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रविवार, 28 फ़रवरी 2021

कविता

 


# नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान गुजरात इकाई
# दिनांक - २२/०३/२०२१
# दिन - सोमवार
# विषय - कविता
# विधा - कविता
कवि बोलता है बोल
बन जाते हैं अनमोल
रचता है कविता निर्मल सोच
बज जाते हैं ढोल
दिल की बात खोलता
सच प्यार के बोल बोलता
देश प्रेम की भावना
खत्म करती है सब कामना
कवि शब्दों को देता है अर्थ
प्रयास कभी नहीं जाता व्यर्थ ।

स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर ,जम्मू

शनिवार, 27 फ़रवरी 2021

चंद्र शेखर आजाद

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान मध्यप्रदेश  इकाई

# दिनांक - २८/०२/२०२१

# दिन - रविवार

# विषय - चंद्र शेखर आजाद

# विधा - स्वैच्छिक छंदमुक्त कविता

आजादी के दीवाने थे 

मर मिटने के गाते तराने थे 

आजादी मांगती कीमत भारी थी

तभी अपनी चिता स्वयं संवारती थी 

स्वराज का दिया नारा था

लगा सबको प्यारा था

आजाद थे आजादी के लिए लडे़ 

मर मिटने के लिए हमेशा आगे बढ़े  । 

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर ,जम्मू









दर्पण क्या बोलता है

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान तेलंगाना इकाई

# दिनांक - २७/०२/२०२१

# दिन - शनिवार

# विषय - दर्पण क्या बोलता है

# विधा - स्वैच्छिक छंदमुक्त कविता  

 

आत्मा का दर्पण सत्य का दिखाता है

दिखावे से बचाता है

किताबों का दर्पण ज्ञान सिखाता है

कोई विरला जन ही ग्रहण कर पाता है

मन दर्पण संगत की रंगत का 

संगत की रंगत के अनुसार फल पाता है

वाणी दर्पण शब्दों की 

जो अक्षर बोलता वही वाक्य बन जाता है

भकि्त दर्पण भावनाओं की 

भावना अनुसार रस पाता है

दर्पण जैसी हो काया

वैसी ही छाया दिखाता है। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर ,जम्मू






पवन/समीर

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान गुजरात इकाई

# दिनांक - २७/०२/२०२१

# दिन - शनिवार

# विषय - पवन/समीर

# विधा - छंदमुक्त कविता

करती ना किसी  से कोई भेदभाव

चलती हमेशा अपने प्रवाह

कण कण को उडने का देती मौका

साथ चलने का देती हौका

सरहदों की दीवार न माने 

यही इसके कारनामे

कभी मंद कभी उन्माद 

मचाती है बहुत उत्पाद

भीनी भीनी खुशबू फैलाती

वातावरण पूरा महकाती 

दूर दूर सब को पहुंचाती संदेश

चल पड़ती देश परदेश

ठंडी ठंडी सब को भाती 

खुशी खुशी लगता है सहलाती । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर ,जम्मू








कोरोना और सामाजिक दूरी

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# कलमकार कुम्भ

# दिनांक - 24/04/2021

# दिन - शनिवार

# विषय - महामारी

# विधा - स्वैच्छिक (कविता) 

कोरोना की जिस पर पड़ती मार

वो जाता स्वर्ग सिधार

भय का ऐसा बन गया माहौल

दूर भागते एक दूसरे लोग

मुंह पर सबने लगा लिया मास्क

रूक गई जिंदगी जो थी फास्ट

अपने पराया का हो गया ज्ञान

कोई नहीं जाता अब श्मशान

कोरोना एक  ऐसा महादानव

डर गए जिससे मानव

आनलाईन होती है अब बात

कोई नहीं जाता अब बारात

संगी साथियों काअब होता नहीं मेल

मिलकर कोई नहीं खेलता खेल

कोरोना की ऐसी मजबूरी

दूर खड़े होना है जरूरी। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू





शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2021

भक्त रविदास

# विषय - भक्त रविदास

जात पात का भ्रम नहीं कोई

चार वर्ण एक होई

आत्म ज्ञान का किया प्रचार

बाकी सब मिथ्याचार

मन चंगा का दिया नारा

लगता सबको बहुत प्यारा

नाम तीर्थ का सबको कराया स्नान

उत्तर गया मन का गुमान 

ईश्वर संग ऐसी लिव जोड़ी

कभी न जाए तोडी़ 

मीराबाई पर हुए दयाल

छूट गए उसके मन के जंजाल

दीन दुखियों का बने सहारा

एक ईश्वर का दिया नारा  । 

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू







बेटियां

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान हरियाणा इकाई

# दिनांक - २६/०२/२०२१

# दिन - शुक्रवार

# विषय - बेटियां

# विधा - गीत

माँ की दुलारी  पापा की प्यारी 

परी होती है बेटियां

घर को महकती

फूलों से सजाती  बेटियां

माँ की दुलारी........ 

पापा की शान 

माँ की जान होती है बेटियां

माँ की दुलारी........ 

दिल की नर्म

करती अच्छा कर्म 

कुल का मान बढाती है बेटियां

माँ की दुलारी........ 

माँ बाप की करती सेवा

चाहती नहीं कोई मेवा 

माँ की दुलारी............ 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू





मन

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान महाराष्ट्र इकाई

# दिनांक - २६/०२/२०२१

# दिवस- शुक्रवार

# विषय - मन

# विधा - गीत

मन मेरे तूं मीत मेरा 

अच्छा बुरा कर्म तेरा

तेरा मेरा रिश्ता निराला

साथी है तूं मेरा कर्म वालों

मन मेरे तूं....... 

न कोई अपना पराया

हर कोई लगता अपना साया

मन मेरे तूं........... 

मन मेरे तेरे सुंदर भाव

तूं करता सच्चा प्यार

मन मेरे तूं.............. 

प्रेम रस का पी ले जाम

पूरे होगे तेरे काम

मन मेरे तूं.......... 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू







मीडिया

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान पंजाब इकाई 

# दिनांक - २६/०२/२०२१

# दिन - शुक्रवार

# विषय - मीडिया

# विधा - कविता

मीडिया का सुनहरा युग है आया

सब को ज्ञानवान बनाया 

सच झूठ का सामने लाता है रूप

काम करता हैं समय के अनुरूप

भ्रष्टाचारियों की खोलता पोल

खतरे लेता बहुत मोल

राष्ट्र के ज्वलंत मुद्दे उठाता

सरकार की कमियाँ दिखाता

जनसाधारण की  बनता है आवाज

झूठ करता है पर्दाफाश

सब धर्मों का करता है सम्मान

सब का करता आदर मान

अपना फर्ज खूब निभाता

तभी सभी के मन को भाता । 

 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू







सुनहरी भोर

 # नमन मंच🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार डिब्रूगढ़ इकाई

#दिनांक - १७/०५/२०२१

# दिन - सोमवार

# विषय - भोर

 #शीर्षक - सुनहरी भोर 

# विधा - लघुकथा

तारे आकाश से विदा लेकर आराम करने के लिए जा रहे प्रतीत हो रहे थे।  वातावरण में चारों ओर शांति ही शांति थी । पक्षियों ने चहचहाना शुरू कर दिया। दस दिशाओं में धार्मिक ग्रन्थों की आवाज गूंज रही थी, जो वातावरण को पवित्र कर रही थीं। 

