गीता का ज्ञान जो भी पाता
ईश्वर में अभेद हो जाता।
श्वास श्वास जपता नाम
पहुंच जाता अपने निज धाम ।
जन्म मृत्यु का नष्ट हो जाता जाल
अंतर में दिख जाते सतगुर गोपाल ।
कर्म धर्म का मिलता सही ज्ञान
नष्ट हो जाता झूठा अभिमान।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा, जम्मू-कश्मीर