कविता है कवि के मन की आवाज
न्याय अन्याय का फैसला कुदरत करती खूब,
जल्दबाज़ी में इंसान तोड़ देता अपने उसूल।
उसूल तोड़ने वाला हमेशा पाता अपमान ,
कर्म का भुगतान करना नहीं इतना आसान।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा, जम्मू-कश्मीर
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