शीर्षक - मन में भरी गंदगी
मन में भरी गंदगी , कैसी है यह जिंदगी
मन क्यों करता नहीं बंदगी
तेरी बर्बाद हो रही है जिंदगी
कर ले साधुसंगति
तेरी मिट जाएगी गंदगी ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - मन में भरी गंदगी
मन में भरी गंदगी , कैसी है यह जिंदगी
मन क्यों करता नहीं बंदगी
तेरी बर्बाद हो रही है जिंदगी
कर ले साधुसंगति
तेरी मिट जाएगी गंदगी ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - सेवा
सेवा कर अहम त्याग कर , फल पा ले अति अपार
सत्संग सिमरन भजन कर , कल में होत क्षण में उद्धार।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - बगुला भक्ति
बगुला भक्ति त्याग कर ,लाईये सच्चा ध्यान
पाखंड कर कछु न मिले, खोया जन्म हीरे समान।
द्वैत में मन लगाकर, पहुंच न सके प्रभु धाम
पंच बैरी मारकर , जप ले अमोलक नाम।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - जाना तो तय है
जाना तो तय है इस जहान से मेरा
मन नहीं छोड़ता अभी भी करना मेरा तेरा ।
अज्ञानता ने जमा लिया अंतर में डेरा
गुरुज्ञान से ही दूर होगा अज्ञान का अंधेरा
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - सरहद के लोगों की मुश्किले
सरहद पर रहने वालों का होता बुरा हाल
सब कुछ सहते वे बनकर लाचार
गोला गोली चलती दोनों तरफ
सब कहते फिरते सरहद पर रहने वालो का बड़ जिगर
बचाते फिरते अपने वो प्राण
भूखे के मारे फिरते देता नहीं कोई अन्न दान
देश - देश में होती जब तकरार
हमेशा पीसता सरहद पर रहने वाला परिवार
बड़े- बड़े गोलों से टूट जाते उनके मकान
कई लोगों की जाती जान
सरकार करती जब सीजफायर का ऐलान
कोई नहीं पूछता जिनकी सरहद पर जाती जान
सरहद पर रहना बहुत दुखकारी
देशों की लड़ाई में पीसती सरहद की जनता बेचारी ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - मोबाइल फोन
मोबाइल फोन में उलझा संसार
भूला बैठा रिश्ते दुनियादारी का व्यवहार
मोबाइल फोन में घुसाए रहता सिर
भविष्य की नहीं इसको अब फिक्र ।
स्नैपचाॅट , व्हाट्सऐप , टेलीग्राम में व्यस्त
चाहे आगे पीछे चलत रहे अस्त्र-शस्त्र
फेसबुक फाॅलोवर बढाने की चिंता
पूरा दिन मोबाइल फोन चलाने में निकलता ।
मोबाइल फोन के चक्कर में,
सब बन गए उल्लू
अब नहीं भाता सबको ,
जाना मनाली कुल्लू ।
मोबाइल ने बनाया सबको अंधा
अपनी पहचान भूल गया इंसानी बंदा
विचारों का भी हो गया गंदा
मोबाइल फोन है मैला धंधा।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - हे समीर मेरी पुकार सुन
हे समीर मेरी पुकार सुन , शीतलता प्रदान करना तूं भी चुन
तेरी सुनाई दे रही मधुर धुन, सबको भाता तेरा यही गुण।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
मन का छला हुआ पाता दुख अपार
पाप-पुण्य में उलझ गया बिसर गया करतार
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
मन हठ कर्म कमाकर, काया भई रोगी
बुराई ही बुराई जमाकर , मन कैसे बनेगा योगी।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - बाहरी भेष त्याग कर
बाहरी भेष त्याग कर, अंतर कर प्रवेश
जिसमें तूं उलझ रहा , यह नहीं तेरा देश ।
बाहर धर्म कर्म छोड़कर, सतगुर संग सच्ची प्रीत लगा
मन विकार मिटाकर, तन नाम बीज उगा ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - तबाही
तबाही का मंजर हर ओर छाया ,
मनुष्य तूने क्यों अपने कर्ता को भुलाया ।
अपनी करनी दंड का तूने पाया,
अब क्यों तूं है घबराया ।
चारों ओर अज्ञान का अंधकार बढ़ाया ,
सब को माया ने भरमाया।
पदार्थ देख मन ललचाया
नेकी बदी में अंतर कर नहीं पाया।
लोभ लालच में अपना नाश करवाया ,
मन को कभी नहीं समझाया,
अंतिम अवसर भी ऐसे गंवाया
अब मन बहुत पछताया ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - भारत देश
भारत देश बहुत महान, मानवता पर रखता विश्वास ।
क्षमा का हमेशा देता दान , शांति के हमेशा करता प्रयास ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - नमस्कार सतगुर
नमस्कार सतगुर कीजिए पाइए नाम अपार
कट जाएगे मन के कोटि अपराध ।
सतगुर भजन सिमरन कीजिए पाइए मुक्ति द्वार ,
मिट जाएगे जीवन से दुख व्याधि।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - युद्ध
युद्ध है विनाश का दूजा नाम ,
बर्बादी पर लगता नहीं कोई विराम ,
मरता हमेशा इसमें इंसान,
बचाए नहीं बचती किसी की जान ,
धमाकों से बहरे हो जाते कान ,
