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गुरुवार, 17 अप्रैल 2025

दुनियादारी का मेला

 दुनियादारी का मेला , अजब गजब है भाई 

बेईमान, ठग, चोर सब है,एक दूसरे के सखाई ,

अब तो सब समझ गए, सबकी है एक ही ताई

पानी छोड़कर, खा जाते दूध संग मलाई। 

सबने नफ़रत,  ईर्ष्या की भावना, सब ओर फैलाई, 

सब ओर हो रही है, मेहरबानी से इनकी लड़ाई

भ्रष्ट ,लांछित राजनीति ने , धर्म - धर्म फूट डलवाई 

कुर्सी अपनी इंसान से इंसान,  लड़ाकर बचाई ।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा ,जम्मू-कश्मीर 


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