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गुरुवार, 29 मई 2025

मन में भरी गंदगी

 शीर्षक - मन में भरी गंदगी

मन में भरी गंदगी , कैसी है यह जिंदगी 

मन क्यों  करता नहीं बंदगी 

तेरी बर्बाद हो रही है जिंदगी 

कर ले साधुसंगति 

 तेरी मिट जाएगी गंदगी ।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर 




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