदमुक्त कविता

#दिनाँक 20 जून 2021

***************

मन मंदिर को सुंदर बनाना है , 

ईश्वर को हृदय में बसाना है । 


सबसे प्रेम बढ़ाना है, 

नफरतों को दिलों से भगाना है। 


विनम्रता को अपनाना है, 

अंहकार को दूर भगाना है। 


मानवतावादी दृष्टिकोण बनाना है, 

संकुचित सोच की दीवार को गिराना है। 


हर किसी को गले लगाना है, 

विश्वबंधुत्व के सिद्धांत को जीवन मे अपनाना है। 


समाज सेवा को जीवन लक्ष्य बनाना है

अपना मानव जन्म सफल बनाना है। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर




प्रकृति के उपहार

  नमन मंच 🙏🙏🙏

#नव साहित्य परिवार

दिनांक - 19/06/2021

दिन-  शनिवार

#विषय - प्रकृति के उपहार

विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता) 

नदियाँ, नाले, पहाड़ पेड़ ,पौधें 

प्रकृति के अनुपम उपहार

स्वस्थ जीवन जीने के लिए

इनकी जरूरत हमेशा होगी 

इस बात को मन में विचारों

पेड़ पौधे ही हमें जीवनदायिनी आक्सीजन देते

वातावरण को शुद्ध बनने में

अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते

नदी नालों का पानी

खेतों को हरा भरा करता

अनाज की पैदावार करने में

ये भी अपना योगदान निभाते

प्रकृति के इन उपहारों का संरक्षण बहुत जरूरी

इनके बिना होगी हमारी जरूरतें पूरी। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर





गुरुवार, 17 जून 2021

ज्ञान और संस्कार, सदा सजाये व्यवहार

  नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार अमेरिका इकाई

दिनांक - 17/06/2021

दिन- गुरुवार

#विषय - ज्ञान और संस्कार, सदा सजाये व्यवहार

विधा - गद्य - पद्य (आलेख) 

ज्ञान और संस्कार ही मनुष्य का चरित्र निर्माण करते है । उसी के अनुसार ही मनुष्य का व्यवहार बनता है।क्योंकि मनुष्य जिस तरह के संस्कारों को सीखेगा ,उसी तरह का समाज में व्यवहार करता है । हमें हमेशा अच्छे संस्कार बच्चों को देने चाहिए। साधु,संतों, महापुरुषों की जीवनी बच्चों को पढ़कर सुनानी चाहिए । जिससे उनके अंदर अच्छे और शुभ गुणों का समावेश हो सकें। 

महापुरुषों, संतों, गुरुओं के जीवन मनुष्य के लिए प्रेरणास्रोत है। जो मनुष्य को शुभ कार्य करने के लिए प्रेरित करते है । जीवन के कदम कदम पर हमारा मार्गदर्शन करते है। हमें कभी भटकने नहीं देता है । भगवान श्रीराम जी का जीवन हमें आदर्श पुत्र, पति, भाई , राजा बनने की प्रेरणा देता है । बच्चों को रामायण पढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए ,ताकि उनके जीवन भी सकारात्मक बदलाव आ सकें। 

अच्छे लोगों की संगति करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। जिससे उन्हें अच्छे ज्ञान मिल सकें। इससे उनको  सत्य, अहिंसा, मैत्रीभाव, विश्वबंधुत्व की भावना, ईश्वरीय प्रेम जैसे गुणों का धारण करने की प्रेरणा मिलेगी। वह कभी सत्य के मार्ग से नहीं भटकेंगे ,उनके हृदय में समाज सेवा करने का चांव पैदा होगा। वह अच्छे समाज सेवक बनेगें और उन्नति में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं । 

अच्छा ज्ञान और अच्छे संस्कारों से ही अच्छा व्यवहार बनता है। इसलिए अच्छे ज्ञान और अच्छे संस्कारों को हमेशा ग्रहण करना चाहिए । 