रोहित रोज की तरह सुबह ५ बजे उठ गया  था। बाहर से दरवाजा खटखटाना की आवाज आ रही थी। रोहित की माँ ने तुरंत जाकर दरवाजा खोला । माँ कहने लगी बेटा इतनी सुबह कैसे आना हुआ । रोहित ने पूछा माँ कौन आया है माँ कहने लगी तुम्हारा मित्र मनोज आया हैं । 

जल्दी से रोहित मनोज को मिलने के लिए आगे बढ़ने लगा मनोज ने रोहित को गले से लगा लिया और उसका हालचाल पूछने लगा । रोहित ने अपने मित्र से कहा तुम माँ के साथ अतिथिगृह में बैठो मैं स्नान करके आता हूँ। 

  जब रोहित स्नान करने के पश्चात मनोज के पास पहुंचा, रोहित की माँ और मनोज मुस्कुरा रहे थे  । रोहित अपनी माँ से मुस्कारने का कारण पूछा माँ मनोज की तरफ देखकर जोर जोर से हंसने लगी और कहने लगी तुम्हारा यह दोस्त तुम्हारी जिंदगी में नई सुनहरी, मदहोश और उज्जवल कर देने वाली सुबह का संदेश देने आया है। 

रोहित ने माँ से कहा पहेलियाँ मत बुझा माँ सीधे सीधे कहों, माँ कहने लगी बेटा तुम्हारी नियुक्ति निजी विद्यालय में अध्यापक के तौर पर हो गई है । रोहित को भी लगा उसके जीवन में नई सुहानी, सुनहरी और उज्ज्वल सुबह आज ही हुई है। जो रोहित को कभी भूलती नहीं है। 

 स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू




गुरुवार, 25 फ़रवरी 2021

जीवन है संघर्ष


#विषय - संघर्ष

#विधा - कविता

 जीवन है  संघर्षों की कहानी

करनी पड़ती हैं हर वक़्त कुर्बानी

बिघ्न बाधाओं को नदी हटाती

संघर्ष करती आगे बढती जाती है 

भूख प्यास को सहना पड़ता

हर आंसू को पीना पड़ता 

पर्वतरोही  समस्याओं के रोडे़ तोड़ता

तब ही चोटी पर चढ़ पाता है  

जीवन संघर्ष संघर्ष है जीवन

जीवन का पल पल यही सिखाता है। 

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा ,जम्मू कश्मीर 


सतगुर मेरे काज सवारों

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

दिनांक - २५/0२/२०२१

दिन - शुक्रवार 

विधा - भजन 

सतगुरु मेरे काज सवारों

      अवगुण मेरे तुम विसारो 

काम, क्रोध से मोहे बचावो

  मेरा बेड़ा पार लगाओ

सतगुरु मेरे काज......... 

प्रेम प्रीत का दियो उपहार

तब मै पाया मोक्ष द्वार 

सतगुरु मेरे काज........ 

मै मेरी का हो गया नाश

सब ओर दिखा तेरा प्रकाश

सतगुरु मेरे काज......... 

प्रेमरस का दियो प्याला

मिट गए मन के सकल जंजाला

सतगुरु मेरे काज ........... 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू एवं कश्मीर ,जम्मू

  

  



दर्पण

# नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्यिक महफ़िल

# दिनांक - 12/09/2021

# दिन - रविवार

षय - आईना/दर्पण

# विधा - गद्य/पद्म

 मन दर्पण है विचारों, 

अच्छे बुरे ख्यालों का । 

जो होता है वही दिखता, 

कोई पर्दा नहीं छिपता । 

जो सामने होता , 

उसी सत्य का ज्ञान कराता । 

 विवेक दर्पण आत्मा का , 

सत्य का राह हर क्षण दिखाता। 

पाप पुण्य का  फल बताता, 

नासमझ समझ नहीं पाता। 

दर्पण जो होता है वही दिखाता , 

सच्चाई को स्वीकार करना सिखलाता । 

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर जम्मू






सफर कटता नहीं हमसफ़र के बिना

 #नमन मंच 🙏🙏🙏

#साहित्यिक महफ़िल

#दिनांक 17 सितम्बर,2021 

#दिन शुक्रवार

#विषय - हमसफ़र या जीवन

शीर्षक - सफर कटता नहीं हमसफ़र के बिना

#विधा - संस्मरण

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25 अगस्त  ,2011 का दिन मुझे कभी भूलता नहीं है । खुशी से आगे बढ़ती हुई जिंदगी कब गमों में खो गई पता ही नहीं चला । जीवनसाथी के छूटने का आभास भी मैंने महसूस नहीं किया । अगर पता होता कि उनके साथ मेरी यह अंतिम मुलाकात है मै उनको घर से कभी बाहर नहीं जाने देती । मुझे लगता है मौत भी उनका इंतजार कर रही थी। 

उनके घर से निकलने के बाद 10 मिनट में फोन की घंटी बजना शुरू हो गयी। मैंने जैसे ही फोन उठाया, एक आदमी बोला मनोज तिवारी जी की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई है आप तुरंत वहाँ पहुंचे। फोन पर यह सुनते ही मैं बेहोश हो गई। 

मेरी बेटी और बेटे ने मुझे आकर उठाया और मेरे मुंह में पानी की कुछ बूंदें डाली, अब मुझे कुछ होश आया। अब हम रिक्शा में बैठकर दुर्घटना वाली जगह पहुंच गए। लेकिन कुछ लोग तब तक उनको अस्पताल ले जा चुके थे। अब हम सीधे अस्पताल की ओर रवाना हुए।  

अस्पताल पहुंचते ही यह खबर मिली जिनकी गाड़ी फव्वारा चौक के पास  दुर्घटनाग्रस्त हुई है उनकी मृत्यु हो चुकी है। यह खबर सुनकर मैंने अपना आपा ही खो दिया । कुछ समय के लिए मुझे ऐसा लगा जैसे की मेरी तो सारी दुनिया ही खत्म हो गई है। मैंने अपने आप को बेसहारा ही मान लिया था, मेरा तो जीने का उद्देश्य ही खत्म हो गया था । 

बेटी और बेटे ने बहुत सहारा दिया । लेकिन उनकी कमी हमेशा खलती है। जिंदगी का यह लंबा सफर उनके बिना काटना बहुत मुश्किल लगता है।  जब भी उनके बारे में सोचती हूँ आंखें आंसू से भर जाती है और जीवन जीना बड़ा मुश्किल लगता है  । 

