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शनिवार, 25 दिसंबर 2021

माता गुजरी जी

 शीर्षक - माता गुजरी जी

माता गुजरी जी  तेरी कुर्बानी को हिंदोस्ता याद करता

तेरे परिवार की कुर्बानियों से ही आबाद दिखता

तूने ही अपने पोतों को गुरु तेगबहादुर की सीख सिखाई

तभी उन्होंने धर्म की खातिर अपने प्राणों की बलि चढाई

तेरे दो बड़े पोतो ने चमकौर गढ़ी में अपना रण कौशल दिखलाया

लाखों ही दुश्मनों को मृत्यु के द्वार पहुंचाया

तेरे दो छोटे पोतों ने दादा गुरु तेग बहादुर के मान को बढ़ाया

हंसते हंसते अपने आप को सरहिंद की दीवार में चुनवाया

माता गुजरी जैसी माँ का दर्शन ईश्वर भी देखना चाहता

जिसके श्री चरणों में संपूर्ण ब्रह्माण्ड अपना शीश झुकाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला सांबा ,जम्मू कश्मीर




शुक्रवार, 24 दिसंबर 2021

सरहिंद की दीवार

शीर्षक - सरहिंद की दीवार

 सरहिंद की दीवार तूने कैसा रच दिया खूनी इतिहास, 

तुझे देखकर लगता है पत्थर का दिल है तेरा मुझे हो गया विश्वास, 

ठंडे बुर्ज भी उन बाल वीरों को झुकाने पाया, 

माता गुजरी ने अपने पौत्रों को शहादतों का इतिहास सुनाया, 

गुरु नानक साहेब की वाणी ने उनमें जोश जगाया, 

प्रेम भक्ति में कुर्बान होने का मार्ग दिखलाया, 

बजीर खान ने बाबा फतेह सिंह बाबा जोरावर सिंह को लालच दिखाया था, 

लेकिन उन बाल वीरों से जीत नहीं पाया था, 

तभी पापी बजीर खान ने छोटे साहिबजादों को जिंदा दीवार में चिनवाने का फरमान सुनाया था

तभी चारों ओर अंधकार छाया था, 

गुरु पुत्र हंसते हंसते सरहिंद की दीवार में चिन गए, 

कुर्बानियों का नया इतिहास लिख गए।  


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा जम्मू कश्मीर



चमकौर गढ़ी

नमन मंच 🙏🙏🙏

शीर्षक - चमकौर गढ़ी

गुरु गोबिंद सिंह ने अपना फर्ज खूब निभाया 

धर्म की रक्षा के लिए पुत्रों को जंग में शहीद कराया

चमकौर की गढ़ी ने बहुत दुख मनाया

बड़े साहिबजादों की शहादत पर पूरा ब्रह्माण्ड रुलाया

गुरु गोबिंद सिंह का युद्ध कौशल देखकर मुगल  हुए हैरान

कैसे वो जीत पाते गुरु साहेब है ईश्वर के अवतार महान

गुरु गोबिंद सिंह ने गुरु होने का कर्तव्य निभाया

प्यारे पुत्रों को अपने सिंहों समेत शहीद कराया

छोड़ गए लाशें बिना कफ़न के अपने पुत्रों की

क्या कर पाती  मोह माया उस दानी गुरु गोबिंद सिंह की

चमकौर गढ़ी बोल उठी गुरु गोबिंद सिंह को

क्यों नहीं बचा लेते निशानी अपने कुल की

गुरु गोबिंद सिंह जी बोले मुझे अपना फर्ज निभाना है

गुरु होने का कर्तव्य पुत्रों की शहादत द्वारा चुकाना है

शहीद पिता का पुत्र शहीद पुत्रों का पिता बन गया, 

चमकौर गढ़ी में नया इतिहास रचा गया। 


 स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जिला -  सांबा, जम्मू कश्मीर




रोजगार

नमन मंच 🙏🙏🙏

 शीर्षक - रोजगार

रोजगार से ही चलता घरवार , 

बिना रोजगार के  बन जाता सबकी नजरों में बेकार, 

रोजगार ही मान प्रतिष्ठा बढ़ाता, 

सबसे सम्मान दिलाता । 


  रोजगार की जरूरत सबको होती, 

तभी खरीदे जाते हीरे मोती, 

रोजगार से ही घर की सजावट होती, 

पहनने को मिलते कमीज और धोती। 


रोजगार से ही रास कारज होते, 

बिना रोजगार के बच्चे भूखे पेट सोते, 

बिना इसके जीवन में उठानी परेशानी, 

याद आ जाती अपनी नानी। 


 बिना इसके घर में रहता कलेश, 

कोई बन नहीं पता श्रेष्ठ, 

रोजगार ही मानव को जीवन मान सम्मान दिलाता, 

तभी वो सबके सपने पूरे कर पाता । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा, जम्मू कश्मीर




