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गुरुवार, 31 मार्च 2022

वैराग्य क्या है

 शीर्षक-  वैराग्य क्या है 

घरबार छोड़कर न होता बैराग

मायाजाल से निर्लिप्त रहकर प्रभु से करो चित् एकाग्र 

कमल से सीख लो जल से निर्लिप्त रहना 

सुख दुख को एक भाव में ग्रहण करना

हर कर्तव्य को खूब ईमानदारी से निभाना

कर्म के फल की कभी इच्छा नहीं करना 

भेदभाव पक्षपात का भाव मन में न आएं

श्वास श्वास केवल प्रभु के गुण गाएं 

समाज कल्याण  की भावना का हमेशा हृदय में रखें ध्यान

ऐसा परम बैरागी ईश्वर के दर पर परवान।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर

 



बुधवार, 30 मार्च 2022

खुली आंखों से सपना देखना चाहिए

 शीर्षक - खुली आंखों से सपना देखना चाहिए 

सोते हुए सपने मत देखो मेरे यार 

होगा व्यर्थ में समय बर्बाद 

सपने तो खुली आंखों से देखो मेरे यार 

तभी होंगे वो साकार 

सपनों को पूरा करने के लिए थोड़ा सी मशक्कत कर लो 

साहस हिम्मत को दिल में भर लो 

आलस नकारात्मक से बना लो दूरी 

तभी होगी आशाएं पूरी 

सोते हुए जो सपने देखते‌ है

कल्पनाओं में ही जीते हैं

उनके सपने  कभी नहीं होते साकार 

रोते हैं जीवन में बार बार ।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला -  सांबा,  जम्मू कश्मीर








मंगलवार, 29 मार्च 2022

जिंदगी कोरा कागज है

शीर्षक - जिंदगी कोरा कागज है 

जिंदगी कोरा कागज है 

चलो इसको रंगीन बनाते हैं 

जो हमारे लिए जीते मरते हैं

उनका पल पल फूलों सा महकाते हैं 

अच्छे पुण्य कर्मों से धरा को सजाते हैं 

धरती पुत्र होने का फर्ज़ निभाते हैं 

कड़वे बुरे बोलो को हृदय से बिसराते है 

प्रेम प्यार गीत सबको सुनाते हैं 

इंसान हैं इंसानियत को धर्म बनाते हैं 

नफ़रत ,मज़हब परस्ती की भावना दिलों से हटाते हैं 

जिंदगी के कोरे कागज को रंग बिरंगे भावों से सजाते हैं 

शुभ गुणों से धरती को स्वर्ग सा सुंदर बनाते हैं।

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा,  जम्मू कश्मीर




मन मेरे प्रेम के मार्ग पर चल

शीर्षक -  मन मेरे प्रेम के मार्ग पर चल 

मन मेरे प्रेम के मार्ग पर चल 

तभी पायेगा प्रभु का दर 

 मन मेरे प्रेम के मार्ग पर चल...........

दया भाव सबसे पर दिखाऊं 

यही शुभ गुण में अपनाऊं 

 मन मेरे प्रेम के मार्ग पर चल..............

संतोष करने से तृष्णा मिट जाएं 

लोभ लालच की भावना मन को सताएं 

 मन मेरे प्रेम के मार्ग पर चल............

काम क्रोध करते हैं शुभ गुणों का नाश 

यह अवगुण प्रभु कृपा से गए भाग 

 मन मेरे प्रेम के मार्ग पर चल.............

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा,  जम्मू कश्मीर








सोमवार, 28 मार्च 2022

अब मैं अतुल्य सुख पा लिया मेरी माई

 शीर्षक- अब मैं अतुल्य सुख पा लिया मेरी माई

अब मैं अतुल्य सुख पा लिया मेरी माई

खत्म हो गई माया की छाई 

अब मैं अतुल्य सुख पा लिया मेरी माई............

सतगुरु ऐसी कृपा बरसाई 

मैं मेरी की अग्न इक छिन में भगाई 

अब मैं अतुल्य सुख पा लिया मेरी माई...........

काम क्रोध अब मोहि न सताई 

नाम रस से मेरा मन तन सीतलाई 

अब मैं अतुल्य सुख पा लिया मेरी माई.........….. 

अपने पराये बैरी मीत का भेद मिटाई 

कण कण में अपनी परम ज्योति दिखाई

अब मैं अतुल्य सुख पा लिया मेरी माई............... 