स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर




बुधवार, 16 जून 2021

गुरू बिन ज्ञान कहाँ

नमन मंच 🙏🙏🙏

#नव साहित्य परिवार

दिनांक - 15/06/2021

दिन- बुधवार

विषय -गुरू बिन ज्ञान कहाँ

विधा - स्वैच्छिक

गुरू ही संसार का ज्ञान कराता, 

अच्छे बुरे की परख बतलाता, 

जीवन जीने की कला हमें सिखाते, 

मुश्किल राहों को आसान बनाते, 

गुरु परमेश्वर का पूर्ण स्वरूप, 

सबसे सुंदर लगता उसका रूप, 

हर मुश्किल में देता सहारा, 

लगता हमको प्राणों से प्यारा, 

अनहद शब्द का देता ज्ञान, 

सहज धुन में लग जाता ध्यान, 

शुभ कर्मों की सीख सिखाता, 

बुरे कर्म  करने से हमेशा बचाता, 

गुरु की वाणी अमृत समान, 

नित करता मन आत्म स्नान, 

गुरु की वाणी भ्रम मिटाती , 

ईश्वर का दर्शन कण कण में कराती, 

गुरु बिन अधूरा सारा संसार , 

कोई न होगा भवसागर पार । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर






















प्यारा हिंददेश परिवार हमारा

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार उड़ीसा इकाई

दिनांक - 05/07/2021

दिन-  सोमवार

#विषय - परिवार हमारी ताकत

विधा - गद्य - पद्म

हिंददेश परिवार सबसे करता प्यार, 

हर दिन बनाता त्योहार, 

छोटे बड़े यहाँ कोई भेद नहीं करता, 

हर किसी की बात ध्यान से सुनता, 

पवित्र विचारों की गंगा हम बहाते , 

सब के दिल में प्रेम भर जाते, 

सब धर्मों का हम करते सम्मान, 

गीता ,बाईबल, कुरान, गुरु ग्रंथ हमारे लिए एक समान, 

नकारात्मक हमें नहीं भाती, 

हमारे विचारों को सुनकर दूर भाग जाती, 

हिंददेश परिवार पर हमको बहुत मान , 

लगता हमको तीर्थ समान, 

हिंददेश परिवार में दीजिये योगदान, 

बन जाएगें मानव महान, 

हिंददेश परिवार सबको देता सत्कार, 

हमनें   से पाए अच्छे संस्कार । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  ,जम्मू कश्मीर














डॉ. आंबेडकर जी का मूल मिशन

 नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 16/06/2021

दिन-  बुधवार 

 विषय- डॉ. आंबेडकर जी का मूल मिशन

विधा - स्वैच्छिक

बचपन में जाति प्रथा को झेला था, 

तब गुण नहीं जाति ही मनुष्य को बनाती थी, 

जाति के नाम पर मनुष्य मनुष्य का बैरी था, 

सब ओर अज्ञानता का अंधेरा फैलता था, 

डॉक्टर आंबेडकर ने जीवन में एक मिशन बनाया, 

शोषित, पीड़ित, पिछड़े वर्ग को उनका हक दिलाया, 

आरक्षण का संविधान में प्रावधान बनाया, 

समानता से रहना सब को सिखाया, 

शिक्षा हासिल करना सब का अधिकार बनाया, 

अज्ञानता का अंधेरा सब ओर से मिटाया। 



स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू   , जम्मू कश्मीर


स्वर


मंगलवार, 15 जून 2021

भारतीय संस्कृति

   नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार जम्मू कश्मीर इकाई

 दिनांक - 15/06/2021

दिन-  मंगलवार

#विषय - भारतीय संस्कृति

 विधा - गद्य - पद्य (आलेख) 


भारतीय संस्कृति आरंभ से ही वसुधैव कुटुम्बकम्  की भावना पर विश्वास रखती है अर्थात सारे संसार को एक परिवार मानती है  । इसके अनुसार सभी एक ईश्वर की संतान हैं, कोई भी छोटा बड़ा नहीं है  ।  ईश्वर को सर्वव्यापी माना जाता है। हर एक जीव को ईश्वर का अंश माना जाता है। 

 अहिंसा,दया, क्षमा, प्रेम, प्यार हमारे विशेष गुण है। जो हमारे चरित्र को उज्ज्वल और श्रेष्ठ बनाते हैं । हमारी संस्कृति दया को धर्म का मूल मानती है और सदियों से इसका अनुसरण करती चली आ रही हैं । जीव हत्या को यहाँ महापाप  समझा जाता है। हर एक जीव को जीवन का अधिकार देती है। 

