संघर्ष बिना जीवन कैसा ,
फटे हुए तबले जैसा ,
बेकार में पड़ा है कचरे सा ,
बिना खुशबू फूलों जैसा ,
जो आता न किसी काम ,
बदनाम किया जिसने नाम ।
संघर्ष ही जीवन है, जीवन ही संघर्ष है
बिना संघर्ष के कोई मंजिल न होती स्पर्श
मुश्किल राहों को स्वीकार करो सहर्ष
छोड़कर सब विचार विमर्श
त्याग दो चिंता करना व्यर्थ
मेहनत लग्न पहुंचा देगी कामयाबियों के अर्श।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा , जम्मू-कश्मीर
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