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शनिवार, 19 अप्रैल 2025

सतगुर प्रीत अति मीठी

शीर्षक - सतगुर प्रीत अति मीठी

 सतगुर प्रीत अति मीठी ,की न जा सके बयान।

पल पल बढ़ती जात है, बिरह निकाले तन से जान।

रोम रोम बस गई, जैसे दूध में होत मिष्ठान्न ।

प्रीत मिटाय न मिटे, अमूल्य निधि  सतगुर सुजान।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा ,जम्मू-कश्मीर 

 

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