मेरे गोविंद मुझे अब मरना सिखाओ
तेरे हुक्म में रहने का तरीका बताओ
मोहे मोहमाया के जाल से बचाओ
मेरे मन को अंतर तीर्थ में नहलाओ
मेरे भीतर की मैल को हटाओ
निर्मल मन की महिमा सबको सुनाओ
मुझे अपना अलौकिक दर्शन दिखाओ
मेरे जन्मों की प्यास को बुझाओ
मेरे गोविंद मुझे गले लगाओ
जन्म मरण का चक्र ही मिटाओ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला -सांबा, जम्मू कश्मीर
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