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रविवार, 13 अप्रैल 2025

संघर्ष जीवन का आधार

 संघर्ष बिना जीवन कैसा ,

फटे हुए तबले जैसा ,

बेकार में पड़ा है कचरे सा ,

बिना खुशबू  फूलों जैसा ,

जो आता न किसी काम ,

बदनाम किया जिसने नाम ।

संघर्ष ही जीवन है, जीवन ही संघर्ष है

बिना संघर्ष के कोई मंजिल न होती स्पर्श 

मुश्किल राहों को स्वीकार करो सहर्ष 

छोड़कर सब विचार विमर्श 

त्याग दो चिंता करना व्यर्थ 

मेहनत लग्न पहुंचा देगी कामयाबियों के अर्श। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा , जम्मू-कश्मीर 



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