कर्तव्य के लिए जान निछावर कर देना यह विशेषता भी हमारी संस्कृति में पाई जाती है। कभी पुत्र पिता के वचन पालन के लिए वन में निवास करता है। कभी धर्म की रक्षा के लिए प्रिय को निछावर कर देता है। 

विनम्रता को मानव का श्रेष्ठ गुण माना जाता है । जो मानव को जीवन में सि्थर  बनाएं रखता है । मानव के अंतर मन में अहंकार पैदा नहीं होने देता है । सब में समानता का भाव लाता है। कोई भी अपने श्रेष्ठ गुणों का अहंकार नहीं करता है । 

हम अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व है। 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर


हंसते हंसते कट जाए रास्ते

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार बिहार इकाई

दिनांक - 15/06/2021

दिन- मंगलवार

 विषय- हंसते हंसते कट जाए रास्ते

विधा - गद्य - पद्य

हंसते हंसते कट जाए रास्ते, 

मुश्किलों से हम घबराते नहीं, 

बुलंद हौसले हमारे, 

हम चित को डुलाते  नहीं

हर गम को भूल जाते, 

हर पल अपना खुशी खुशी बिताते, 

हर मुश्किल को मिलकर सुलझाते, 

जगत की खुशी के गीत हम गाते, 

संघर्षों से जूझना हमें भाता, 

साहस हमारा हर मुश्किल आसान कर जाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



रविवार, 13 जून 2021

गरीबी रेखा

नमन मंच 🙏🙏🙏
#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत
दिनांक - 14/06/2021
दिन - सोमवार
#विषय - गरीबी रेखा
 विधा - स्वैच्छिक

गरीबी रेखा का सिर्फ गरीब कागज़ो में नाम पाता, 
कोई ना उसको लाभ पहुंचाता, 
बी पी एल के राशन कार्ड बांटें जाते, 
ज्यादा फायदा अमीरों को दें जाते, 
कोई न करता जांच पडताल, 
गरीब क्यों नहीं पा रहा लाभ, 
गरीब का ए पी एल का राशनकार्ड बना दिया जाता, 
उसे ही हर तरफ से लूटा जाता, 
सरकार बहुत सारी योजनाएं चलाती, 
गरीब को लाभ क्यों नहीं दे पाती, 
बड़े पेट वाले सब खा जाते, 
सिर्फ गरीबी मिटाने का नारा दे जाते, 
जब गरीब इन पाखंडियों की चाल समझ जाएगा, 
तभी अपना हक ले पाएगा । 

स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू  , जम्मू कश्मीर



गंगा मईया

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार फरुखाबाद इकाई

दिनांक - 01/07/2021

दिन- गुरुवार

 विषय- पवित्र गंगा 

विधा - गद्य - पद्य

भगीरथ  ने अपार तपस्या कर, 

ब्रह्मा से वर पाया, 

तेरा पावन पवित्र आगमन, 

माँ धरती पर करवाया, 

अपने पूवर्जों का उद्धार , 

तेरे निर्मल जल से करवाया, 

तेरी महिमा अपरंपार है, 

करती समस्त पापों का नाश, 

तेरे शरण जो आया, 

उसने मनवांछित फल पाया, 

तेरी महिमा गाता जग सारा, 

तूं सब का सहारा, 

तेरी जय हो गंगा मईया, 

तूं ही जग की तारनहार बन आई, 

सुख शांति सब को आई, 

जिसने तेरी अपार महिमा गाई । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू  , जम्मू कश्मीर


शनिवार, 12 जून 2021

आरक्षण

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक - 12/06/2021

# दिन - शनिवार

# विषय - आरक्षण

# विधा - स्वैच्छिक

आरक्षण बहुत बदलाव लाता, 

शोषित, पिछड़े वर्गों को उनका पूरा हक दिलाता, 

जातिवाद पर बनी व्यवस्था पर पूर्ण विराम लगाता , 

सबको बराबर होने का अहसास कराता, 

आरक्षण की नीति में अब बदलाव लाना है, 

आर्थिक पिछड़े वर्गों को इसका लाभ पहुँचाना है, 

जाति आधारित आरक्षण को अब बंद करवाना है, 

आर्थिक तंगी से जूझ रहे , 

सबको समानता पर लाना है, 

आरक्षण को राजनैतिक विचारधारा से मुक्त करवाना है, 

समतावाद का वृक्ष सब ओर लगाना। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू   ,जम्मू कश्मीर






