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रविवार, 29 अगस्त 2021

हिंदी

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#नमन मंच


गूंज क़लम की बिहार इकाई


 हिंदी भाषा भारत की शान बढ़ाती


सबको समानता का पाठ पढ़ाती




सब भारतीय भाषाओं की माँ कहलाती, 


भाषाओं को आगे बढ़ने का राह दिखाती। 




हिंदी भाषा भारत में सबसे ज्यादा बोली जाती, 


राष्ट्र भाषा होने का मान है पाती। 




हिंदी भाषा रचनाकारों को भाती, 


मनमोहक काव्य रचनाएँ इसी में लिखी जाती। 




हिंदी सब में मिठास घोलती, 


ज्ञान चक्षुओं को अपने शब्दों से खोलती। 




हिंदी ही संपूर्ण राष्ट्र को एकता के सूत्र बांधती, 


मानवता को ही श्रेष्ठ धर्म मानती। 




हिंदी ही हिंददेश को मजबूत बनाती, 


पूरे विश्व में भारत की एकता की शक्ति दिखाती। 




स्वरचित एवं मौलिक


 अमरजीत सिंह


सांबा, जम्मू कश्मीर







रविवार, 15 अगस्त 2021

अमर वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#क़लम की ताक़त साहित्यिक समूह, भारत

दिनांक  - 15/08/2021

दिन - रविवार से मंगलवार

 #विषय - अमर वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई

विधा - छंदमुक्त कविता

अंग्रेजों को भगाने की जिसने मन ठानी थी,

वो ही अमर वीरांगना झांसी वाली रानी थी । 


मोरोपंत और भागीरथी बाई की पुत्री सबसे दिखती निराली थी,

तेरह वर्ष की आयु में  राजा गंगाधर राव संग ब्याही थी । 


 झांसी वासियों ने खूब खुशियाँ मनाई थी,

जब मनु वहाँ गई ब्याही थी । 


  आनंद राव की जननी लक्ष्मी बाई थी,

झांसी के उतराधिकारी ने उम्र बहुत कम पाई थी । 


पुत्र के निधन ने गंगाधर राव को रोगी बनाया था,

पुत्र वियोग से राजा ने मृत्यु को गले लगाया था । 


तब लक्ष्मी बाई ने झांसी की सत्ता संभाली थी,

जोश से हर मुश्किल से लड़ती रही वो आज़ादी की दीवानी थी। 


अंग्रेजी सरकार ने अनेक षडयंत्र रचाये थे,

वो रानी की हिम्मत को न डिगा पाये थे। 


रानी के दत्तक पुत्र को अंग्रेजी सरकारी ने उतराधिकारी मनाने से असहमति जताई थी,

रानी ने झांसी की आज़ादी के लिए तलवार उठाई थी । 


रानी ने रणचंडी का रूप अंग्रेजो को दिखाया था,

झांसी को अंग्रेजी सरकार से मुक्त कराया था। 


देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की आरंभ की जिसने कहानी थी,

वो ही मर्दानी झांसी वाली रानी थीं । 


अपने प्राणों को देश के लिए कुर्बान करने वाली अमर मर्दानी थी,

इतिहास जिसके वीरता के गीत गाता वो अमर बलिदानी झांसी वाली रानी थी । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर












भारत प्यारा देश हमारा

 नमन मंच  🙏 🙏 🙏 

#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 11-15/08/2021

दिन - बुधवार से रविवार

विषय - भारत प्यारा देश हमारा

विधा - छंदमुक्त कविता


भारत देश मुझे प्राणों से प्यारा 

देता सबको सहारा है । 

हर किसी का सम्मान दिल से करता,

मेरा भारत देश बहुत महान। 

छोटा बड़ा किसी को समझा न जाता,

समता का भाव हमें महान बनाता। 

गीता,रामायण,कुरान,गुरु ग्रंथ,बाईबल की वाणी यहाँ गाई जाती,

मन की सारी मैल मिटाती। 

मानवता की सीख सिखाती,

समता का भाव सब में दर्शाती । 

भारत देश में अनेक भाषाएँ बोली जाती,

हिंदी को ही अपनी माता बताती। 

हिमालय इसका पहरेदार कहलाता,

अपनी सुंदरता के लिए विश्व में जाना जाता। 

नदियाँ इसकी पावन पवित्र जलधारा बहाती,

भारत में चारों ओर हरियाली फैलाती। 

भारत देश ही विश्वगुरु कहलाता,

ज्ञान का आरंभ मेरे देश से माना जाता। 

कर्मवीरों की भूमि भारत कहलाता,

दुश्मन के आगे कभी सिर नहीं झुकाता। 

भारत देश नित्य नव बुलंदियों को छूता जाता,

हमारा देश अपनी उन्नति के लिए विश्व में जाना जाता। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



सोमवार, 9 अगस्त 2021

सन् 1857: प्रथम स्वतंत्रता संग्राम

  नमन मंच  🙏 🙏 🙏 

# गूंज क़लम की जम्मू कश्मीर इकाई

दिनांक - 09/08/2021

दिन - सोमवार

विषय - सन् 1857: प्रथम स्वतंत्रता संग्राम

विधा - छंदमुक्त कविता


भारतीयों ने आजादी की कीमत पहचानी थी, , 

अंग्रेजों को देश से भगाने की ठानी थी, 

सन् 1857  ऐसा आया था, 

 जिसने ब्रिटिश सरकार को हिलाया था, 

सभी राजवाड़ो ने विरोध जताया था, 

अंग्रेजी सरकार को भगाने का हर तरीका अपनाया था, 

मंगल पांडे ने अंग्रेजी सरकारी के खिलाफ़ अपनी आवाज उठाई थी, 

सब ने मिलकर लड़ी लड़ाई थी, 

अंग्रेजों ने अवध, झांसी की सत्ता को छीनने की नीतियां बनाई थी, 

तभी तो झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने तलवार उठाई थी, 

नाना साहेब, तात्या टोपे, ने लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर लड़ी लड़ाई थी, 

आजादी पाने के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाई थी, 

सारे भारतीय लोगों ने  एकता दिखाई थी, 

अंग्रेजी सरकारी की नींव पूरे जोर से हिलाई थी, 

1857 के विद्रोह ने ही भारतीय को जगाया था, 

आज़ादी को पाने के लिए संघर्ष का मार्ग दिखाया था । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  ,  जम्मू कश्मीर



गुरुवार, 5 अगस्त 2021

प्राकृतिक आपदा

 नमन मंच  🙏 🙏 🙏 

# गूंज क़लम की जम्मू कश्मीर इकाई

दिनांक - 05/08/2021

दिन - गुरुवार

विषय - प्राकृतिक आपदा

विधा - छंदमुक्त कविता


जब जब प्रकृति का दोहन होगा, 

तब तब  समस्याओं का सामना करना होगा, 

पेड़ का कटाव गंभीर समस्या लाएगा, 

बाढ़ का पानी सारी मिट्टी साथ बहा ले जाएगा, 

पहाड़ को  जगह जगह से काटना , 

भूकंप को आने का न्यौता दे आएगा, 

नदी नालों की गति रोकना मंहगी पड़ जाएगी, 

जल के भीतर ही मानव की सांसें रूक जाएगी, 

प्रकृति की सुंदरता जब तक बरकरार रहेगी, 

मानव को प्रकृति से अनुपम चीजें मिलती रहेगी। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

