मन का उठना गिरना करता बेचैन
आत्मा को कैसे मिले चैन
विषय विकारों से भरे रहते नैन
खात पीत ही बीत रहे दिन रैन
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा ,जम्मू-कश्मीर
मन का उठना गिरना करता बेचैन
आत्मा को कैसे मिले चैन
विषय विकारों से भरे रहते नैन
खात पीत ही बीत रहे दिन रैन
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा ,जम्मू-कश्मीर
भजन सिमरन की बेला, मन करता भागाभागी
कब होगा सतगुर संग मेला , घड़ी कब आएगी सुभागी।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा, जम्मू-कश्मीर
शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार सभी एक है परिवार बना ले इसको जीवन का आ...