तूं ही मेरी जीवन कश्ती का मल्लाह,
तेरे बिना किसे मेरी परवाह ।
दुख दर्द में तूँ ही सहारा
तेरी शरण भूल में जाता हूं दुख दर्द सारा।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा , जम्मू-कश्मीर
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