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर ,जम्मू




बुधवार, 24 फ़रवरी 2021

साहित्य और समाज

# नमन मंच🙏🙏🙏 🌹🌼🌻🌺🌸💐

#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 21/07/2021

दिन - बुधवार

#विषय - समाज और साहित्य

#विधा - कविता

संस्कृति संस्कारों का देता ज्ञान 

कारण इसके बनता देश महान

धर्म कर्म की बात सुनता 

हृदय से बुरे विचार मिटाता

वीरों की वीरता करता है बखान

देश के लिए तभी लड़ पाते है वीर जवान

धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान

बनाता है महा विद्वान

साहित्य समाज पर छोड़ता अपनी अमिट छाप

साफ़ साफ़ दिखता है इसका प्रताप


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू



सिमटते परिवार

 नमन मंच 

#साहित्य संगम संस्थान राजस्थान इकाई 

#विषय - सिमटते परिवार 

विधा- कविता 

दिनांक - 24/02/2021

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एकांत बन गया अब जीवन का  अंग

कोई नहीं रहना चाहता किसी के संग

मन मर्जी के सभी बनते है मालिक

बात करने का सभी करते हैं आलस

बड़े परिवार की बड़ी है बात

हर कोई कहता मन की बात

बड़े बूढ़ों की सीख प्यारी

हल होती मुश्किलें सारी

चाचा चाची का मिलता प्यार

सब मिलकर खाते दाल

दुख सुख  के सब बनते साथी 

बनती नहीं कोई भ्रांति

दादा दादी का मिलता है प्यार दुलार

खुशी से भरा लगता है संसार

अकेले रहने से बढ़ती है परेशानी

मिलकर बांटो दुखों की कहानी

दुख की घड़ी में कोई होता नहीं साथ

पड़ती है जब समय की लात

कामकाज में सब रहते हैं व्यस्त 

बन जाते हैं मतलब परस्त

संस्कारों की हो जाती कमी

खुशी की जगह लेती है गमी

सुखी होने का सिर्फ भरते है दम 

दुख छिपाने का करते हैं कर्म 

एकल परिवार की बहुत सारी है परेशानी 

भूल जाते हैं खाना दाना पानी

अकेले रहने से बढ़ता तनाव

भूल जाते हैं सारे ख्वाब

संयुक्त परिवार सुखी परिवार

बाकी सब है मन के जंजाल । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर जम्मू







 



उम्मीदों का आकाश कभी झुकता नहीं

🙏🙏🙏 नमन मंच 🙏🙏🙏

दिनांक - १६/०४/२०२१

दिवस - शुक्रवार

विषय -  उम्मीद का दामन

शीर्षक - उम्मीदों का आकाश कभी झुकता नहीं ....... 

विधा - छंदमक्त   कविता 


उम्मीदों का आकाश कभी झुकता नही ं

बुलंद हौंसले वाला कभी रुकता नहीं

सपने देखता जो खुली आँखों से

विघ्न बाधाओं से डरता नहीं

परिश्रम करना जिसका धर्म है

हार जीत की परवाह करता नहीं

आत्मविश्वास से जो है भरा  

सहारा किसी और का तलाशता नहीं

मुश्किलों परेशानियों को जिसने झेल लिया

सफलता अमृत उस ने ही पी लिया। 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जिला- जम्मू 


मंगलवार, 23 फ़रवरी 2021

जल ही जीवन है

# नमन मंच 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

 #साहित्य_संगम_संस्थान _झारखंड_इकाई

#विषय - जल संसाधन

#विधा आलेख

# दिनांक -   10/04/2021

# दिन - शनिवार

जल के बिना मनुष्य का जीवित रहना असंभव है। खाने के बिना हम कुछ दिन जीवित रह सकते हैं लेकिन पानी के बिना एक क्षण नहीं रह सकते हैं । जल की महता का पता होने पर भी हम इसके संरक्षण के लिए कोई उपाय नहीं करते हैं। 

जल सभी जीव जंतुओं के लिए आवश्यक है। ३ प्रतिशत पानी ही पीने के योग्य है बाकी 97 प्रतिशत पानी खारा है जो किसी काम नहीं आता है।  मानव शरीर में 70% पानी होता है । मानव के जीवन का आरंभ और अंत पानी के द्वारा होता हैं। 

पानी की महत्व को जानते हुए भी हम इसका दुरूपयोग करते है। अगर किसी नल खुला है खुला  ही रहेगा  । कोई यह विचार नहीं करता है कि उसकी गलती के कारण कितना पानी व्यर्थ में नलियों में बह गया। बर्षा के पानी को तालाबों में भरकर जल संरक्षण का कार्य किया जा सकता है। पालतू जानवरों को पीने के पानी से नहीं नहलाना चाहिए बल्कि तालाबों और नहर के पानी से नहलाना चाहिए। 

पानी को कभी व्यर्थ में बर्बाद नहीं करना चाहिए । जो लोग सर्दियों में पानी को बर्बाद करते है गर्मियों में पानी के लिए तरसते हैं। हम सब को मिलकर जल संरक्षण के लिए कार्य करना चाहिए क्योंकि जल के बिना मानव जीवन संभव नहीं है। 

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर ,जम्मू



पनघट

 #साहित्य_संगम_संस्थान_महाराष्ट्र_इकाई

#दिनांक:२३/२/२०२१

# विषय - पनघट

# विधा - कविता 

पनघट की लंबी है दूरी 

पानी वहाँ से भरना है  मजबूरी

कमर लचकती कदम आगे बढती

आगे पीछे का भी  होश है रखती

हरे भरे पेड़ों को निहारती

फूलों की भीनी भीनी खुशबू लेती 

पहुँच गई है पनघट के पास में 

गगरिया सिर से उतार

रूप अपना देख रही 

बड़े ही चाव से 

पानी भर गगरिया में

लौट चली घर ग्राम में। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर ,जम्मू

लघुकथा - रिश्ता

# बिषय:- रिश्ता  विधा:- लघुकथा

हर एक रिश्ता हमारी भावनाओं से जुड़ा हुआ होता हैं। अगर रिश्ते स्वार्थपूर्ति का साधन बन जाए तो वो रिश्ता नही व्यापार बन जाता है। राकेश सिन्हा और सरिता कहने को पति पत्नी है, लेकिन दोनों हमेशा एक दूसरे के विरोध में खड़े रहते थे। 

राकेश सिन्हा जो अमीर परिवार से संबंध रखता है,  सरिता एक गरीब परिवार से है । राकेश हमेशा सरिता के परिवार का नाम लेकर ताने देता रहता है। एक दिन सरिता भी बोल पडी़ कब तक अपनी बेज्जती सहती, वह बोली, अगर आपको मुझसे और मेरे मायके वालों से इतनी परेशानी है तो मुझे तलाक दे दो । राकेश भी गुस्से से बोलने लगे तुम को छोड़ भी नहीं सकता क्योंकि मैनें तुमसे प्रेमविवाह किया, लोग क्या कहेंगे मेरे बारे में? तुम तो यहीं चाहती हो कि बाहर दुनिया में मेरी बदनामी हो ।