मोह माया का का सब बंधन‌ तोड़ी 

सांची लिव अब हम तुम से जोड़ी 

अब मैं अतुल्य सुख पा लिया मेरी माई..........

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जिला-  सांबा, जम्मू कश्मीर


 





हरि नाम सच्चा धन है

 शीर्षक - हरि नाम सच्चा धन है

हरि नाम सच्चा धन है 

सुन लो मन मित्र प्यारे 

जग के रिश्ते यही छूट जाएंगे 

इस सच को स्वीकार कर लो 

जीवन की यह घड़ियां हरि के नाम सिमरन से सफल कर लो 

जग के रिश्ते सिर्फ मोह माया का बंधन 

अंत काल में  क्यों करता है झूठा रूदन 

क्या लेकर आया था जग में 

जो यहां छूट गया  

तन का घड़ा फूटते ही सिर्फ पछतायेगा

हरि का नाम न सिमरन करने  वाला 

चौरासी लाख योनियों में आएगा ।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला -सांबा , जम्मू कश्मीर


रविवार, 27 मार्च 2022

सतगुरु मैं तेरा हूं

 शीर्षक - सतगुरु मैं तेरा हूं

अच्छा हूं या बुरा हूं सतगुरु मैं तेरा हूं 

अच्छा हूं या बुरा हूं............................... 

तेरा दर ही मेरा सहारा 

 सब पापों को तूं बख्शने वाला 

अच्छा हूं या बुरा हूं............................... 

तूं दिलदार है मेरा 

सारे जहां में हुक्म चलता है तेरा 

अच्छा हूं या बुरा हूं............................... 

तूं चाहे पहाड़ को चलना सिखा दें 

महा पापी को संत बना दें

अच्छा हूं या बुरा हूं............................... 

तेरी रहमत अगर मुझे मिल जाएं 

जन्म मरण का चक्र तभी मिट पाएं 

अच्छा हूं या बुरा हूं............................... 

चौरासी लाख योनियों का दुख बहुत भारी 

अब की बार मुझे लो उबारी 

अच्छा हूं या बुरा हूं............................... 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला -सांबा, जम्मू कश्मीर



गुरुवार, 24 मार्च 2022

प्यार में ईमान रखना जरूरी है

 शीर्षक - प्यार में ईमान रखना जरूरी है

प्यार में ईमान कोई ही रख पाता है 

बाकी दुनिया तो दिखावा ही करती है

दिखावा करना तो पंखड़ियों का काम है 

ऐसे लोग प्यार को करते बदनाम है 

प्यार तो वो मीठा सा अहसास है 

जो महसूस करता है  दुख तकलीफ़े भूल जाता है 

प्यार तो प्रेमी को मजबूत बनाता है

प्यारे की खुशी के लिए हर जोखिम उठाता है 

प्यार ही ईमान सिखाता है 

क्योंकि प्यार में ईमान रखना जरूरी है।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा,  जम्मू कश्मीर


दिल‌ की बात किस से कहूं

 शीर्षक - दिल की बात किस से कहूं 

दिल की बात किस से कहूं 

मन में थोड़ा चैन आए 

तेरे साथ मैं गुफ्तगू करूं 

तूं मेरे प्यार को समझ पाएं

मेरे हर एहसास का तूं मीत 

यही प्रेम प्यार की सच्ची रीत 

तेरे प्यार के गीत में गाऊं 

जिंदगी के दुख दर्द भूल जाऊं 

तेरा हर बोल मिश्री से मीठा लगता 

मेरे मन के सब दुख दर्द दूर करता 

तेरा पास होना मुझे है भाता 

मेरा जीवन खुशियों से भर जाता।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला- सांबा,  जम्मू कश्मीर





बुधवार, 23 मार्च 2022

अहंकार विनाश का कारण हमेशा से बनता आया

 शीर्षक - अहंकार विनाश का कारण हमेशा से बनता आया 

अंहकार विनाश का कारण हमेशा से बनता आया

बड़े विद्वानों, ऋषि मुनियों,वीर योद्धा को मिट्टी में मिलाता आया 

रावण बहुत बड़ा विद्वान था वो भी अहंकार का शिकार हुआ 

समूह उसके कुटुंब का एक पल में ही विनाश हुआ

ऋषि मुनियों भी हजारों वर्ष तपस्या करके इसे मार नहीं पाते थे 

तपस्या का अहंकार करके कर्मों के चक्र में फंस जाते थे 

वीरता का अहंकार का योद्धा को युद्ध में हार दिलाता है 

जितना मर्जी अस्त्र शस्त्र हो वो जबाव दे जाते हैं 

अंहकार का हमेशा त्याग करें 

विनम्रता से हमेशा सब से बात करें 

अंहकार विनाश की ओर ले जाता 

यही मानव के पतन का कारण बनता 

अंहकार  मन मस्तिष्क को मैल करता 

अच्छे पुण्य कर्मों  को भी यह हरता। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर







मंगलवार, 22 मार्च 2022

२३ मार्च का दिन भारत मां के लालो की याद दिलाता है

शीर्षक-  भारत माता के लालों की याद 
 
रंग दे बसंती चोला गान वाले
 वो कैसे मतवाले थे
वो मां भारती की आंखों के तारे थे
देश की आजादी  उन मस्तमौला को
 अपने प्राणों से प्यारी थी
देश से अंग्रेजों को भगाने की
 उन वीरों ने मन में ठानी थी 
ऐसे वीरों की कहानियां
 सब में जोश भरती थी
अपना सर्वस्व न्यौछावर करने को तैयार करती थी
भगतसिंह राजगुरु सुखदेव को अंग्रेजी सरकार ने फांसी पर चढ़ाया था
उन‌ वीरों के बुलंद हौसलों कोई तोड़ नहीं पाया था
  २३ मार्च का दिन भारत मां के लालो की याद दिलाता है
  आजादी के खातिर प्राण न्यौछावर करने वालों के आगे
 सबका शीश झुक जाता है ।

स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर

मेरे गोविंद मुझे अब मरना सिखाओ

‍ शीर्षक- मेरे गोविंद मुझे अब मरना सिखाओ 
मेरे गोविंद मुझे अब मरना सिखाओ
तेरे हुक्म में रहने का तरीका बताओ
मोहे मोहमाया के जाल से बचाओ 
मेरे मन को अंतर तीर्थ में नहलाओ
मेरे भीतर की मैल को हटाओ 
निर्मल मन की महिमा सबको सुनाओ
मुझे अपना अलौकिक दर्शन दिखाओ 
मेरे जन्मों की प्यास को बुझाओ 
मेरे गोविंद मुझे गले लगाओ 
जन्म मरण का चक्र  ही मिटाओ।

स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला -सांबा,  जम्मू कश्मीर



शुक्रवार, 18 मार्च 2022

मेरे मन जगत की झूठी प्रीति त्याग

 शीर्षक - मेरे मन जगत की झूठी प्रीति त्याग 

मेरे मन जगत की झूठी प्रीति त्याग  

प्रभु का सिमरन करो दिन रात 

मेरे मन जगत की झूठी..................

इस जग में कोई नहीं तेरा 

सोच समझ अब मन में विचार 

मेरे मन जगत की झूठी.................. 

सुख के सभी साथी बनते 

दुख आने पर जाते दूर भाग 

मेरे मन जगत की झूठी..................

सबका प्यार काया तक सीमित 

पक्षी के उड़ जाने पर छोड़ आएंगे श्मशान

मेरे मन जगत की झूठी..................

अच्छे बुरे कर्मों का लेखा तूं ही देगा 

कोई नहीं देगा तेरा साथ

मेरे मन जगत की झूठी.................. 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला सांबा जम्मू कश्मीर


 









होली पर्व है रंग में जाने का

शीर्षक - होली पर्व है रंग में जाने का 

होली पर्व है रंग में रंग जाने का

दिल से गिले शिकवे मिटाने का 

सबको गले लगाने का 

सब दूरियां दिलों से हटाने का।

सबकी गलतियों को नजरंदाज करने का 

सबको प्यार बांटने का 

फीकी सी जिंदगी में नव रंग भरने का 

होली पर्व है सब भेद भाव भूल जाने का ।

खुशियों के गीत गाने का 

रूठे हुए मित्रों को मनाने का 

कड़वाहट को बिसरने का 

मीठी मीठी बातें करने का । 

एक दूसरे को रंग लगाने का 

प्रेम प्यार के रंग में रंग जाने का 

होली के रंगों का महत्व सबको को समझाने का 

होली पर्व को सबके साथ खुशी खुशी मनाने का।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला- सांबा, जम्मू कश्मीर














