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बुधवार, 30 अप्रैल 2025

पानी का बुलबुला

 शीर्षक - पानी का बुलबुला

पानी का बुलबुला है जीव

करता बहुत अभिमान 

सुंदर मनमोहक काया 

एक दिन पहुंच जाएगी श्मशान 

आधे अधूरे रह जाएगे दिल के अरमान 

आएगा जब मौत का फरमान 

पड़ा होगा एक तरफ जगह होगी बिल्कुल सुनसान 

सिर्फ पछतावा होगा  समय जाएगा गुजरान 

भाई रे समय बड़ा बलवान 

अब तो सीख साधु-संतन की मान 

हर पल जप ले हरिनाम 

तेरा जीवन ईश्वर का वरदान 

झूठा बंधन है सिर्फ मोह-माया का मान 

जग भी छूट जाता जब तन से जुदा होते प्राण ।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर 




शनिवार, 26 अप्रैल 2025

अमृत बेला अमृत बरसे

 अमृत बेला अमृत बरसे, पीजिए सुरत ध्यान ।

धुन सुनकर मन ठहराए, सीख देत सतगुर संत सुजान। 

घट घट हरि बसत ,देखत केवल आत्म ज्ञान। 

सतसंग सेवा सिमरन में, सुख होत दोऊ जहान। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर 




बुधवार, 23 अप्रैल 2025

धर्म के नाम पर लड़ने वालो

 शीर्षक- धर्म के नाम पर लड़ने वालो 

धर्म के नाम पर लड़ने वालो ,

बेकसूर लोगो का लहू बहाने वालो, 

तुम दोनों जहान में धक्के खाओगे,

अपना अशुभ मुख कैसे मालिक को दिखलाओगे ,

बुरे कर्मों के कारण धिक्कारे जाओगे,

सिर्फ पछताओगे ही पछताओगे। 

 धर्म कभी खून बहाना नहीं सिखलाता, 

किसी का दुख दर्द कभी भी खुशी नहीं बढाता,

नीच कर्म करने वाला नीच ही कहलवाता ,

अंधभक्त बनकर मानवता को भुलाता,

घृणित कार्य करके दुष्ट बन जाता,

कायरों जैसा काम कायर ही कहलाता ।



स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर 




हिंसा को धर्म जाति का नाम देना

शीर्षक  - 

हिंसा को धर्म जाति का नाम देना सबसे बड़ी भूल , ऐसा करने वाले मालिक तेरे में होते न कबूल। 

हिंसा कट्टरवाद का मूल है , धर्म के नाम पर लड़ने वाले होते नष्ट समूल। 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

सांबा ,जम्मू-कश्मीर

रविवार, 20 अप्रैल 2025

आप कुलमालिक गुरू अर्जुन देव रूप में आया ।

शीर्षक  - आप कुलमालिक गुरू अर्जुन देव रूप में आया 

 कलयुग अंदर जहाज बनाया , भवसागर से पार लगाया।

आप कुलमालिक गुरू अर्जुन देव रूप में आया ।

सबको प्रभु का नाम जपाया, दीन दुखियों को गले लगाया। 

भेदभाव को जड़ से मिटाया, मानवता का धर्म सबको सिखाया।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा ,जम्मू-कश्मीर 

नाता

 दीन दुखियों का तूं ही सहारा , हमसे  नाता तेरा प्यारा ।

हम सब जीवों का मात पिता हमारा , कोई न पा सका तेरा पारा।

डांवाडोल मन तूँ ही संभाला , अब मैं नीच तेरा हवाला ।

समझ नहीं पाता मन की चाला , फंस गई आत्मा माया जंजाला। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा , जम्मू-कश्मीर 



शनिवार, 19 अप्रैल 2025

सतगुर प्रीत अति मीठी

शीर्षक - सतगुर प्रीत अति मीठी

 सतगुर प्रीत अति मीठी ,की न जा सके बयान।

पल पल बढ़ती जात है, बिरह निकाले तन से जान।

रोम रोम बस गई, जैसे दूध में होत मिष्ठान्न ।

प्रीत मिटाय न मिटे, अमूल्य निधि  सतगुर सुजान।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा ,जम्मू-कश्मीर 