अब सरिता अपनी आँखों से आंसू पोछते हुए बोली, मेरी गलती यह है कि मैंने अपने मां बाप के खिलाफ जाकर तुमसे विवाह किया, अब मैं अपनी समस्या किसे सुनाऊँ। सरिता जोर जोर से रोने लगी। राकेश  को भी अपनी गलतियों का एहसास होने लगा और उसने रोती हुई सरिता के आंसू पोछता और उसे अपने गले से लगा लेता है। 


 स्वरचित एवं मौलिक


 अमरजीत सिंह


 जम्मू कश्मीर ,जम्मू


जम्मू

सोमवार, 22 फ़रवरी 2021

नानी की याद

 #नमन मंच 🙏🙏🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान महाराष्ट्र इकाई

#दिनांंक-19/04/2021

#दिन - शनिवार

विषय- वो बचपन और गरमी की छुट्टियां

विधा-संस्मरण 

बचपन की यादें हमेशा हमारी स्मृति में घूमती रहती है और सुखद एहसास कराती है। मुझे याद है कि हर साल जब गर्मियों की छुट्टियां स्कूल में होती थी, मैं कपडों का बैग भरकर नानी के घर जाने के लिए तैयार हो जाता। 

वहाँ जाकर खूब मस्ती करनी, तरह तरह के पकवान खाने, एक दो रुपए लेकर दुकान की तरफ भाग जाना। मुझे आज भी याद है किसी कारण मैं नानी के घर नही जा पाया था। जब मेरी तीन चार छुट्टियां बीत गई। नानी मुझे स्वयं लेने आ गई अब मेरी जान में जान आ गई। मैंने कपडों का थैला उठाया नानी के साथ चल पड़ा। 

नानी ने घर पहुंचाते ही मुझे मेरी मनपसंद खीर बनाकर दी , जिसे मैंने बड़ी खुशी के साथ खाया। नानी मुझे एक दो रुपए देने मैं दुकान की तरफ भाग जाता था। उस समय एक रुपए की दस टॉफी आती  थी, मैंने सबको दिखा दिखाकर टॉफियां खानी, मामा जी के बच्चों को बहुत चिढ़ाता था। 

नानी  सोने से पहले मुझे बहुत दिलचस्प कहानियाँ सुनाती थी, जब तक कहानी नहीं सुन लेता था तब तक नींद नहीं पड़ती थी।  मामा जी के बच्चों के साथ खेलना और शरारतें करनी मेरा नित्य का काम था। मेरी गलती होने पर भी डांट उनको पड़ती थी । जब उनको नाना-नानी और मामा-मामी से डांट पड़ती मुझे बहुत खुशी का अनुभव होता  । गर्मियों की छुट्टियां कैसे समाप्त हो जाती थी पता ही नहीं चलता था। आज भी जब नानी के पास बैठता हूं बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू

चित्र आधारित

 नमन 🙏🙏🙏  मंच 🌴🌱🍁🌹🌻🌼🎄🌳🎋🌸🌺💐🍃☘🎍🌷🥀🌹🥀🌻🌼🌸🌸🌺🌾🍁🍄🌿🌱🌴🍀🎍🎋🌺 

दिनांक - २२/०२/२०२१

विषय - चित्र आधारित

विधा - स्वतंत्र (कविता)

मजबूरी बेबसी का नाम है गरीबी 

लगती है सारी जिंदगी फीकी

गरीबी में कोई नहीं बनता है सहारा

ऐसा कोई मिलता नहीं जिस कहूँ अपना दुख सारा

वोट की लड़ाई पढाई का किसी को फिर्क नहीं

खा जाते हैं सारा पैसा जिस कोई जिक्र नहीं

सिर्फ तख्ती पर ही लिखा रह जाएगा मेरा भारत देश महान 

कौन साकार करेगा मेरे सपने महान  |

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू






रविवार, 21 फ़रवरी 2021

वीरता

   🙏🙏🙏 नमन मंच 🙏🙏🙏 

दिनांक- २२/०२/२०२१

दिन- सोमवार

विषय - वीरता

विधा - कविता

वीरता का गुण जिसके रोम रोम में समाया

कभी झुकता नही किसी का झुकाया

जुल्मी का करता है डटकर मुकाबला

दुश्मन जोश को ही देखकर है भागता 

तलवार भी क्या कर सकती है

उठाने वाले में साहस न हो

बुलंद होने चाहिए हौसले 

चाहे हाथों से वार करो 

कुर्बान होना उनका सफल है

मिसाल वीरता की जिसने कायम की  

देश धर्म के लिए मर मिटने की राह

स्वयं ही जिसने चयन किया 

मौत को खुशी से गले लगाने वाला 

वीरता का प्रतिबिंब है |


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू



तिरंगे को हाथों में है थामा

    🙏🙏🙏  नमन काव्य सरिता मंच  🙏🙏🙏

दिनांक २२/०२/२०२१

दिन  सोमवार

विधा चित्राभिव्यकित  


तिरंगे को हाथों में है थामा 

देश के लिए कुछ करने का मैंने भी है ठाना 

देश तरक्की में   योगदान मेरा 

देश सेवा के लिए न्योछावर प्राण मेरा

देश की आज़ादी के लिए उठाई 

जिसने  नंगी तलवार 

वही झांसी वाली रानी हूँ 

समझ न मुझको कमजोर 

कांटों के पथ पर 

राह मेरा

देश आजादी के लिए जो कुर्बान हुए

मेरे ही तो जाय थे 

मुझे भी अपने साथ में ले लो

तेरी तरक्की के लिए हर काम मेरा |


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर, जम्मू




वर्षा की नन्ही- सी बूंद

 नमन मंच

दिनांक - २२/०२/२०२१

दिन - सोमवार

विधा - कविता

शीर्षक - वर्षा की नन्ही- सी बूंद 

वर्षा की नन्ही- सी बूंद 

चारों ओर मची है हरियाली की धूम

धरती की प्यास बुझाती है

शीतलता की देवी कहलाती है

दसों दिशाओं में खुशी है छाई

मन में  है उमंग भर आई 

टिप टिप की आवाज है करती 

मन में आनंद उल्लास है भरती 

नन्ही सी बूंद उम्मीद बढाती 

फसलें तभी फल से भर पाती|


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर, जम्मू



कुदरत के कण कण में


दिनांक - २१/०२/२०२१


दिन - रविवार


नमन साहित्य बोध मंच 🙏🙏🙏  🌻🌼🌸🌺 🙏🙏🙏


विधा - कविता 


विषय - कुदरत 


कुदरत के कण कण में


खुशबू है प्रिय प्रेम  की 


सबको को मग्न करती


अपने मदहोश स्वरूप में


पेड़ों की घनी घनी छाया 


माँ के आंचल सा सुख है पाया


फूलों की मनमोहक सुगंध


मन हो जाता मुग्ध


नदियों की निर्मल धारा


स्वर करती है प्यारा 


लहरों का नाच निराला


लगता है पी लिया मधु प्याला


धीमी गति से हवा जो चलती


मीठी सी ठंडक एहसास कराती


ऊँची ऊँची चोटियाँ लगती है 


अंबर छूने को बेकरार 

पक्षियों की मधुर सी आवाज

करती है सुबह होने का आगाज । 


स्वरचित एवं मौलिक


अमरजीत सिंह


जम्मू कश्मीर, जम्मू












शनिवार, 20 फ़रवरी 2021

मृत्यु ने तो आना है

# नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक - 20-21/05/2021

# दिन - गुरुवार से शुक्रवार

# विषय - मृत्यु अंतिम सत्य है

# विधा - स्वैच्छिक

#शीर्षक - मृत्यु ने तो आना है 

 

