मातृशक्ति को शत-शत नमन
#विषय - माँ
विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता)
माँ परमात्मा है, माँ जन्नत है,
माँ के चरणों सारा संसार है,
माँ का आंचल धूप में छांव करता,
तन मन के सब दुख हरता,
जीवन में जब भी निराशा आती,
माँ हमेशा हौंसला बढाती ,
माँ की दुआ जीवन को सुखमय बनाती,
जीवन की सब मुश्किल दूर करती,
माँ ही हमेशा संतान का मंगल चाहती,
संतान की खुशियों के लिए अगणित उठाती,
माँ का प्यार पाने के लिए ईश्वर भी धरती पर आता,
माँ के आंचल में अपने परमधाम से ज्यादा सुख पाता ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू , जम्मू कश्मीर
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