गुरुवार, 10 जून 2021

बुढ़ापे का जीवन कैसा

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#नव साहित्य परिवार

दिनांक - 10-12/06/2021

दिन - बृहस्पतिवार से शनिवार

विषय - बुढ़ापे का जीवन कैसा

विधा - स्वैच्छिक

बुढापा सबको आता है, 

फिर क्यों रोता पछताता, 

अपने कर्म बहुत याद आते, 

दुख के बादल बढ़ते जाते , 

दुख दर्द और बढ़ाते, 

माँ बाप आशीष वो पाता, 

जो अपना पूरा कर्तव्य निभाता, 

माँ बाप  की सेवा हृदय से करता, 

ईश्वर उसके सब दुख हरता, 

माता पिता की सेवा स्वर्ग पहुँचाती, 

जीवन में खुशियाँ बढ़ती जाती , 

माँ बाप को जो बोझ समझता , 

उसका जीवन भी दुखों से भरता, 

माँ बाप के प्रति अपने कर्तव्य निभाएं, 

बच्चों को मां बाप की सेवा का संस्कार सिखाएं । 



स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



बुधवार, 9 जून 2021

जहाँ चाह वहाँ राह

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार पटना इकाई

दिनांक - 08-14/06/2021

दिन- मंगलवार से सोमवार

 विषय- जहाँ चाह वहाँ राह

विधा - गद्य - पद्य( छंदमुक्त कविता) 

चाह ही राह दिखाती , 

मंजिल के समीप ले जाती, 

कुछ पाने की चाहत, 

हौंसले को बुलंद कर जाती, 

मानव को मेहनती बनाती, 

चाह मुश्किलों से न घबराने देती, 

राही को आगे बढ़ने का उत्साह भरती, 

चाह बिना इंसान न जी पाता, 

ऐसे ही अमूल्य जीवन को व्यर्थ गंवाता, 

चाह को जीवन का सारथी बनाएं, 

मंजिल पाने को जीवन जीने लक्ष्य बताएं । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर


 



तस्वीर

 नमन मंच 🙏🙏🙏🙏🙏🙏

#साहित्य संगम संस्थान गुजरात इकाई

दिनांक - 10/06/2021

दिन - बृहस्पतिवार

विषय - तस्वीर

विधा - स्वैच्छिक ( छंदमुक्त कविता) 

तेरी तस्वीर को आंखों में बसाये रखता हूँ, 

तेरी यादों में हमेशा खोया रहता हूँ, 

तूं मेरी तकदीर बदल दे मलिक, 

तेरी तस्वीर को सीने से लगाये रखता हूँ, 

तस्वीर तेरी मेरे नयनों की प्यास बुझाती है, 

तेरे पास होने का मधुर अहसास कराती है, 

तेरा प्यार मेरी जिंद जान में बस गया है, 

तूं मेरे जीने का सहारा बन गया है, 

तेरी तस्वीर को हमेशा निहारता हूँ, 

तेरे प्यार पाने के लिए तरसता हूँ, 

तेरी तस्वीर तेरे पास होने का अहसास कराती है, 

तेरे लिए मेरे प्यार को और बढ़ाती है । 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जम्मू   , जम्मू कश्मीर



