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रविवार, 20 अप्रैल 2025

नाता

 दीन दुखियों का तूं ही सहारा , हमसे  नाता तेरा प्यारा ।

हम सब जीवों का मात पिता हमारा , कोई न पा सका तेरा पारा।

डांवाडोल मन तूँ ही संभाला , अब मैं नीच तेरा हवाला ।

समझ नहीं पाता मन की चाला , फंस गई आत्मा माया जंजाला। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा , जम्मू-कश्मीर 



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