इंसान इंसान को मारना समझता अपनी शान,
खाने को नहीं मिल पाता खान पान,
भूल जाते सभी करना दान ,
मुश्किल में पड़ जाते प्राण ,
युद्ध का होता यही परिणाम,
जान माल का होता बहुत नुकसान,
फिर भी करते युद्ध का गुणगान।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - जलती फसले रोता बिलखता किसान
गर्मी धूप में जलाता अपने प्राण ,
तन में कुछ शेष बची है जान,
कड़ी मेहनत से लगाता धान,
जलती फसले रोता बिलखता किसान ।
गरीबी तंगी में बीतता जीवन
कैसे खुश रहे बिन धन
दुख तकलीफ में डूबा घर का हर जन
जलती फसले रोता बिलखता किसान ।
जल गई फसल चढ़ गया ऋण
बनता जा रहा है हर दिन निर्धन
जीवन जी नहीं बीता रहा गिन दिन
जलती फसले रोता बिलखता किसान ।
जीवन से खुशियाँ दूर होती हर क्षण
पल पल जड़ता जा रहा जीवन का वन
फसल बर्बाद होने से उजड गया नव आशाओं का स्वप्न
जलती फसले रोता बिलखता किसान ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - तन मन में गोपाल
तन मन में बसा लो गोपाल, फिर मन में आता नहीं कोई सवाल
दुनियादारी के छोड़कर जंजाल, भज ले केवल दीनदयाल
बिन गोपाल होगा बुरा हाल , सब ओर बैठा तेरा काल
हरिशरण में बांका न होगा तेरा बाल ,प्रभु ही कालों के काल।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - सुबह सुबह ठंडी हवा
सुबह सुबह ठंडी चलती है हवा
चहुंओर है शांति की गवाह
श्वासों में मिठास सी जाती है घोलती
प्यार की मीठी सी बोली है बोलती
ध्यान अपनी ओर सबका है मोड़ती
लगता जैसे जाती है दौड़ती
सबको बिना भेदभाव से पहुंचाती है ठडंक
तूफ़ान में लगती है सबको दंडक ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - कपट
छल कपट से माया ली जोड़ ,चारों ओर लालच का शोर।
रिश्ते नातों को सबने दिया छोड़, ईमानदारी की कब आएगी भोर।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - भजन सिमरन
भजन सिमरन में मन कोई न कर ढील , यही दौलत बनाती जीव को अमीर।
अंत न लगते यम के कील ,यही सीख देते सब संत फकीर।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - पेड़ से गिरता पत्ता
पेड़ से गिरता पत्ता दे रहा संदेश ,
जिस जग को तूने अपना मान लिया ,वो है पराया देश।
सब से प्रीत लगा रहा ,
जो तुझे दिख रहे सबका झूठा भेष ।
माया ठगनी अनेक ठगे ,
झूठ को न सच मान , मायावी संसार में झूठ बन बैठा प्रधान।
भूखे को भूखा समझे नहीं ,
धनवान को कर रहा अन्न दान , यही है कलयुग होने का प्रमाण।
सच ठोकर खाता फिर रहा ,
अंधा न्याय अन्याय न विचार सके, सब ओर अज्ञान ही अज्ञान।
गरीब का दुखड़ा कोई न सुनता,
सब में माया का अभिमान, अधर्म की यही पहचान।
पराया हक खाना समझते बहुत महान,
मजदूर अपने हक को तरसे , भूखे भूखे चली गई जान ।
यमफंदा भुलाता फिर रहा ,
उड़ जाएगे पंछी रूपी प्राण, तेरे स्नेही पहुंच देगे श्मशान।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - सतगुर संग
सतगुर संग पा लिया, नाम निधान भरपूर ,
अब मन जान गया,जगत पदार्थ झूठ।
सर्वव्यापी हृदय बस लिया ,
महाप्रताप यह है सतगुर चरण धूल।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - कुसंगति
कुसंगति कीचड़ तालाब सी , छींटा पड़ने पर पड़े बहुत निशान।
कुसंगति फाँस लिए, जो बनते बहुत बड़े विद्वान।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - सत्संग
सत्संग सुनिए सच्ची वाणी , मन संतोष आत्मा तृप्त आनी।
सब में एकाकर समानी, नित्य सीख देत सतगुर की वाणी।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
सच्चा प्रेम हो न सके बयान, प्रेमी की प्रेम में होती जान
सुख दुख होता एक समान, दो शरीर होते एक प्राण।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - मिट्टी का पुतला
मिट्टी का पुतला करता बहुत नाच ,
अभी भी न हुआ इसको,जग मिथ्या का आभास।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक- भवसागर
भवसागर में डूबता जा रहा जीव ,
अब तो कुछ रहमत कर दे मेरे पीर ।
मेरी वेदना समझ मेरे पीव,
मेरे हृदय में मार दे प्रेम वाला तीर।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक - प्रीतम
प्रीतम तेरे प्रेम में, बार दूं जिंद जान ,
रोम रोम में बस जाए, तेरा अमूल्य नाम ।
जग सारा झूठ है,सच ले यह मान
तेरा मेरा छोड़कर, भज ले केवल हरिनाम।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार सभी एक है परिवार बना ले इसको जीवन का आ...