दाम्पत्य में तकरार

 # नमन मंच🙏🙏🙏 

# साहित्य बोध जम्मू कश्मीर इकाई

# दिनांक- 09/06/2021

# दिन- बुधवार

#विषय- दाम्पत्य में तकरार

#विधा - स्वैच्छिक

दाम्पत्य जीवन में तकरार करीब लाता, 

एक दूसरे के लिए प्यार बढ़ाता, 

यहाँ होता प्यार, 

वही होता तकरार, 

हर मसल को मिलकर सुलझाएं, 

एक दूसरे के प्रति विश्वास को बढ़ाएं, 

तकरार को तकरार रहने दें, 

दिलों में कभी न दरार होने दें, 

दाम्पत्य में तकरार रिश्ते को कमज़ोर करता जाता, 

एक दूसरे के प्रति अविश्वास को बढ़ाता, 

तकरार हमेशा रिश्तों को तोड़ने काम करता, 

दोनों को एक दूसरे से हमेशा दूर करता, 

पति पत्नी अपनी भावनाओं को एक दूसरे को समझाएँ, 

एक दूसरे के प्रति अपने कर्तव्य को निभाएं


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर


मंगलवार, 8 जून 2021

रक्तदान

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार हरियाणा इकाई

# दिनांक - 07/06/2021

# विषय- रक्तदान

# विधा - गद्य - पद्य

रक्तदान महादान कहलाता, 

रक्तदाता रक्तवीर बन जाता, 

रक्तदान कर इंसानियत निभाइये, 

सब लोगों के प्राण बचाइये, 

रक्त हमेशा रहता बनता, 

रक्तदाता पर सब जग मान करता, 

रक्तदाता निष्काम सेवा निभाता, 

रक्तदान कर सबके काम आता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर




कर्म प्रधान संसार, कर्म जीवन का सार

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार अमेरिका इकाई

# दिनांक - 07/06/2021

# विषय- कर्म प्रधान संसार, कर्म जीवन का सार

# विधा - गद्य - पद्य 

कर्म प्रधान संसार कहलाता, 

कर्म ही जीवन का सार माना जाता, 

कर्म ही इंसान को महान बनाता, 

देव जैसा संसार में पूजा जाता, 

बुरे कर्म निंदा पाते, 

आत्मा पर दाग़ लगाते, 

कर्म की महता को जिसने पहचाना, 

मानव जीवन के लक्ष्य को जाना, 

कर्मवीर वो ही कहलाता, 

संसार को सुंदर का बेड़ा उठाता, 

अपने कर्म को सुंदर बनाए, 

प्रेम की खूशबू से संसार को महकाए । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  ,जम्मू कश्मीर, 







परिवर्तन

 नमन मंच 🙏🙏🙏

ग्वालियर साहिति्यक एवं सांस्कृतिक मंच

दिनांक - 12/06/2021 

दिन - शनिवार

विषय -स्वतंत्र 

शीर्षक- परिवर्तन 

विधा - लघुकथा, कहानी, संस्मरण

अब्दुल गनी ने शिक्षा हासिल करने के लिए बहुत मुश्किल को उठाया  ।वो नहीं चाहता किसी ओर को भी पढ़ने के लिए घंटों पैदल चलना पडे़ ,वो इसमें परिवर्तन चाहता था । उसने शहर जाकर खूब मेहनत की और लाखों करोड़ों रुपये उसके पास जमा हो गया । 

अब वह गाँव लौटना चाहता था उसने अपने परिवार के सभी सदस्यों को गाँव लौटने के लिए मना लिया। सभी गाँव लौट आए। अब्दुल ने अपने पैसों से एक निजी विद्यालय खुलवाया यहाँ बिल्कुल मुफ़्त शिक्षा मिलती थी और कंप्यूटर सेंटर भी खुलवाया जिससे बच्चों को टेक्निकल शिक्षा भी मिल सकें। 

उसके इस महान कार्य से गाँव में परिवर्तन आ गया। सभी बच्चों के लिए शिक्षा प्राप्त करने आसान हो गया । अब बच्चे शहर जाकर नए नए कोर्स करने लगे ,और गाँव के विकास में अपना योगदान देने लगे।गाँव की तस्वीर बदल गयी इसका सारा श्रेय अब्दुल गनी को जाता है । जिसने मुश्किल हालातों में शिक्षा हासिल की और अपनी मेहनत की कमाई को गाँव के विकास में लगाया । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



चंदा मामा

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार पुष्पवाटिका विद्यालय, डिब्रूगढ़