सोमवार, 14 मार्च 2022

कागज के फूल

 शीर्षक - कागज के फूल 

कागज के फूल कभी खुश्बू नहीं दिया करते 

दूसरे के सहारे जीने वाले कामयाब नहीं हुआ करते 

कागज के फूल उन रिश्तों की तरह है 

जो सिर्फ दिखावा ही करते हैं

मुसीबतें आने  पर पीठ फेर लेते हैं 

केवल साथ होने का दम ही भरते है 

कागज के फूलों से अर्क नहीं बनता 

दिखावा करने से प्यार का रिश्ता नहीं जुड़ता 

कागज के फूलों से खुश्बू की आस मत कीजिए

हर रिश्ते को प्रेम प्यार की भावना से जीतिए 

कागज के फूल देखने में ही खूबसूरत लगते 

असली फूलों की तरह वे कभी नहीं महकते 

मन से बनावटीपन हम भी निकाल दें

सारे संसार से दिल से प्यार करें 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला -  सांबा, जम्मू कश्मीर






शुक्रवार, 11 मार्च 2022

तेरे सिमरन में सुख सारे


शीर्षक - तेरे सिमरन में सुख सारे

प्रभु जी तेरे सिमरन में सुख सारे सब धर्म ग्रंथ यही पुकारे 

कोटि पापी तेरे नाम ने पल में तारे 

प्रभु सिमरन में सुख सारे ............................ 

संसार सागर में तेरा नाम सहारा

तूं सच्चा मीत हमारा 

प्रभु जी तेरे सिमरन में सुख सारे ............................ 

मोह माया से दिलाता छुटकारा 

कण कण में दिखता तेरा रूप प्यारा 

प्रभु जी तेरे सिमरन में सुख सारे ............................ 

विषय विकार तन मन से भाग जाते 

अंतर में प्रभु आ समाते

प्रभु जी तेरे सिमरन में सुख सारे ............................  

प्रभु सिमरन से अंतर चक्षु खुल जाते 

अंतर में ही प्रभु का दर्शन पाते 

प्रभु जी तेरे सिमरन में सुख सारे...............…............ 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर











बुधवार, 9 मार्च 2022

बेरोज़गारी का रोना

 शीर्षक - बेरोज़गारी का रोना

सब ओर बेरोज़गारी का रोना  

अब लगता है सबको खाली पेट ही सोना 

हर कोई इस समस्या से परेशान  

बेरोज़गारी का कोई दिखता नहीं समाधान 

रोजगार के साधन कैसे बनाये

नई पीढ़ी को इस समस्या से कैसे निजात दिलाये 

महंगाई भत्ता भी सरकारी रोजगार को मिलता 

बेरोजगार तो सिर्फ खाली हाथ मलता 

सरकारें भी सिर्फ झूठे वादे करती 

केवल बेरोज़गारी को दूर करने का पाखंड ही रचती  

कौन सुझवान नेता देश से बेरोज़गारी का दाग़ मिटेगा

देश की नव पीढ़ी को रोजगार के साधन उपलब्ध करायेगा।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर





मंगलवार, 8 मार्च 2022

श्याम तेरी बांसुरी

 शीर्षक - श्याम तेरी बांसुरी 

श्याम तेरी बांसुरी की तान में

बसते है मेरे प्राण 

ओ गोपियों का कान्हा मेरे हृदय में समाना 

मेरी दृष्टि से कभी दूर मत जाना

श्याम तेरी बांसुरी की तान में

बसते है मेरे प्राण ................. 

मेरे मन भीतर का मिट जाता है अज्ञान 

ऐसी मधुर है तेरी बांसुरी की तान

श्याम तेरी बांसुरी की तान में

बसते है मेरे प्राण .................

तेरी बांसुरी श्याम मुझे नचाएं 

मेरे मन भीतर से हर भय हटाए 

श्याम तेरी बांसुरी की तान में

बसते है मेरे प्राण .................

तेरी बांसुरी में श्याम जादू है कैसा

हर कोई नाचता कठपुतली जैसा 

श्याम तेरी बांसुरी की तान में

बसते है मेरे प्राण .................

तेरी बांसुरी की तान से हर दुख दर्द भूल जाता 

हर पल हर क्षण खुशियां ही खुशियां लेकर आता

श्याम तेरी बांसुरी की तान में

बसते है मेरे प्राण .................