मृत्यु ने तो आना है, 

समझ ले एक दिन जाना है, 

धन दौलत का वहाँ काम नहीं, 

सुख दुःख का वहाँ नाम नहीं, 

जो बीजेगा सो पायेगा, 

हरि के नाम बिना पछतायेगा, 

जीवन में सही कर्म कमायेगा, 

तभी तभी खुशी मर पायेगा, 

धन दौलत से जिसने प्यार किया, 

जीना मरना व्यर्थ बेकार किया, 

ह-रि का मार्ग जिसने जान लिया, 

जन्म मरण का चक्र पहचान लिया, 

जीवन का यही खेल है, 

मृत्यु से होता सबका मेल है । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू


शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2021

भूल गया अपने संस्कार

 नमन मंच

दिनांक - २०/०२/२०२१

विधा - पद्म 

शीर्षक - भूल गया अपने संस्कार

निंदा चुगली  का उठाया भार

भूल गया अपने संस्कार

स्वयं को मान लिया गुणवान

बन बैठा महाविद्वान 

हृदय में जम गई विकारों की मैल 

सब से मोल लिया है बैर 

असहाय का बना न सहारा 

सारा जन्म व्यर्थ गुजारा

पराया हक़ खूब हैं खाया

कभी किसी पर तरस न आया

लूट लूट कर घर भर ली माया 

धर्म कर्म कुछ कर न पाया

दीन दुखी की लगेगी हाय

रे पापी!  तूने कैसे कर्म कमाएं

सब कुछ छोड़ यहाँ से जाएगें

अंत में फिर पछतायेगा  ।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू एवं कश्मीर, जम्मू




बुधवार, 17 फ़रवरी 2021

निराशा आशा में बदल जाती है

शीर्षक - निराशा आशा में बदल जाती है

निराशा आशा में बदल जाती , 

मेहनत करने की ठान लें, 

छोटी- सी चींटी बार- बार गिरकर , 

फिर लग जाती है काम, 

नदी की ओर देखो , 

कितने विघ्न बाधाओं को पार करती , 

पहुंच जाती है सागर धाम में, 

जिसने ठान लिया कुछ करने का , 

विघ्न बाधाओं से नहीं घबराता , 

कभी न अपना लक्ष्य छोड़, 

पैर पीछे खिसकता है, 

हार जीत का प्रश्न छोड़, 

परिश्रम में लग जाता है , 

सफलता असफलता का मूल्य नहीं , 

पुरुषार्थ करना ही शुभ कर्म कहलाता है , 

जिसने कुछ करने का ठानी लिया, 

अपना मार्ग स्वयं बनाता है।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू-कश्मीर, जम्मू


मंगलवार, 16 फ़रवरी 2021

मित्रता


# नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान पंजाब इकाई

# दिनांक - 10/04/2021

# दिन - शनिवार

# विषय - मित्रता

# विधा - पद्म


सुदामा आया तेरे धाम , 


उसके काज पूरे करो श्याम। 


प्रेम प्रीत का रखा भरोसा, 


उठ चला आया तेरे देसा । 


उपहार वस्तु न मेरे पास  , 


नेत्रों में दरस की प्यास। 


दीन हीन खड़ा तेरे द्वार, 


जल्दी करो मेरा उद्धार । 


द्वारपाल को अपना परिचय बताया, 


द्वारपाल ने हंसी मजाक उड़ाया। 


शर्माया लौट चला निज धाम , 


अब नहीं मिलेंगे मुझको श्याम । 


अपनी दीन दशा का आ गया ध्यान, 


कैसे खाली हाथ करूंगा प्रणाम । 


सुदामा आने की खबर जो पाई , 


नंगें पांव दौड़ चले आए कन्हाई । 


मित्र की देख दीन दशा को, 


नयनों से बरसने लगा नीर। 


सुदामा को जाकर गले लगाया, 


मित्रता का धर्म खूब निभाया । 


स्वरचित एवं मौलिक


अमरजीत सिंह 


जम्मू-कश्मीर,जम्मू






ज्ञान देवी करो सदा नमस्कार

 🙏🙏🙏शारदा देवी को नमन 🙏🙏🙏 🌱🌿☘️🍃🌿🏵️🏵️🌻💐🍂🌾🌼🌹🌸🌺🏵️💐🌻🌹🌼🌾🍂🍃💐

आज की विधा के उपलक्ष्य में मेरी उपस्थिति


ज्ञान देवी करो सदा नमस्कार

हृदय से मिट जाएगा

अज्ञान का अंधकार 

वाणी की अधिष्ठात्री 

ज्ञान की तुम भंडार

मूर्ख को ज्ञानी करें

तेरी दृष्टि का प्रताप

विद्या ज्ञान तुम से मिला

मूढ़ भए विद्वान

ऐसी कृपा हम पर करो

मिट जाए मन का अज्ञान।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू-कश्मीर, जम्मू



सोमवार, 15 फ़रवरी 2021

प्रेम का प्याला

 दिनांक - १६/०२/२०२१

विधा - पद्य 

शीर्षक - प्रेम का प्याला

प्रेम का प्याला करे मतवाला

मैं मेरी के मिटे जंजाला 

मन में बस गया राम नाम

भूल गया दुनिया के सब काम 

भूल गया जात-पात का मान 

मन कर बैठा विश्राम

अब अच्छी लगती हैं भक्तों के  चरणों की धूल 

अब पहचान लिया है मैंने अपना मूल 

प्रेम प्याला मस्ती का है जाम 

ले जाता है सीधे प्रभु के धाम 

विषय विकारों से नाता दिया है तोड़ा

प्रिय प्रीतम से संबंध लिया  है जोड़ा 

प्रीतम के प्रेम का चढ़ गया रंग

प्रेम रस से भर गए सब अंग।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू-कश्मीर, जम्मू







 




मां सरस्वती को नमन

नमन मंच 🙏🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार झारखंड इकाई

दिनांक- 07/07/2021

दिन - बुधवार

#विषय- सरस्वती वंदना

शीर्षक - मां सरस्वती को नमन


मां सरस्वती को नमन करते हैं बारंबार , 

मां तुम्हारी कृपा से मिला सर्व कलाओं का ज्ञान, 

हंसवाहिनी, ज्ञानप्रदायिनी ममतामयी मां शारदे अज्ञान का करो समूल नाश, 

तन मन में बस जाए तेरा ज्ञान प्रसाद, 

संगीत, साहित्य , कला की अष्टदात्री , 

सब ज्ञान तुझमें समाए , 

मूढ़मति ज्ञानवान होये जात, 

तुम्हारी कृपा अपार, 

 मानव सब तुम से ही ज्ञान पाता , 

बन जाता महाविद्वान, 

मां सरस्वती की महिमा अपरम्पार , 

मेरी जिह्वा एक है कैसे करे वखान ।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू-कश्मीर, जम्मू