दिनांक - 07-13/06/2021

दिन- सोमवार से रविवार

 विषय- चंदा मामा

विधा - गद्य - पद्य

चंदा मामा हमको बहुत भाते, 

ऐसा लगता जैसे पास बुलाते, 

अंधेरे में रोशनी फैलाते, 

सबको रोशनी का महत्व बताते, 

सुंदरता तुम्हारी बहुत मनमोहक लगती, 

सबको अपनी ओर आकर्षित करती, 

चंदा मामा नयनों को देते आराम, 

सब रात करते विश्राम । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर






आंतरिक सुंदरता

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार   अमेरिका इकाई

# दिनांक- 23/06/2021

# दिन- बुधवार

# विषय- आंतरिक सुंदरता

# विधा - गद्य - पद्य

 सारा विश्व सुंदर दिख आता, 

आंतरिक सुंदरता से नाता बनाता, 

 अपना  पराए का भेद मिट जाता, 

जब आंतरिक सुंदरता का गुण आता, 

मन के सब भेद मिट जाते, 

जब सब पर प्रेम लुटाते, 

आंतरिक सुंदरता आंखों से अझोल रहती, 

दिलों में हमेशा राज करती, 

आंतरिक सुंदरता अमूल्य खजाना, 

जिसे न समझे मनुष्य अनजाना, 

आंतरिक सुंदरता अजर अमरता पाती, 

जब संसार में प्रेम फैलाती, 

आंतरिक सुंदरता स्वयं का ज्ञान, 

मन में बसता स्वयं भगवान । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर





शनिवार, 5 जून 2021

मेरी प्यारी कविता

 नमन मंच🙏🙏🙏🙏

#साहित्य संगम संस्थान तेलंगाना इकाई

दिनांक - 05/06/2021

दिन - शनिवार

विषय - मेरी प्यारी कविता

विधा - स्वैच्छिक ( छंदमुक्त कविता) 


मेरी प्यारी कविता तूं मेरे बोल, 

तूने मुझे बना कितना अनमोल, 

तेरे कारण मान बहुत पाया, 

तूने मुझे प्रसिद्ध बनाया, 

कविता समाज सेवा बनाया, 

लोगों की समस्याओं से कराया, 

कविता समाज करती उत्थान , 

कविता रचने वाले पाता बहुत सम्मान, 

कविता समाज में जागृति लाती, 

अपने असीम अस्तित्व का अहसास कराती, 

कविता मेरे मन अंतर का प्यार, 

मुझे संवारना है इससे पूरा संसार । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर




बेटी बहू में फर्क कैसा

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक 05-06/06/2021

# दिन - शनिवार से रविवार

# विषय - बेटी बहू में फर्क कैसा

# विधा - स्वैच्छिक

बेटी बहू में फर्क  मत करिए, 

दोनों घर की शान, 

हमेशा बढ़ाती परिवार का मान , 

सदा करो इनका सम्मान, 

बेटी ही बहू  में जो फर्क करता , 

मूढ़ मति वो इंसान , 

बहू घर के सब काम करती, 

घर को ही मानती तीर्थस्थान, 

बहू बेटी से सम भावना से करिए प्यार, 

सब खुशियाँ आएगी तेरे द्वार । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



पर्यावरण और हमारा भविष्य

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार पंजाब इकाई

दिनांक - 03/07/2021

दिन - रविवार

#विषय - पर्यावरण

विधा - गद्य - पद्य ( छंदमुक्त कविता) 

आओ मिलकर पेड़ लगाएं, 

पर्यावरण को शुद्ध बनाएं, 

संसार को प्रदूषण से बचाएं, 

पेड़ लगाने के फायदे बताएं, 

पेड़ पौधे वातावरण को शुद्ध बनाते, 

हमें रोगों से बचाते हैं, 

इनके बिना सांस लेने का मुश्किल हो जाएंगे, 

कौन हमें प्राणदायिनी आक्सीजन दे पाएंगे, 

जब हर कोई पेड़ लगाएंगा , 

पर्यावरण को अशुद्ध होने से बचाएगा, 

पेड़ पौधों के बिना मानव जीना  संभव सा लगता, 

पेड़ पौधों की छाया में बैठना माँ के आंचल सा लगता, 

पेड़ पौधों को लगाकर पर्यावरण दिवस बनाएं, 

मिथ्याचार में व्यर्थ समय न बिताएं । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



शुक्रवार, 4 जून 2021

भक्ति की शक्ति

शीर्षक-   भक्ति की शक्ति

विधा - लघुकथा

भक्त नामदेव जी महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत हुए है  ।उन्होंने पूरा जीवन ईश्वर की भक्ति और समाज सेवा में व्यतीत किया। इनके जीवन काल में जात पात का बहुत बोलवाला था, निम्न जात के लोगों का मंदिर में प्रवेश वर्जित माना  जाता था । मंदिर में पूजा करने का अधिकार सिर्फ उच्च जाति के लोगों को था। 

