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शुक्रवार, 18 अप्रैल 2025

जीवन के हर मोड़ में देना साथ

 जीवन के हर मोड़ में देना साथ,

तेरा बिन मेरे सतगुर, कोई नहीं रखता सिर पर हाथ। 

तेरी ही दया से पाई मैने नाम रूपी दात, 

मेरे भूले मन को तूँ ही अब समझात ।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा , जम्मू-कश्मीर 

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