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मंगलवार, 15 अप्रैल 2025

शरण आकर प्रभु की

 शरण आकर प्रभु की, छोड दो मान अभिमान ।

पल ही पा लोगे, अविनाशी भगवान।


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

सांबा  , जम्मू-कश्मीर 

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