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जिला- सांबा, जम्मू कश्मीर







सोमवार, 7 मार्च 2022

होली के रंग

 शीर्षक - होली के रंग 

रंगों का त्योहार होली बहुत रंगीन है 

सब ओर बजती प्रेम की बीन है

होली के रंग में सब रंग जाते हैं

गिले शिकवों को दिल से बिसरते है

ऊंच नीच ,अमीर गरीब का भाव मन भूल जाता है

सबको एक होने की सीख सिखाता है

फीकी सी  जिंदगी में नव‌ रंग भर जाता है 

सबको रंगों का महत्व होली का त्योहार समझाता है ।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर





गुरुवार, 3 मार्च 2022

वृंदावन की मनमोहक होली

नमन मंच 🙏🙏🙏

 शीर्षक - वृंदावन की मनमोहक होली 

ओ मेरे कान्हा मुझे प्रेम का रंग लगा दो 

मेरी जन्मों की बिरहा की आग को बुझा दो 

मेरे फीके जीवन‌ में अपने प्रेम का रंग भर दो 

तेरे प्रेम रस को मैं अपने रोम रोम में भर लूं 

अपने अतृप्त मन की वेदना को तेरे दर्शन दीदार से शांत कर लूं

कान्हा तेरे वृंदावन की मनमोहक होली 

जहां बनता है तूं सबका हमजोली 

तेरा प्रेम का  गहरा रंग तन मन में बस जाए 

मोह माया का पर्दा मेरे मन के भीतर से हट जाए 

मेरे प्यारे श्याम सुंदर सलोने ऐसा गहरा रंग लगा दें

मेरे तन मन में अपने प्रेम का गहरा रंग चढ़ा दें।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर












बुधवार, 2 मार्च 2022

भक्त प्रहलाद

 शीर्षक - भक्त प्रहलाद 

भक्त प्रहलाद की भक्ति की कथा सुनाते हैं 

सच्चे हृदय से भक्ति करने वालों की ईश्वर लाज स्वयं बचाते हैं

राक्षस कुल में हिरण्यकश्यप दुष्ट स्वभाव का व्यक्ति था

हरि के भक्तों को बहुत सताता था

अपने आप को ईश्वर बताता था 

हरि की भक्ति करने वाले पर बहुत जुल्म कमाता था

हिरण्यकश्यप की रानी कयाधु ने एक पुत्र को दिया 

उसी पुत्र ने बचपन से ही हरि का नाम हृदय में बसा लिया

हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद पर बहुत ही जुल्म किया 

हरि की भक्ति छुड़वाने के लिए सांपों वाले कमरे में बंद किया 

सारे सर्प भक्त प्रहलाद को शीश झुकाते हैं

भक्त वत्सल हरि की महिमा का गुणगान नित मुख से गाते हैं

हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रहलाद को पहाड़ से गिराकर मारने का यत्न किया 

पत्थरों ने भी भक्त प्रहलाद को फूलों जैसा एहसास प्रदान किया 

ऐसे लाज बचाने वाले हरि के गुण हम क्यों नित नहीं गाते हैं

पारब्रहम की महिमा गाकर अपना जन्म सफल बनाते हैं

होलिका ने अपने भाई के साथ प्रहलाद को जिंदा जलाने की योजना बनाई थी

लगता था उस दुष्टा ने अपनी चिता स्वयं सजाई थी

होलिका ने अपनी गोद में  प्रहलाद को बैठाया था

चिता की आग ने स्वयं होलिका को ही जलाया था

हरि की एक मन से भक्ति करने वाले भक्त प्रहलाद की परम गाथा गाते हैं

भक्त से परम स्नेह करने वाले परमपिता परमात्मा का यश सच्चे हृदय से सबको सुनाते हैं 

जब पापी हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रहलाद को गर्म स्तंभ को आलिंगन करने का हुक्म दिया

हरि जी ने नरसिंह रूप धारण कर पापी हिरण्यकश्यप को मृत्यु की गोद में सुला दिया 

ऐसे परम रक्षक हरि की महिमा सृष्टि का कण कण हर पल गाता है 

उस परमपिता परमेश्वर की भक्ति का प्रताप हमें लोक परलोक में सम्मान दिलाता है।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर









मंगलवार, 1 मार्च 2022

नाम रंगन चढ़ा दो

 शीर्षक - नाम रंगन चढ़ा दो 

नाम रंगन चढ़ा दो मेरे सतगुरु दीनदयाल 

तेरे बिना मेरे मन में कोई आया ना ख्याल

मेरे मन‌ पर पड़ गया माया जाल 

इस कारण सतगुरु बिगड़ गया है मेरे मन का हाल।

ऐसी कृपा करो लालो के लाल 

मेरा मन‌ नाचे सिर्फ तेरे ताल 

पल  पल सताने आता हैं काल 

समझ नहीं आती उसकी मुझे कुचाल।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला : सांबा, जम्मू कश्मीर



प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...