सांबा,जम्मू कश्मीर




मंगलवार, 3 अगस्त 2021

गुरु हरकिशन साहिब जी

#विषय - गुरु हरकिशन साहिब जी

माता किशन कौर पिता गुरु हरराय जी  बड़े भाग्यशाली कहलाते, 

ईश्वर को जब अपने पुत्र के रूप में पाते, 

कीरतपुर रोपड़ पंजाब की पावन भूमि जन्मस्थान कहलाई, , 

गुरु हरकिशन साहिब जी के अवतार की सब ने दी बधाई, 

गुरु हरकिशन के महातेज से सब ओर हुई रोशनाई, 

सिमरन भजन का नियम सतगुरु ने हमेशा कमाया, 

लगता है ईश्वर गुरु हरकिशन साहिब का स्वरूप बनाकर आया, 

सतगुरु ने सिमरन साधना से गुरुपिता हरराय साहिब जी को रिझाया, 

गुरुपिता के हुक्म में सेवा को कमाया, 

गुरु हरराय जी ने गुरु हरकिशन साहिब जी को अपना उतराधिकारी बनाया, 

गुरु जी ने छोटे बड़े का भेद मिटाया, 

मानवता की सेवा का सबको पाठ पढ़ाया, 

बड़े भाई बाबा रामराय ने गुरु जी का बहुत विरोध किया , 

गुरुगद्दी पर अपना हक जताया, 

औरगंजेब जी के पास बाबा रामराय ने गुरु जी की शिकायत पहुंचाई

गुरुगद्दी पाने के लिए रामराय जी ने ऐसी साजिश रचाई, 

गुरु हरकिशन साहिब को दिल्ली बुलाया, 

अधर्मी औरंगजेब ने गुरु जी का दर्शन न पाया, 

राजा जयसिंह ने गुरु जी दिल्ली आने का न्यौता भेज दिया , 

गुरु जी ने निमंत्रण स्वीकार किया, 

गुरु जी ने पंडित लालचंद का अहंकार तोड़ा, 

अनपढ़ गंवार गुरु जी की कृपा से भगवत गीता के अर्थ बोला, 

दिल्ली में भयानक चेचक का रोग आया, 

गुरु जी ने तन मन धन से सेवा को कमाया, 

गुरु जी की कृपादृष्टि से रोगियों को आराम आया, 

गुरु हरकिशन साहिब के स्वरूप में ईश्वर स्वयं धरा पर उतर आया, 

बाला प्रीतम ने 1664 में संसार को छोड़ने का निर्णय किया, 

गुरुगद्दी का तिलक अपने बाबा गुरु तेग बहादुर साहिब को दिया, 

गुरु जी को बाला प्रीतम कहकर संसार याद करता , 

गुरु हरकिशन साहिब की कृपा से तन मन के रोग हरता। 



स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



रविवार, 1 अगस्त 2021

क्रांतिकारी उधम सिंह

 नमन मंच  🙏 🙏 🙏 

#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 01/08/2021

दिन - रविवार

विषय - क्रांतिकारी उधम सिंह

विधा - छंदमुक्त कविता


पंजाब की धरती को नमन बारंबार, 

जहाँ जन्मा उधम सिंह जैसा बहादुर लाल, 

बचपन में अपने माता पिता को गंवाया, 

बचपन सारा अनाथालय में बिताया, 

जलियांवाला में 1919 में जनरल डायर ने निहत्थे लोगों पर हमला करवाया, 

उनको गलियों से मरवाया, 

उधम सिंह ने आंखों से देखा जुल्म सारा, 

हृदय में प्रण कर लिया भारा, 

इक्कीस बर्षो तक बदले की आग को अंदर जलाया, 

लंदन जाकर जनरल डायर को गोली से उड़ाया, 

उधम सिंह ने भारत माता का मान बढ़ाया, 

फांसी पर चढ़कर देश के प्रति अपना कर्तव्य निभाया, 

भारत माता के वीर सपूतों में उधम सिंह का हमेशा नाम रहेगा, 

आने वाली नस्लों में वीरता का भाव भरेगा, 

 उधम सिंह की वीरता की कहानी मन में  जोश भर जाती, 

दुश्मन से लड़ने की ताक़त बढ़ जाती । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर






प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...