शीर्षक - मन में भरी गंदगी
मन में भरी गंदगी , कैसी है यह जिंदगी
मन क्यों करता नहीं बंदगी
तेरी बर्बाद हो रही है जिंदगी
कर ले साधुसंगति
तेरी मिट जाएगी गंदगी ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर
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