रविवार, 14 फ़रवरी 2021

वसंत पंचमी का त्यौहार

 

मां शारदा को नमन🙏🙏🙏🏵️🌻🌺🌸🍀🌿🌹💐🌼🌾🌻🌻🍂🍃🌱💐 आज की विधा के उपलक्ष्य में मेरी उपस्थिति

दिनांक - १५/०२/२०२१

विधा - पद्य ( कविता)

 शीर्षक - वसंत पंचमी का त्यौहार 

वसंत पंचमी का त्यौहार 

लाता है खुशियां अपार

पीले पीले फूलों से ,

धरती को सजाता है

बार बार देखने के लिए,

 जी है ललचाता 

मां सरस्वती की वंदना ,

करेंगे अनिक बार 

जिसने  हमको दिया,

 ज्ञान, संगीत, कला का उपहार

पीले वस्त्र पहनकर त्योहार मानेंगे

नित नित अपना शीश मां हंसवाहिनी को झुकाएंगे

वसंत के आने से धरती का ,

कण-कण उर्जा से भर गया

नवजीवन को जीने का, 

जोश उन में भर गया।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू-कश्मीर, जम्मू


हार नहीं मानता हूं

 दिनांक - १४/०२/२०२१

 विधा - पद्य (कविता)

शीर्षक - हार नहीं मानता हूं 

हार नहीं मानता हूं

यही मेरा कर्म है

जीत कर ही जाऊंगा

बनाया अपना धर्म है

रुकता नहीं, झुकता नहीं

विघ्न, बाधाओं को हटाकर 

हमेशा रहता हूं प्रयासरत 

सुख दुख की परवाह नहीं

आत्मविश्वास मेरा अथाह है

रास्ते के रोडों को जाता हूं तोड़ता

लक्ष्य को पाने के लिए सदा रहता हूं दौड़ता

आराम को हाराम मानता हूं

मंजिल को पाना अपनी साधना मानता हूं

सफलता पाने के लिए झेलनी पड़ती है मुसीबतें हज़ार

लक्ष्य पूर्ण होने पर मिलती है खुशियां अपार।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू-कश्मीर, जम्मू


शनिवार, 13 फ़रवरी 2021

अंधकार का अब हुआ नाश

 दिनांक - १४/०२/२०२१

 विधा -  पद्य (कविता)

शीर्षक - अंधकार का अब हुआ नाश 

अंधकार का अब हुआ नाश 

निकल आया सूर्य का प्रकाश

आलस की कमर तोड़ 

स्फूर्ति लाया चारों ओर

 धर्म ग्रंथों का होगा गान 

मिट जाएगा मन का अज्ञान

प्रेम भक्ति की धुन बजेगी

विकारों की मैल दूर हटेगी

सब मिलकर प्रभु के भजन गायेंगे

प्रेम रस में डूबे जाएंगे

अहम का मिटेगा भाव 

सब में दिखेगा निर्मल प्रकाश

धर्म के नाम पर अब लड़ेगा न‌  कोई

सब में प्रेम प्रीत होई 

विश्व बंधुत्व का लाया संदेश

सब में समाया परम देव 

सब मिल बांटकर खाएंगे

खुशी खुशी जीवन बिताएंगे।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू-कश्मीर, जम्मू












 

युगपुरुष

 दिनांक -१३/०२/२०२१

आज की विधा- युगपुरुष

संसार में जब अंधेरा छाता है

ज़ुल्म  करना स्वभाव बन जाता है

बदलाव लाने के लिए जो आवाज उठाता है

बहती नदी की तरह,

 अपने रोड़े स्वयं ही हटाता है 

आगे बढ़ना ही जिसका लक्ष्य बन जाता है 

सुख दुख की परवाह किए बिना

 अपना कर्तव्य निभाता है

राष्ट्र को एक करने के लिए 

अपना सर्वस्व लुटाता है

वहीं इस ज़हान में युगपुरुष कहलाता है


 स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू-कश्मीर, जम्मू


शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2021

श्याम मैं तेरी बिरहिणी

  दिनांक - १३/०२/२०२१ 

  विधा - पद्य (कविता)

 शीर्षक - श्याम मैं तेरी बिरहिणी 


श्याम मैं तेरी बिरहिणी 

मानती हूं मैं नहीं राधा ,रूक्मणी 

हृदय की सेज सजाया बैठी हूं

दरस तेरे की आस लगाया बैठी हूं

तूं जलनिधि मैं प्यास हूं

तुझे रिझाने का करती हूं हर  प्रयास

तुम सागर मैं बूंद हूं

मिलने के लिए अधीर हूं 

तेरे बिन मेरी क्या कहानी

जल थल समाया तुम मेरे स्वामी 

कुबजा का किया उद्धार 

सुंदर रूप दिया उपहार

मेरी विनती पर करो विचार 

मोहे नीच का करो उद्धार।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू






गुरुवार, 11 फ़रवरी 2021

भजन - पाप करके अब गई हार रे

 दिनांक १२/०२/२०२१

 विधा - भजन 

 शीर्षक - पाप करके अब गई हार रे


पाप करके अब गई हार रे 

पहुंच गई तेरे द्वार रे ।

तूं समर्थ ,अगम अगोचर 

दिल मेरे का ,जानत हाल रे 

पाप करके अब गई..........

पाप पुण्य का भेद न जानूं

मोह माया संग सदा लपटानूं 

पाप करके अब गई ...........

पूजा व्रत की  विधि न जानूं 

कैसे रीझाऊं  तुम्हें नाथ रे 

पाप करके अब गई ..........

मोहे नीच का तूं ही सहारा 

उदार ले अब की बार रे

पाप करके अब गई ..........

