दीन दुखियों का तूं ही सहारा , हमसे नाता तेरा प्यारा ।
हम सब जीवों का मात पिता हमारा , कोई न पा सका तेरा पारा।
डांवाडोल मन तूँ ही संभाला , अब मैं नीच तेरा हवाला ।
समझ नहीं पाता मन की चाला , फंस गई आत्मा माया जंजाला।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा , जम्मू-कश्मीर
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