 

शुक्रवार, 18 अप्रैल 2025

जीवन के हर मोड़ में देना साथ

 जीवन के हर मोड़ में देना साथ,

तेरा बिन मेरे सतगुर, कोई नहीं रखता सिर पर हाथ। 

तेरी ही दया से पाई मैने नाम रूपी दात, 

मेरे भूले मन को तूँ ही अब समझात ।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा , जम्मू-कश्मीर 

गुरुवार, 17 अप्रैल 2025

गुरुदेव तेग बहादुर साहिब

 शीर्षक  - गुरुदेव तेग बहादुर साहिब

गुरुदेव तेग बहादुर साहिब को नमन वंदन बारंबार, 

ईश्वर लेकर आ गया सतगुर रूप में अवतार। 

सतगुर साहिब सृष्टि पर किया उपकार ,

नाम रसायन देकर अनंत जीवों का किया उद्धार। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा,  जम्मू-कश्मीर 

नाम जपत सुख पात अनंत

 नाम जपत सुख पात अनंत, मन तन प्यास सगल मिटंत ।

सब दुख कलेश गलंत , गुण गोविंद नित जपंत ।

दुनियादारी का मेला

 दुनियादारी का मेला , अजब गजब है भाई 

बेईमान, ठग, चोर सब है,एक दूसरे के सखाई ,

अब तो सब समझ गए, सबकी है एक ही ताई

पानी छोड़कर, खा जाते दूध संग मलाई। 

सबने नफ़रत,  ईर्ष्या की भावना, सब ओर फैलाई, 

सब ओर हो रही है, मेहरबानी से इनकी लड़ाई

भ्रष्ट ,लांछित राजनीति ने , धर्म - धर्म फूट डलवाई 

कुर्सी अपनी इंसान से इंसान,  लड़ाकर बचाई ।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा ,जम्मू-कश्मीर 


मन करता अपनी मनमानी

 मन करता अपनी मनमानी , होती आत्मा की हानि।

मन तूं सदा बुरी सीख सिखानी, करनी पड़ेगी तुझे ही भुगतानी।

मंगलवार, 15 अप्रैल 2025

शरण आकर प्रभु की

 शरण आकर प्रभु की, छोड दो मान अभिमान ।

पल ही पा लोगे, अविनाशी भगवान।


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

सांबा  , जम्मू-कश्मीर 

सोमवार, 14 अप्रैल 2025

गुरुदेव दृष्टि अमृत समान

 गुरुदेव दृष्टि अमृत समान , मिट जाता मन का अभिमान।

 झूठा लगता मान सम्मान ,गुरू वचन डाल देते मुर्दे में जान।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा,जम्मू-कश्मीर 


रविवार, 13 अप्रैल 2025

मनुष्य मनुष्य को पहचानना भूल गया

 मनुष्य मनुष्य को पहचानना भूल गया 

धन दौलत संचय करने के चक्कर में

कर्मों की दलदल में धसकर 

लालच की भूख बढ़ाकर 

संस्कारों को तिलांजलि लगाकर

अच्छाई को दूर भगाकर 

पाखंड की चादर ओढ़ाकर 

दूसरों को बुरा बनाकर 

खुदगर्जी में डूबकर 

कर्मो के फल को भूलकर 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा , जम्मू-कश्मीर 


मनुष्य देही असली हरि धाम

 शीर्षक  - मनुष्य देही असली हरि धाम

मंदिर, गुरूद्वारे, मस्जिद गिरजाघर पूजा स्थान, 

मनुष्य देही असली हरि धाम। 

पढ़कर देखकर लो गुरू ग्रंथ, भागवत गीता ,पुराण, क़ुरान, 

 कलयुग मुक्ति सिर्फ हरिनाम।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा , जम्मू-कश्मीर 