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू-कश्मीर, जम्मू 







बसंत आया

 दिनांक १२/०२/२०२१

 विधा - पद्य 

 शीर्षक - बसंत आया


हर्षोल्लास का उत्सव बसंत है आया

चारों ओर हरियाली लाया

पतझड़ का अब हुआ अंत

सब पेड़ पौधों में आई नई खुशी उमंग 

हरियाली ही हरियाली छाई

लगता है नई नवेली दुल्हन सज धज के आई 

पीली पीली सरसों लहरा रही है

सब का मन लुभा रही है

नई नई कोंपले उग आई

नवजीवन का संदेशा लाई।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू-कश्मीर, जम्मू





बुधवार, 10 फ़रवरी 2021

अधर्म कमा गया

 दिनांक - ११/०२/२०२१

विधा - पद्य

शीर्षक - अधर्म कमा गया

धर्म धर्म करता रहा

अधर्म कमा गया  

धर्म के नाम पर

लोगों को लड़ा गया

ईमान की बात करता रहा

बेईमानी का पैसा बैकों में जमा करवाया गया

जननायक बनने का लालच 

मुझे इंसानियत से गिर गया

रामराज्य का सपना दिखाकर

रावणराज की नींव रखा गया

मेरी कथनी करनी का अंतर

जनता की समझ में आ गया।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू-कश्मीर,जम्मू


संस्मरण- मजबूरी

 विधा- गद्य (संस्मरण)

  शीर्षक - मजबूरी

हृदय की गहराई में घुस गई कई बातें कभी नहीं भूलती है ।२००२ की  बात मैं और मेरा मित्र एक दिन बाबे वाली माता के मंदिर गए हुए थे। हम दोनों वहां झूलों का आनंद ले रहे थे, तभी वहां एक गरीब औरत हमसे पैसे मांगने लगी। अरूण मुझसे कहने लगा अरे तुम बहुत जल्दी दयावान हो जाते हो। अपना बटुआ जेब में रखो बूढ़ी औरत की ओर देखकर कहने लगा यह लोग मुफ्त की खाना जानते हैं मेहनत करना इनको आता ही नहीं है। वहां खड़ा एक आदमी हमारी बातें सुन रहा था उसने मुझे कहा साहिब यह औरत बहुत मजबूर हैं इसके पति की मृत्यु हो गई और बेटों ने इसको घर से बाहर निकाल दिया। अपने पेट भरने के लिए लोगों से भीख मांगती है।

अब अरूण को अपनी कही बातों पर पछतावा होने लगे और उसने अपनी जेब से कुछ पैसे उस बुजुर्ग महिला को दे दिए। मैंने कुछ खाने का सामान खरीद कर दिया।मेरे मन यही विचार आता है कि मां बाप चार पांच बच्चों को अकेले ही पाल लेते हैं फिर वो ही बच्चे अकेले मां बाप की सेवा क्यों नहीं कर पाते हैं और मां बाप को ठोकरें खाने के छोड़ देते हैं।यह १८ साल पहले की बात जब भी मुझे याद आती है तो मेरी आंखों से आंसू निकलना शुरू हो जाते हैं।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू एवं कश्मीर, जम्मू





मंगलवार, 9 फ़रवरी 2021

कामयाबियों के मेले

 दिनांक १०/०२/२०२१

 विधा - पद्य 

शीर्षक - कामयाबियों के मेले

कामयाबियों के मेले हजार होते हैं

जिनसे ना हमारा वास्ता वो भी हमारे साथ होते हैं 

बैठे रहते हैं घंटों इंतजार में हमारे

पहले देखकर जो मुंह फेरते 

नाकामयाबियों का वक्त अकेले ही काटना हैं

ना कोई मित्र ना कोई साथी साथ है 

तुम्हें जानकर भी पराएं हो जाएंगे सब

जिन पर तुमको मान था 

छोड़ जाएंगे बीच मझधार में

जिस नाव में तुम सवार थे

कामयाबियों पर सब कोई करता सलाम है

नाकामयाबियों पर आता न कोई काम है 

पैसों  सब खेल है मतलब का साथ है

जहां न कोई अपना न पराया 

 मुश्किल में हमारे साथ है।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू-कश्मीर,जम्मू










सोमवार, 8 फ़रवरी 2021

संगत का प्रभाव

# नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार अमेरिका इकाई

# दिनांक - 28/06/2021

# दिन - सोमवार

#विषय- संगत की रंगत

# विधा - लघुकथा

#शीर्षक - संगत का प्रभाव

रोहन और सोहन दोनों सगे भाई थे।आपस में दोनों भाइयों का बहुत प्यार था, पढ़ने में बहुत होशियार थे। रोहन मन का थोड़ा चंचल था।सोहन बड़ा भाई होने के नाते हमेशा रोहन को समझाता है कि हमें कोई भी काम सोच विचार करना चाहिए  क्योंकि उसका परिणाम हमें ही भुगतना पड़ता है ।रोहन सोहन की ज्ञान भरी बातों पर ध्यान नहीं दिया। स्कूल में रोहन की दोस्ती एक अमीर लडके से हो गई ।सोहन ने रोहन को बहुत समझाया कि तुम इस लड़के से दूर रहो नहीं तो तुम्हें बाद में पछताना पड़ेगा।रोहन अपने अमीर दोस्त के साथ आगे पीछे घूमता रहता और पढ़ाई लिखाई की तरफ ध्यान नहीं देता।इसका परिणाम यह हुआ कि उसे परीक्षा में असफलता प्राप्त हुई।रोहन को अपने माता-पिता और गुरुजनों की डांट का सामना करना पड़ा ।अब रोहन को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने अमीर दोस्त की संगति को छोड़ दिया।मन लगाकर पढाई करने लगा।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू-कश्मीर, जम्मू

रिश्ते

 

# नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान पंजाब इकाई

# दिनांक - 18/03/2021

# दिन - बृहस्पतिवार

# विषय - रिश्ते

# विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता

अजीब सी लगती है रिश्तों की डोरी, 

लगता है ख़ुदा ने स्वयं है जोड़ी । 

रिश्तों की अलग सी मर्यादा , 

विरला ही समझ पाता। 

रिश्तों की कच्ची है डोरी, 

सदा रखो इसको जोड़ी। 

रिश्ते है सुख की छाया , 

जिसने अपना कर्तव्य खुशी से  निभाया। 

रिश्तों में सुख दुख आता जाता है, 

हर कोई अपना फ़र्ज़ निभाता है। 

रिश्तों में अहम कोई स्थान नहीं, 

रिश्ते टूटने का वहां कोई नाम नहीं। 

त्याग रिश्तों की बुनियाद है, 

रिश्तों में होता सदा सुधार है। 

मन भावों को समझाना है, 

हर रिश्ते को खुशी खुशी से निभाना है ।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू एवं कश्मीर, जम्मू



