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मंगलवार, 1 अप्रैल 2025

सहारा

 तूं ही मेरी जीवन कश्ती का मल्लाह, 

तेरे बिना किसे मेरी परवाह ।

दुख दर्द में तूँ ही सहारा 

तेरी शरण भूल में जाता हूं दुख दर्द सारा।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा , जम्मू-कश्मीर 

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