नमन मंच 🙏🙏🙏
शीर्षक - रोजगार
रोजगार से ही चलता घरवार ,
बिना रोजगार के बन जाता सबकी नजरों में बेकार,
रोजगार ही मान प्रतिष्ठा बढ़ाता,
सबसे सम्मान दिलाता ।
रोजगार की जरूरत सबको होती,
तभी खरीदे जाते हीरे मोती,
रोजगार से ही घर की सजावट होती,
पहनने को मिलते कमीज और धोती।
रोजगार से ही रास कारज होते,
बिना रोजगार के बच्चे भूखे पेट सोते,
बिना इसके जीवन में उठानी परेशानी,
याद आ जाती अपनी नानी।
बिना इसके घर में रहता कलेश,
कोई बन नहीं पता श्रेष्ठ,
रोजगार ही मानव को जीवन मान सम्मान दिलाता,
तभी वो सबके सपने पूरे कर पाता ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा, जम्मू कश्मीर
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