रविवार, 7 फ़रवरी 2021

प्रेम प्रीत

 दिनांक - ०८/०२/२०२१

शीर्षक - प्रेम प्रीत 

प्रेम प्रीत की जात नहीं

इसकी कोई रात नहीं

प्रेम प्रीत है अविचल अविनाशी

सब ओर दिखे पूर्ण अविनाशी

प्रेम प्रीत का रंग है ऐसा 

संसार दिखे खेल तमाशा

प्रेम प्रीत की प्रेम है वाणी

सब में समाया समदर्शी स्वामी

प्रेम प्रीत कोई न मोल 

हृदय बन गया रत्न अनमोल

प्रेम प्रीत प्रेम है दान 

सब ओर दिखे एक भगवान

प्रेम प्रीत संग दुख सुख की न चिंता 

मन रहे हरि संग अचिंता

प्रेम प्रीत का सार है बैराग 

सहज मिले गोविंद गोपाल

प्रेम प्रीत हरि का धाम 

स्वयं मिलेंगे ईश्वर भगवान

प्रेम प्रीत करें उदार 

मुक्ति आएगी स्वयं तेरे द्वार।


अमरजीत सिंह

जम्मू-कश्मीर, जम्मू














शनिवार, 6 फ़रवरी 2021

हर घर की शान होती है बेटियां

#विषय - बेटियां

विधा - छंदमुक्त कविता

शीर्षक - हर घर की शान होती है बेटियां 


हर घर की शान होती है बेटियां

मां बाप का मान होती है बेटियां 

अपना हर कर्तव्य खूब निभाती है बेटियां

पति का साथ हर परिस्थिति में देती है बेटियां 

ससुराल में हर दुख खुशी से सह लेती है बेटियां

परिवार का सम्मान बढ़ाने का हर काम करती है बेटियां

बेटों के घर से निकालने पर सहारा बनती है बेटियां

हर मुश्किल को आसान कर देती है बेटियां

संसार की जननी बनती है बेटियां

परिवार के हर दुख को अपना दुख मानती है बेटियां

इतनी कुर्बानी  करने के बाद क्यों मार दी जाती है बेटियां

कई लोगों को क्यों बोझ लगती है बेटियां

खुशनसीब होते हैं वो लोग जिनके पास होती है बेटियां।

अमरजीत सिंह

जम्मू-कश्मीर, जम्मू





शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2021

गोपाल गोपियों की सुनो कहानी


शीर्षक - गोपाल गोपियों की सुनो कहानी 


गोपाल गोपियों की सुनो कहानी

सुख मन उपजे ज्ञान पाए ज्ञानी

प्रेम भक्ति का कोई नहीं मोल 

हृदय बस गया गिरिधर अमोल 

प्रेम प्रीत कोई नहीं जात 

प्रेम रस पाया दिन और रात

मैं मेरी की मिट गई कान 

मन में बस गए कृष्णा श्याम 

रासलीला गोपियों संग रचाई

सब ओर दिखे कृष्ण कन्हाई 

राधा रानी की अमर कहानी

कृष्ण  प्रेम में बनी दीवानी

गोकुल में चली हवा मस्तानी

बनी गोपियां श्याम  दीवानी 

 चुराके माखन गोपियों का खाया 

  प्रेम रस सब को पिलाया ।


अमरजीत सिंह

जम्मू-कश्मीर, जम्मू

गुरुवार, 4 फ़रवरी 2021

आलस

 शीर्षक - आलस 

दिनांक ०५/०२/२०२१


आलस आलस में अलसाया

कोई काम कर नहीं पाया

जीवन का भूल गया मोल 

बन गया समय का चोर 

खा पीकर रहा मैं सोया

आलस में  रहा  सदा मैं खोया

जीवन में कोई लक्ष्य न बनाया

अपना जीवन व्यर्थ गंवाया

बहाने बनाने का किया कर्म

अब आती है बहुत शर्म 

सुख का साधन बन नहीं पाया

दुखों ने आकर गले लगाया

 परख ना पाया सत्य की सीख 

सारी उम्र मांगनी पड़ेगी भीख।


अमरजीत सिंह

जम्मू-कश्मीर, जम्मू


बुधवार, 3 फ़रवरी 2021

गृह स्वामिनी की सुनो कहानी

 शीर्षक - गृह स्वामिनी की सुनो कहानी
 दिनांक-०४/०२/२०२१
 
गृह स्वामिनी की सुनो कहानी
कुर्बान करती है पूरी जवानी
पति के संग सदा खड़ी हूं
प्रेम रंग में सदा रंगी हूं
अपना मुझे कोई मोह नहीं
परिवार के लिए हंसती रोती हूं
बच्चों को खूब पढ़ाऊं
अच्छे अच्छे संस्कार सिखाऊं
मेरा परिवार ही मेरा संसार है
परिवार के लिए कुर्बान होना ही मेरा संस्कार
सब का दुख दर्द हूं बांटती 
अपना दुख छिपाती हूं
घर की हर जिम्मेदारी खूब निभाऊं
अपना आराम सदा भूल जाऊं
मेरी इच्छा का हर कोई सम्मान करो
मेरी कुर्बानियों का कोई तो गुनगान करो
हर दिल में मैं राज करूं
हर खुशी के लिए अपने को कुर्बान करूं।
 
अमरजीत सिंह
जम्मू-कश्मीर
जम्मू



 

मंगलवार, 2 फ़रवरी 2021

पथ संवारती हूं दिन रात

कविता -  पथ संवारती हूं दिन रात


पथ संवारती हूं दिन रात
मुझे मिलो रघुनाथ
फूलों से सजाया पथ
हृदय में बसाया राम अकथ
छोटी जाति न कोई ध्यान
हृदय बस गए प्रभु श्री राम
मीठे मीठे बेर खिलाऊं
प्रेम प्रीत के गीत सुनाऊं
राम राम जप हुई निहाल
द्वार आए अयोध्यानाथ
देखत दरस दिव्य दृष्टि पाई
सब ओर दिखे एक रघुराई
मीठे मीठे बेर का लगाया भोग
मिट गए सारे  मन के रोग
जात पात का भेद मिटाया
जूठे बेर से रघुपति रिझाया
प्रेम भक्ति पूरा फल पाया
जगत स्वामी मेरे घर आया।

अमरजीत सिंह
जम्मू एवं कश्मीर, जम्मू



दया धर्म का मूल है

" दया धर्म धर्म का मूल है पाप मूल अभिमान तुलसी दया न छोडिये जब तक घट में प्राण।" (गोस्वामी तुलसीदास जी)

गोस्वामी तुलसीदास जी ने इस दोहे में दया की भावना को सर्वोपरि माना है। दया को धर्म का मूल बताया है उनके अनुसार जिस मनुष्य में दया की भावना है वहीं मनुष्य असल में धर्मी है। अभिमान पाप का मूल है जो हमें नरक की ओर ले जाता है। तुलसीदास जी कहते हैं कि जब तक मनुष्य के शरीर में प्राण है तब तक उसे दया की भावना का त्याग नहीं करना चाहिए।
दया को धर्म की नींव, मूल, आधारशिला कहा जाता है। इसके बिना किए गए सब कर्म काण्ड व्यर्थ है । दया की भावना दीन, दुखी, असहाय, गरीब के लिए मरहम का कार्य करती है । अगर हमारे अंतर्मन में दीन, दुखी, असहाय के लिए करूणा और सहानुभूति नहीं उपजती तो हमें समझ लेना चाहिए कि हम बेशक शारीरिक तौर पर जीवित है लेकिन हमारी आत्मा मर चुकी है।
दया की भावना मनुष्य को मानवता के ऊंच शिखर तक ले जाती है। जिससे उसको हर एक जीव में ईश्वर की ज्योति नजर आती है वे किसी से भेद भाव नहीं करता है। पशु पक्षियों के प्रति दया की भावना दर्शानी चाहिए। उन्हें अपने आनंद विनोद और स्वाद चेष्टा के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। दया के बिना मानव जीवन पशु तूल्य है।

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प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...