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शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2021

सुनहरी भोर

 # नमन मंच🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार डिब्रूगढ़ इकाई

#दिनांक - १७/०५/२०२१

# दिन - सोमवार

# विषय - भोर

 #शीर्षक - सुनहरी भोर 

# विधा - लघुकथा

तारे आकाश से विदा लेकर आराम करने के लिए जा रहे प्रतीत हो रहे थे।  वातावरण में चारों ओर शांति ही शांति थी । पक्षियों ने चहचहाना शुरू कर दिया। दस दिशाओं में धार्मिक ग्रन्थों की आवाज गूंज रही थी, जो वातावरण को पवित्र कर रही थीं। 

रोहित रोज की तरह सुबह ५ बजे उठ गया  था। बाहर से दरवाजा खटखटाना की आवाज आ रही थी। रोहित की माँ ने तुरंत जाकर दरवाजा खोला । माँ कहने लगी बेटा इतनी सुबह कैसे आना हुआ । रोहित ने पूछा माँ कौन आया है माँ कहने लगी तुम्हारा मित्र मनोज आया हैं । 

जल्दी से रोहित मनोज को मिलने के लिए आगे बढ़ने लगा मनोज ने रोहित को गले से लगा लिया और उसका हालचाल पूछने लगा । रोहित ने अपने मित्र से कहा तुम माँ के साथ अतिथिगृह में बैठो मैं स्नान करके आता हूँ। 

  जब रोहित स्नान करने के पश्चात मनोज के पास पहुंचा, रोहित की माँ और मनोज मुस्कुरा रहे थे  । रोहित अपनी माँ से मुस्कारने का कारण पूछा माँ मनोज की तरफ देखकर जोर जोर से हंसने लगी और कहने लगी तुम्हारा यह दोस्त तुम्हारी जिंदगी में नई सुनहरी, मदहोश और उज्जवल कर देने वाली सुबह का संदेश देने आया है। 

रोहित ने माँ से कहा पहेलियाँ मत बुझा माँ सीधे सीधे कहों, माँ कहने लगी बेटा तुम्हारी नियुक्ति निजी विद्यालय में अध्यापक के तौर पर हो गई है । रोहित को भी लगा उसके जीवन में नई सुहानी, सुनहरी और उज्ज्वल सुबह आज ही हुई है। जो रोहित को कभी भूलती नहीं है। 

 स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू




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