गुरुवार, 23 दिसंबर 2021

सफर ए शहादत

नमन मंच 🙏🙏🙏

शीर्षक - महान शहीद

आनंदपुर ऐसा छोडा़, 

परिवार में पड़ा गया बिछोड़ा , 

सिरसा नदी ने ऐसा कहर ढहाया, 

गुरु परिवार कभी मिल नहीं पाया। 

दो जत्थों में बंट गया परिवार, 

कैसे सुनाऊं उस समय का हाल, 

दो साहिबजादे गुरु गोबिंद सिंह संग चले, 

दो छोटे साहिबजादे दादी माँ संग चले । 

गंगू रसोईया बना मददगार ,

माता गुजरी छोटे साहिबजादों को ले चला अपने साथ, 

गंगू के मन में लालच आया,

 माँ गुजरी और छोटे साहिबजादों को कोतवाली में  बंद कराया। 

चमकौर गढ़ी को मुगल ने घेरा डाला,

 गुरु के सिंहों को झुका न पाया, 

बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह ने मुगल योद्धाओं को हराया, 

शहीदी देकर अपने पूर्वजों की कीर्ति को बढ़ाया। 


सरहिंद में लिखा गया नया इतिहास,

 धर्म में अडिग रहने का बना इतिहास, 

बजीर खान ने अत्याचार कमाया, 

छोटे साहिबजादों को जिंदा दीवार में चिनवाया । 


माता गुजरी जी ने यही शहीदी पाई, 

उनकी महिमा समस्त ब्रह्माण्ड ने गाई, 

गुरु गोबिंद सिंह ने वार दिया सारा परिवार,

 मालिक का शुक्रिया किया हर वार । 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर





बुधवार, 22 दिसंबर 2021

इलाही इश्क़

नमन मंच 🙏🙏🙏

 विषय - इलाही इश्क़

इलाही इश्क़ की महिमा अपरंपार, 

खोल देता जब मुर्शिद दसवां द्वार, 

ह्रदय में गूंजता अनहद नाद, 

कर देता तन मन को विसमाद । 


इलाही इश्क़ प्रेम सिखाये, 

सबको को अपना मीत बनाये, 

नफरतों को मन से मिटाये, 

ईश्वर का दरस कण कण में दिखाये। 


इलाही इश्क़ मन के भ्रम मिटाता, 

सबको समानता का पाठ पढ़ाता, 

ईश्वर का दरस हृदय में पाता, 

दरस का आनंद किसी से कह नहीं पाता । 


 इलाही इश्क़ इंद्रियों से परे की बात, 

करता मनुष्य की क्षण में गात,

इलाही इश्क़ तन मन में भरता उल्लास, 

प्रभु की महिमा गाता सांस सांस । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर




प्रभु यीशु मसीह

नमन मंच 🙏🙏🙏
विषय - प्रभु यीशु मसीह

प्रभु यीशु दीन दुखियों का सहारा, 
लगता है उनका दर्शन प्यारा । 

माँ मरियम की आंखों का तारा, 
ईश्वर का यह पुत्र बहुत न्यारा। 

प्रभु यीशु ने सबसे  प्यार करना सिखाया, 
सबको अपने गले लगाया। 

प्रभु यीशु ने नफरतों को दिलों से मिटाया, 
सबको एक ईश्वर संतान बताया। 

प्रभु यीशु ईश्वर का अवतार, 
उनकी अपरंपार  महिमा गाता समस्त संसार। 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह
जिला - सांबा,  जम्मू कश्मीर




शुक्रवार, 17 दिसंबर 2021

आजादी की कीमत

 नमन मंच 🙏🙏🙏

शीर्षक - आजादी की कीमत

आजादी की कीमत दीवानों ने पहचानी थी, 

तभी तो अपने प्राणों की दी हंसकर कुर्बानी थी, 

 अंग्रेजों को भगाने की मन में ठानी थी, 

बूढ़े बड़ो में भी आ गई जवानी थी, 

फांसी के फंदे पर झूली  जिनकी जवानी थी, 

आजादी को पाने की हिम्मत उन्होंने सब में जगानी थी, 

ऐसे वीरों की गाथाएँ बच्चों को नित्य सुनाती नानी थी, 

भारत की आज़ादी के लिए ,माँ भारती के पुत्रों ने दी अपनी कुर्बानी थी । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर








सोमवार, 13 दिसंबर 2021

नैतिक मूल्यों का हो रहा दमन

 विषय - नैतिक मूल्यों का हो रहा दमन


नैतिक मूल्यों का हो रहा दमन, 

कैसे बढ़ेगा मेरा यह वतन । 


नैतिकता ही मनुष्य को अन्य सभी जीवों से अलग बनाती, 

मनुष्य को मनुष्य होने का एहसास कराती ।


नैतिकता को लालच ने नुकसान पहुंचाया, 

इंसान को इंसानियत का पाठ भुलाया। 


नैतिक मूल्य मानव को देव बनाते, 

उसके शुभ गुण संसार में अच्छी खुश्बू फैलाते । 


नैतिक मूल्यों का दमन हमें रूकवाना है, 

मनुष्य को नैतिकता का मूल्य समझाना है । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

सांबा जम्मू कश्मीर

प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

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