एक दिन भक्त नामदेव जी के मन में भी आया मंदिर जाकर ईश्वर की पूजा करूँ वो मंदिर में जाने के लिए घर से निकल पड़े। जब वह मंदिर में प्रवेश करने लगे, मंदिर के पुजारियों और उच्च जाति के लोगों ने भक्त नामदेव जी को धक्के मारकर मंदिर से बाहर निकाल दिया । 

भक्त नामदेव जी मंदिर के पीछे जाकर ईश्वर के ध्यान में बैठा गया । एक ऐसा चमत्कार हुआ ,जिसे देखकर सब हैरान हो गया । मंदिर का मुख पश्चिम दिशा की ओर हो गया जिस तरफ भक्त नामदेव जी ध्यान लगाकर बैठे थे सब ने सच्ची भक्ति की शक्ति का प्रमाण अपनी आंखों से देख लिया । इससे यह सिद्ध होता है कि सच्ची भक्ति करने वाले की लाज ईश्वर स्वयं बचाते है । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर




कुछ मत कहिए

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक 04/06/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - कुछ मत कहिए

# विधा - स्वैच्छिक

लाशों का ढेर लगा , 

चीखें ही चीखें चारों ओर, 

सुनने वाला कोई नहीं, 

कुछ मत कहिए। 

गरीबी का कैसा दौर आया, 

सबको इसने बहुत रुलाया, 

भूख से रोते सारे, 

बेरोजगारी का भयानक समय आया, 

सुनने वाला कोई नहीं, 

कुछ मत कहिए। 


मरीज अस्पताल जाने से डरते, 

 कमियाँ ही कमियाँ नज़र आती, 

मरीजों को यम का द्वार दिखाती, 

घर परिवार को बहुत रुलाती, 

कोरोना ने भयंकर कोहराम मचाया, 

सबको बर्बादी की दहलीज तक पहुँचाया, 

सुनने वाला कोई नहीं, 

कुछ मत कहिए। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीरौ़ॽ





गुरुवार, 3 जून 2021

खुशहाली

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार   जम्मू कश्मीर इकाई

# दिनांक - 03/06/2021

# विषय- खुशहाली

# विधा - गद्य - पद्य

जब सब खुशी खुशी जीवन बिताएंगे, 

मिलकर प्रेम के गीत गाएंगे, 

जब सब अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे, 

एक दूसरे का दुख दर्द बटाएंगे , 

मैं मेरी की भावना को भूल जाएंगे, 

इंसानियत का रिश्ता सब से निभाएंगे, 

जब पशु पक्षी भी निर्भय होकर जी पाएंगे, 

वो भी प्रेम प्रीत की रीति समझ जाएंगे, 

खुशहाली का रास्ता सबके मन से होकर जाता, 

जब हर कोई अपना कर्तव्य निष्ठा से निभाता है । 



स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



बुधवार, 2 जून 2021

माँ परमात्मा है, माँ जन्नत है

मातृशक्ति को शत-शत नमन

#विषय - माँ 

 विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता) 

माँ परमात्मा है, माँ जन्नत है, 

माँ के चरणों सारा संसार है, 

माँ का आंचल धूप में छांव करता, 

तन मन के सब दुख हरता, 

जीवन में जब भी निराशा आती, 

माँ हमेशा हौंसला बढाती , 

माँ की दुआ जीवन को सुखमय बनाती, 

जीवन की सब मुश्किल दूर करती, 

  माँ ही हमेशा संतान का मंगल चाहती, 

संतान की खुशियों के लिए अगणित  उठाती, 

माँ का प्यार पाने के लिए ईश्वर भी धरती पर आता, 

माँ के आंचल में अपने परमधाम से ज्यादा सुख पाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर


इंसानियत / मानवता

 नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार राजस्थान इकाई

दिनांक - 10/06/2021

दिन - बृहस्पतिवार

विषय - मानवता / इंसानियत

विधा -  स्वैच्छिक 

रोते ,दुखी , असहाय की सहायता करता, 

गर्व गुमान की भावना न मन में करता, 

सबको एक समान समझकर, 

समाज सेवा कमाता, 

धन दौलत का संचय छोड़, 

अपना सर्वस्व भी लुटाता, 

मानव सेवा को जीवन का लक्ष्य मान, 

अपना पूरा जीवन मानवता की सेवा में बिताता, 

वो ही मानव सेवी, 

मानवता का असली धर्म कमाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर


प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...