संघर्ष जीवन का आधार

 संघर्ष बिना जीवन कैसा ,

फटे हुए तबले जैसा ,

बेकार में पड़ा है कचरे सा ,

बिना खुशबू  फूलों जैसा ,

जो आता न किसी काम ,

बदनाम किया जिसने नाम ।

संघर्ष ही जीवन है, जीवन ही संघर्ष है

बिना संघर्ष के कोई मंजिल न होती स्पर्श 

मुश्किल राहों को स्वीकार करो सहर्ष 

छोड़कर सब विचार विमर्श 

त्याग दो चिंता करना व्यर्थ 

मेहनत लग्न पहुंचा देगी कामयाबियों के अर्श। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा , जम्मू-कश्मीर 



ख़्वाबों का कारवाँ

 शीर्षक - ख़्वाबों का कारवाँ 

रूककर भी नही रूका  ख़्वाबों का कारवाँ 

 मुश्किल दौर से गुजर कर 

पत्थरों को  तोड़कर आगे बढ़ता 

मंजिल को खोजता 

कर्म को धर्म मानकर

जी जान लग्न से 

जोश होश में 

प्रसन्नता के सागर से भरकर 

दुख दर्द चिंता से दूर होकर 

हार जीत का फैसला कहीं खोकर 

निराशा के आंसुओ को पोंछकर 

दिल में अरमान जागकर 

सब विघ्न बाधाओं को गले से लगाकर 

सब नफ़रतों को भुलाकर 

लक्ष्य को पाने की ओर बढ़ता ख्वाबों का कारवाँ 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा ,जम्मू-कश्मीर 


शनिवार, 12 अप्रैल 2025

मन बहुत नाचत फिरता

 मन बहुत नाचा फिरता ,

बन माया का चेला ।

हवा महल बनाता आता , 

भूल जाता जग है चार दिन का मेला ।

धन दौलत संचय करता जाता ,

 एक दिन हंस उड़ जाएगा अकेला।

सब से कड़वे बोल बोलता ,

बनता जा रहा करेला ।

जिसकी खातिर सब से उलझता फिरता , 

चौरासी लाख योनि बार- बार फिरेला। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

सांबा , जम्मू-कश्मीर 



सतगुर तेरे ऊपर मेरा जी बलिहार

 सतगुर तेरे ऊपर मेरा जी बलिहार, 

मानस जन्म तेरा ही उपहार। 

मेरे जीवन का तूँ ही आधार, 

जगत का सच बता दिया तेरा उपकार। 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

सांबा , जम्मू-कश्मीर 

गुरुवार, 10 अप्रैल 2025

मंजिल को पाना आसान नहीं होता

 मंजिल को पाना आसान नहीं होता ,

 आराम से बैठने से दुनिया में कभी नाम नहीं होता ।

 कुछ पाना के लिए मुश्किलों से लड़ना होता है , 

खराब राहों को भी खरा करना होता है।


स्वरचित एव मौलिक 

अमरजीत सिंह 





मन मेरा सदा भ्रम में रखे भुलाए

 मन मेरा सदा भ्रम में रखे भुलाए , 

मालिक की इबादत से दूर ले जाए।  





स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा, जम्मू-कश्मीर 

रविवार, 6 अप्रैल 2025

कर्म धर्म सब बंधनकारी

 कर्म धर्म सब बंधनकारी ,

 आवागमन से ले सके न उबारी।

शब्द सुरति की कमाई हितकारी, 

सतगुर सीख मन तूं काहे बिसारी।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा,  जम्मू-कश्मीर 

शनिवार, 5 अप्रैल 2025

सतगुर तेरे दर्शन से

 सतगुर तेरे दर्शन से, भाग्य जाग गए मेरे। 

तेरी एक दृष्टि से,असंख्य पाप कट गए मेरे।

सतगुर अमृत वचनों से तेरे , कर्म कट गए मेरे।

तेरी अपार रहमत से, भवसागर पार हो गए बिना लगाए देरे।

शुक्रवार, 4 अप्रैल 2025

कर्म जो किया मैने

 कर्म जो किया मैने वापिस मुड़कर आता है ,

भुगतान के समय यह पापी मन क्यों घबराता।

कर्म करते समय भुगतान न भूलिए, 

बुराई करते समय कभी न इतना फूलिए।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा, जम्मू-कश्मीर 

