फ़ॉलोअर

रविवार, 13 अप्रैल 2025

ख़्वाबों का कारवाँ

 शीर्षक - ख़्वाबों का कारवाँ 

रूककर भी नही रूका  ख़्वाबों का कारवाँ 

 मुश्किल दौर से गुजर कर 

पत्थरों को  तोड़कर आगे बढ़ता 

मंजिल को खोजता 

कर्म को धर्म मानकर

जी जान लग्न से 

जोश होश में 

प्रसन्नता के सागर से भरकर 

दुख दर्द चिंता से दूर होकर 

हार जीत का फैसला कहीं खोकर 

निराशा के आंसुओ को पोंछकर 

दिल में अरमान जागकर 

सब विघ्न बाधाओं को गले से लगाकर 

सब नफ़रतों को भुलाकर 

लक्ष्य को पाने की ओर बढ़ता ख्वाबों का कारवाँ 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा ,जम्मू-कश्मीर 


कोई टिप्पणी नहीं:

प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...