अपने आप में अवगुण

 अपने आप में अवगुण, दूसरों में गुण देखता हूं ।

दुख की घड़ियों में भी ,जीवन का नया सबक सीखता हूँ।

बुधवार, 2 अप्रैल 2025

कर्म

 खुद को सही समझना दूसरों का गलत ,

यही है मेरी गफलत। 

कर्मों का सामना करना ही पडेगा ,

साधारण हो या लगा हो बड़ा अफसर।


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा , जम्मू-कश्मीर 


पथिक

 शीर्षक-  पथिक 

पथिक का गिरना स्वाभाविक है

क्योंकि जो चलता है वही गिरता है 

जो चलता नहीं वो गिरता नहीं

जीवन के इस पथ पर तेरा चलना बहुत जरूरी है 

नहीं तो कैसे सीख पाएगा गिरकर उठना 

जीवन के पथ पर निरंतर चलते जाना है 

रास्तों की मुश्किलों को बुलंद हौंसले से आसान बनाना है। 

पथिक का निरंतर चल पाना कोई आसान काम नहीं 

पर उसका  कठिनाइयों को देख कर रुक जाना

पीछे की ओर पैर खिसकाना 

मन में निराशा के भाव लाना 

छोटी- छोटी बात पर घबरा जाना 

पथिक का यह काम नही ।

पथिक तेरा निरंतर आगे बढ़ना बहुत जरूरी है

मंजिल पाने के लिए मुश्किलों का सामना करना तेरी मजदूरी है 

रूककर भी क्या पा लेगा तूं 

जीवन के दर्पण में उतरने के लिए संघर्ष बहुत जरूरी है 

बिना संघर्ष के सभी आशाएं रहती अधूरी है ।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा,  जम्मू-कश्मीर 

न्याय अन्याय का फैसला

 न्याय अन्याय का फैसला कुदरत करती खूब, 

जल्दबाज़ी में इंसान तोड़ देता अपने उसूल। 

उसूल तोड़ने वाला हमेशा पाता अपमान ,

कर्म का भुगतान करना नहीं इतना आसान। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा, जम्मू-कश्मीर 


मंगलवार, 1 अप्रैल 2025

सहारा

 तूं ही मेरी जीवन कश्ती का मल्लाह, 

तेरे बिना किसे मेरी परवाह ।

दुख दर्द में तूँ ही सहारा 

तेरी शरण भूल में जाता हूं दुख दर्द सारा।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा , जम्मू-कश्मीर 

मैं टूटने नहीं दूंगा अपने विश्वास की डोर को

 शीर्षक - मैं टूटने नहीं दूंगा अपने विश्वास की डोर को

मैं टूटने नहीं दूंगा अपने विश्वास की डोर को

चाहे कितना ही प्रचंड तूफान हो 

अंबर को अपनी ऊंचाइयों का मान हो 

बाढ़ बनकर सब बहा ले जाऊँगा 

विघ्न बाधाएं के अभिमान को ।।

सपने मेरे अब और ऊंचाई को छूने को तैयार हो 

चाहे मुश्किलें रास्ते रोकने को तैयार हो 

आत्मविश्वास से तोड़ दूँगा 

पत्थर के मजबूत होने के मान को ।।

अब कदम आगे बढ़ने को तैयार हो 

चाहे नींद चैन तेरा हराम हो 

हार जीत का फैसला मालिक पर छोड़कर 

तूं अपना कर्म करने को तैयार हो।।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा ,जम्मू-कश्मीर 







 

सबक

 जीवन के हर मोती को पिरोकर रखूंगा ,

हार को भी सबक समझकर कुछ नई सीख सीखूंगा। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह सांबा , जम्मू-कश्मीर 

प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...